शिवसागर में बाढ़ का महाविनाश : पूरा शहर जलमग्न, ऐतिहासिक रंगपुर डूबा, रंगघर पर भी मंडराया खतरा : ONGC, एसएसपी कार्यालय और कई सरकारी दफ्तर बाढ़ की चपेट में : सिविल अस्पताल तक पहुंचा पानी, रातभर बढ़ता रहा जलस्तर
जिला प्रशासन ने युद्धस्तर पर शुरू किए राहत एवं बचाव अभियान : NDRF, SDRF, सेना और वायुसेना मैदान में : विधायक अखिल गोगोई ने सरकार पर लगाए गंभीर आरोप

शिवसागर, 21 जुलाई : असम के ऐतिहासिक शिवसागर जिले में बाढ़ ने पिछले कई दशकों का सबसे भयावह रूप धारण कर लिया है। लगातार तीसरे दिन भी जिले की समग्र बाढ़ स्थिति अत्यंत गंभीर बनी हुई है। दिहिंग, दिखौ, दिसांग, डिमौ और दरिका नदियों के उफान ने पूरे जिले को जलमग्न कर दिया है। शिवसागर नगर के अधिकांश हिस्से, ऐतिहासिक धरोहरें, सरकारी कार्यालय, अस्पताल, राष्ट्रीय राजमार्ग, बाजार, आवासीय कॉलोनियाँ तथा औद्योगिक प्रतिष्ठान बाढ़ की चपेट में आ चुके हैं।
हालाँकि दिखौ नदी का जलस्तर धीरे-धीरे घटने लगा है, फिर भी यह अभी भी खतरे के निशान से ऊपर बह रही है। दूसरी ओर दिसांग और दरिका नदियों का लगातार बढ़ता जलस्तर नए-नए क्षेत्रों को अपनी चपेट में ले रहा है, जिससे पूरे जिले में भय और अनिश्चितता का माहौल बना हुआ है।
दरिका नदी का रौद्र रूप, रातों-रात जलमग्न हुआ शिवसागर शहर
मंगलवार तड़के दरिका नदी का पानी मुख्य तटबंध के ऊपर से बहने लगा। इसके बाद तेज बहाव के साथ बाढ़ का पानी शिवसागर नगर में प्रवेश कर गया। देखते ही देखते दरिकापार, खाटपाथार, पाछी पाथार, मेछगांव, एटी रोड, बीजी रोड, स्टेशन चारिआली, जेंगनिकोटिया और जामुना रोड सहित अनेक इलाके जलमग्न हो गए। स्थानीय लोगों का कहना है कि कई दशकों बाद उन्होंने शहर में इतनी भयावह बाढ़ देखी है।
देर रात 11:45 बजे से लेकर लगभग 1:30 बजे तक बीजी रोड, एटी रोड, स्टेशन चारिआली, जामुना रोड और एएसटीसी तिनाली क्षेत्र में जलस्तर लगातार बढ़ता रहा, जिससे लोगों में दहशत फैल गई।
स्टेशन चारिआली और प्रमुख बाजारों में थम गया जनजीवन
शिवसागर के सबसे व्यस्त व्यावसायिक केंद्र स्टेशन चारिआली में आधी रात के समय तेज बहाव के साथ पानी प्रवेश कर गया। कुछ ही समय में पूरा बाजार जलमग्न हो गया। अधिकांश दुकानों और व्यावसायिक प्रतिष्ठानों में पानी घुस गया तथा सड़कें नदी का रूप लेने लगीं। सभी प्रकार का यातायात पूरी तरह ठप हो गया और व्यापारियों को लाखों रुपये के नुकसान की आशंका जताई जा रही है। रात बढ़ने के साथ बाढ़ का पानी जामुना रोड सहित आसपास के इलाकों में तेजी से फैलता गया।
बीजी रोड और एटी रोड पर घरों-दुकानों में घुसा पानी
शहर की प्रमुख व्यावसायिक सड़कें बीजी रोड और एटी रोड पूरी तरह जलमग्न हो गईं। सैकड़ों दुकानों और घरों में पानी भर जाने से लोगों को रातों-रात अपना सामान सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने की कोशिश करनी पड़ी। अनेक व्यापारिक प्रतिष्ठानों में रखा सामान पानी में डूब गया, जबकि कई परिवारों को अपना घर छोड़कर ऊँचे स्थानों पर शरण लेनी पड़ी।
ONGC का केंद्रीय प्रतिष्ठान भी बाढ़ की चपेट में
बाढ़ का असर केवल आम जनजीवन तक सीमित नहीं रहा। शिवसागर स्थित ऑयल एंड नेचुरल गैस कॉरपोरेशन (ONGC) का केंद्रीय प्रतिष्ठान भी बाढ़ से प्रभावित हो गया। बढ़ते जलस्तर के कारण केंद्रीय स्थापना सहित कई कार्यालयों का कामकाज बाधित हो गया और अनेक इकाइयों को अस्थायी रूप से बंद करना पड़ा। ONGC कॉलोनी में फँसे कर्मचारियों एवं उनके परिवारों को सुरक्षित निकालने के लिए भारतीय सेना को विशेष अभियान चलाना पड़ा। सेना की नौकाओं के माध्यम से कर्मचारियों और उनके परिजनों को सुरक्षित स्थानों तक पहुँचाया गया।
एसएसपी कार्यालय और कई सरकारी भवनों में घुसा पानी
बाढ़ ने प्रशासनिक व्यवस्था को भी बुरी तरह प्रभावित किया है। शिवसागर के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (एसएसपी) कार्यालय, जनस्वास्थ्य अभियांत्रिकी विभाग (PHE) के कार्यालय तथा कई अन्य सरकारी परिसरों में पानी भर गया। डॉ. एम.आई. बोरा रोड, एसपी कार्यालय के आसपास का इलाका और जेंगनिकोटिया क्षेत्र पूरी तरह जलमग्न हो गए, जिससे सरकारी कामकाज भी प्रभावित हुआ।
राष्ट्रीय राजमार्ग पर भी चढ़ा बाढ़ का पानी
बाढ़ का पानी गौरीसागर क्षेत्र में राष्ट्रीय राजमार्ग तक पहुँच गया। रानी फ्यूल स्टेशन से हंटोलीचिगा तक फोरलेन राष्ट्रीय राजमार्ग जलमग्न हो गया। वहीं बेतबाड़ी-अलीमुर क्षेत्र में भी राष्ट्रीय राजमार्ग पर पानी भर जाने से वाहनों की आवाजाही गंभीर रूप से प्रभावित हुई और कई मार्गों पर यातायात बाधित हो गया।
ऐतिहासिक रंगपुर पर बाढ़ का कहर
बाढ़ का सबसे चिंताजनक प्रभाव शिवसागर की विश्वविख्यात ऐतिहासिक धरोहरों पर देखने को मिला। ऐतिहासिक रंगपुर का विशाल क्षेत्र पूरी तरह जलमग्न हो गया है। डिमौ नदी के बढ़ते जलस्तर ने अनेक प्राचीन स्मारकों, पुरातात्विक संरचनाओं और ऐतिहासिक परिसरों को अपनी चपेट में ले लिया है। इससे राज्य की अमूल्य सांस्कृतिक विरासत पर गंभीर संकट उत्पन्न हो गया है।
तलातल घर के प्रवेश द्वार और बारूद भंडार पानी में डूबे
बाढ़ के कारण तलातल घर का ‘ना-द्वार’, ‘पानी द्वार’ तथा अहोम काल का ऐतिहासिक बारूद भंडार पूरी तरह जलमग्न हो गए हैं। हालांकि मुख्य तलातल घर अभी तक सुरक्षित है, क्योंकि उसके चारों ओर बने सुरक्षात्मक तटबंध ने फिलहाल बाढ़ के पानी को भीतर प्रवेश करने से रोक रखा है। लेकिन यदि जलस्तर इसी तरह बढ़ता रहा तो यह विश्वप्रसिद्ध स्मारक भी बाढ़ की चपेट में आ सकता है।
रंगघर पर भी मंडराने लगा खतरा
डिमौ नदी का पानी लगातार ग्रेटर जॉयसागर क्षेत्र में फैल रहा है। स्थानीय लोगों और विशेषज्ञों को आशंका है कि यदि जलस्तर और बढ़ा तो असम की पहचान माने जाने वाले ऐतिहासिक रंगघर तक भी बाढ़ का पानी पहुँच सकता है। यदि ऐसा हुआ तो राज्य की ऐतिहासिक धरोहरों को अपूरणीय क्षति पहुँचने की आशंका है।
रातभर बढ़ता रहा जलस्तर, प्रशासन ने जारी की चेतावनी
रात लगभग 1:30 बजे तक स्टेशन चारिआली से प्रवेश कर रहा बाढ़ का पानी जामुना रोड और एएसटीसी तिनाली की ओर लगातार बढ़ता रहा। हालात को देखते हुए जिला प्रशासन ने नागरिकों से अपील की है कि वे अनावश्यक रूप से घरों से बाहर न निकलें, जलमग्न क्षेत्रों से दूर रहें, स्थिति बिगड़ने पर तुरंत सुरक्षित स्थानों की ओर चले जाएँ तथा केवल प्रशासन द्वारा जारी आधिकारिक निर्देशों का ही पालन करें। अधिकारियों का कहना है कि स्थिति पर लगातार निगरानी रखी जा रही है और राहत एवं बचाव अभियान पूरी क्षमता के साथ जारी है।




