
शिवसागर / 3 मई : असम विधानसभा चुनाव 2026 की मतगणना कल सोमवार 4 मई को होने वाली है। 9 अप्रैल को हुए मतदान के बाद पूरे राज्य में राजनीतिक नेताओं, पार्टियों और आम जनता में बेसब्री का माहौल है।
परिसीमन के बाद अधिकांश विधानसभा क्षेत्रों की भौगोलिक स्थिति में आए बड़े बदलाव के बाद हो रहे इस चुनाव में मतदाताओं का रुख क्या होगा यह अनसुलझी गुत्थी है।
126 सदस्यीय असम विधानसभा में बहुमत के लिए 64 सीटें जरूरी हैं। एग्जिट पोल के अनुसार बीजेपी नीत एनडीए गठबंधन 85 से 102 सीटों तक की भारी जीत की ओर बढ़ रहा है। जबकि कांग्रेस नीत गठबंधन 23-36 सीटों के आसपास सिमट सकती है।
मुख्यमंत्री डॉ. हिमंत विश्व शर्मा के नेतृत्व में बीजेपी सरकार राज्य में तीसरी बार सत्ता में वापसी की मजबूत दावेदार नजर आ रही है।
राज्य भर में मतदान के दौरान 85.38% से ज्यादा वोटिंग हुई थी, जो पिछले चुनावों से ज्यादा है। अब सबकी नजर ऊपरी असम के शिवसागर और चराइदेव जिलों की पांच महत्वपूर्ण सीटों – 93 सोनारी, 94 मांहमोरा, 95 डिमौ, 96 शिवसागर और 97 नाजिरा क्षेत्र पर टिकी हुई है।
ये पांच सीटें चाय बागान, असमिया पहचान और कांग्रेस के पारंपरिक गढ़ के रूप में जानी जाती हैं, जहां बीजेपी पिछले एक दशक में मजबूत पकड़ बना रही है। इनमें कहीं सीधा और कहीं त्रिकोणीय मुकाबला होने के कारण सियासी ड्रामा चरम पर है।
- 93 सोनारी सीट : यहां बीजेपी के धर्मेश्वर कुंवर (सिटिंग विधायक) मुख्य दावेदार हैं। उनके मुकाबले कांग्रेस के उत्पल गोगोई और झारखंड मुक्ति मोर्चा के बलदेव तेली मैदान में हैं। 2021 में बीजेपी ने यहां जीत दर्ज की थी। स्थानीय चाय बागान मजदूरों और असमिया मतदाताओं में बीजेपी की विकास योजनाओं का असर दिख रहा है।

- 94 माहमोरा सीट : बीजेपी के सुरुज देहिंगिया और कांग्रेस के ज्ञानदीप मोहन के बीच सीधा मुकाबला। यह सीट भी चराईदेव जिले में आती है, जहां पिछले चुनाव में बीजेपी के पूर्व मंत्री तथा वर्तमान में राज्यसभा सांसद जोगेन मोहन ने बाजी मारी थी।

- 95 डिमौ सीट : शिवसागर जिले की इस सीट पर बीजेपी के सुशांत बोरगोहांई (सिटिंग विधायक), कांग्रेस के अजय कुमार गोगोई और सीपीआई के अजय बोरा त्रिकोणीय लड़ाई में हैं। 2021 में बीजेपी ने यहां कब्जा किया था। क्षेत्र में हिंदुत्व और क्षेत्रीय अस्मिता का मिश्रण देखने को मिल रहा है।

- 96 शिवसागर सीट : ऊपरी असम में शिवसागर सबसे ज्यादा चर्चित सीट। यहां एनडीए गठबंधन में भी ट्विस्ट है – बीजेपी के कुशल दुवरी, एजीपी के प्रदीप हजारिका और राइजोर दल के अखिल गोगोई (सिटिंग विधायक) आमने-सामने हैं। कृषक मुक्ति संग्राम समिति के नेता अखिल गोगोई सीएए विरोधी आंदोलन के चेहरे के रूप में जाने जाते हैं। ऐतिहासिक शिवसागर असमिया भाषा, साहित्य और संस्कृति का प्रमुख केंद्र माना जाता है, जहां कभी बीजेपी नहीं जीती। एनडीए गठबंधन के दोनों सहयोगी पार्टियों बीजेपी और एजीपी द्वारा शिवसागर सीट से उम्मीदवार उतारे जाने को मुख्यमंत्री डॉ. हिमंत विश्व शर्मा ने “कैलिब्रेटेड स्ट्रैटजी” बताया है, ताकि वोट बंटने से बचें। लेकिन स्थानीय स्तर पर यह ड्रामा का केंद्र बन गया है।

- 97 नाजिरा सीट : कांग्रेस के नेता प्रतिपक्ष देबब्रत सैकिया (सिटिंग विधायक) का गढ़। 2021 में उन्होंने बीजेपी के मयूर बोरगोहांई को महज 683 वोटों से हराया था। इस बार भी देवब्रत सैकिया, मयूर बोरगोहांई और सीपीआई के कनक गोगोई के बीच त्रिकोणीय मुकाबला है। यह सीट कांग्रेस की अंतिम उम्मीदों में शुमार है, लेकिन एग्जिट पोल में बीजेपी की लहर यहां भी दिख रही है।

राजनीतिक विश्लेषकों के मुताबिक, इन सीटों का नतीजा पूरे ऊपरी असम की तस्वीर तय करेगा। बीजेपी की रणनीति विकास, हिंदुत्व और अपने क्षेत्रीय सहयोगियों (एजीपी, बीपीएफ) पर टिकी है।
जबकि कांग्रेस-राइजोर दल-असम जातीय परिषद नीत विपक्षी गठबंधन ने भ्रष्टाचार, बेरोजगारी और अस्मिता के मुद्दे उठाए। आम जनता के बीच चर्चा का केंद्र यही पांच सीटें हैं।
सोमवार सुबह 8 बजे से मतगणना शुरू होगी। सभी पार्टियों ने अपने-अपने प्रत्याशियों के लिए मजबूत काउंटिंग एजेंट्स की टोलियां तैयार कर ली हैं।
मुख्यमंत्री डॉ. हिमंत विश्व शर्मा ने पहले ही “शतक” (100+ सीटें) का लक्ष्य रखा था। जबकि कांग्रेस सहित विपक्षी पार्टियों ने इसे “बीजेपी की हार” का चुनाव बताया। जनता अब नतीजों का इंतजार कर रही है, जो तय करेंगे कि असम की अगली सरकार किसकी होगी।




