रतनगढ़ वेद विद्यालय के 21 दिवसीय पांडित्य प्रशिक्षण शिविर का भव्य दीक्षांत समारोह सम्पन्न : समाजहित, वैदिक शिक्षा और युवा पीढ़ी के संस्कार निर्माण पर वक्ताओं ने दिया विशेष जोर
संस्कृत, संस्कृति और संस्कार ही ब्राह्मण समाज की वास्तविक पहचान : डॉ. रामगोपाल शर्मा

रतनगढ़, 4 जून : राजस्थान के चूरू जिले के रतनगढ़ स्थित वेद विद्यालय में आयोजित 21 दिवसीय पांडित्य प्रशिक्षण शिविर का दीक्षांत समारोह बुधवार को अत्यंत गरिमामय एवं आध्यात्मिक वातावरण में सम्पन्न हुआ। समारोह का आयोजन वेद विद्यालय के अधिष्ठाता दिवाकर शास्त्री की अध्यक्षता तथा विभिन्न सामाजिक, धार्मिक एवं शैक्षणिक क्षेत्रों से जुड़े गणमान्य अतिथियों की गरिमामयी उपस्थिति में किया गया।

कार्यक्रम का शुभारंभ संत शिरोमणि शोभानंद महाराज के सान्निध्य में दीप प्रज्ज्वलन एवं पुष्पार्पण के साथ हुआ। इसके पश्चात वेद विद्यालय के विप्रवटुओं ने समवेत स्वर में गुरु वंदना प्रस्तुत कर पूरे वातावरण को वैदिक मंत्रोच्चार और आध्यात्मिक ऊर्जा से सराबोर कर दिया।
समारोह में मुख्य वक्ता एवं सारस्वत अतिथि डॉ. रामगोपाल शर्मा ने अपने उद्बोधन में कहा कि संस्कृत भाषा केवल एक भाषा नहीं, बल्कि भारतीय संस्कृति और सनातन परंपरा की आत्मा है। उन्होंने कहा कि ब्राह्मण समाज के लिए संस्कृत, संस्कृति और संस्कार तीनों का संरक्षण और संवर्धन अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने विद्यार्थियों के आदर्श गुणों, अनुशासन, अध्ययनशीलता और चरित्र निर्माण पर विस्तार से प्रकाश डालते हुए कहा कि वर्तमान समय में वैदिक शिक्षा की प्रासंगिकता और भी बढ़ गई है।

गौड़ ब्राह्मण समाज के अध्यक्ष जयप्रकाश ताम्रायत ने समाज द्वारा संचालित विभिन्न सेवा और विकास कार्यों की जानकारी देते हुए कहा कि बदलते समय के अनुरूप समाज को अपनी व्यवस्थाओं में सकारात्मक परिवर्तन लाने की आवश्यकता है। उन्होंने युवाओं को समाज सेवा और सांस्कृतिक संरक्षण से जोड़ने का आह्वान किया।
गंगा समग्र के प्रांतीय संयोजक नरेश कालरी ने अपने ओजस्वी संबोधन में समाज के विभिन्न वर्गों को एकजुट होकर कार्य करने की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने कहा कि सामाजिक समरसता, सांस्कृतिक संरक्षण और राष्ट्र निर्माण के लिए सामूहिक प्रयास अनिवार्य हैं।

वहीं छः न्याति ब्राह्मण समाज के अध्यक्ष अंबिका प्रसाद हारित ने समाजहित के विभिन्न विषयों पर विचार व्यक्त करते हुए कहा कि आर्थिक अथवा अन्य कारणों से अध्ययन से वंचित रहने वाले ब्राह्मण बालकों को निःशुल्क शिक्षा उपलब्ध कराने की दिशा में समाज को ठोस पहल करनी चाहिए। उन्होंने वेद विद्यालय जैसे संस्थानों को समाज की अमूल्य धरोहर बताया।
कार्यक्रम को मुरारीलाल पारीक, शशिकांत धरेंद्र, पवन मंगलहारा, सूर्यप्रकाश पारीक, रामदेव चंदनिया एवं महेंद्र कुमार शर्मा सहित अनेक वक्ताओं ने भी संबोधित किया। वक्ताओं ने वैदिक परंपरा के संरक्षण, संस्कारवान युवा पीढ़ी के निर्माण तथा समाज में नैतिक मूल्यों की स्थापना की आवश्यकता पर जोर दिया।

समारोह में बड़ी संख्या में समाज के गणमान्य नागरिक, विद्वान, शिक्षाविद् एवं विप्रवटु उपस्थित रहे। प्रमुख रूप से गोपाल कृष्ण लाटा, कैलाश चंद्र भुढ़ाढरा, योगेश ताम्रायत, शांतिलाल हरितवाल, विष्णु धरेंद्र, पृथ्वीराज गंगावत, भोलाराम धरेंद्र, ललित पुजारी, कमल इंदौरिया, कन्हैयालाल चौमाल, केशरदेव काछवाल, अनिल बबेरवाल, श्याम चौमाल, संतोष शर्मा, ओमप्रकाश चौमाल, अजय इंदौरिया, भूपेंद्र चौमाल, भंवरदान चारण, श्री चौमाल, देवीदत्त सिंवाल एवं श्रवण सांखोलिया सहित अनेक सामाजिक कार्यकर्ता एवं श्रद्धालु मौजूद रहे।
कार्यक्रम के दौरान प्रशिक्षण प्राप्त विद्यार्थियों के उज्ज्वल भविष्य की कामना की गई तथा वैदिक अध्ययन और पांडित्य परंपरा को आगे बढ़ाने का संकल्प दोहराया गया। उपस्थित वक्ताओं ने कहा कि ऐसे प्रशिक्षण शिविर न केवल वैदिक ज्ञान के संरक्षण में सहायक हैं, बल्कि युवा पीढ़ी को अपनी सांस्कृतिक जड़ों से जोड़ने का भी महत्वपूर्ण माध्यम हैं।
समारोह का सफल संचालन सुधाकर शर्मा ने किया तथा अंत में सभी अतिथियों, प्रतिभागियों एवं सहयोगियों के प्रति आभार व्यक्त किया गया।
विशेष उल्लेखनीय है कि वेद विद्यालय द्वारा समय-समय पर आयोजित किए जाने वाले ऐसे प्रशिक्षण शिविर वैदिक शिक्षा, संस्कृत भाषा और सनातन संस्कृति के संरक्षण एवं संवर्धन की दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। 21 दिवसीय इस पांडित्य प्रशिक्षण शिविर ने प्रतिभागियों को धार्मिक अनुष्ठानों, वैदिक विधानों, संस्कृत अध्ययन तथा भारतीय सांस्कृतिक मूल्यों का व्यावहारिक ज्ञान प्रदान किया, जिससे समाज को भविष्य में योग्य एवं संस्कारवान विद्वानों की नई पीढ़ी प्राप्त होगी।




