शिवसागर में बाढ़ से स्वास्थ्य व्यवस्था पर संकट : सिविल अस्पताल तक पहुंचा पानी, 158 मरीजों और 50 प्रसूताओं की सुरक्षा बनी सबसे बड़ी चुनौती : NDRF, SDRF, सेना और वायुसेना युद्धस्तर पर राहत एवं बचाव अभियान में जुटे : हजारों लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया गया
प्रशासन ने उतारी 38 से अधिक नावें, अतिरिक्त टीमें भी तैनात; हेलीकॉप्टर से पहुंचाया जा रहा भोजन और राहत सामग्री

शिवसागर, 21 जुलाई : शिवसागर जिले में आई विनाशकारी बाढ़ अब केवल जनजीवन और यातायात तक सीमित नहीं रही, बल्कि जिले की स्वास्थ्य सेवाओं पर भी गंभीर संकट खड़ा हो गया है। जिले का सबसे बड़ा सरकारी स्वास्थ्य संस्थान 300 बिस्तरों वाला शिवसागर सिविल अस्पताल भी बाढ़ की चपेट में आ गया है। अस्पताल परिसर में पानी प्रवेश कर चुका है और लगातार बढ़ते जलस्तर के कारण अस्पताल भवन के भीतर पानी घुसने का खतरा मंडरा रहा है। स्थिति को देखते हुए अस्पताल प्रशासन ने आपातकालीन तैयारियाँ तेज कर दी हैं। यदि पानी अस्पताल भवन में प्रवेश करता है तो वहां भर्ती 158 मरीजों, जिनमें 50 प्रसूताएँ (गर्भवती एवं प्रसवोत्तर महिलाएँ) भी शामिल हैं, को सुरक्षित स्थानों पर स्थानांतरित करना सबसे बड़ी चुनौती बन सकता है।
सिविल अस्पताल पर गहराया संकट, स्वास्थ्य विभाग हाई अलर्ट पर
अस्पताल परिसर में बाढ़ का पानी पहुंचने के बाद चिकित्सकों और स्वास्थ्यकर्मियों में चिंता बढ़ गई है। अस्पताल प्रशासन ने जलस्तर पर लगातार निगरानी रखने के निर्देश दिए हैं। जिन मरीजों की स्थिति सामान्य है, उन्हें समय से पहले छुट्टी देकर घर भेजा जा रहा है, जबकि गंभीर मरीजों के लिए वैकल्पिक व्यवस्था तैयार रखी गई है। साथ ही आवश्यक दवाइयों, ऑक्सीजन सिलेंडरों और महत्वपूर्ण चिकित्सा उपकरणों को सुरक्षित स्थानों पर स्थानांतरित किया जा रहा है। अधिकारियों का कहना है कि यदि पानी वार्डों तक पहुंचता है तो स्वास्थ्य सेवाओं पर अभूतपूर्व संकट उत्पन्न हो सकता है।
युद्धस्तर पर शुरू हुआ राहत एवं बचाव अभियान
बाढ़ की गंभीरता को देखते हुए शिवसागर जिला प्रशासन ने राहत एवं बचाव कार्यों को युद्धस्तर पर तेज कर दिया है। जिलाधिकारी के नेतृत्व में जिला प्रशासन, राष्ट्रीय आपदा मोचन बल (NDRF), राज्य आपदा मोचन बल (SDRF), भारतीय सेना, भारतीय वायुसेना, पुलिस, स्वास्थ्य विभाग तथा अन्य एजेंसियां संयुक्त रूप से राहत अभियान चला रही हैं। प्रशासन का कहना है कि वर्तमान समय में सबसे बड़ी प्राथमिकता लोगों की जान बचाना, राहत सामग्री पहुंचाना, फंसे हुए लोगों को सुरक्षित निकालना और प्रभावित क्षेत्रों में चिकित्सा सहायता उपलब्ध कराना है।
38 नावों से चल रहा व्यापक राहत अभियान
प्रशासन द्वारा जारी नवीनतम जानकारी के अनुसार पूरे जिले में राहत एवं बचाव कार्यों के लिए कुल 38 नावें तैनात की गई हैं। इनमें SDRF की 17 नावें, NDRF की 18 नावें तथा भारतीय सेना की 3 नावें शामिल हैं। इसके अलावा आवश्यकता को देखते हुए असम के अन्य जिलों से अतिरिक्त नावें और बचाव दल भी बुलाए जा रहे हैं ताकि कटे हुए इलाकों तक जल्द से जल्द पहुंचा जा सके।
NDRF ने हजारों लोगों को सुरक्षित निकाला
12वीं बटालियन NDRF के कमांडेंट वीरेन्द्र कुमार वर्मा के निर्देशन में पांच विशेष टीमें लगातार विभिन्न बाढ़ग्रस्त क्षेत्रों में राहत एवं बचाव अभियान चला रही हैं। आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार अब तक 2,391 लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया गया है, जबकि 35 लोगों को आपातकालीन परिस्थितियों से बचाया गया। इसके अलावा 46 पशुओं को भी सुरक्षित निकाला गया है। राहत अभियान लगातार जारी है और टीमें नए प्रभावित क्षेत्रों में भी पहुंच रही हैं।
भारतीय सेना और वायुसेना ने संभाला मोर्चा
बाढ़ की गंभीरता को देखते हुए भारतीय सेना भी पूरी क्षमता के साथ राहत कार्यों में जुटी हुई है। सेना विशेष रूप से ONGC कॉलोनी में फंसे कर्मचारियों और उनके परिवारों को सुरक्षित निकालने, वृद्ध एवं बीमार लोगों को राहत शिविरों तक पहुंचाने तथा राहत सामग्री वितरित करने का कार्य कर रही है।
इधर, सड़क संपर्क पूरी तरह टूट जाने के बाद भारतीय वायुसेना को भी अभियान में शामिल किया गया है। वायुसेना के हेलीकॉप्टरों के माध्यम से दूरदराज के इलाकों में फंसे लोगों को सुरक्षित निकाला जा रहा है। साथ ही भोजन के पैकेट, पीने का पानी, दवाइयां तथा अन्य आवश्यक राहत सामग्री उन क्षेत्रों तक पहुंचाई जा रही है जहां नावों के माध्यम से पहुंचना भी संभव नहीं है।
प्रभावित क्षेत्रों में सेक्टरवार तैनात की गईं टीमें
जिला प्रशासन ने NDRF, SDRF और भारतीय सेना की टीमों की विस्तृत तैनाती सूची जारी की है। सभी टीमों को अलग-अलग सेक्टरों में राहत वितरण, निकासी अभियान, चिकित्सा सहायता, खाद्य सामग्री वितरण तथा आपातकालीन प्रतिक्रिया के लिए तैनात किया गया है, ताकि जिले के प्रत्येक प्रभावित क्षेत्र तक शीघ्र सहायता पहुंचाई जा सके।
रेलवे लाइन, तटबंध और स्कूल बने अस्थायी आश्रय स्थल
बाढ़ का पानी घरों में घुसने के बाद हजारों लोगों को अपने घर छोड़ने पड़े हैं। बड़ी संख्या में परिवार रेलवे लाइन, ऊंचे तटबंधों, स्कूल भवनों और सामुदायिक भवनों में अस्थायी रूप से शरण लिए हुए हैं। कई परिवारों ने पूरी रात खुले आसमान के नीचे बिताई। प्रभावित लोगों के लिए राहत शिविरों में भोजन, पेयजल और आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराने का प्रयास किया जा रहा है।
बाढ़ ने छीनी एक युवक की जान
बाढ़ के बीच एक दुखद घटना में बेतबाड़ी क्षेत्र के 25 वर्षीय अम्लान गोगोई की मौत हो गई। बताया गया कि वे बाढ़ के बीच पीने का पानी लाने के लिए निकले थे, तभी तेज बहाव में बह गए। गंभीर अवस्था में उन्हें अस्पताल ले जाया गया, जहां चिकित्सकों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। इस घटना से पूरे क्षेत्र में शोक की लहर फैल गई।
डेढ़ वर्षीय मासूम को लोगों ने बचाया
एक अन्य घटना में हाहचरा-कुजीबाली क्षेत्र में लगभग डेढ़ वर्ष का एक बच्चा उफनती दिखौ नदी में गिर गया। स्थानीय लोगों और एक राहगीर की तत्परता से बच्चे को सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया। गंभीर अवस्था में उसे शिवसागर सिविल अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां उसका उपचार जारी है।
मृतकों की संख्या बढ़कर 13, प्रशासन ने जारी की अपील
प्रशासनिक सूत्रों के अनुसार बाढ़ से जुड़ी विभिन्न घटनाओं में अब तक 13 लोगों की मृत्यु की पुष्टि हो चुकी है। हालांकि राहत एवं बचाव अभियान जारी रहने के कारण अधिकारियों ने स्थिति पर लगातार नजर बनाए रखी है।
जिला प्रशासन ने नागरिकों से अपील की है कि वे जलमग्न क्षेत्रों में जाने से बचें, प्रशासन द्वारा जारी निर्देशों का पालन करें, सुरक्षित स्थानों पर रहें, किसी भी प्रकार की अफवाहों पर विश्वास न करें तथा आपात स्थिति में तत्काल राहत एवं बचाव दलों से संपर्क करें। अधिकारियों ने कहा है कि शिवसागर में चौबीसों घंटे राहत एवं बचाव अभियान जारी है और प्रत्येक प्रभावित व्यक्ति तक हर संभव सहायता पहुंचाने का प्रयास किया जा रहा है।




