जयसागर दुग्ध शीतलीकरण प्रकल्प बदहाली की कगार पर : लाखों की मशीनें और सरकारी संसाधन उपेक्षा के शिकार : भवन बना, आधुनिक मशीनें लगीं, जनरेटर और संसाधन उपलब्ध हुए… लेकिन दूध संग्रह केंद्र में अब झाड़ियों और वीरानी का कब्जा
दुग्ध उत्पादकों की आय बढ़ाने और ग्रामीण अर्थव्यवस्था मजबूत करने के उद्देश्य से बना था केंद्र, वर्षों बाद भी किसानों को नहीं मिला अपेक्षित लाभ

शिवसागर, 7 जुलाई : ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती देने, स्थानीय दुग्ध उत्पादकों को उचित बाजार उपलब्ध कराने और किसानों की आय में वृद्धि करने के उद्देश्य से स्थापित किया गया शिवसागर जिले के जयसागर स्थित दुग्ध शीतलीकरण प्रकल्प (Bulk Milk Cooling Centre – BMC) आज सरकारी उपेक्षा और लापरवाही की एक बड़ी तस्वीर बनकर सामने आया है।
जिस केंद्र को कभी क्षेत्र के सैकड़ों दुग्ध पालकों के लिए आर्थिक बदलाव की उम्मीद माना गया था, वही केंद्र आज वर्षों बाद अपनी बदहाली पर आंसू बहा रहा है। लाखों रुपये की लागत से तैयार भवन, आधुनिक मशीनें और अन्य संसाधन उपयोग के अभाव में बेकार पड़े होने के आरोप स्थानीय लोगों द्वारा लगाए जा रहे हैं।

2011-12 में बड़ी उम्मीदों के साथ हुई थी स्थापना
स्थानीय लोगों के अनुसार वर्ष 2011-12 के दौरान जयसागर में इस दुग्ध शीतलीकरण केंद्र का निर्माण किया गया था। इस परियोजना का मुख्य उद्देश्य आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों के दुग्ध उत्पादकों से दूध संग्रह कर उसे वैज्ञानिक तरीके से संरक्षित करना था।
योजना के तहत किसानों और पशुपालकों द्वारा उत्पादित दूध को यहां आधुनिक शीतलीकरण व्यवस्था के माध्यम से सुरक्षित रखा जाना था, ताकि उन्हें अपने उत्पाद का उचित मूल्य मिल सके और दूध व्यवसाय के जरिए ग्रामीण परिवारों की आर्थिक स्थिति मजबूत हो सके।

लाखों की मशीनें, महंगा जनरेटर और उपकरण हुए निष्क्रिय
जानकारी के अनुसार इस प्रकल्प के लिए लाखों रुपये खर्च कर आधुनिक दुग्ध शीतलीकरण मशीनें, आवश्यक उपकरण और बिजली व्यवस्था बनाए रखने के लिए महंगा जनरेटर सेट भी लगाया गया था।
केंद्र के संचालन के लिए कार्यालय भवन सहित अन्य सुविधाएं भी तैयार की गई थीं और कर्मचारियों की व्यवस्था भी की गई थी। लेकिन स्थानीय लोगों का आरोप है कि इतनी बड़ी राशि खर्च होने के बावजूद यह योजना अपने वास्तविक उद्देश्य को पूरा करने में सफल नहीं हो सकी।

दूध संग्रह शुरू होने से पहले ही ठप पड़ी व्यवस्था
लोगों का कहना है कि जिस केंद्र में प्रतिदिन ग्रामीण क्षेत्रों से दूध पहुंचना था और जहां से दुग्ध व्यवसाय को नई दिशा मिलनी थी, वहां वर्षों बाद भी नियमित रूप से दूध संग्रह और संरक्षण की व्यवस्था शुरू नहीं हो पाई।
स्थानीय लोगों ने सवाल उठाते हुए कहा कि आखिर लाखों रुपये खर्च कर बनाई गई इस महत्वपूर्ण परियोजना का लाभ किसानों तक क्यों नहीं पहुंच पाया। उन्होंने आशंका जताई कि कहीं यह योजना केवल भवन निर्माण और संसाधन खरीद तक ही सीमित होकर तो नहीं रह गई।
कभी उम्मीद का केंद्र, आज बना वीरान परिसर
वर्तमान स्थिति में जयसागर का यह बीएमसी केंद्र पूरी तरह सुनसान नजर आता है। स्थानीय लोगों के अनुसार लंबे समय से यहां किसी अधिकारी या कर्मचारी की नियमित मौजूदगी दिखाई नहीं देती।
परिसर में चारों ओर झाड़ियां और जंगली घास उग चुकी हैं। जिस जगह पर कभी दूध संग्रह, किसानों की आवाजाही और ग्रामीण विकास की गतिविधियां होनी थीं, वहां आज सन्नाटा पसरा हुआ है।
स्थानीय लोगों के शब्दों में, किसानों की आर्थिक उम्मीदों से जुड़ा यह केंद्र अब एक ‘भूत बंगले’ जैसी स्थिति में पहुंच गया है।

दुग्ध पालकों की उम्मीदों को लगा झटका
स्थानीय लोगों का कहना है कि जयसागर और आसपास के क्षेत्रों में बड़ी संख्या में लोग पशुपालन और दूध उत्पादन से जुड़े हुए हैं। इस केंद्र के सही तरीके से संचालन से दुग्ध उत्पादकों को स्थायी बाजार, बेहतर मूल्य और नियमित आमदनी मिल सकती थी।
लेकिन वर्षों की निष्क्रियता के कारण जहां सरकारी संसाधनों का नुकसान हुआ है, वहीं ग्रामीण दुग्ध उत्पादकों को मिलने वाले संभावित लाभ से भी वंचित होना पड़ा है।

प्रशासन से जांच और पुनः संचालन की मांग
स्थानीय लोगों ने संबंधित विभाग और जिला प्रशासन से मांग की है कि जयसागर दुग्ध शीतलीकरण प्रकल्प की वर्तमान स्थिति की गंभीरता से जांच की जाए।
लोगों ने खराब पड़े उपकरणों और संसाधनों को फिर से उपयोग योग्य बनाने, परिसर की सफाई कराने और इस केंद्र को पुनः सक्रिय कर दुग्ध उत्पादकों के हित में संचालित करने की अपील की है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि इस परियोजना को सही तरीके से पुनर्जीवित किया जाए तो यह आज भी क्षेत्र के किसानों और पशुपालकों की आर्थिक प्रगति का महत्वपूर्ण माध्यम बन सकता है।




