सोनारी में फर्जी डॉक्टर प्रकरण पर उबाल : दो बड़े चाय बागानों में श्रमिक संगठनों का जोरदार प्रदर्शन, प्रशासन को सौंपा ज्ञापन : मंजुश्री और टाओकाक चाय बागान में आटसा, आसा, असम चाय मजदूर संघ सहित विभिन्न संगठनों का संयुक्त विरोध
'बिना दस्तावेज सत्यापन डॉक्टरों की नियुक्ति श्रमिकों की जिंदगी से खिलवाड़'— भविष्य में सरकारी जांच अनिवार्य करने की मांग

दोषियों पर कड़ी कार्रवाई और पारदर्शी नियुक्ति प्रक्रिया लागू नहीं हुई तो आंदोलन होगा और व्यापक— श्रमिक संगठनों की चेतावनी
सोनारी, 29 जून : ऊपरी असम के चराईदेव जिले के सोनारी क्षेत्र में हाल ही में सामने आए कथित फर्जी चिकित्सक प्रकरण ने चाय बागानों में कार्यरत हजारों श्रमिकों की स्वास्थ्य सुरक्षा को लेकर गंभीर चिंताएं पैदा कर दी हैं। घटना के बाद पूरे क्षेत्र में आक्रोश का माहौल है और अब विभिन्न श्रमिक एवं सामाजिक संगठनों ने इस मुद्दे पर संयुक्त आंदोलन शुरू कर दिया है।
सोमवार को मंजुश्री चाय बागान तथा टाओकाक चाय बागान में बड़ी संख्या में श्रमिकों एवं स्थानीय लोगों ने विरोध प्रदर्शन कर बागान प्रबंधन की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाए। प्रदर्शनकारियों ने मांग की कि भविष्य में किसी भी चिकित्सक की नियुक्ति बिना सरकारी दस्तावेज सत्यापन के नहीं की जानी चाहिए।
संयुक्त मंच पर उतरे कई प्रमुख संगठन
विरोध प्रदर्शन में ऑल असम टी ट्राइब्स स्टूडेंट्स एसोसिएशन (आटसा), ऑल आदिवासी स्टूडेंट्स एसोसिएशन (आसा), असम चाय मजदूर संघ सहित विभिन्न श्रमिक एवं सामाजिक संगठनों के पदाधिकारी और कार्यकर्ता शामिल हुए।
संगठनों ने एक स्वर में कहा कि चाय बागानों में कार्यरत श्रमिकों का स्वास्थ्य किसी भी कीमत पर जोखिम में नहीं डाला जा सकता। डॉक्टरों की नियुक्ति में लापरवाही सीधे हजारों परिवारों के जीवन से जुड़ा गंभीर मामला है।
‘बिना सत्यापन नियुक्ति करना घोर लापरवाही’
प्रदर्शनकारियों ने आरोप लगाया कि यदि किसी चिकित्सक की शैक्षणिक योग्यता, मेडिकल पंजीकरण और अन्य आवश्यक प्रमाणपत्रों की विधिवत जांच किए बिना उसे नियुक्त किया जाता है, तो यह न केवल प्रशासनिक लापरवाही है बल्कि श्रमिकों के जीवन के साथ गंभीर खिलवाड़ भी है।
संगठनों ने कहा कि चाय बागानों के अस्पतालों में प्रतिदिन हजारों श्रमिक और उनके परिवार उपचार के लिए आते हैं। ऐसे में चिकित्सकों की योग्यता पर कोई समझौता स्वीकार नहीं किया जा सकता।
प्रशासन को सौंपा गया ज्ञापन
विरोध प्रदर्शन के उपरांत विभिन्न संगठनों के प्रतिनिधियों ने संबंधित प्रशासनिक एवं विभागीय अधिकारियों को संयुक्त ज्ञापन सौंपा।
ज्ञापन में प्रमुख रूप से मांग की गई कि भविष्य में किसी भी चाय बागान में डॉक्टर की नियुक्ति से पहले उसकी शैक्षणिक योग्यता, मेडिकल काउंसिल पंजीकरण, अनुभव प्रमाणपत्र और अन्य सभी आवश्यक दस्तावेजों का सरकार द्वारा अनिवार्य सत्यापन कराया जाए।
संगठनों ने यह भी मांग की कि नियुक्ति प्रक्रिया को पूरी तरह पारदर्शी, जवाबदेह और कानूनी मानकों के अनुरूप बनाया जाए ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो।
‘स्वास्थ्य सेवाओं से समझौता नहीं होगा’
संगठनों के नेताओं ने कहा कि चाय श्रमिक समाज पहले से ही अनेक सामाजिक और स्वास्थ्य संबंधी चुनौतियों का सामना कर रहा है। ऐसे में यदि अस्पतालों में फर्जी अथवा अपात्र चिकित्सकों की नियुक्ति होती है, तो यह अत्यंत गंभीर और अस्वीकार्य स्थिति है।
उन्होंने कहा कि श्रमिकों की जान से किसी प्रकार का खिलवाड़ बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
आंदोलन तेज करने की चेतावनी
संगठनों ने स्पष्ट चेतावनी दी कि यदि दोषियों के विरुद्ध प्रभावी कार्रवाई नहीं की गई और चिकित्सकों की नियुक्ति प्रक्रिया में आवश्यक सुधार लागू नहीं किए गए, तो आंदोलन को और व्यापक तथा उग्र रूप दिया जाएगा।
उन्होंने कहा कि यह केवल एक व्यक्ति का मामला नहीं, बल्कि पूरे चाय श्रमिक समाज की सुरक्षा और स्वास्थ्य से जुड़ा विषय है।
पारदर्शिता और जवाबदेही की मांग
प्रदर्शनकारियों ने सरकार और चाय बागान प्रबंधन से मांग की कि सभी बागानों के अस्पतालों में कार्यरत चिकित्सकों की योग्यता और पंजीकरण की व्यापक जांच कराई जाए तथा दोषी पाए जाने वालों के विरुद्ध कठोर कानूनी कार्रवाई की जाए।
उन्होंने कहा कि स्वास्थ्य व्यवस्था में पारदर्शिता, जवाबदेही और नियमित निगरानी ही भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने का सबसे प्रभावी उपाय है।
स्वास्थ्य सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देने की अपील
प्रदर्शन के समापन पर विभिन्न संगठनों ने कहा कि उनका उद्देश्य किसी संस्था या व्यक्ति विशेष का विरोध करना नहीं, बल्कि चाय बागानों में कार्यरत हजारों श्रमिकों और उनके परिवारों की स्वास्थ्य सुरक्षा सुनिश्चित करना है।
उन्होंने सरकार, जिला प्रशासन और बागान प्रबंधन से अपील की कि इस मामले को गंभीरता से लेते हुए शीघ्र ठोस कदम उठाए जाएं, ताकि चाय श्रमिकों का स्वास्थ्य तंत्र पर विश्वास बना रहे और भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो।




