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अखिल गोगोई का बड़ा राजनीतिक हमला : मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा की डॉक्टरेट थीसिस पर उठाए सवाल : “थीसिस कहां है? विश्वविद्यालय में नहीं, विभाग में नहीं, शोधनगंगा में भी नहीं” — अखिल गोगोई

मीडिया ब्रीफिंग में पारदर्शिता, जवाबदेही और जनहित के मुद्दों को लेकर सरकार को घेरा : मुख्यमंत्री की शैक्षणिक उपलब्धियों से लेकर शासन व्यवस्था तक कई मुद्दों पर विपक्ष का तीखा प्रहार

गुवाहाटी, 21 जून : असम की राजनीति में शनिवार को उस समय नया विवाद खड़ा हो गया जब रायजोर दल के अध्यक्ष एवं शिवसागर के विधायक अखिल गोगोई ने एक विस्तृत मीडिया ब्रीफिंग के दौरान मुख्यमंत्री डॉ. हिमंत बिस्वा सरमा को कई मुद्दों पर घेरते हुए उनकी डॉक्टरेट डिग्री और शोध प्रबंध (थीसिस) की उपलब्धता को लेकर सार्वजनिक सवाल खड़े कर दिए। गोगोई ने दावा किया कि मुख्यमंत्री की डॉक्टरेट थीसिस सार्वजनिक रूप से उपलब्ध नहीं है और उन्होंने इसे सार्वजनिक करने की मांग की।

प्रेस वार्ता के दौरान गोगोई ने केवल शैक्षणिक विषयों तक ही अपनी बात सीमित नहीं रखी, बल्कि राज्य सरकार की नीतियों, प्रशासनिक कार्यप्रणाली, चुनावी वादों, बेरोजगारी, महंगाई, लोकतांत्रिक संस्थाओं की भूमिका और विपक्ष की आवाज को लेकर भी गंभीर प्रश्न उठाए।

मुख्यमंत्री की डॉक्टरेट थीसिस पर सार्वजनिक सवाल

मीडिया के एक प्रश्न का उत्तर देते हुए अखिल गोगोई ने कहा कि मुख्यमंत्री की डॉक्टरेट डिग्री से जुड़ी थीसिस को लेकर लंबे समय से सवाल उठ रहे हैं और उन्होंने स्वयं इसे खोजने का प्रयास किया है।

उन्होंने कहा, “क्या किसी ने डॉ. हिमंत बिस्वा सरमा की डॉक्टरेट थीसिस देखी है? मैंने खोजने की कोशिश की, लेकिन मुझे यह कहीं नहीं मिली। यह विश्वविद्यालय की लाइब्रेरी में नहीं है, गुवाहाटी विश्वविद्यालय के राजनीतिक विज्ञान विभाग में भी उपलब्ध नहीं है। यहां तक कि शोध कार्यों के लिए महत्वपूर्ण और अनिवार्य माने जाने वाले शोधनगंगा (Shodhganga-INFLIBNET) पोर्टल पर भी यह दिखाई नहीं देती। यदि थीसिस मौजूद है, तो उसे सार्वजनिक रूप से उपलब्ध कराया जाना चाहिए ताकि लोग उसे पढ़ सकें।”

गोगोई ने कहा कि सार्वजनिक जीवन में रहने वाले नेताओं के शैक्षणिक रिकॉर्ड को लेकर पारदर्शिता होनी चाहिए और जनता को जानकारी प्राप्त करने का अधिकार है।

“सवाल पूछना लोकतंत्र का हिस्सा”

अखिल गोगोई ने कहा कि उनका उद्देश्य किसी की व्यक्तिगत आलोचना करना नहीं है, बल्कि लोकतांत्रिक जवाबदेही सुनिश्चित करना है। उन्होंने कहा कि जब आम नागरिकों, छात्रों, शोधार्थियों और सरकारी कर्मचारियों से पारदर्शिता की अपेक्षा की जाती है, तो उच्च संवैधानिक पदों पर बैठे व्यक्तियों के लिए भी वही मानक लागू होने चाहिए।

उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में सवाल पूछना अपराध नहीं है और जनता के प्रतिनिधि होने के नाते उनका कर्तव्य है कि वे जनहित से जुड़े विषयों को सामने रखें।

सरकार पर प्रचार की राजनीति करने का आरोप

मुख्यमंत्री की थीसिस के मुद्दे के साथ-साथ अखिल गोगोई ने राज्य सरकार की कार्यशैली पर भी तीखा हमला बोला। उन्होंने आरोप लगाया कि वर्तमान सरकार जनहित के मुद्दों की तुलना में प्रचार और राजनीतिक छवि निर्माण पर अधिक ध्यान दे रही है।

गोगोई ने कहा कि असम के सामने बेरोजगारी, महंगाई, शिक्षा, स्वास्थ्य, कृषि संकट, नशे का बढ़ता कारोबार और स्थानीय युवाओं के रोजगार जैसे कई गंभीर मुद्दे मौजूद हैं, लेकिन सरकार का ध्यान इन समस्याओं के स्थायी समाधान की बजाय राजनीतिक प्रचार पर अधिक केंद्रित दिखाई देता है।

युवाओं और छात्रों के मुद्दों को लेकर सरकार को घेरा

रायजोर दल प्रमुख ने कहा कि राज्य के हजारों शिक्षित युवा रोजगार की प्रतीक्षा कर रहे हैं। अनेक सरकारी विभागों में रिक्त पद होने के बावजूद नियुक्ति प्रक्रिया अपेक्षित गति से आगे नहीं बढ़ रही है।

उन्होंने कहा कि प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे युवाओं के सामने अनिश्चितता का माहौल है और सरकार को रोजगार सृजन तथा भर्ती प्रक्रियाओं को प्राथमिकता देनी चाहिए।

चुनावी वादों को लेकर भी उठाए सवाल

अखिल गोगोई ने आरोप लगाया कि चुनाव के दौरान जनता से किए गए कई महत्वपूर्ण वादों पर अब तक अपेक्षित प्रगति दिखाई नहीं दे रही है। उन्होंने कहा कि सरकार को यह स्पष्ट करना चाहिए कि विभिन्न योजनाओं और घोषणाओं की वास्तविक स्थिति क्या है।

उन्होंने कहा कि जनता को केवल घोषणाएं नहीं, बल्कि परिणाम चाहिए और सरकार को अपने वादों की प्रगति रिपोर्ट सार्वजनिक करनी चाहिए।

विपक्ष की भूमिका को कमजोर करने का आरोप

प्रेस वार्ता के दौरान गोगोई ने यह भी आरोप लगाया कि राज्य में विपक्ष की आवाज को कमजोर करने की कोशिश की जा रही है। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में एक मजबूत विपक्ष आवश्यक होता है और जनता के मुद्दों को उठाने वालों को राजनीतिक प्रतिद्वंद्वी नहीं बल्कि लोकतांत्रिक प्रक्रिया का हिस्सा माना जाना चाहिए।

उन्होंने कहा कि रायजोर दल जनहित के मुद्दों को उठाना जारी रखेगा, चाहे उस पर राजनीतिक दबाव ही क्यों न बनाया जाए।

आगामी विधानसभा सत्र में गरमाएगा मुद्दा

अखिल गोगोई ने संकेत दिया कि मुख्यमंत्री की डॉक्टरेट थीसिस से जुड़ा मुद्दा और सरकार की जवाबदेही से संबंधित अन्य विषय आगामी विधानसभा सत्र में भी उठाए जाएंगे।

उन्होंने कहा कि यदि सरकार के पास इन सवालों के जवाब हैं, तो उन्हें सार्वजनिक रूप से सामने रखा जाना चाहिए। इससे अनावश्यक विवाद समाप्त होंगे और जनता के मन में उठ रहे प्रश्नों का समाधान होगा।

राजनीतिक हलकों में तेज हुई चर्चा

अखिल गोगोई के बयान के बाद राजनीतिक हलकों में इस मुद्दे को लेकर चर्चा तेज हो गई है। सोशल मीडिया पर भी मुख्यमंत्री की डॉक्टरेट थीसिस और उसके सार्वजनिक रिकॉर्ड को लेकर बहस शुरू हो गई है।

हालांकि इस विषय पर मुख्यमंत्री कार्यालय, राज्य सरकार अथवा संबंधित विश्वविद्यालय की ओर से तत्काल कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यदि आने वाले दिनों में इस पर कोई स्पष्टीकरण जारी किया जाता है, तो यह विवाद और अधिक चर्चा का विषय बन सकता है।

असम की राजनीति में नया विवाद

मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा की डॉक्टरेट थीसिस को लेकर उठाए गए सवालों ने असम की राजनीति को एक नया मुद्दा दे दिया है। एक ओर अखिल गोगोई इसे पारदर्शिता और जवाबदेही का प्रश्न बता रहे हैं, वहीं राजनीतिक पर्यवेक्षकों का मानना है कि यह विवाद आने वाले दिनों में राज्य की राजनीति में महत्वपूर्ण बहस का विषय बन सकता है।

फिलहाल, अखिल गोगोई की मीडिया ब्रीफिंग ने राजनीतिक माहौल को गर्मा दिया है और अब सभी की निगाहें मुख्यमंत्री कार्यालय तथा संबंधित संस्थानों की संभावित प्रतिक्रिया पर टिकी हुई हैं।

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