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बाढ़ के बीच देर रात तक लोगों के बीच रहे विधायक अखिल गोगोई, सरकार और जिला प्रशासन पर लगाए गंभीर आरोप : ’27 पंचायतों के लिए केवल 13 सरकारी नावें क्यों?’—राहत व्यवस्था पर उठाए सवाल, नागालैंड के किसी बांध से पानी छोड़े जाने की भी जताई आशंका

दिसांग नदी के तटबंध पर बढ़ते खतरे और नागिनीमोरा में संभावित भूस्खलन ने बढ़ाई लोगों की चिंता

शिवसागर, 21 जुलाई : शिवसागर जिले में आई विनाशकारी बाढ़ के बीच जहां एक ओर जिला प्रशासन, NDRF, SDRF, भारतीय सेना और अन्य एजेंसियां युद्धस्तर पर राहत एवं बचाव अभियान चला रही हैं, वहीं दूसरी ओर राहत व्यवस्था और प्रशासनिक तैयारियों को लेकर राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप भी तेज हो गए हैं। शिवसागर के विधायक अखिल गोगोई ने मंगलवार को दिनभर तथा देर रात तक बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों का दौरा कर हालात का जायजा लिया। उन्होंने प्रभावित परिवारों से मुलाकात कर उनकी समस्याएं सुनीं और राज्य सरकार तथा जिला प्रशासन की कार्यप्रणाली पर कई गंभीर सवाल उठाए।

देर रात तक बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों का किया दौरा

बाढ़ की भयावह स्थिति के बीच विधायक अखिल गोगोई देर रात तक शिवसागर नगर के विभिन्न जलमग्न इलाकों में मौजूद रहे। उन्होंने स्टेशन चारिआली, बीजी रोड, एटी रोड, अस्पताल रोड, जेंगनिकोटिया, निमाईजान, हाहचरा तथा ग्रेटर जॉयसागर सहित अनेक प्रभावित क्षेत्रों का दौरा कर लोगों से बातचीत की और राहत कार्यों की प्रगति का निरीक्षण किया। रात लगभग 11 बजे भी वे स्टेशन चारिआली के जलमग्न बाजार और आवासीय क्षेत्रों में स्थानीय नागरिकों से हालात की जानकारी लेते दिखाई दिए।

सरकार और जिला प्रशासन पर लगाए गंभीर आरोप

निरीक्षण के बाद मीडिया से बातचीत करते हुए विधायक अखिल गोगोई ने आरोप लगाया कि राज्य सरकार और जिला प्रशासन बाढ़ जैसी गंभीर आपदा से प्रभावी ढंग से निपटने में विफल रहे हैं। उनका कहना था कि इतनी बड़ी प्राकृतिक आपदा के बावजूद प्रभावित लोगों तक समय पर राहत सामग्री, सुरक्षित आश्रय और पर्याप्त बचाव संसाधन उपलब्ध नहीं कराए जा सके। उन्होंने दावा किया कि हजारों लोग अपने घर छोड़कर रेलवे लाइन, तटबंधों और ऊंचे स्थानों पर रात बिताने को मजबूर हैं। उन्होंने यह भी कहा कि प्रशासन को बाढ़ आने से पहले पर्याप्त तैयारी करनी चाहिए थी।

’27 पंचायतों के लिए केवल 13 सरकारी नावें क्यों?’

अखिल गोगोई ने राहत अभियान में नावों की संख्या को लेकर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि जब जिले की 27 पंचायतें बाढ़ से प्रभावित हैं, तब केवल 13 सरकारी नावों के भरोसे राहत अभियान चलाना पर्याप्त नहीं माना जा सकता। उनके अनुसार इतने बड़े संकट के लिए पहले से अधिक नावें और प्रशिक्षित बचाव दल तैयार रहने चाहिए थे।

हालांकि, जिला प्रशासन की ओर से बाद में जानकारी दी गई कि SDRF, NDRF और भारतीय सेना की नावों सहित कुल 38 नावें राहत एवं बचाव कार्यों में लगाई गई हैं तथा आवश्यकता के अनुसार अतिरिक्त नावें भी मंगाई जा रही हैं।

जरूरत पड़ी तो स्वयं पहुंचाएंगे राहत सामग्री

विधायक अखिल गोगोई ने कहा कि यदि प्रशासन प्रत्येक प्रभावित परिवार तक समय पर सहायता नहीं पहुंचा पाता है तो उनकी राजनीतिक टीम और स्वयंसेवक अपने स्तर पर राहत सामग्री वितरित करेंगे। उन्होंने कहा कि जरूरतमंद लोगों तक खाद्य सामग्री, पीने का पानी और अन्य आवश्यक वस्तुएं पहुंचाने के लिए वे हरसंभव प्रयास करेंगे। साथ ही उन्होंने जिला प्रशासन से भी पर्याप्त राहत सामग्री तत्काल उपलब्ध कराने की मांग की।

मुख्यमंत्री से विशेष राहत पैकेज की मांग

अखिल गोगोई ने मुख्यमंत्री डॉ. हिमंत बिस्वा सरमा से तत्काल हस्तक्षेप करने की अपील करते हुए बाढ़ प्रभावित परिवारों के लिए विशेष राहत पैकेज की मांग की। उन्होंने कहा कि प्रत्येक प्रभावित परिवार को पर्याप्त राहत सामग्री उपलब्ध कराई जाए, घरों और व्यावसायिक प्रतिष्ठानों को हुए नुकसान का विशेष सर्वे कराया जाए, किसानों और छोटे व्यापारियों के लिए आर्थिक सहायता की घोषणा की जाए, बाढ़ पीड़ितों को शीघ्र मुआवजा दिया जाए तथा ऐतिहासिक धरोहरों की सुरक्षा के लिए विशेष कदम उठाए जाएं।

नागालैंड से पानी छोड़े जाने की जताई आशंका

बाढ़ के कारणों को लेकर भी विधायक ने गंभीर आशंका व्यक्त की। उनका कहना था कि यह बाढ़ केवल नागा पहाड़ियों में हुई भारी वर्षा का परिणाम नहीं हो सकती। उन्होंने संदेह जताया कि संभवतः नागालैंड में किसी जलाशय या बांध से अचानक पानी छोड़ा गया हो, जिससे शिवसागर, चराइदेव और जोरहाट जिलों में बाढ़ की स्थिति और गंभीर हो गई। हालांकि इस संबंध में अब तक किसी सरकारी एजेंसी द्वारा कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है।

दिसांग नदी के तटबंध पर बढ़ा खतरा

इधर बाढ़ के बीच एक और बड़ी चिंता सामने आई है। स्थानीय सूत्रों के अनुसार दिसांग नदी का पानी मुख्य तटबंध के ऊपर से बहना शुरू हो गया है। यदि किसी कारणवश यह तटबंध टूटता है तो शिवसागर शहर, आसपास के निचले इलाके और अनेक ग्रामीण बस्तियां कुछ ही समय में गंभीर जलभराव की चपेट में आ सकती हैं। स्थानीय लोग लगातार तटबंध की स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं।

नागिनीमोरा में संभावित भूस्खलन की आशंका

बाढ़ के साथ-साथ नागालैंड सीमा से सटे नागिनीमोरा क्षेत्र में संभावित भूस्खलन का खतरा भी लोगों की चिंता बढ़ा रहा है। स्थानीय लोगों के अनुसार दिखौ नदी के समीप पहाड़ी क्षेत्र में लगभग दो किलोमीटर लंबी विशाल दरार दिखाई दी है, जो NAP कैंप से बरपुल तक फैली हुई बताई जा रही है। ग्रामीणों का कहना है कि यदि यहां भूस्खलन होता है तो पहाड़ी का बड़ा हिस्सा नदी में गिर सकता है, जिससे दिखौ नदी का प्रवाह बदलने और आसपास के गांवों पर नया खतरा मंडराने की आशंका है। हालांकि प्रशासन की ओर से अभी तक इस संबंध में कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है।

ऐतिहासिक धरोहरों के संरक्षण की उठी मांग

बाढ़ के कारण ऐतिहासिक रंगपुर, तलातल घर तथा संभावित खतरे में आए रंगघर को देखते हुए इतिहासकारों, स्थानीय नागरिकों और विभिन्न सामाजिक संगठनों ने राज्य सरकार से इन धरोहरों की सुरक्षा के लिए विशेष संरक्षण योजना लागू करने की मांग की है। उनका कहना है कि ये धरोहरें केवल असम ही नहीं बल्कि पूरे देश की सांस्कृतिक विरासत हैं, इसलिए इनके संरक्षण के लिए तत्काल विशेषज्ञों की टीम तैनात की जानी चाहिए।

रातभर बढ़ता रहा जलस्तर, लोगों में बनी रही दहशत

देर रात तक शिवसागर शहर में जलस्तर लगातार बढ़ता रहा। स्टेशन चारिआली, जामुना रोड, अस्पताल रोड, जेंगनिकोटिया, एसपी कार्यालय क्षेत्र, बीजी रोड और एटी रोड सहित कई इलाकों में पानी लगातार नए क्षेत्रों में फैलता गया। रात लगभग 1:30 बजे जिला प्रशासन ने लोगों से सतर्क रहने, अनावश्यक रूप से घरों से बाहर नहीं निकलने तथा आवश्यकता पड़ने पर तुरंत सुरक्षित स्थानों पर जाने की अपील की।

प्राकृतिक आपदा से बढ़कर मानवीय संकट

शिवसागर में लगातार बिगड़ते हालात ने यह स्पष्ट कर दिया है कि यह केवल एक प्राकृतिक आपदा नहीं, बल्कि एक गंभीर मानवीय संकट का रूप ले चुकी है। हजारों परिवार अपने घरों से विस्थापित हो चुके हैं, व्यापारिक गतिविधियां ठप हैं, ऐतिहासिक धरोहरें खतरे में हैं और प्रशासन तथा राहत एजेंसियों के सामने हर घंटे नई चुनौतियां खड़ी हो रही हैं। ऐसे में आने वाले दिनों में राहत, पुनर्वास और ऐतिहासिक विरासत के संरक्षण की दिशा में प्रभावी और समन्वित प्रयास सबसे बड़ी आवश्यकता माने जा रहे हैं।

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