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नाजिरा गोलीकांड का मास्टरमाइंड फरार : अल्फा-स्वाधीन और एनएससीएन के नाम पर चलता था रंगदारी का नेटवर्क? : 30 साल पुराने अपराधों से जुड़ा मानस गोगोई फिर पुलिस रडार पर : 50 हजार का इनाम घोषित

शिवसागर में आईजीपी (ईस्टर्न रेंज) सत्यराज हजारिका की प्रेस कांफ्रेंस : पुलिस ने कई बड़े खुलासे किए : ऊपरी असम में बढ़ता "फेक अल्फा" नेटवर्क

शिवसागर, 27 मई : असम के शिवसागर जिले के नाजिरा क्षेत्र के मादुरी मलागांव में सोमवार शाम हुई पुलिस और संदिग्ध उग्रवादी समर्थित रंगदारी गिरोह के बीच गोलीबारी ने पूरे ऊपरी असम में सनसनी फैला दी है। इस मामले में बुधवार को शिवसागर जिला पुलिस अधीक्षक कार्यालय के कॉन्फ्रेंस हॉल में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में पुलिस ने कई बड़े खुलासे किए।

प्रेस वार्ता को आईजीपी (ईस्टर्न रेंज) सत्यराज हजारिका ने संबोधित करते हुए कहा कि यह केवल साधारण रंगदारी का मामला नहीं, बल्कि संगठित आपराधिक नेटवर्क का हिस्सा हो सकता है, जिसमें अल्फा-स्वाधीन और एनएससीएन के नाम का इस्तेमाल कर व्यापारियों और प्रभावशाली लोगों को धमकाया जा रहा था।

पुलिस के अनुसार पूरे गिरोह का नेतृत्व नाजिरा चूनपुरा निवासी मानस गोगोई कर रहा था। जिसका आपराधिक इतिहास करीब तीन दशक पुराना बताया जा रहा है। फिलहाल मानस गोगोई फरार है और पुलिस ने उसकी गिरफ्तारी के लिए 50 हजार रुपये का इनाम घोषित किया है।

कैसे रची गई रंगदारी की पूरी साजिश

पुलिस सूत्रों के अनुसार शिवसागर के व्यवसायी लाचित गोगोई को पिछले कई दिनों से धमकी भरे फोन और संदेश मिल रहे थे। आरोप है कि गिरोह ने अल्फा-स्वाधीन और एनएससीएन के नाम पर पहले 20 लाख रुपये की मांग की। बाद में बातचीत के दौरान रकम घटाकर 8 लाख रुपये तक लाई गई।

जांच में सामने आया है कि व्यवसायी को पहले नागिनीमरा इलाके में बुलाया गया था। पुलिस को पहले से इस गिरोह की गतिविधियों की सूचना मिल चुकी थी और गुप्त निगरानी शुरू कर दी गई थी।

सोमवार को जब पैसे लेने के लिए गिरोह के सदस्य मादुरी मलागांव के पास पहुंचे, तब पहले से तैनात पुलिस टीम ने उन्हें घेरने की कोशिश की। पुलिस का दावा है कि आरोपियों ने पुलिस पर गोली चलाई, जिसके बाद जवाबी कार्रवाई की गई।

तीन बाइक, आठ लोग और फिर गोलियों की गूंज

आईजीपी सत्यराज हजारिका ने बताया कि घटना के समय कुल आठ लोग वहां पहुंचे थे। इनमें से कुछ पहले ही इलाके में पहुंचकर रेकी कर रहे थे। बाद में तीन मोटरसाइकिलों पर बाकी सदस्य पहुंचे।

पुलिस ने कहा कि पूरे ऑपरेशन की निगरानी स्वयं मानस गोगोई कर रहा था और वह भी मौके पर मौजूद था। हालांकि गोलीबारी के दौरान वह भागने में सफल रहा।

घटना के बाद इलाके में अफरा-तफरी मच गई। स्थानीय लोगों ने लगातार गोलियों की आवाज सुनने की बात कही। पुलिस ने तत्काल पूरे इलाके को घेरकर तलाशी अभियान शुरू किया।

गोलीबारी में दो घायल, कई फरार

पुलिस कार्रवाई में रितु गोगोई गंभीर रूप से घायल हुआ। पुलिस सूत्रों के अनुसार उसके जांघ और कमर के पास कई गोलियां लगीं। उसे पहले शिवसागर अस्पताल और बाद में गंभीर हालत में डिब्रूगढ़ मेडिकल कॉलेज एंड हॉस्पिटल रेफर किया गया।

वहीं दूसरा घायल जितु गोगोई के पेट के पास गोली छूकर निकल गई। उसका इलाज शिवसागर सिविल अस्पताल में चल रहा है।

पुलिस ने इस मामले में क्षिप्र गोगोई और द्विपेन गोगोई को गिरफ्तार किया है। वहीं मानस गोगोई समेत दो अन्य आरोपी अभी भी फरार बताए जा रहे हैं।

हथियार बरामद, पुलिस का बड़ा दावा

प्रेस कॉन्फ्रेंस में पुलिस ने बताया कि नाजिरा के चूनपोरा स्थित मानस गोगोई के घर पर छापेमारी के दौरान 9 एमएम पिस्टल बरामद किया गया।

इसके अलावा घटनास्थल से 7.65 एमएम पिस्टल, दो मोटरसाइकिल और अन्य संदिग्ध सामान भी जब्त किया गया। पुलिस अब हथियारों के स्रोत और नेटवर्क की जांच कर रही है।

पुलिस का मानना है कि गिरोह लंबे समय से ऊपरी असम में सक्रिय था और व्यापारियों, डॉक्टरों तथा चाय बागान प्रबंधन को निशाना बनाता था।

अपहरण की भी थी तैयारी

पुलिस ने प्रेस वार्ता में बड़ा खुलासा करते हुए कहा कि यह केवल पैसे लेने का मामला नहीं हो सकता। जांच एजेंसियों को संदेह है कि व्यवसायी लाचित गोगोई के अपहरण की भी योजना बनाई गई थी।

इसी आशंका को देखते हुए पुलिस ने लाचित गोगोई को अतिरिक्त सुरक्षा लेने की सलाह दी है।

30 सालों से अपराध की दुनिया में सक्रिय ?

आईजीपी सत्यराज हजारिका ने कहा कि मानस गोगोई कोई नया अपराधी नहीं है। उसके खिलाफ बीते तीन दशकों में कई गंभीर आरोप सामने आए हैं।

पुलिस के अनुसार करीब 30 वर्ष पहले नाजिरा छात्र संस्था ने उसे निष्कासित किया था।

1996 में नाजिरा के चिकित्सक डॉ. मविदुल इस्लाम से रंगदारी मांगने के मामले में उसका नाम आया था।

2012 में आमगुड़ी के एक चाय बागान प्रबंधक से रंगदारी मांगने के मामले में भी वह आरोपी रहा।

शिवसागर की एक युवती के अपहरण मामले में भी उसका नाम सामने आया था।

पुलिस का कहना है कि मानस गोगोई लंबे समय से उग्रवादी संगठनों के नाम का इस्तेमाल कर आपराधिक गतिविधियां संचालित करता रहा है।

ऊपरी असम में बढ़ता “फेक अल्फा” नेटवर्क

हाल के महीनों में असम पुलिस ने कई ऐसे गिरोह पकड़े हैं, जो अल्फा-स्वाधीन के नाम का इस्तेमाल कर रंगदारी वसूलने की कोशिश कर रहे थे।

कुछ सप्ताह पहले डिब्रूगढ़ पुलिस ने भी एक ऐसे गिरोह का भंडाफोड़ किया था, जिसने एक डॉक्टर से 60 लाख रुपये की मांग की थी। जांच में सामने आया था कि गिरोह ऊपरी असम के कई जिलों में सक्रिय था।

सुरक्षा एजेंसियों का मानना है कि कई आपराधिक गिरोह अब प्रतिबंधित संगठनों के नाम का इस्तेमाल कर भय पैदा कर रहे हैं ताकि आसानी से पैसे वसूले जा सकें।

इलाके में बढ़ाई गई सुरक्षा

इस गोलीबारी की घटना के बाद नाजिरा, बोगीडोल, मलागांव और आसपास के इलाकों में पुलिस की गश्त बढ़ा दी गई है। कई संदिग्ध ठिकानों पर छापेमारी जारी है।

पुलिस सूत्रों के अनुसार फरार आरोपियों की तलाश में विशेष अभियान चलाया जा रहा है और कई जिलों में अलर्ट जारी किया गया है।

दो अलग अलग मामले दर्ज

इस पूरे मामले में दो अलग-अलग केस दर्ज किए गए हैं। पुलिस के अनुसार एक मामला शिवसागर थाने में तथा दूसरा नाजिरा थाने में दर्ज किया गया है।

जिनमें शिवसागर सदर थाने में बीएनएस की धारा 308(4)/351(4) के तहत 93/2026 केस दर्ज किया गया है।

वहीं दूसरा मामला नाजिरा थाने में बीएनएस की धारा 61(2)/62/109/121(B)/308(4)/324(6) तथा आर्म्स एक्ट की धारा 25(1-A)/27 के तहत 26/2026 नंबर केस दर्ज किया गया है।

सूचना देने वाले का नाम रहेगा गुप्त

पुलिस ने जनता से अपील की है कि यदि किसी को मानस गोगोई या उसके साथियों के बारे में कोई जानकारी मिले तो तुरंत पुलिस को सूचित करें। सूचना देने वाले व्यक्ति का नाम पूरी तरह गोपनीय रखा जाएगा।

पुलिस का अभियान लगातार जारी रहेगा

आईजीपी सत्यराज हजारिका ने कहा कि संगठित रंगदारी और उग्रवादी संगठन के नामों के दुरुपयोग के खिलाफ पुलिस का अभियान लगातार जारी रहेगा और किसी भी आरोपी को बख्शा नहीं जाएगा।

प्रेस कांफ्रेंस में शिवसागर जिले के एएसपी हेडक्वार्टर ऋषभ हंस और एएसपी क्राइम मोइदुल इस्लाम उपस्थित थे।

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