मोरानहाट में परिवार और समाज को गौरव दिलाने वाली प्रतिभाओं का भव्य सम्मान : तीन सामाजिक संस्थाओं की अनूठी पहल : 10वीं के 4 और 12वीं के 10 मेधावी छात्र-छात्राओं को फूलाम गामुछा, अभिनंदन पत्र और गिफ्ट हैंपर देकर किया सम्मानित
शिक्षा, संस्कार और अभिभावकों के सम्मान का दिया संदेश, विद्यार्थियों में दिखा उत्साह

शिवसागर, 24 मई : मोरानहाट की सामाजिक एवं सांस्कृतिक चेतना को नई दिशा देने वाले एक प्रेरणादायक आयोजन में रविवार को वृहत्तर मारवाड़ी समाज के मेधावी छात्र-छात्राओं का भव्य सम्मान किया गया।

मोरानहाट की प्रतिष्ठित सामाजिक संस्थाएं मारवाड़ी युवा मंच मोरानहाट शाखा, मारवाड़ी सम्मेलन मोरानहाट शाखा तथा मोरान संगीतमय सुंदरकांड परिवार के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित इस “छात्र प्रतिभा सम्मान समारोह” ने पूरे क्षेत्र में शिक्षा, संस्कार और सामाजिक एकता का सुंदर संदेश दिया।
मारवाड़ी युवा मंच कार्यालय भवन में आयोजित इस गरिमामयी समारोह में बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं, अभिभावक, समाजसेवी एवं गणमान्य लोग और तीनों संगठनों के सदस्य सदस्याएं उपस्थित रहे।

कार्यक्रम का उद्देश्य केवल विद्यार्थियों को सम्मानित करना ही नहीं, बल्कि उनमें उच्च शिक्षा, प्रतिस्पर्धा, संस्कार और सामाजिक जिम्मेदारी के प्रति जागरूकता उत्पन्न करना भी था।
समारोह का शुभारंभ मंच गठन एवं समारोह की उद्देश्य व्याख्या के साथ हुआ। मायुम मोरानहाट शाखा की अध्यक्ष श्रीमती स्वीटी शर्मा, सम्मेलन शाखा के प्रथम उपाध्यक्ष सह सचिव छगनलाल माड़ोदिया, सुंदरकांड परिवार के अध्यक्ष पवन मोर तथा वरिष्ठ सलाहकार श्यामलाल मोर तथा मंच एवं सुंदरकांड परिवार के सचिव मनीष बेड़िया प्रमुख रूप से मंच पर उपस्थित रहे।

कार्यक्रम में वक्ताओं ने विद्यार्थियों को केवल पढ़ाई में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने के लिए ही प्रेरित नहीं किया, बल्कि जीवन में संस्कार, अनुशासन, विनम्रता और माता-पिता के सम्मान को भी सफलता की असली कुंजी बताया।
अपने संबोधन में छगनलाल माड़ोदिया ने कहा कि विद्यार्थियों ने शानदार परिणाम हासिल कर समाज का नाम रोशन किया है, लेकिन यह उनकी मंजिल नहीं बल्कि एक नई शुरुआत है। उन्होंने कहा कि आज के प्रतिस्पर्धात्मक दौर में निरंतर मेहनत, लक्ष्य के प्रति समर्पण और सकारात्मक सोच ही सफलता का आधार है। उन्होंने विद्यार्थियों से आग्रह किया कि वे अपने सपनों को बड़ा रखें और समाज तथा राष्ट्र के निर्माण में अपनी भूमिका निभाएं।

वरिष्ठ समाजसेवी श्यामलाल मोर ने अपने सारगर्भित वक्तव्य में कहा कि समाज में प्रतिभाओं की कोई कमी नहीं है, लेकिन कई बार उन्हें उचित मंच और प्रोत्साहन नहीं मिल पाता। ऐसे सम्मान समारोह बच्चों में आत्मविश्वास और प्रतिस्पर्धा की स्वस्थ भावना विकसित करते हैं। उन्होंने कहा कि जब समाज अपनी प्रतिभाओं का सम्मान करता है तो उससे नई पीढ़ी को आगे बढ़ने की प्रेरणा मिलती है।
मंच शाखा की अध्यक्ष श्रीमती स्वीटी शर्मा ने विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए भावुक अंदाज में कहा कि किसी भी बच्चे की सफलता के पीछे उसके माता-पिता का त्याग, संघर्ष और मार्गदर्शन सबसे बड़ी ताकत होती है। उन्होंने कहा कि बच्चे चाहे जितनी ऊंचाई हासिल कर लें, उन्हें अपने माता-पिता का सम्मान कभी नहीं भूलना चाहिए। उन्होंने विद्यार्थियों से कहा कि “आपकी जीवन रूपी गाड़ी के असली चालक आपके माता-पिता हैं, जो आपको सही दिशा में आगे बढ़ाते हैं।”

वहीं सुंदरकांड परिवार के अध्यक्ष पवन मोर ने अपने ओजस्वी उद्बोधन में विद्यार्थियों को भारतीय संस्कृति और पारिवारिक मूल्यों से जुड़े रहने का संदेश दिया। उन्होंने कहा कि आधुनिक शिक्षा के साथ-साथ आध्यात्मिक और सांस्कृतिक ज्ञान भी जीवन में उतना ही आवश्यक है। इसी उद्देश्य से सभी सम्मानित विद्यार्थियों को सुंदरकांड पाठ की एक-एक पुस्तक भेंट की गई ताकि वे नियमित रूप से उसका अध्ययन कर सकें। उन्होंने यह भी बताया कि मारवाड़ी सम्मेलन द्वारा प्रांतीय एवं राष्ट्रीय स्तर पर उच्च शिक्षा के लिए आर्थिक सहायता योजनाएं संचालित की जाती हैं, जिनका लाभ मेधावी एवं जरूरतमंद विद्यार्थी उठा सकते हैं।

कार्यक्रम के दौरान विद्यार्थियों ने भी अपनी भावनाएं व्यक्त करते हुए कहा कि इस सम्मान से उन्हें आगे और बेहतर करने की प्रेरणा मिली है। विद्यार्थियों ने आयोजक संस्थाओं के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि समाज द्वारा मिला यह सम्मान उनके लिए किसी पुरस्कार से कम नहीं है।
इस अवसर पर उपस्थित अभिभावकों ने भी आयोजन की मुक्त कंठ से सराहना की। उन्होंने कहा कि आज के समय में बच्चों को केवल शिक्षा ही नहीं, बल्कि विनम्रता, अनुशासन और सामाजिक मूल्यों की शिक्षा देना भी अत्यंत आवश्यक है। अभिभावकों ने कहा कि बच्चों को सफलता के साथ-साथ अपने व्यवहार और संस्कारों को भी बनाए रखना चाहिए।

समारोह का सबसे भावुक और आकर्षक क्षण वह रहा जब सभी मेधावी छात्र-छात्राओं को उनके अभिभावकों के साथ मंच पर आमंत्रित कर असमिया संस्कृति के प्रतीक “फूलाम गामुछा” पहनाकर सम्मानित किया गया। साथ ही उन्हें अभिनंदन पत्र, आकर्षक गिफ्ट हैंपर तथा बच्चों को संस्कारित करने और सनातन संस्कृति से जोड़ने के महती उद्देश्य से सुंदरकांड की पुस्तक भेंट कर उनके उज्जवल भविष्य और उत्तरोत्तर प्रगति एवं सफलता की कामना के साथ सम्मानित किया गया। इस दौरान पूरे सभागार में तालियों की गड़गड़ाहट के बीच बच्चों का उत्साह देखते ही बन रहा था।

परिवार और समाज को गौरवान्वित करने वाले सम्मानित मेधावी छात्र-छात्राओं में सीबीएसई 10वीं परीक्षा में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले सचित अग्रवाल (87%), दीपांविता अग्रवाल (91.2%), हर्षना अग्रवाल (92.6%) एवं मानवी जैन (93.8%) शामिल थे।
वहीं सेबा 12वीं परीक्षा में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाली श्रद्धा चूड़ीवाल (87.8%) एवं सृष्टि चूड़ीवाल (89.5%) और सीबीएसई 12वीं परीक्षा में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वालों में कृशिका बेड़िया (79.75%), लवली पोद्दार (80.2%), निलय वेद (91.2%), गोपाल अग्रवाल (91.25%), रियांश अग्रवाल (91.25%), नितिन अग्रवाल (93%), कनक चांडक (93.4%) एवं कृषा शर्मा (96%) शामिल थे।

कार्यक्रम के अंत में मनीष बेड़िया ने धन्यवाद ज्ञापन प्रस्तुत करते हुए सभी अतिथियों, अभिभावकों, विद्यार्थियों एवं सहयोगियों का आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि समाज की नई पीढ़ी को प्रोत्साहित करने के लिए भविष्य में भी ऐसे आयोजन निरंतर किए जाते रहेंगे।

इस भव्य आयोजन ने यह सिद्ध कर दिया कि जब समाज, परिवार और संस्थाएं मिलकर नई पीढ़ी को प्रोत्साहित करती हैं, तब प्रतिभाएं केवल सफलता ही नहीं प्राप्त करतीं, बल्कि समाज और राष्ट्र के उज्ज्वल भविष्य की मजबूत नींव भी तैयार करती हैं।




