महिला कैदियों की स्वच्छता और स्वास्थ्य के लिए शिवसागर मारवाड़ी महिला समिति की संवेदनशील पहल, कारागार में बांटी आवश्यक सामग्री : आठ वर्षों से हर महीने जारी है स्थायी सेवा प्रकल्प, महिला कैदियों को सेनेटरी नैपकिन और दैनिक उपयोग की सामग्री प्रदान की : संगीता झूरिया व सरोज चौखानी के संयोजन में नियमित सेवा : अध्यक्ष सारिका देवड़ा सहित पदाधिकारियों-सदस्यों की सहभागिता
“परिस्थितियां बदल सकती हैं, लेकिन हर महिला का स्वास्थ्य, स्वच्छता और गरिमा समान रूप से महत्वपूर्ण है”—संगीता झूरिया

शिवसागर, 8 सितंबर : महिला सशक्तीकरण को केवल सामाजिक और आर्थिक प्रगति तक सीमित न रखते हुए महिलाओं के स्वास्थ्य, व्यक्तिगत स्वच्छता और गरिमा से जोड़ने की दिशा में अखिल भारतीय मारवाड़ी महिला सम्मेलन के असम प्रदेश अंतर्गत शिवसागर मारवाड़ी महिला समिति शाखा ने एक बार फिर अपनी सामाजिक जिम्मेदारी निभाई। शाखा की ओर से स्थानीय कारागार में नियमित मासिक सेवा कार्यक्रम आयोजित कर वहां रह रही 38 महिला कैदियों को सेनेटरी नैपकिन सहित स्वच्छता और दैनिक उपयोग की आवश्यक सामग्री उपलब्ध कराई गई।

यह कार्यक्रम समिति के किसी एक अवसर तक सीमित सेवा अभियान का हिस्सा नहीं, बल्कि पिछले आठ वर्षों से प्रत्येक महीने निरंतर संचालित किए जा रहे स्थायी सेवा प्रकल्प की कड़ी है। इसके माध्यम से कारागार में रह रही महिलाओं की व्यक्तिगत स्वच्छता और स्वास्थ्य से जुड़ी बुनियादी आवश्यकताओं को पूरा करने में सहयोग किया जाता है।
38 महिला कैदियों के लिए 40 पैकेट सेनेटरी नैपकिन
इस महीने आयोजित सेवा कार्यक्रम के तहत कारागार में रह रही 38 महिला कैदियों के लिए 40 पैकेट सेनेटरी नैपकिन उपलब्ध कराए गए। महिला स्वास्थ्य और मासिक धर्म स्वच्छता से जुड़ी आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए समिति अपने इस नियमित प्रकल्प में सेनेटरी नैपकिन उपलब्ध कराने को विशेष प्राथमिकता देती आ रही है।
इसके साथ ही कारागार परिसर की साफ-सफाई और स्वच्छता में सहयोग के उद्देश्य से 2 कार्टन ब्लीचिंग पाउडर, 20 बोतल फिनाइल, 30 पैकेट गार्बेज बैग और एक कार्टन बिस्किट सहित अन्य आवश्यक सामग्री भी प्रदान की गई।
आठ वर्षों से बिना रुके हर महीने जारी सेवा
मारवाड़ी महिला समिति, शिवसागर शाखा की ओर से कारागार में यह स्थायी सेवा प्रकल्प पिछले करीब आठ वर्षों से लगातार संचालित किया जा रहा है। समिति प्रत्येक महीने महिला कैदियों की आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए उपयोगी सामग्री उपलब्ध कराने की व्यवस्था करती है।
इस पहल का मूल उद्देश्य यह सुनिश्चित करने में सहयोग करना है कि कारागार में रहने वाली महिलाओं को व्यक्तिगत स्वच्छता से जुड़ी बुनियादी सामग्री की कमी का सामना न करना पड़े। समिति का मानना है कि परिस्थितियां चाहे जैसी भी हों, प्रत्येक महिला को स्वास्थ्य, स्वच्छता और गरिमा से जुड़ी बुनियादी सुविधाएं मिलनी चाहिए।
“महिला की गरिमा उसकी परिस्थितियों से तय नहीं होती”—संगीता झूरिया
स्थायी प्रकल्प की चेयरपर्सन संगीता झूरिया ने इस अवसर पर कहा कि समिति के लिए यह केवल सामग्री वितरण का कार्यक्रम नहीं, बल्कि महिलाओं के स्वास्थ्य और सम्मान से जुड़ी एक निरंतर सामाजिक जिम्मेदारी है।
उन्होंने कहा कि परिस्थितियां बदल सकती हैं, लेकिन हर महिला का स्वास्थ्य, स्वच्छता और गरिमा समान रूप से महत्वपूर्ण है। कारागार में रह रही महिलाओं की भी व्यक्तिगत स्वच्छता से जुड़ी आवश्यकताएं हैं और इन बुनियादी जरूरतों के प्रति संवेदनशील होना समाज की जिम्मेदारी है। इसी भावना से हमारी शाखा पिछले आठ वर्षों से प्रत्येक महीने इस सेवा प्रकल्प को लगातार संचालित कर रही है।
संगीता झूरिया ने कहा कि सेनेटरी नैपकिन जैसी सामग्री महिलाओं के लिए कोई विलासिता नहीं, बल्कि स्वास्थ्य और स्वच्छता से जुड़ी आवश्यक जरूरत है। समिति का प्रयास है कि नियमितता के साथ ऐसी सामग्री उपलब्ध कराकर महिला कैदियों की दैनिक जरूरतों को पूरा करने में यथासंभव सहयोग किया जाए।
उन्होंने आगे कहा कि लगातार आठ वर्षों तक किसी सेवा प्रकल्प को हर महीने जारी रखना तभी संभव होता है, जब पूरी टीम में सेवा के प्रति प्रतिबद्धता हो। हमारी कोशिश है कि यह प्रकल्प आगे भी इसी नियमितता और संवेदनशीलता के साथ चलता रहे।
संगीता झूरिया और सरोज चौखानी के संयोजन में प्रकल्प
इस स्थायी सेवा प्रकल्प की चेयरपर्सन संगीता झूरिया और सरोज चौखानी हैं। दोनों के संयोजन में प्रत्येक महीने कारागार के लिए आवश्यक सामग्री की व्यवस्था और वितरण कार्यक्रम संचालित किया जाता है।
इस महीने आयोजित कार्यक्रम में शाखा की अध्यक्ष सारिका देवड़ा, सचिव प्रीति केजरीवाल, कोषाध्यक्ष एवं प्रकल्प चेयरपर्सन संगीता झूरिया तथा सदस्य उर्मिला अग्रवाल उपस्थित रहीं। पदाधिकारियों और सदस्यों ने सामग्री उपलब्ध कराते हुए नियमित सेवा प्रकल्प को आगे बढ़ाया।
महिला सशक्तीकरण को स्वास्थ्य और मानवीय संवेदना से जोड़ने का प्रयास
मारवाड़ी महिला समिति का यह प्रयास महिला सशक्तीकरण की अवधारणा को स्वास्थ्य, स्वच्छता और मानवीय संवेदनाओं के साथ जोड़ता है। समिति के अनुसार महिला सशक्तीकरण का अर्थ केवल महिलाओं को आगे बढ़ने के अवसर उपलब्ध कराना ही नहीं, बल्कि उनकी बुनियादी स्वास्थ्य आवश्यकताओं, व्यक्तिगत स्वच्छता और आत्मसम्मान के प्रति संवेदनशील रहना भी है।
इसी सोच के तहत शिवसागर शाखा पिछले आठ वर्षों से कारागार में महिला कैदियों के लिए इस स्थायी प्रकल्प को नियमित रूप से चला रही है। शाखा ने भविष्य में भी इस सेवा को निरंतर जारी रखने और जरूरत के अनुरूप आवश्यक सामग्री उपलब्ध कराने की प्रतिबद्धता जताई है।
कार्यक्रम की जानकारी शिवसागर मारवाड़ी महिला समिति की जनसंपर्क अधिकारी एडवोकेट पायल अग्रवाल ने दी।




