सरभोग के श्रीमंत शंकरदेव नामघर में नवनिर्मित कीर्तन हॉल व पाकशाला का लोकार्पण, माहेश्वरी परिवार ने पूर्वजों की स्मृति को सेवा से जोड़ा : समाजसेवी हरिकिशन माहेश्वरी एवं परिवार ने स्व. झुमरमल माहेश्वरी व स्व. बरजी देवी माहेश्वरी की पुण्य स्मृति में कराया निर्माण : असम विधानसभा अध्यक्ष रंजीत कुमार दास ने किया लोकार्पण; नाम-जप, नाम-कीर्तन और धार्मिक आयोजनों के लिए श्रद्धालुओं को मिलेगी बेहतर सुविधा
“नामघर केवल उपासना का स्थान नहीं, असम की सामाजिक-सांस्कृतिक चेतना और सामुदायिक एकता का महत्वपूर्ण केंद्र”—रंजीत कुमार दास : धार्मिक आस्था, पूर्वजों के प्रति श्रद्धा और समाजसेवा का प्रेरणादायी संगम, मारवाड़ी समाज ने माहेश्वरी परिवार को दिया हार्दिक साधुवाद

न्यूज डेस्क, 9 सितंबर : धार्मिक आस्था, पूर्वजों के प्रति श्रद्धा और समाजसेवा को एक सूत्र में पिरोते हुए असम के बरपेटा जिले के सरभोग स्थित श्रीमंत शंकरदेव नामघर में नवनिर्मित कीर्तन स्थल (हॉल) एवं पाकशाला का लोकार्पण किया गया। प्रतिष्ठित समाजसेवी हरिकिशन माहेश्वरी, उनकी धर्मपत्नी कमला देवी माहेश्वरी एवं परिवार की ओर से स्वर्गीय झुमरमल माहेश्वरी एवं स्वर्गीय बरजी देवी माहेश्वरी की पुण्य स्मृति में निर्मित इन दोनों सुविधाओं को श्रद्धालुओं एवं नामघर की सेवा के लिए समर्पित किया गया।
नवनिर्मित कीर्तन हॉल और पाकशाला का विधिवत लोकार्पण असम विधानसभा अध्यक्ष रंजीत कुमार दास ने किया। धार्मिक एवं सामाजिक दृष्टि से महत्वपूर्ण इस पहल को लेकर स्थानीय लोगों के साथ मारवाड़ी समाज में भी विशेष प्रसन्नता व्यक्त की गई। समाज के लोगों ने इसे पूर्वजों की स्मृति को चिरस्थायी बनाने के साथ जनसेवा और धार्मिक कार्यों से जोड़ने वाली अनुकरणीय पहल बताया।

स्व. झुमरमल माहेश्वरी और स्व. बरजी देवी माहेश्वरी की स्मृति को किया समर्पित
समाजसेवी हरिकिशन माहेश्वरी एवं उनके परिवार ने अपने पूर्वज स्व. झुमरमल माहेश्वरी और स्व. बरजी देवी माहेश्वरी की पावन स्मृति को धार्मिक सेवा के माध्यम से जीवंत बनाए रखने के उद्देश्य से इस प्रकल्प को साकार किया है।
परिवार की ओर से नामघर में ऐसा स्थायी निर्माण कराया गया है, जिसका लाभ आने वाले वर्षों तक यहां आयोजित होने वाले नाम-जप, नाम-कीर्तन और अन्य धार्मिक-सामाजिक कार्यक्रमों में श्रद्धालुओं को मिलता रहेगा। इस दृष्टि से यह निर्माण पूर्वजों को श्रद्धांजलि देने के साथ समाज के लिए एक स्थायी सेवा के रूप में भी देखा जा रहा है।
मारवाड़ी समाज के लोगों ने कहा कि किसी दिवंगत परिजन या पूर्वज की स्मृति को ऐसे कार्य से जोड़ना, जिसका लाभ लंबे समय तक समाज और श्रद्धालुओं को मिलता रहे, अपने आप में प्रेरणादायी है।

विधानसभा अध्यक्ष रंजीत कुमार दास ने किया लोकार्पण
असम विधानसभा अध्यक्ष रंजीत कुमार दास ने नवनिर्मित कीर्तन स्थल एवं पाकशाला का लोकार्पण कर इन्हें नामघर की सेवा में समर्पित किया। इस अवसर पर उन्होंने माहेश्वरी परिवार की पहल की सराहना करते हुए धार्मिक स्थलों के सामाजिक एवं सांस्कृतिक महत्व को रेखांकित किया।
दास ने कहा कि नामघर असम की आध्यात्मिक परंपरा के साथ-साथ सामाजिक सद्भाव, सामुदायिक सहभागिता और सांस्कृतिक चेतना के भी महत्वपूर्ण केंद्र रहे हैं। यहां होने वाला नाम-प्रसंग और सामूहिक धार्मिक आयोजन लोगों को एक-दूसरे से जोड़ने तथा समाज में सकारात्मक मूल्यों को मजबूत करने का माध्यम बनते हैं।
उन्होंने कहा कि नामघर केवल उपासना का स्थान नहीं, बल्कि असम की सामाजिक-सांस्कृतिक चेतना और सामुदायिक एकता का महत्वपूर्ण केंद्र है। ऐसे पवित्र स्थल पर श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए कीर्तन हॉल और पाकशाला का निर्माण कराना निश्चित रूप से सराहनीय सेवा है।
“पूर्वजों की स्मृति को जनसेवा से जोड़ना प्रेरणादायी”
रंजीत कुमार दास ने माहेश्वरी परिवार के योगदान की प्रशंसा करते हुए कहा कि मारवाड़ी समाज हमेशा धार्मिक और जनसेवा कार्यों में आगे रहता है, अब माहेश्वरी परिवार ने एक बार फिर से यह प्रमाणित किया है। उन्होंने कहा कि पूर्वजों के प्रति श्रद्धा व्यक्त करने के अनेक माध्यम हो सकते हैं, लेकिन उनकी स्मृति में ऐसी स्थायी सुविधा का निर्माण करना, जिसका लाभ समाज को लगातार मिलता रहे, विशेष महत्व रखता है।
उन्होंने कहा कि स्वर्गीय झुमरमल माहेश्वरी और स्वर्गीय बरजी देवी माहेश्वरी की स्मृति में हरिकिशन माहेश्वरी, कमला देवी माहेश्वरी एवं उनके परिवार द्वारा किया गया यह निर्माण धार्मिक आस्था के साथ समाजसेवा की भावना को भी अभिव्यक्त करता है। ऐसी पहल अन्य लोगों को भी समाज और धार्मिक संस्थानों के हित में आगे आने के लिए प्रेरित करती है।”
दास ने इस अवसर पर माहेश्वरी परिवार को शुभकामनाएं देते हुए आशा व्यक्त की कि नवनिर्मित सुविधाएं नामघर की धार्मिक गतिविधियों को और सुव्यवस्थित बनाने में उपयोगी साबित होंगी तथा श्रद्धालुओं को लंबे समय तक इसका लाभ मिलेगा।

नाम-जप और नाम-कीर्तन के लिए मिलेगा सुव्यवस्थित स्थान
नवनिर्मित कीर्तन हॉल का उद्देश्य श्रीमंत शंकरदेव नामघर में आयोजित होने वाले नाम-जप, नाम-कीर्तन, नाम-प्रसंग तथा अन्य धार्मिक और सामुदायिक कार्यक्रमों के लिए श्रद्धालुओं को एक सुव्यवस्थित स्थान उपलब्ध कराना है।
विशेष धार्मिक अवसरों पर नामघर में बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के पहुंचने के दौरान पर्याप्त स्थान और उचित व्यवस्था की आवश्यकता रहती है। नए हॉल के निर्माण से ऐसे आयोजनों को व्यवस्थित रूप से संपन्न कराने में सुविधा मिलने की उम्मीद है।
साथ ही नियमित धार्मिक गतिविधियों के लिए भी यह स्थान उपयोगी रहेगा। इससे नामघर की गतिविधियों के विस्तार और श्रद्धालुओं की सहभागिता के लिए बेहतर आधारभूत सुविधा उपलब्ध होगी।
पाकशाला से प्रसाद और भोजन व्यवस्था में मिलेगी सहूलियत
कीर्तन हॉल के साथ निर्मित पाकशाला भी नामघर के लिए महत्वपूर्ण सुविधा साबित होगी। धार्मिक आयोजनों, नाम-कीर्तन एवं अन्य विशेष अवसरों पर श्रद्धालुओं के लिए प्रसाद या भोजन तैयार करने की आवश्यकता होती है। व्यवस्थित पाकशाला उपलब्ध होने से इन कार्यों को बेहतर तरीके से संचालित करने में सहायता मिलेगी।
इस प्रकार माहेश्वरी परिवार द्वारा कराया गया निर्माण केवल एक भवन या भौतिक संरचना तक सीमित नहीं है, बल्कि नामघर में होने वाली धार्मिक गतिविधियों से जुड़ी व्यावहारिक आवश्यकताओं को ध्यान में रखकर तैयार की गई स्थायी सुविधा है।

श्रीमंत शंकरदेव की परंपरा में नामघर का विशेष महत्व
असम के सामाजिक और आध्यात्मिक जीवन में नामघरों की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण रही है। महापुरुष श्रीमंत शंकरदेव की एकशरण नामधर्म परंपरा में नामघर केवल धार्मिक आराधना के केंद्र नहीं रहे, बल्कि सामुदायिक संवाद, सांस्कृतिक गतिविधियों, सामाजिक मेल-मिलाप और सामूहिक चेतना के केंद्र के रूप में भी विकसित हुए।
सरभोग स्थित श्रीमंत शंकरदेव नामघर में कीर्तन हॉल एवं पाकशाला जैसी स्थायी सुविधाओं का विस्तार इसी सामाजिक-धार्मिक परंपरा को आगे बढ़ाने में सहायक होगा। श्रद्धालुओं को बेहतर सुविधाएं मिलने के साथ धार्मिक कार्यक्रमों के आयोजन और प्रबंधन में भी सहूलियत होगी।
मारवाड़ी समाज और स्थानीय संस्कृति के बीच आत्मीयता का संदेश
इस प्रकल्प को मारवाड़ी समाज की ओर से स्थानीय धार्मिक एवं सांस्कृतिक परंपराओं के प्रति सम्मान और सहभागिता के महत्वपूर्ण उदाहरण के रूप में भी देखा जा रहा है। लंबे समय से असम के सामाजिक एवं आर्थिक जीवन का हिस्सा रहे मारवाड़ी समाज के विभिन्न परिवार धार्मिक, सामाजिक और जनकल्याणकारी गतिविधियों में सहयोग करते रहे हैं।
माहेश्वरी परिवार द्वारा सरभोग के श्रीमंत शंकरदेव नामघर में कराया गया यह निर्माण भी इसी सामाजिक सहभागिता और आपसी सद्भाव की भावना को आगे बढ़ाता है। इस पहल के माध्यम से एक ओर पूर्वजों के प्रति श्रद्धांजलि अर्पित की गई है, वहीं दूसरी ओर स्थानीय धार्मिक संस्था के लिए स्थायी आधारभूत सुविधा तैयार की गई है।

“भगवान के नाम की सेवा में किया गया कार्य अशेष पुण्य का कार्य”
मारवाड़ी समाज की ओर से इस प्रकल्प पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए कहा गया कि भगवान के नाम-जप और नाम-कीर्तन जैसे पवित्र कार्यों के लिए हॉल एवं पाकशाला का निर्माण कराना अत्यंत पुण्यदायी सेवा है। ऐसी सेवा का लाभ किसी एक व्यक्ति या परिवार तक सीमित नहीं रहता, बल्कि बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं और आने वाली पीढ़ियों तक पहुंचता है।
समाज के लोगों ने कहा कि धार्मिक स्थलों पर स्थायी जनोपयोगी सुविधाओं का निर्माण सेवा और परोपकार की उस भावना को मजबूत करता है, जिसमें व्यक्तिगत श्रद्धा व्यापक सामाजिक हित से जुड़ जाती है।
माहेश्वरी परिवार को हार्दिक साधुवाद
इस नेक और पावन प्रकल्प के लिए मारवाड़ी समाज ने समाजसेवी हरिकिशन माहेश्वरी, कमला देवी माहेश्वरी एवं पूरे माहेश्वरी परिवार को हार्दिक साधुवाद दिया है। समाज की ओर से स्व. झुमरमल माहेश्वरी एवं स्व. बरजी देवी माहेश्वरी को श्रद्धापूर्वक स्मरण करते हुए उनके नाम पर किए गए इस जनोपयोगी निर्माण की सराहना की गई।
समाज ने कामना की कि यह कीर्तन स्थल आने वाले वर्षों तक भगवान के नाम-जप और नाम-कीर्तन से गुंजायमान रहे तथा पाकशाला के माध्यम से धार्मिक आयोजनों में आने वाले श्रद्धालुओं की सेवा होती रहे। साथ ही माहेश्वरी परिवार की यह पहल अन्य समाजसेवियों और परिवारों को भी धर्म, सेवा, परोपकार और पूर्वजों की स्मृति को जनकल्याण से जोड़ने के लिए प्रेरित करती रहे।




