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दुनिया की सबसे ऊंची चोटी पर गूंजा “वंदे मातरम्” : बीएसएफ की पहली ऑल-वूमेन टीम ने फतह किया माउंट एवरेस्ट : रचा नया इतिहास

न्यूज डेस्क, 22 मई : भारत की बेटियों ने एक बार फिर दुनिया के सामने अपने साहस, संकल्प और राष्ट्रभक्ति का अद्भुत उदाहरण पेश किया है। सीमा सुरक्षा बल (बीएसएफ) की पहली ऑल-वूमेन माउंटेनियरिंग टीम ने दुनिया की सबसे ऊंची चोटी माउंट एवरेस्ट को सफलतापूर्वक फतह कर इतिहास रच दिया। शिखर पर पहुंचते ही टीम ने “वंदे मातरम्” का उद्घोष किया, जिसकी गूंज पूरी दुनिया में भारत के गौरव का संदेश बनकर फैल गई।

बीएसएफ के अनुसार महिला टीम ने गुरुवार सुबह लगभग 8 बजे एवरेस्ट शिखर पर तिरंगा लहराया। यह अभियान “मिशन वंदे मातरम्” के नाम से चलाया गया था और इसे बीएसएफ के इतिहास की सबसे महत्वपूर्ण साहसिक उपलब्धियों में से एक माना जा रहा है।

टीम में शामिल थीं देश के अलग-अलग हिस्सों की बेटियां

इस ऐतिहासिक अभियान में शामिल महिला जवानों में लद्दाख की कांस्टेबल कौसर फातिमा, पश्चिम बंगाल की मुनमुन घोष, उत्तराखंड की रेबेका सिंह और कारगिल की त्सेरिंग चोरोल शामिल रहीं। कठिन मौसम, ऑक्सीजन की कमी और माइनस तापमान जैसी चुनौतियों को पार करते हुए इन वीरांगनाओं ने दुनिया की सबसे कठिन चढ़ाइयों में से एक को पूरा किया।

अप्रैल में हुआ था अभियान का शुभारंभ

इस अभियान को 6 अप्रैल 2026 को नई दिल्ली स्थित बीएसएफ मुख्यालय से हरी झंडी दिखाकर रवाना किया गया था। अभियान का नेतृत्व वरिष्ठ अधिकारियों और पर्वतारोहण विशेषज्ञों की निगरानी में किया गया। टीम ने नेपाल मार्ग से एवरेस्ट की चढ़ाई शुरू की और कई चरणों में ऊंचाई के अनुसार खुद को अनुकूलित किया।

“नारी शक्ति” का नया प्रतीक बनीं बीएसएफ की वीरांगनाएं

इस सफलता को केवल एक पर्वतारोहण उपलब्धि नहीं बल्कि भारतीय महिलाओं की बढ़ती ताकत और आत्मविश्वास के प्रतीक के रूप में देखा जा रहा है। रक्षा और सुरक्षा बलों में महिलाओं की बढ़ती भागीदारी के बीच यह उपलब्धि देशभर की युवतियों के लिए प्रेरणा बन गई है।

बीएसएफ के लिए भी ऐतिहासिक क्षण

सीमा सुरक्षा बल (बीएसएफ) पहले भी कई साहसिक अभियानों में हिस्सा ले चुकी है, लेकिन यह पहला अवसर है जब उसकी पूर्ण महिला टीम ने एवरेस्ट पर विजय प्राप्त की है। इस अभियान को बीएसएफ के डायमंड जुबली वर्ष के विशेष कार्यक्रमों से भी जोड़ा जा रहा है।

प्रधानमंत्री और देशभर से मिल रही बधाइयां

इस ऐतिहासिक उपलब्धि के बाद देशभर से टीम को बधाइयां मिल रही हैं। सोशल मीडिया पर लोग इसे “नए भारत की नई तस्वीर” बता रहे हैं। कई लोगों ने इसे “नारी शक्ति, राष्ट्र शक्ति” का जीवंत उदाहरण कहा।

कठिन होती है एवरेस्ट की चढ़ाई

माउंट एवरेस्ट की ऊंचाई लगभग 8,848.86 मीटर है और इसे दुनिया की सबसे कठिन पर्वतारोहण चुनौतियों में गिना जाता है। यहां ऑक्सीजन का स्तर बेहद कम होता है और मौसम कभी भी जानलेवा रूप ले सकता है। ऐसे में किसी ऑल-वूमेन टीम का सफलतापूर्वक शिखर तक पहुंचना अपने आप में असाधारण उपलब्धि माना जाता है।

भारत की बेटियां हर सीमा पार कर रही हैं

बीएसएफ की इस ऐतिहासिक उपलब्धि ने यह साबित कर दिया है कि आज भारत की बेटियां हर क्षेत्र में नए कीर्तिमान स्थापित कर रही हैं। चाहे सीमा सुरक्षा हो, अंतरिक्ष हो या दुनिया की सबसे ऊंची चोटियां — भारतीय महिलाएं अब हर चुनौती को जीत में बदल रही हैं।

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