शिवसागर कोर्ट लॉकअप में विचाराधीन कैदी ने किया आत्महत्या का प्रयास, सुरक्षा व्यवस्था पर उठे गंभीर सवाल : पॉक्सो मामले में करीब तीन महीने से जेल में बंद 21 वर्षीय फरदीन अहमद ने कथित तौर पर बाएं हाथ की नस काटने का किया प्रयास : जमानत याचिका खारिज होने की जानकारी मिलने के बाद उठाया कदम : पुलिस ने तत्काल शिवसागर सिविल अस्पताल पहुंचाया
कड़ी सुरक्षा वाले कोर्ट लॉकअप में विचाराधीन कैदी तक कैसे पहुंची धारदार वस्तु? तलाशी और निगरानी व्यवस्था सवालों के घेरे में : घटना में इस्तेमाल वस्तु क्या थी, कहां से आई और लॉकअप तक कैसे पहुंची—इन सवालों का जवाब मिलना बाकी

शिवसागर, 9 सितंबर : शिवसागर अदालत परिसर में बुधवार को उस समय हड़कंप मच गया, जब एक विचाराधीन कैदी ने पीआई कोर्ट के लॉकअप के भीतर कथित तौर पर अपने बाएं हाथ की नस काटकर आत्महत्या का प्रयास किया। घटना की जानकारी मिलते ही ड्यूटी पर मौजूद पुलिसकर्मी हरकत में आए और घायल युवक को तत्काल उपचार के लिए जयसागर स्थित शिवसागर सिविल अस्पताल पहुंचाया। घटना के बाद जहां विचाराधीन कैदी की सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ गई है, वहीं कड़ी सुरक्षा वाले कोर्ट लॉकअप के भीतर कथित धारदार वस्तु पहुंचने को लेकर भी गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।

पॉक्सो मामले में करीब तीन महीने से जेल में बंद है फरदीन
प्राप्त जानकारी के अनुसार घायल विचाराधीन कैदी की पहचान जापिसजिया निवासी 21 वर्षीय फरदीन अहमद के रूप में हुई है। वह पॉक्सो से जुड़े एक मामले में पिछले करीब तीन महीने से शिवसागर जेल में विचाराधीन कैदी के रूप में बंद है।
बुधवार को संबंधित मामले में अदालत में पेशी के लिए फरदीन को जेल से शिवसागर अदालत लाया गया था। पेशी की प्रक्रिया के दौरान उसे अदालत परिसर स्थित पीआई कोर्ट के लॉकअप में रखा गया था।

जमानत खारिज होने की जानकारी के बाद कथित तौर पर उठाया कदम
बताया जा रहा है कि संबंधित अदालत द्वारा उसकी जमानत याचिका खारिज किए जाने की जानकारी मिलने के बाद फरदीन ने कथित तौर पर यह कदम उठाया। आरोप है कि उसने पीआई कोर्ट के लॉकअप के भीतर किसी धारदार वस्तु का इस्तेमाल कर अपने बाएं हाथ की नस काटने का प्रयास किया।
घटना अचानक सामने आने के बाद अदालत परिसर में मौजूद पुलिसकर्मियों में हड़कंप मच गया। ड्यूटी पर तैनात पुलिसकर्मियों ने तत्काल स्थिति संभाली और घायल विचाराधीन कैदी को लॉकअप से बाहर निकालकर अस्पताल पहुंचाने की व्यवस्था की।

शिवसागर सिविल अस्पताल में कराया गया भर्ती
घायल फरदीन अहमद को पुलिस तत्काल जयसागर स्थित शिवसागर सिविल अस्पताल लेकर पहुंची, जहां उसे भर्ती कर उपचार शुरू किया गया। समय रहते पुलिसकर्मियों द्वारा उसे अस्पताल पहुंचाए जाने के कारण चिकित्सकीय सहायता उपलब्ध हो सकी।
हालांकि घटना से जुड़े कई पहलुओं की आधिकारिक स्तर पर विस्तृत जानकारी सामने आना अभी बाकी है।

कोर्ट लॉकअप तक कैसे पहुंची धारदार वस्तु?
इस पूरे घटनाक्रम ने अदालत परिसर की सुरक्षा व्यवस्था को लेकर एक बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है—कड़ी सुरक्षा और पुलिस निगरानी के बीच कोर्ट लॉकअप में मौजूद एक विचाराधीन कैदी तक कथित धारदार वस्तु आखिर पहुंची कैसे?
आमतौर पर जेल से अदालत में पेशी के लिए लाए जाने वाले बंदियों को सुरक्षा जांच और पुलिस निगरानी के बीच रखा जाता है। जेल से अदालत तक लाने और लॉकअप में रखने के दौरान सुरक्षा संबंधी प्रक्रियाओं का पालन किया जाता है। ऐसे में पीआई कोर्ट के लॉकअप के भीतर किसी विचाराधीन कैदी द्वारा कथित तौर पर धारदार वस्तु का इस्तेमाल किए जाने की घटना ने तलाशी और निगरानी व्यवस्था को लेकर सवाल पैदा कर दिए हैं।
कथित धारदार वस्तु क्या थी और कहां से आई—जांच का अहम पहलू
अब सबसे महत्वपूर्ण सवाल यह है कि घटना में कथित तौर पर इस्तेमाल की गई वस्तु वास्तव में क्या थी। वह फरदीन के पास पहले से मौजूद थी या अदालत परिसर अथवा लॉकअप में उसे कहीं से मिली—यह स्पष्ट होना जरूरी है।
इसके साथ ही यह भी पता लगाया जाना महत्वपूर्ण होगा कि यदि वस्तु उसके पास पहले से थी तो जेल से अदालत लाए जाने और लॉकअप में रखे जाने के दौरान हुई सुरक्षा जांच में वह पकड़ में क्यों नहीं आई। वहीं, यदि वस्तु लॉकअप या अदालत परिसर में उपलब्ध हुई तो वहां की सुरक्षा और रखरखाव व्यवस्था को लेकर अलग सवाल खड़े होते हैं।
घटना के समय लॉकअप में सुरक्षा और निगरानी की क्या व्यवस्था थी तथा ड्यूटी पर कितने सुरक्षाकर्मी मौजूद थे, ये पहलू भी पूरे घटनाक्रम को समझने के लिए महत्वपूर्ण हैं।
घटना से सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर प्रश्नचिह्न
फिलहाल इस घटना को लेकर शिवसागर में चर्चा तेज है। एक ओर 21 वर्षीय विचाराधीन कैदी द्वारा कथित आत्महत्या के प्रयास की घटना ने चिंता पैदा की है, तो दूसरी ओर अदालत परिसर के सुरक्षित माने जाने वाले लॉकअप में कथित धारदार वस्तु की उपलब्धता ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर प्रश्नचिह्न लगा दिया है।
अब इस मामले में यह स्पष्ट होना बाकी है कि कथित धारदार वस्तु फरदीन तक कैसे पहुंची और सुरक्षा व्यवस्था में किसी स्तर पर चूक हुई थी या नहीं। इन सवालों के जवाब संबंधित तथ्यों की जांच और आधिकारिक जानकारी सामने आने के बाद ही स्पष्ट हो सकेंगे।




