“वृद्धाश्रम में एक दिन” : सत्यम वृद्धाश्रम में “रंगमन” का अनूठा स्नेह मिलन : मानवता, सेवा और सामाजिक जिम्मेदारी का प्रेरणादायी उदाहरण बना कार्यक्रम
बुजुर्गों के साथ भावनात्मक पल बिताकर जीता दिल : सांस्कृतिक कार्यक्रम और प्रीतिभोज से गूंज उठा आश्रम परिसर

शिवसागर, 2 जून : मानवता, संवेदनशीलता और सामाजिक उत्तरदायित्व की मिसाल पेश करते हुए शिवसागर की सामाजिक-सांस्कृतिक संस्था ‘रंगमन’ ने कोँवरपुर स्थित सत्यम वृद्धाश्रम में एक भावनात्मक एवं आत्मीय स्नेह मिलन कार्यक्रम का आयोजन किया। “वृद्धाश्रम में एक दिन” शीर्षक से आयोजित इस विशेष कार्यक्रम में रंगमन के सदस्यों ने वृद्धाश्रम में रह रहे बुजुर्गों के साथ समय बिताया, उनकी बातें सुनीं, सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आनंद लिया तथा विभिन्न उपयोगी सामग्री वितरित कर उनके प्रति सम्मान और अपनत्व का भाव प्रकट किया।

यह कार्यक्रम स्वर्गीय कांचा नामक व्यक्ति की प्रथम पुण्यतिथि के अवसर पर गठित “मनुष्य मनुष्य के लिए” समूह के सहयोग से आयोजित किया गया। कार्यक्रम में रंगमन के लगभग 20 सदस्य सुबह वृद्धाश्रम पहुंचे और दिनभर विभिन्न गतिविधियों में भाग लिया।
कार्यक्रम का शुभारंभ समाजसेविका एवं प्रसिद्ध चिकित्सक डॉ. कविता शर्मा के परिवार द्वारा स्थापित नामघर में दीप प्रज्वलन के साथ हुआ। इसके बाद उपस्थित सदस्यों ने आश्रम में रह रही मातृशक्ति एवं बुजुर्गों का आशीर्वाद प्राप्त कर कार्यक्रम की शुरुआत की।
इसके पश्चात वृद्धाश्रम के निवासियों के साथ एक आत्मीय स्नेह मिलन आयोजित किया गया। इस अवसर पर आयोजित सांस्कृतिक कार्यक्रम में आश्रम की निवासी बिमला गोगोई और अनुपमा तामुली ने भावपूर्ण कविता पाठ कर सभी को भावुक कर दिया। वहीं श्याम चंद्र तांती ने अपने मधुर गीतों से उपस्थित लोगों का मन मोह लिया।

रंगमन परिवार की ओर से भी कई सांस्कृतिक प्रस्तुतियां दी गईं। घनश्याम गोगोई और कृष्णा बरगोहाई ने गीत प्रस्तुत किए, जबकि प्रतिष्ठित कवयित्री कल्पना बरगोहाई ने अपनी कविताओं के माध्यम से कार्यक्रम को साहित्यिक गरिमा प्रदान की। इस दौरान कई बुजुर्गों ने अपने जीवन के अनुभव और स्मृतियां साझा कीं, जिससे कार्यक्रम भावनात्मक और प्रेरणादायी बन गया।
कार्यक्रम में उपस्थित सत्यम वृद्धाश्रम के संचालक पराग गोस्वामी ने रंगमन की इस मानवीय पहल की सराहना करते हुए कहा कि ऐसे कार्यक्रम आश्रम के बुजुर्गों को मानसिक संबल और आत्मिक खुशी प्रदान करते हैं। उन्होंने समाज के सभी वर्गों से वृद्धाश्रम के संचालन एवं विकास में सहयोग की अपील भी की।
इस अवसर पर रंगमन के सचिव प्रदीप बरगोहाई ने कहा कि समाज के उपेक्षित, वंचित और वरिष्ठ नागरिकों के साथ खड़ा रहना संगठन का प्रमुख उद्देश्य है। उन्होंने वृद्धाश्रम के विकास के लिए भविष्य में किए जाने वाले कुछ योजनाबद्ध कार्यों की जानकारी भी दी तथा आश्वासन दिया कि रंगमन आगे भी समाजहित के कार्यों में सक्रिय भूमिका निभाता रहेगा।

कार्यक्रम के अंत में रंगमन के सदस्यों द्वारा एकत्र किए गए कमीज, चादर, गमछा सहित अन्य आवश्यक वस्तुएं आश्रम के निवासियों के बीच वितरित की गईं। इसके अतिरिक्त डॉ. कविता शर्मा ने भी बुजुर्गों के लिए कई उपयोगी सामग्री प्रदान की।
बाद में आयोजित प्रीतिभोज में आश्रम के निवासी, अतिथि और रंगमन के सदस्य सहित लगभग 30 लोगों ने भाग लिया। सभी ने रंगमन के इस अभिनव और संवेदनशील प्रयास की सराहना करते हुए संस्था के उज्ज्वल भविष्य की कामना की तथा समाजसेवा के कार्यों में हर संभव सहयोग का भरोसा दिलाया।
कार्यक्रम में रंगमन के सचिव प्रदीप बरगोहाई, बुलबुल बड़ा, प्रवीण शर्मा, चंपा बरुआ, अनूप बरुआ, पवित्र बड़ा, जीवन मिली, मुनिन फुकन, देवज्योति चांगमाई, कल्याण गोहाईं, महेश्वर सतनामी, वंदना देवी, पाली बड़ा, कुशल कोँवर सहित अनेक सदस्य उपस्थित रहे।

इस अवसर पर उपस्थित लोगों ने कहा कि आज के समय में जब संयुक्त परिवारों की परंपरा कमजोर होती जा रही है, ऐसे कार्यक्रम न केवल बुजुर्गों को सम्मान और अपनापन देते हैं, बल्कि समाज में मानवीय मूल्यों, संवेदनशीलता और सामाजिक एकता को भी मजबूत करते हैं। रंगमन की यह पहल निश्चित रूप से समाज के लिए एक प्रेरणादायी संदेश है।




