साढ़े चार साल बाद भी अधूरा बलमा घाट पुल : निर्माण बीच में छोड़ ठेकेदार संस्था गायब, लोगों में बढ़ा आक्रोश : करीब 17 करोड़ की परियोजना का महज 40 प्रतिशत काम पूरा : अनुसूचित जाति छात्र संघ ने मुख्यमंत्री से की ठेकेदार संस्था को ब्लैकलिस्ट करने की मांग : दूसरी संस्था से तत्काल निर्माण शुरू नहीं कराया तो आंदोलन की चेतावनी : शिवसागर और डिमौ के विधायकों से भी हस्तक्षेप की मांग
मिलनकुर, चितलिया समेत करीब 20 गांवों के हजारों लोग आज भी रस्सी से खींची जाने वाली नाव के सहारे नदी पार करने को मजबूर

शिवसागर, 30 सितंबर : शिवसागर जिले के दिसांगमुख स्थित बलमा घाट पर दिसांग नदी के ऊपर निर्माणाधीन आरसीसी पुल साढ़े चार साल से अधिक समय बीत जाने के बावजूद पूरा नहीं हो सका है। करीब 17 करोड़ रुपये की लागत वाली इस महत्वपूर्ण परियोजना का महज लगभग 40 प्रतिशत काम पूरा होने के बाद निर्माण ठप पड़ा है। आरोप है कि निर्माण की जिम्मेदारी संभालने वाली ठेकेदार संस्था काम अधूरा छोड़कर गायब हो गई। वर्षों से पुल अधूरा रहने के कारण अब स्थानीय लोगों के साथ अनुसूचित जाति छात्र संघ ने भी कड़ा रुख अपनाया है।

ठेकेदार संस्था को ब्लैकलिस्ट करने की मांग
अनुसूचित जाति छात्र संघ ने मुख्यमंत्री से बलमा घाट पुल का निर्माण अधूरा छोड़ने वाली ठेकेदार संस्था के खिलाफ तत्काल कार्रवाई की मांग की है। संगठन ने संबंधित संस्था को ब्लैकलिस्ट करने और शेष निर्माण कार्य किसी अन्य सक्षम ठेकेदार संस्था को सौंपकर पुल का काम तत्काल शुरू कराने की मांग उठाई है।
छात्र संगठन का कहना है कि वर्षों तक किसी महत्वपूर्ण सार्वजनिक परियोजना को अधूरा छोड़ने के मामले में जवाबदेही तय की जानी चाहिए। संगठन ने स्पष्ट किया कि यदि ठेकेदार संस्था को ब्लैकलिस्ट कर किसी दूसरी संस्था के माध्यम से निर्माण कार्य जल्द शुरू नहीं कराया गया तो आंदोलन का रास्ता अपनाया जाएगा।
शिवसागर और डिमौ के विधायकों से हस्तक्षेप की मांग
अनुसूचित जाति छात्र संघ ने शिवसागर और डिमौ विधानसभा क्षेत्रों के विधायकों से भी मामले में तत्काल हस्तक्षेप करने की मांग की है। संगठन का कहना है कि यह पुल दोनों विधानसभा क्षेत्रों के हजारों लोगों की रोजमर्रा की जिंदगी से जुड़ा है, इसलिए जनप्रतिनिधियों को निर्माण कार्य दोबारा शुरू कराने के लिए प्रभावी कदम उठाने चाहिए।

करीब 17 करोड़ की लागत, फिर भी सिर्फ 40 प्रतिशत काम
दिसांग नदी पर इस आरसीसी पुल की योजना शिवसागर विधानसभा क्षेत्र के अंतर्गत दिसांगमुख और डिमौ विधानसभा क्षेत्र के बीच बेहतर संपर्क स्थापित करने के उद्देश्य से बनाई गई थी। करीब 17 करोड़ रुपये की लागत से बनने वाला यह पुल लोक निर्माण विभाग के डिमौ डिवीजन के अधीन है।
आरोप है कि ठेकेदार संस्था ने पुल का करीब 40 प्रतिशत निर्माण करने के बाद काम बंद कर दिया। इसके बाद से परियोजना अधूरी पड़ी है। साढ़े चार साल से अधिक समय बीतने के बावजूद निर्माण पूरा नहीं होने से स्थानीय लोगों में विभागीय कार्यप्रणाली को लेकर नाराजगी बढ़ रही है।
करीब 20 गांवों के लिए बेहद महत्वपूर्ण है पुल
बलमा घाट का यह पुल केवल दो क्षेत्रों को जोड़ने वाली परियोजना नहीं, बल्कि आसपास के बड़े ग्रामीण इलाके की सामाजिक और आर्थिक गतिविधियों के लिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। इसके पूरा होने से मिलनकुर, चितलिया समेत करीब 20 गांवों के कृषक परिवारों को विशेष लाभ मिलने की उम्मीद थी।
पुल के जरिए किसानों के लिए कृषि उत्पादों को बाजार तक पहुंचाना आसान होने के साथ शिक्षा, स्वास्थ्य और अन्य जरूरी कार्यों के लिए आवागमन भी सुगम हो सकता था। स्थानीय लोगों को उम्मीद थी कि पुल बनने के बाद इलाके की वर्षों पुरानी आवागमन संबंधी समस्या का स्थायी समाधान हो जाएगा।

पानी दिहिंग पक्षी अभयारण्य जाने वाले पर्यटकों को भी होता लाभ
इस पुल के निर्माण को पर्यटन की दृष्टि से भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। पुल पूरा होने पर पानी दिहिंग पक्षी अभयारण्य आने वाले पर्यटकों की यात्रा दूरी कम हो सकती है। इससे क्षेत्र में पर्यटन गतिविधियों को बढ़ावा मिलने के साथ आसपास के ग्रामीण इलाकों को भी आर्थिक लाभ मिलने की संभावना जताई जा रही है।
आज भी रस्सी से खींची जाने वाली नाव के भरोसे हजारों लोग
पुल अधूरा रहने का सबसे बड़ा खामियाजा स्थानीय लोगों को भुगतना पड़ रहा है। हजारों लोगों को आज भी अपनी जेब से पैसे खर्च कर राजस्व घाट के जरिए रस्सी से खींची जाने वाली नाव से दिसांग नदी पार करनी पड़ रही है।
मिलनकुर, चितलिया और आसपास के गांवों के लोगों के लिए यह आवागमन न केवल असुविधाजनक, बल्कि जोखिम भरा भी बताया जा रहा है। रोजमर्रा के काम, शिक्षा, चिकित्सा, बाजार और अन्य आवश्यकताओं के लिए नदी पार करने वाले लोगों को लगातार परेशानी झेलनी पड़ रही है।
जिला प्रशासन और लोक निर्माण विभाग की भूमिका पर सवाल
लंबे समय से निर्माण कार्य ठप रहने को लेकर स्थानीय लोगों ने जिला प्रशासन और लोक निर्माण विभाग की भूमिका पर भी सवाल उठाए हैं। लोगों का आरोप है कि इतनी महत्वपूर्ण परियोजना साढ़े चार साल से अधिक समय बाद भी अधूरी है, लेकिन इसे पूरा कराने की दिशा में अपेक्षित सक्रियता दिखाई नहीं दे रही।
क्षेत्रवासियों का कहना है कि निर्माणकारी संस्था के काम छोड़ने के बाद समय रहते वैकल्पिक व्यवस्था की जानी चाहिए थी, ताकि हजारों लोगों को वर्षों तक जोखिम भरे आवागमन पर निर्भर न रहना पड़ता।
‘बड़े पुल दो-ढाई साल में बन रहे, बलमा घाट पुल के लिए और कितना इंतजार?’
स्थानीय लोगों ने सवाल उठाया है कि जब राज्य के विभिन्न हिस्सों में बड़े पुल और फ्लाईओवर निर्धारित दो से ढाई साल की अवधि में बनकर तैयार हो रहे हैं, तब दिसांग नदी पर बलमा घाट के इस पुल को पूरा करने में आखिर और कितना समय लगेगा।
क्षेत्रवासियों की मांग है कि सरकार अब इस परियोजना में और देरी न होने दे तथा निर्माण कार्य तत्काल दोबारा शुरू कराकर इसे समयबद्ध तरीके से पूरा करे।
काम शुरू नहीं हुआ तो आंदोलन का रास्ता अपनाएगा छात्र संघ
अनुसूचित जाति छात्र संघ ने सरकार को चेतावनी दी है कि यदि अधूरा निर्माण छोड़ने वाली ठेकेदार संस्था को ब्लैकलिस्ट कर किसी दूसरी सक्षम संस्था के माध्यम से पुल का निर्माण तत्काल शुरू नहीं कराया गया तो संगठन आंदोलन का रास्ता अपनाएगा।
संगठन और स्थानीय लोगों की मांग है कि सरकार परियोजना की मौजूदा स्थिति की समीक्षा करे, जिम्मेदारी तय करे और बलमा घाट पुल का शेष निर्माण जल्द पूरा कर हजारों ग्रामीणों को वर्षों से चली आ रही आवागमन की समस्या से राहत दिलाए।




