राज्य में समय से पहले बढ़ा जापानी एन्सेफलाइटिस का खतरा, सतर्क हुआ स्वास्थ्य विभाग : शिवसागर में फरवरी से ही शुरू किए गए बचाव अभियान, अब तक 42,498 रक्त नमूनों की जांच : जिला संयुक्त स्वास्थ्य सेवा निदेशक डॉ. माखन कलिता ने लोगों से बरतने की अपील की विशेष सावधानी
अब तक जिले में जापानी एन्सेफलाइटिस का कोई मरीज नहीं मिला : सामान्य बुखार होने पर भी चिकित्सकीय जांच कराने का आग्रह

शिवसागर, 11 जून : असम में इस वर्ष जापानी एन्सेफलाइटिस (Japanese Encephalitis – JE) का खतरा सामान्य समय से पहले दिखाई देने लगा है। संभावित प्रकोप को देखते हुए शिवसागर जिला स्वास्थ्य विभाग पूरी तरह सतर्क हो गया है और बीमारी की रोकथाम तथा नियंत्रण के लिए व्यापक स्तर पर तैयारियां शुरू कर दी गई हैं।

शिवसागर जिले के संयुक्त स्वास्थ्य सेवा निदेशक डॉ. माखन कलिता ने जानकारी देते हुए बताया कि स्वास्थ्य विभाग ने जापानी एन्सेफलाइटिस के विरुद्ध प्रभावी लड़ाई लड़ने के लिए कई महत्वपूर्ण कदम उठाए हैं। उन्होंने कहा कि लोगों की जागरूकता और समय पर सावधानी ही इस बीमारी से बचाव का सबसे प्रभावी उपाय है।
फरवरी से ही शुरू कर दी गई थी रोकथाम की तैयारी
डॉ. माखन कलिता ने बताया कि शिवसागर जिले में जापानी एन्सेफलाइटिस के संभावित प्रकोप को ध्यान में रखते हुए फरवरी 2026 से ही रोकथाम संबंधी गतिविधियां शुरू कर दी गई थीं।
स्वास्थ्य विभाग ने विभिन्न क्षेत्रों में बीमारी की रोकथाम के लिए विशेष अभियान चलाए हैं। इसके अंतर्गत मच्छरों के प्रजनन को रोकने तथा संक्रमण के खतरे को कम करने के लिए नियमित निगरानी और जनजागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं।
मच्छर नियंत्रण और जागरूकता पर विशेष जोर
जापानी एन्सेफलाइटिस की रोकथाम के लिए स्वास्थ्य विभाग द्वारा जिले के विभिन्न क्षेत्रों में कीटनाशकयुक्त मच्छरदानी (आठुवा औषधीकरण), जागरूकता सभाएं तथा फॉगिंग (धुआं छिड़काव) अभियान चलाए जा रहे हैं।
स्वास्थ्य विभाग लोगों को घरों और आसपास के क्षेत्रों में जलभराव रोकने, मच्छरों से बचाव के उपाय अपनाने तथा बच्चों और बुजुर्गों की विशेष देखभाल करने की सलाह दे रहा है।
42 हजार से अधिक रक्त नमूनों की जांच
स्वास्थ्य विभाग के अनुसार जिले के सभी छह स्वास्थ्य ब्लॉकों में बुखार से पीड़ित मरीजों की लगातार निगरानी की जा रही है।
अब तक जिले में बुखार से प्रभावित लोगों के 42,498 रक्त नमूने एकत्र कर उनकी जांच की जा चुकी है। स्वास्थ्य विभाग का कहना है कि संभावित मामलों की शीघ्र पहचान और उपचार सुनिश्चित करने के लिए यह जांच अभियान लगातार जारी रहेगा।
अभी तक नहीं मिला कोई जेई संक्रमित मरीज
डॉ. माखन कलिता ने राहत भरी जानकारी देते हुए बताया कि वर्तमान समय तक शिवसागर जिले में जापानी एन्सेफलाइटिस का कोई भी पुष्ट मरीज सामने नहीं आया है।
हालांकि उन्होंने स्पष्ट किया कि मानसून और बरसात के मौसम में मच्छरजनित रोगों का खतरा बढ़ जाता है। इसलिए किसी भी प्रकार की लापरवाही भविष्य में गंभीर स्थिति पैदा कर सकती है।
सामान्य बुखार को भी नजरअंदाज न करें
स्वास्थ्य विभाग ने लोगों से अपील की है कि यदि किसी व्यक्ति को बुखार, सिरदर्द, उल्टी, कमजोरी या अन्य असामान्य लक्षण दिखाई दें तो उसे साधारण बुखार समझकर नजरअंदाज न करें।
डॉ. माखन कलिता ने कहा कि सामान्य बुखार होने पर भी तुरंत चिकित्सक की सलाह लें और आवश्यकता पड़ने पर रक्त जांच अवश्य कराएं। समय पर जांच और उपचार से बीमारी के खतरे को काफी हद तक कम किया जा सकता है।
स्वास्थ्य विभाग की अपील
स्वास्थ्य विभाग ने नागरिकों से मच्छरदानी का उपयोग करने, घर के आसपास साफ-सफाई बनाए रखने, जलभराव न होने देने तथा स्वास्थ्य विभाग द्वारा चलाए जा रहे जागरूकता अभियानों में सहयोग करने की अपील की है।
विभाग का कहना है कि प्रशासन, स्वास्थ्य कर्मियों और आम जनता के सामूहिक प्रयासों से ही जापानी एन्सेफलाइटिस जैसी गंभीर बीमारी पर प्रभावी नियंत्रण पाया जा सकता है।




