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स्कूल बैग के बोझ पर शिक्षा विभाग की सख्ती : शिवसागर में विशेष निरीक्षण अभियान : कई विद्यालयों को कारण बताओ नोटिस : विद्यार्थियों के स्वास्थ्य और शारीरिक विकास को ध्यान में रखते हुए शिक्षा विभाग की बड़ी पहल

डॉ. समीरण बोरा के नेतृत्व में 6 विद्यालयों का निरीक्षण, निर्धारित सीमा से अधिक वजन वाले बैग मिलने पर कार्रवाई

शिवसागर, 12 जून : बच्चों के कंधों पर बढ़ते स्कूल बैग के बोझ को कम करने और उनके शारीरिक एवं मानसिक स्वास्थ्य की सुरक्षा सुनिश्चित करने के उद्देश्य से असम के शिवसागर जिले में शिक्षा विभाग ने एक महत्वपूर्ण और सराहनीय पहल की है। विद्यार्थियों के स्वास्थ्य को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए शुक्रवार को शिवसागर जिला सर्किल के विद्यालय निरीक्षक डॉ. समीरण बोरा के नेतृत्व में जिले के विभिन्न विद्यालयों में विशेष “स्कूल बैग वजन निरीक्षण अभियान” चलाया गया। इस अभियान के दौरान अधिकारियों ने विद्यालयों में पहुंचकर विद्यार्थियों के बैगों का वजन मापा, शिक्षा विभाग द्वारा निर्धारित मानकों की समीक्षा की तथा विद्यालय प्रबंधन को आवश्यक दिशा-निर्देश भी जारी किए।

यह अभियान ऐसे समय में चलाया गया है जब देशभर में विद्यार्थियों पर बढ़ते शैक्षणिक दबाव और भारी स्कूल बैग को लेकर लगातार चिंता व्यक्त की जा रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि अत्यधिक वजन वाले बैग बच्चों के शारीरिक विकास पर प्रतिकूल प्रभाव डाल सकते हैं। इसी पृष्ठभूमि में शिवसागर में चलाया गया यह विशेष अभियान शिक्षा विभाग की दूरदर्शी सोच और विद्यार्थियों के हितों के प्रति उसकी प्रतिबद्धता को दर्शाता है।

छह विद्यालयों में हुआ निरीक्षण

शिक्षा विभाग द्वारा जारी जानकारी के अनुसार निरीक्षण अभियान के दौरान शिवसागर जिले के चार निजी विद्यालयों और दो सरकारी प्रांतीयकृत विद्यालयों का दौरा किया गया। निरीक्षण टीम ने विद्यालय परिसरों में पहुंचकर विभिन्न कक्षाओं के विद्यार्थियों के बैगों का वजन मापा तथा यह जांच की कि विद्यार्थी केवल आवश्यक पुस्तकें और अध्ययन सामग्री ही लेकर आ रहे हैं या नहीं।

इसके साथ ही विद्यालयों में लागू समय-सारणी, विषयवार पुस्तकों के उपयोग, कार्यपुस्तिकाओं (वर्कबुक) की संख्या तथा अतिरिक्त अध्ययन सामग्री के उपयोग की भी विस्तृत समीक्षा की गई। अधिकारियों ने शिक्षकों और विद्यालय प्रबंधन के साथ बातचीत कर यह समझने का प्रयास किया कि विद्यार्थियों के बैग का भार कम करने के लिए विद्यालयों द्वारा कौन-कौन से उपाय अपनाए जा रहे हैं।

अधिकांश विद्यालयों में स्थिति संतोषजनक

निरीक्षण के दौरान अधिकांश विद्यालयों में स्थिति संतोषजनक पाई गई। बड़ी संख्या में विद्यार्थियों के बैग निर्धारित वजन सीमा के भीतर पाए गए। अधिकारियों ने इसे एक सकारात्मक संकेत बताते हुए कहा कि कई विद्यालयों ने विद्यार्थियों पर अनावश्यक बोझ कम करने के लिए प्रभावी कदम उठाए हैं।

निरीक्षण में यह पाया गया कि कुछ विद्यालयों ने विषयवार समय-सारणी के अनुसार पुस्तकें लाने की व्यवस्था लागू की है, जिससे विद्यार्थियों को प्रतिदिन सभी पुस्तकें लेकर आने की आवश्यकता नहीं पड़ती। कुछ विद्यालयों में अतिरिक्त पुस्तकों और अध्ययन सामग्री को विद्यालय परिसर में ही रखने की सुविधा भी उपलब्ध कराई गई है। इसके अतिरिक्त कई संस्थानों ने अनावश्यक कार्यपुस्तिकाओं के उपयोग को सीमित कर विद्यार्थियों के बैग का भार कम करने की दिशा में सकारात्मक प्रयास किए हैं।

शिक्षा विभाग ने ऐसे विद्यालयों की पहल की सराहना करते हुए कहा कि अन्य विद्यालयों को भी इन मॉडलों से प्रेरणा लेकर विद्यार्थियों के हित में आवश्यक कदम उठाने चाहिए।

कुछ विद्यालयों में मिली अनियमितताएं

हालांकि निरीक्षण के दौरान कुछ विद्यालयों की कुछ कक्षाओं में विद्यार्थियों के बैग का वजन निर्धारित सीमा से अधिक पाया गया। अधिकारियों ने इस स्थिति को गंभीरता से लिया और संबंधित विद्यालय प्रबंधन से स्पष्टीकरण मांगा है।

शिक्षा विभाग ने नियमों का उल्लंघन करने वाले विद्यालयों को कारण बताओ नोटिस (Show Cause Notice) जारी किया है। नोटिस में विद्यालय प्रबंधन से पूछा गया है कि निर्धारित दिशा-निर्देशों का पालन क्यों नहीं किया गया तथा भविष्य में इस समस्या को दूर करने के लिए कौन-कौन से सुधारात्मक कदम उठाए जाएंगे।

अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि यदि विद्यालयों द्वारा संतोषजनक जवाब प्रस्तुत नहीं किया गया तो विभागीय स्तर पर आगे की कार्रवाई भी की जा सकती है।

डॉ. समीरण बोरा ने दिए सख्त निर्देश

विद्यालय निरीक्षक डॉ. समीरण बोरा ने निरीक्षण के बाद कहा कि विद्यार्थियों का स्वास्थ्य किसी भी परिस्थिति में प्रभावित नहीं होना चाहिए। उन्होंने संबंधित विद्यालयों को तत्काल आवश्यक सुधारात्मक कार्रवाई करने के निर्देश दिए।

उन्होंने कहा कि शिक्षा विभाग द्वारा निर्धारित दिशा-निर्देश केवल औपचारिकता नहीं हैं, बल्कि विद्यार्थियों के स्वस्थ विकास को सुनिश्चित करने के लिए बनाए गए हैं। यदि बच्चे प्रतिदिन अत्यधिक वजन वाले बैग लेकर विद्यालय आते हैं तो इसका सीधा असर उनके शारीरिक विकास पर पड़ता है।

डॉ. बोरा ने स्पष्ट किया कि भविष्य में भी इस प्रकार के औचक निरीक्षण जारी रहेंगे और नियमों की अनदेखी करने वाले संस्थानों के विरुद्ध आवश्यक प्रशासनिक कार्रवाई की जाएगी।

क्या हैं स्कूल बैग वजन संबंधी सरकारी मानक?

असम सरकार के प्राथमिक शिक्षा विभाग द्वारा वर्ष 2018 में जारी अधिसूचना तथा बाद में प्रारंभिक शिक्षा निदेशालय द्वारा जारी निर्देशों के अनुसार विभिन्न कक्षाओं के विद्यार्थियों के लिए स्कूल बैग का अधिकतम वजन निर्धारित किया गया है।

निर्धारित मानकों के अनुसार—

कक्षा 1 और 2 : अधिकतम 1.5 किलोग्राम

कक्षा 3 से 5 : 2 से 3 किलोग्राम

कक्षा 6 और 7 : अधिकतम 4 किलोग्राम

कक्षा 8 और 9 : अधिकतम 4.5 किलोग्राम

कक्षा 10 : अधिकतम 5 किलोग्राम

शिक्षा विभाग का कहना है कि इन मानकों का उद्देश्य बच्चों के शरीर पर अनावश्यक दबाव को रोकना तथा उनकी पढ़ाई को अधिक सुविधाजनक बनाना है।

भारी स्कूल बैग से बच्चों को क्या नुकसान ?

स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार लंबे समय तक भारी स्कूल बैग उठाने से बच्चों के शरीर पर कई प्रकार के नकारात्मक प्रभाव पड़ सकते हैं।

विशेषज्ञों का मानना है कि अत्यधिक वजन वाले बैग के कारण बच्चों की रीढ़ की हड्डी पर अतिरिक्त दबाव पड़ता है। इससे कम उम्र में ही पीठ दर्द, गर्दन दर्द, कंधों में तनाव तथा मांसपेशियों की समस्याएं उत्पन्न हो सकती हैं।

बाल रोग विशेषज्ञों के अनुसार लगातार भारी वजन उठाने से बच्चों की शारीरिक संरचना प्रभावित हो सकती है और उनके शरीर का संतुलन भी बिगड़ सकता है। कई शोधों में यह पाया गया है कि आवश्यकता से अधिक वजन वाले बैग बच्चों के शारीरिक विकास और मुद्रा (Posture) पर प्रतिकूल प्रभाव डालते हैं।

राष्ट्रीय शिक्षा नीति और बच्चों के स्वास्थ्य पर बढ़ता जोर

राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) 2020 में भी विद्यार्थियों पर अनावश्यक शैक्षणिक दबाव कम करने पर विशेष बल दिया गया है। शिक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि केवल पाठ्यक्रम का विस्तार ही शिक्षा का उद्देश्य नहीं होना चाहिए, बल्कि बच्चों के समग्र विकास को भी समान महत्व मिलना चाहिए।

देश के विभिन्न राज्यों में समय-समय पर स्कूल बैग के वजन को नियंत्रित करने के लिए दिशा-निर्देश जारी किए जाते रहे हैं। केंद्र सरकार ने भी राज्यों को इस विषय में नियमित निगरानी रखने की सलाह दी है।

शिवसागर में चलाया गया यह अभियान इसी व्यापक राष्ट्रीय सोच का हिस्सा माना जा रहा है।

अभिभावकों की भी महत्वपूर्ण भूमिका

शिक्षा विभाग ने अभिभावकों से भी सहयोग की अपील की है। विभाग का कहना है कि कई बार बच्चे अनावश्यक पुस्तकें, कॉपियां और अन्य सामग्री अपने बैग में लेकर विद्यालय पहुंचते हैं, जिससे बैग का वजन बढ़ जाता है।

अभिभावकों को प्रतिदिन बच्चों के बैग की जांच करनी चाहिए तथा यह सुनिश्चित करना चाहिए कि वे केवल आवश्यक पुस्तकें और अध्ययन सामग्री ही लेकर जाएं। यदि विद्यालय समय-सारणी उपलब्ध कराता है तो उसी के अनुसार पुस्तकों का चयन किया जाना चाहिए।

स्वस्थ और शिक्षा-अनुकूल वातावरण की दिशा में महत्वपूर्ण कदम

शिक्षा विभाग का कहना है कि यह अभियान केवल नियमों के अनुपालन तक सीमित नहीं है, बल्कि विद्यार्थियों के समग्र कल्याण, बेहतर शैक्षणिक वातावरण और स्वस्थ भविष्य को सुनिश्चित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है।

विभाग ने सभी विद्यालयों से आग्रह किया है कि वे विद्यार्थियों के हितों को सर्वोच्च प्राथमिकता दें और स्कूल बैग के वजन को नियंत्रित रखने के लिए प्रभावी उपाय अपनाएं। साथ ही अभिभावकों और शिक्षकों को भी इस विषय में जागरूक करने पर जोर दिया गया है।

निष्कर्ष

शिवसागर जिले में चलाया गया विशेष स्कूल बैग वजन निरीक्षण अभियान विद्यार्थियों के स्वास्थ्य, सुरक्षा और संतुलित शारीरिक विकास की दिशा में एक महत्वपूर्ण और समयोचित पहल है। अधिकांश विद्यालयों में संतोषजनक स्थिति मिलने के बावजूद कुछ संस्थानों में सामने आई अनियमितताओं ने यह स्पष्ट कर दिया है कि अभी भी निरंतर निगरानी और जागरूकता की आवश्यकता है।

शिक्षा विभाग की इस कार्रवाई से न केवल विद्यालयों में जवाबदेही बढ़ेगी, बल्कि बच्चों के कंधों से अनावश्यक बोझ कम करने की दिशा में भी सकारात्मक परिणाम सामने आने की उम्मीद है। यदि विद्यालय, अभिभावक और शिक्षा विभाग मिलकर कार्य करें तो विद्यार्थियों के लिए अधिक स्वस्थ, सुरक्षित और शिक्षा-अनुकूल वातावरण तैयार किया जा सकता है।

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