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अधिक मास की सोमवती अमावस्या पर पारीक महिला परिषद का सेवा महायज्ञ : 250 राहगीरों को कराया गया भोजन-प्रसादी वितरण, पूरी-सब्जी, खीर और मालपुए से मिला आत्मीय सत्कार : सेवा, संस्कार और समर्पण का अनुपम संगम बना आयोजन

समाजसेवा के माध्यम से अधिक मास की पावन अमावस्या को दिया विशेष स्वरूप

गुवाहाटी, 15 जून : अधिक मास की सोमवती अमावस्या के पावन एवं दुर्लभ अवसर पर पारीक महिला परिषद द्वारा मानव सेवा और परोपकार की भावना को साकार करते हुए एक प्रेरणादायी सेवा कार्यक्रम का आयोजन किया गया। परिषद की ओर से सोमवार को ग्लास फैक्ट्री स्थित परिषद की सलाहकार एवं पूर्व अध्यक्ष श्रीमती सुषमा शर्मा के निवास के बाहर पुल के समीप लगभग 250 राहगीरों को श्रद्धापूर्वक भोजन-प्रसादी वितरित की गई।

धार्मिक आस्था, सामाजिक उत्तरदायित्व और मानव सेवा के समन्वय से आयोजित इस कार्यक्रम में राहगीरों को स्नेहपूर्वक पूरी, सब्जी, खीर एवं मालपुआ परोसा गया। कार्यक्रम के दौरान परिषद की सदस्याओं ने स्वयं उपस्थित रहकर भोजन वितरण किया तथा प्रत्येक आगंतुक का आत्मीय स्वागत किया।

अधिक मास और सोमवती अमावस्या का विशेष महत्व

सनातन परंपरा में अधिक मास को भगवान विष्णु को समर्पित अत्यंत पुण्यदायी मास माना जाता है। वहीं सोमवती अमावस्या का विशेष धार्मिक महत्व है। इस अवसर पर किए गए दान, सेवा, सत्संग एवं अन्नदान को अत्यंत फलदायी माना जाता है। इसी भावना को ध्यान में रखते हुए पारीक महिला परिषद ने सेवा कार्य के माध्यम से इस पावन दिवस को समाजोपयोगी स्वरूप प्रदान किया।

परिषद की सदस्याओं का मानना है कि धार्मिक आयोजनों का वास्तविक उद्देश्य समाज के जरूरतमंद वर्ग तक सहायता और सेवा पहुंचाना है। इसी सोच के साथ भोजन-प्रसादी कार्यक्रम का आयोजन किया गया।

राहगीरों को कराया गया स्नेहपूर्ण भोजन

कार्यक्रम के दौरान बड़ी संख्या में राहगीरों, श्रमिकों, जरूरतमंदों तथा आम नागरिकों ने प्रसादी ग्रहण की। भोजन वितरण के समय परिषद की सदस्याएं स्वयं सेवा कार्य में जुटी रहीं और प्रत्येक व्यक्ति को सम्मानपूर्वक भोजन परोसती नजर आईं।

विशेष रूप से तैयार की गई पूरी, सब्जी, खीर एवं मालपुए की प्रसादी को लोगों ने अत्यंत श्रद्धा और प्रसन्नता के साथ ग्रहण किया। आयोजन स्थल पर सेवा, सहयोग और आत्मीयता का वातावरण देखने को मिला।

सुषमा शर्मा के मार्गदर्शन में सफल हुआ आयोजन

इस संपूर्ण सेवा कार्यक्रम का संचालन परिषद की सलाहकार एवं पूर्व अध्यक्ष श्रीमती सुषमा शर्मा के मार्गदर्शन और देखरेख में किया गया। उन्होंने कहा कि समाजसेवा भारतीय संस्कृति की सबसे बड़ी पहचान है और ऐसे अवसर हमें जरूरतमंद लोगों की सहायता करने की प्रेरणा देते हैं।

उन्होंने कहा कि अन्नदान को सनातन परंपरा में सर्वोच्च दानों में स्थान दिया गया है और परिषद भविष्य में भी इसी प्रकार के सेवा कार्यों को निरंतर जारी रखेगी।

परिषद पदाधिकारियों ने निभाई सक्रिय भूमिका

कार्यक्रम में परिषद की कार्यकारी अध्यक्ष श्रीमती दीपिका जोशी, सचिव श्रीमती जया पारीक, कमला पारीक, ज्योति पारीक, जया व्यास, सरिता पारीक तथा नेहा पारीक सहित अन्य सदस्याएं उपस्थित रहीं।

सभी सदस्याओं ने आयोजन को सफल बनाने के लिए श्रमदान, समयदान एवं आर्थिक सहयोग प्रदान किया। भोजन की तैयारी से लेकर वितरण और व्यवस्थाओं तक प्रत्येक कार्य में सदस्याओं ने सक्रिय भूमिका निभाई।

“सेवा से ही बढ़ती है संस्था की गरिमा” — जया पारीक

पारीक महिला परिषद की सचिव श्रीमती जया पारीक ने कार्यक्रम की जानकारी देते हुए कहा कि परिषद का उद्देश्य केवल धार्मिक आयोजन करना नहीं बल्कि समाज में सेवा और संवेदनशीलता का संदेश पहुंचाना भी है।

उन्होंने कहा कि इस सेवा कार्य को परिषद के बैनर तले आयोजित करने का उद्देश्य संस्था की गरिमा को और अधिक बढ़ाना तथा समाज में सेवा, सहयोग और मानवता का संदेश प्रसारित करना है। जब समाज की महिलाएं एकजुट होकर सेवा कार्य करती हैं तो उसका सकारात्मक प्रभाव पूरे समाज पर पड़ता है।”

उन्होंने सभी सहयोगी सदस्याओं के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि सामूहिक प्रयासों से ही ऐसे आयोजन सफल हो पाते हैं।

महिलाओं ने दिया सामाजिक उत्तरदायित्व का संदेश

इस आयोजन ने एक बार फिर यह सिद्ध किया कि महिलाएं केवल परिवार तक सीमित नहीं हैं बल्कि सामाजिक सरोकारों और जनसेवा के कार्यों में भी अग्रणी भूमिका निभा रही हैं। पारीक महिला परिषद की सदस्याओं ने अपने कार्यों के माध्यम से समाज को सेवा, सहयोग और मानवीय संवेदनाओं का प्रेरक संदेश दिया।

समाजसेवा की दिशा में सराहनीय पहल

पारीक महिला परिषद द्वारा आयोजित यह भोजन-प्रसादी कार्यक्रम केवल अन्न वितरण तक सीमित नहीं रहा, बल्कि यह सामाजिक समरसता, धार्मिक आस्था और मानवता के मूल्यों को मजबूत करने वाला एक प्रेरणादायी अभियान बन गया। अधिक मास की सोमवती अमावस्या पर आयोजित यह सेवा महायज्ञ समाज के लिए एक सकारात्मक उदाहरण प्रस्तुत करता है और यह संदेश देता है कि सेवा ही सबसे बड़ा धर्म है।

धार्मिक आस्था और सामाजिक उत्तरदायित्व के इस सुंदर संगम ने उपस्थित सभी लोगों के मन पर गहरी छाप छोड़ी तथा पारीक महिला परिषद की जनसेवा के प्रति प्रतिबद्धता को और अधिक सशक्त रूप से स्थापित किया।

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