शिवसागर में एंटी ड्रग्स स्क्वॉड के दो सदस्यों को कथित जान से मारने की धमकी, सदर थाने में शिकायत : सदस्या वंदना कौशिक बरदलै को बीच सड़क पर रोककर धमकाने का आरोप, वसीम अहमद को फोन पर कथित धमकी : करीब दो महीने पहले एंटी ड्रग्स स्क्वॉड के सहयोग से नाजिरा से गिरफ्तार हुआ था रूपम दे, फिलहाल न्यायिक हिरासत में
मुख्यमंत्री से कड़ी कार्रवाई की मांग—“नशे के खिलाफ पुलिस की मदद करने वालों को धमकाया जाएगा तो आगे कैसे सहयोग करेगी जनता?”

शिवसागर, 8 सितंबर : शिवसागर जिले में नशीले पदार्थों के खिलाफ चलाए जा रहे अभियान में पुलिस-प्रशासन का सहयोग कर रहे एंटी ड्रग्स स्क्वॉड के दो सदस्यों को कथित तौर पर जान से मारने की धमकी दिए जाने का मामला सामने आया है। एंटी ड्रग्स स्क्वॉड की सदस्या वंदना कौशिक बरदलै और सदस्य वसीम अहमद ने आरोप लगाया है कि ड्रग्स तस्करी से जुड़े एक मामले में न्यायिक हिरासत में चल रहे रूपम दे के परिवार की ओर से उन्हें धमकियां दी गई हैं।
घटना को गंभीर बताते हुए एंटी ड्रग्स स्क्वॉड की ओर से शिवसागर सदर थाने में लिखित शिकायत दर्ज कराई गई है। संगठन ने पुलिस से पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच कर आरोप सही पाए जाने पर संबंधित लोगों के खिलाफ कानून के अनुसार कड़ी कार्रवाई करने की मांग की है। साथ ही मुख्यमंत्री से भी मामले का संज्ञान लेकर नशा विरोधी अभियान में सहयोग करने वाले लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित करने का अनुरोध किया गया है।

बीच सड़क पर वंदना कौशिक बरदलै को धमकाने का आरोप
एंटी ड्रग्स स्क्वॉड की ओर से लगाए गए आरोप के मुताबिक, न्यायिक हिरासत में चल रहे रूपम दे की मां रूपा दे ने स्क्वॉड की सदस्या वंदना कौशिक बरदलै को दिनदहाड़े रास्ते में कथित तौर पर रोककर जान से मारने की धमकी दी।
स्क्वॉड का कहना है कि नशीले पदार्थों के खिलाफ अभियान में सक्रिय रूप से पुलिस का सहयोग करने वाले किसी सदस्य को सार्वजनिक स्थान पर इस तरह कथित धमकी मिलना बेहद गंभीर मामला है। संगठन ने घटना के बाद अपने सदस्यों की सुरक्षा को लेकर भी चिंता जताई है।
वसीम अहमद को फोन पर धमकी देने का भी आरोप
इसी प्रकरण में एंटी ड्रग्स स्क्वॉड के एक अन्य सदस्य वसीम अहमद को भी फोन के माध्यम से कथित धमकी दिए जाने का आरोप लगाया गया है। स्क्वॉड के अनुसार, रूपा दे ने कथित तौर पर फोन पर आत्महत्या कर सभी को फंसाने जैसी बात भी कही।
संगठन ने इन आरोपों की भी पुलिस से गहन जांच कराने की मांग की है। स्क्वॉड का कहना है कि जांच के जरिए यह स्पष्ट किया जाना जरूरी है कि वास्तव में क्या बातचीत हुई और इसके पीछे क्या परिस्थितियां थीं। संगठन ने कहा कि जांच में जो तथ्य सामने आएं, उनके आधार पर कानून के तहत उचित कार्रवाई की जानी चाहिए।

दो महीने पहले नाजिरा से गिरफ्तार हुआ था रूपम दे
पूरे विवाद की पृष्ठभूमि करीब दो महीने पहले शिवसागर पुलिस द्वारा की गई एक कार्रवाई से जुड़ी बताई जा रही है। एंटी ड्रग्स स्क्वॉड के अनुसार, पुलिस ने स्क्वॉड के सहयोग से रूपम दे को नाजिरा से गिरफ्तार किया था।
स्क्वॉड का आरोप है कि रूपम दे लंबे समय से जिले में मादक पदार्थों की आपूर्ति से जुड़ा हुआ था। गिरफ्तारी के बाद पुलिस ने उसे न्यायालय के समक्ष पेश किया था, जिसके बाद उसे जेल भेज दिया गया। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, रूपम दे फिलहाल न्यायिक हिरासत में है।
संगठन का दावा है कि उक्त कार्रवाई में एंटी ड्रग्स स्क्वॉड ने पुलिस को सहयोग किया था और इसी घटनाक्रम के बाद अब उसके सदस्यों को कथित तौर पर धमकियां दी जा रही हैं।

नशे के खिलाफ पुलिस का सहयोग करता रहा है स्क्वॉड
शिवसागर में पुलिस द्वारा मादक पदार्थों के खिलाफ चलाए जाने वाले अभियानों के साथ एंटी ड्रग्स स्क्वॉड भी लंबे समय से सक्रिय भूमिका निभाता आ रहा है। संगठन के सदस्य नशीले पदार्थों से जुड़ी संदिग्ध गतिविधियों के संबंध में पुलिस को सूचनाएं उपलब्ध कराने और अन्य स्तरों पर सहयोग करने का दावा करते हैं।
ऐसे में संगठन के दो सदस्यों को कथित तौर पर धमकी मिलने की घटना को स्क्वॉड ने केवल अपने सदस्यों की सुरक्षा का मामला नहीं, बल्कि नशे के खिलाफ अभियान में आम नागरिकों की भागीदारी और उनके विश्वास से जुड़ा गंभीर विषय बताया है।
मुख्यमंत्री से हस्तक्षेप और कड़ी कार्रवाई की मांग
एंटी ड्रग्स स्क्वॉड ने मामले को लेकर मुख्यमंत्री से भी हस्तक्षेप की मांग की है। संगठन ने आग्रह किया है कि शिकायत में लगाए गए आरोपों की निष्पक्ष जांच कराई जाए और यदि आरोप सही पाए जाते हैं तो धमकी देने वालों के खिलाफ कठोर कानूनी कार्रवाई की जाए।
इसके साथ ही संगठन ने नशा विरोधी अभियानों में पुलिस एवं प्रशासन को सहयोग देने वाले नागरिकों और सामाजिक कार्यकर्ताओं की सुरक्षा सुनिश्चित करने की आवश्यकता पर जोर दिया है।
“धमकी मिलेगी तो पुलिस की मदद करने आगे कैसे आएगी जनता?”
घटना के बाद एंटी ड्रग्स स्क्वॉड ने एक महत्वपूर्ण सवाल उठाते हुए कहा है कि नशीले पदार्थों के कारोबार और अपराध के खिलाफ पुलिस-प्रशासन को सूचना देने तथा सहयोग करने वाले लोगों को यदि इस प्रकार कथित तौर पर जान-माल की धमकियां मिलने लगेंगी, तो भविष्य में आम नागरिक अपराध के खिलाफ सामने आने का साहस कैसे करेंगे?
स्क्वॉड का कहना है कि नशे के खिलाफ लड़ाई केवल पुलिस की जिम्मेदारी नहीं है, बल्कि इसमें समाज और आम नागरिकों का सहयोग भी आवश्यक है। लेकिन सहयोग करने वाले लोगों की सुरक्षा को लेकर भय पैदा होने पर नशा विरोधी अभियान प्रभावित हो सकता है। इसलिए प्रशासन को ऐसे मामलों में गंभीरता दिखाते हुए सहयोग करने वाले नागरिकों में सुरक्षा और विश्वास की भावना कायम करनी चाहिए।

पुलिस जांच और संबंधित पक्ष के आधिकारिक बयान का इंतजार
फिलहाल धमकी से संबंधित ये आरोप एंटी ड्रग्स स्क्वॉड की ओर से दी गई शिकायत और उसके सदस्यों के दावों पर आधारित हैं। शिकायत में लगाए गए आरोपों की सत्यता पुलिस जांच के बाद ही स्पष्ट होगी।
मामले में पुलिस की विस्तृत जांच तथा आरोपों को लेकर संबंधित पक्ष का आधिकारिक बयान सामने आना अभी शेष है। ऐसे में जांच पूरी होने से पहले आरोपों को स्थापित तथ्य के रूप में नहीं देखा जा सकता। अब निगाहें शिवसागर पुलिस की जांच और मामले में आगे होने वाली कानूनी कार्रवाई पर टिकी हैं।




