नाजिरा में रायजोर दल का शक्ति प्रदर्शन, बाढ़ पीड़ितों के हक को लेकर अखिल गोगोई ने सरकार को दिया 8 सितंबर तक का अल्टीमेटम : “पात्र परिवारों के खाते में 15 हजार रुपये नहीं पहुंचे तो 9 सितंबर को होगा बड़ा आंदोलन”—अखिल गोगोई : प्रत्येक बाढ़ प्रभावित परिवार और कारोबारी प्रतिष्ठान को 10-10 लाख रुपये मुआवजा देने की मांग : कथित अवैध पत्थर-कोयला खनन की सीबीआई जांच की मांग, मंत्री-विधायकों पर लगाए आरोप
प्रभावित महिलाओं को एक वर्ष तक अरुणोदय के तहत 2,500 रुपये प्रतिमाह देने पर जोर : असम की बाढ़ को ‘राष्ट्रीय आपदा’ घोषित कर केंद्र से अधिक वित्तीय सहायता देने की उठाई मांग

नाजिरा, 6 सितंबर : विनाशकारी बाढ़ से प्रभावित परिवारों को राहत, मुआवजा और पुनर्वास का अधिकार दिलाने की मांग को लेकर नाजिरा में रायजोर दल की ओर से आयोजित जनसमावेश में शिवसागर विधायक एवं पार्टी अध्यक्ष अखिल गोगोई ने राज्य सरकार के खिलाफ आंदोलन तेज करने की चेतावनी दी। उन्होंने बाढ़ प्रभावित परिवारों के लिए घोषित एकमुश्त 15 हजार रुपये की सहायता राशि के भुगतान को लेकर सरकार को 8 सितंबर तक की समयसीमा देते हुए कहा कि यदि तब तक प्रत्येक पात्र परिवार के बैंक खाते में राशि नहीं पहुंची तो 9 सितंबर को बड़ा विरोध-प्रदर्शन किया जाएगा।

जनसमावेश के दौरान अखिल गोगोई के संबोधन के बीच सभा में मौजूद समर्थकों ने मुख्यमंत्री डॉ. हिमंत बिस्वा सरमा के खिलाफ नारे भी लगाए। गोगोई ने आरोप लगाया कि बाढ़ से व्यापक तबाही के बावजूद प्रभावित परिवारों को पर्याप्त सहायता देने में सरकार विफल रही है और मौजूदा राहत व्यवस्था लोगों के वास्तविक नुकसान की भरपाई करने में सक्षम नहीं है।

15 हजार की सहायता के लिए 8 सितंबर की समयसीमा
अखिल गोगोई ने बाढ़ प्रभावित परिवारों को मिलने वाली 15 हजार रुपये की एकमुश्त आर्थिक सहायता को जनसमावेश का प्रमुख मुद्दा बनाया। उन्होंने कहा कि पात्र परिवारों को इस राशि के लिए और इंतजार नहीं कराया जाना चाहिए तथा 8 सितंबर तक उनके बैंक खातों में सहायता पहुंचनी चाहिए।
उन्होंने घोषणा की कि निर्धारित समयसीमा तक भुगतान सुनिश्चित नहीं होने की स्थिति में रायजोर दल 9 सितंबर को व्यापक विरोध-प्रदर्शन करेगा। उन्होंने इसे बाढ़ पीड़ितों के अधिकार की लड़ाई बताते हुए संकेत दिया कि मांगें पूरी नहीं होने पर आंदोलन को आगे और तेज किया जाएगा।

नाजिरा में राहत को लेकर सरकार पर निशाना
अखिल गोगोई ने आरोप लगाया कि सत्तारूढ़ दल के विधायक का निर्वाचन क्षेत्र होने के बावजूद नाजिरा में बड़ी संख्या में बाढ़ प्रभावित लोगों को उनका अपेक्षित मुआवजा और सरकारी सहायता नहीं मिल पाई है।
उन्होंने नाजिरा विधायक मयूर बोरगोहांई को संबोधित करते हुए कहा कि राजनीतिक टकराव से पहले उन्हें अपने निर्वाचन क्षेत्र के बाढ़ प्रभावित लोगों को उनका अधिकार दिलाने की दिशा में काम करना चाहिए। गोगोई ने उनसे पात्र परिवारों को 15 हजार रुपये की एकमुश्त राहत राशि दिलाने की व्यवस्था सुनिश्चित करने की मांग की।

परिवारों और कारोबारियों के लिए 10-10 लाख रुपये मुआवजे की मांग
रायजोर दल अध्यक्ष ने राज्य की मौजूदा आपदा वित्तीय सहायता नीति में बदलाव की मांग करते हुए बाढ़ से व्यापक नुकसान झेलने वाले प्रत्येक प्रभावित परिवार को 10 लाख रुपये तथा प्रत्येक प्रभावित व्यावसायिक प्रतिष्ठान को भी 10 लाख रुपये मुआवजा देने की मांग उठाई।
गोगोई ने कहा कि बाढ़ के कारण लोगों के मकान, घरेलू सामान, खेती, रोजगार, आजीविका और व्यवसाय को व्यापक नुकसान हुआ है। ऐसी स्थिति में वर्तमान राहत राशि वास्तविक क्षति की भरपाई के लिए पर्याप्त नहीं है।
उन्होंने चेतावनी दी कि यदि सरकार बाढ़ प्रभावित परिवारों को समुचित मुआवजा देने के लिए नीति में बदलाव नहीं करती है तो मुख्यमंत्री डॉ. हिमंत बिस्वा सरमा के खिलाफ व्यापक जनआंदोलन खड़ा किया जाएगा।

बाढ़ प्रभावित महिलाओं को एक साल तक 2,500 रुपये प्रतिमाह देने की मांग
अखिल गोगोई ने बाढ़ से प्रभावित महिलाओं के लिए अलग आर्थिक सहायता पैकेज की भी मांग की। उन्होंने कहा कि पात्र प्रभावित महिलाओं को अरुणोदय योजना के तहत एक वर्ष तक 2,500 रुपये प्रतिमाह उपलब्ध कराया जाना चाहिए।
उनके अनुसार बाढ़ ने बड़ी संख्या में परिवारों की आय और आजीविका को प्रभावित किया है। ऐसे समय में महिलाओं को नियमित मासिक सहायता मिलने से परिवारों को पुनर्वास और रोजमर्रा के खर्चों को संभालने में मदद मिल सकती है।

कथित अवैध पत्थर-कोयला खनन की सीबीआई जांच की मांग
जनसमावेश में अखिल गोगोई ने क्षेत्र में कथित अवैध पत्थर और कोयला खनन का मुद्दा भी उठाया। उन्होंने इससे जुड़े आरोपों की केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) से जांच कराने की मांग की।
गोगोई ने अपने संबोधन में जल संसाधन मंत्री सुशांत बोरगोहांई, सोनारी विधायक धर्मेश्वर कुंवर और नाजिरा विधायक मयूर बोरगोहांई सहित कुछ लोगों पर कथित अवैध पत्थर एवं कोयला खनन से जुड़े होने के आरोप लगाए और कहा कि इन आरोपों की निष्पक्ष जांच सीबीआई से कराई जानी चाहिए।
उल्लेखनीय है कि ये आरोप अखिल गोगोई ने राजनीतिक जनसभा में लगाए हैं। उपलब्ध जानकारी में आरोपित नेताओं अथवा राज्य सरकार की ओर से इन आरोपों पर कोई प्रतिक्रिया शामिल नहीं है। इसलिए इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं की गई है।

असम की बाढ़ को ‘राष्ट्रीय आपदा’ घोषित करने की मांग
अखिल गोगोई ने केंद्र सरकार से असम में आई विनाशकारी बाढ़ और उससे हुई व्यापक तबाही को राष्ट्रीय आपदा घोषित करने की मांग भी की।
उन्होंने कहा कि बाढ़ के कारण राज्य में बड़े पैमाने पर मकानों, कृषि भूमि, व्यवसाय और सार्वजनिक बुनियादी ढांचे को नुकसान हुआ है। ऐसे में केंद्र सरकार को असम के लिए अतिरिक्त वित्तीय सहायता उपलब्ध करानी चाहिए, ताकि प्रभावित परिवारों के पुनर्वास के साथ क्षतिग्रस्त सड़क, पुल, ड्रेनेज और अन्य बुनियादी ढांचे का पुनर्निर्माण किया जा सके।

मांगें पूरी नहीं हुईं तो चरणबद्ध आंदोलन की चेतावनी
अखिल गोगोई ने स्पष्ट किया कि रायजोर दल बाढ़ पीड़ितों की राहत और पुनर्वास से जुड़े मुद्दों को लेकर अपना आंदोलन जारी रखेगा। उन्होंने 15 हजार रुपये की तत्काल सहायता, परिवारों और व्यापारिक प्रतिष्ठानों के लिए 10-10 लाख रुपये मुआवजा, प्रभावित महिलाओं को एक वर्ष तक 2,500 रुपये मासिक सहायता, कथित अवैध खनन की सीबीआई जांच और असम की बाढ़ को राष्ट्रीय आपदा घोषित करने की मांग को प्रमुखता से सामने रखा।
नाजिरा का यह जनसमावेश ऐसे समय आयोजित हुआ है जब ऊपरी असम के बाढ़ प्रभावित इलाकों में राहत राशि, नुकसान के आकलन और पुनर्वास को लेकर राजनीतिक गतिविधियां तेज हैं। अखिल गोगोई ने 8 सितंबर की समयसीमा तय कर 9 सितंबर से बड़े विरोध-प्रदर्शन की घोषणा करते हुए साफ संकेत दिया कि राहत और मुआवजे की मांगों पर कार्रवाई नहीं होने की स्थिति में रायजोर दल सरकार के खिलाफ आंदोलन को और व्यापक रूप देगा।




