“भाजपा 5G की रफ्तार से चल रही, कांग्रेस अब भी 3G के जमाने में”—अखिल गोगोई का तीखा हमला : रायजोर दल-कांग्रेस गठबंधन विवाद पर बोले शिवसागर विधायक—“गठबंधन कांग्रेस ने तोड़ा, हमने नहीं; कांग्रेस के जमीनी कार्यकर्ता अच्छे, लेकिन शीर्ष नेतृत्व की कार्यशैली पुरानी” : रकीबुल हुसैन और वाजेद अली चौधरी को बताया ‘आउटडेटेड’, रकीबुल पर टिप्पणी—“लोकसभा भेजा, लेकिन न ठीक से हिंदी बोल पाते हैं, न अंग्रेजी” : गौरव गोगोई पर उठाए सवाल—“जोरहाट संसदीय क्षेत्र में विनाशकारी बाढ़ के बावजूद संसद में न विशेष आर्थिक पैकेज मांगा, न कारणों की जांच”
नगांव लोकसभा उपचुनाव में रायजोर दल रहेगा निरपेक्ष; तीसरे मोर्चे पर बोले—“समय आने पर बताएंगे” : हिरन गोहांई की फेसबुक पोस्ट पर सार्वजनिक टिप्पणी से इनकार—“वे मेरे गुरु हैं, स्वयं मिलकर बात करूंगा” : ‘रंगपुर–शिवसागर Historic Ensemble’ को यूनेस्को वर्ल्ड हेरिटेज साइट का दर्जा दिलाने की कोशिश होगी तेज, दो वर्षों में लक्ष्य हासिल करने की महत्वाकांक्षा

शिवसागर, 6 सितंबर : रायजोर दल और कांग्रेस के बीच गठबंधन को लेकर जारी राजनीतिक विवाद के बीच रायजोर दल के अध्यक्ष एवं शिवसागर विधायक अखिल गोगोई ने कांग्रेस के शीर्ष नेतृत्व, उसकी राजनीतिक कार्यशैली और विपक्षी रणनीति पर तीखा हमला बोला है। गोगोई ने कहा कि मौजूदा राजनीतिक परिस्थितियों में भारतीय जनता पार्टी आधुनिक रणनीति और तेज गति से आगे बढ़ रही है, जबकि कांग्रेस अब भी पुरानी राजनीतिक शैली से बाहर नहीं निकल पाई है।

कांग्रेस और भाजपा की कार्यप्रणाली की तुलना मोबाइल तकनीक की पीढ़ियों से करते हुए अखिल गोगोई ने कहा, “भाजपा आजकल 5G टेक्नोलॉजी की तरह चल रही है और कांग्रेस आज भी 3G टेक्नोलॉजी के जमाने में है।” उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस की राजनीतिक कार्यशैली न केवल पुरानी है, बल्कि शीर्ष स्तर पर उसका व्यवहार सामंतवादी भी है। उनके अनुसार भाजपा जैसी संगठित राजनीतिक ताकत का मुकाबला करने के लिए कांग्रेस के मौजूदा तरीके पर्याप्त नहीं हैं।
“कांग्रेस ने गठबंधन तोड़ा, रायजोर दल ने नहीं”
रायजोर दल और कांग्रेस के बीच गठबंधन टूटने को लेकर अखिल गोगोई ने स्पष्ट तौर पर कहा कि गठबंधन समाप्त करने का निर्णय उनकी पार्टी ने नहीं, बल्कि कांग्रेस ने लिया है। उन्होंने कहा, “कांग्रेस ने गठबंधन तोड़ा है, मैंने नहीं।”
हालांकि कांग्रेस के शीर्ष नेतृत्व की आलोचना करते हुए उन्होंने पार्टी के जमीनी कार्यकर्ताओं की सराहना भी की। गोगोई के अनुसार कांग्रेस के तृणमूल स्तर के बहुत से कार्यकर्ता अच्छे हैं और वे जमीन पर मेहनत करते हैं, लेकिन शीर्ष नेतृत्व की राजनीतिक सोच और काम करने के तरीके में बदलाव की जरूरत है।
उन्होंने कहा कि रायजोर दल ने लगातार कांग्रेस को उसकी राजनीतिक कमियों और भाजपा के मुकाबले रणनीति बदलने की आवश्यकता के बारे में बताने का प्रयास किया। उनके अनुसार इन्हीं मुद्दों को खुलकर उठाने के बाद दोनों दलों के बीच दूरी बढ़ी।
गोगोई ने कहा कि अब यह कांग्रेस को तय करना है कि वह रायजोर दल को अपने साथ रखना चाहती है या नहीं। उन्होंने कहा कि रायजोर दल एक क्षेत्रीय राजनीतिक शक्ति है और अपने दम पर राजनीतिक संघर्ष जारी रखने में सक्षम है। पार्टी असम के हितों तथा देश के संघीय ढांचे को मजबूत करने के मुद्दों पर अपना संघर्ष जारी रखेगी।
रकीबुल-वाजेद पर तीखा प्रहार, कहा—‘आउटडेटेड’ नेतृत्व
अखिल गोगोई ने कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं सांसद रकीबुल हुसैन और विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष वाजेद अली चौधरी को लेकर भी कड़ी टिप्पणी की। उन्होंने दोनों नेताओं को राजनीतिक रूप से “आउटडेटेड” बताते हुए दावा किया कि ऐसे पुराने चेहरों को सामने रखकर नई पीढ़ी के मतदाताओं के साथ प्रभावी संवाद स्थापित करना मुश्किल है।
उन्होंने दावा किया कि इन नेताओं के नाम को लेकर असम के लोगों के एक वर्ग में नाराजगी है। गोगोई ने प्रदेश कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष रिपुन बोरा का भी उल्लेख किया और उनके खिलाफ अतीत में रहे भ्रष्टाचार संबंधी मामले का हवाला देते हुए कांग्रेस के नेतृत्व चयन पर सवाल खड़े किए।
रकीबुल हुसैन पर टिप्पणी करते हुए अखिल गोगोई ने कहा कि “हमने रकीबुल हुसैन को लोकसभा भेजा, लेकिन रकीबुल न हिंदी बोलना जानते हैं और न अंग्रेजी।” इस टिप्पणी के जरिए उन्होंने राष्ट्रीय स्तर पर असम के मुद्दों को प्रभावी तरीके से प्रस्तुत करने की कांग्रेस नेताओं की क्षमता पर सवाल उठाया।
गोगोई ने कहा कि आज का मतदाता पहले की तुलना में कहीं अधिक जागरूक है। महिलाएं, युवा और ग्रामीण क्षेत्रों के लोग राजनीतिक परिस्थितियों का स्वयं विश्लेषण कर निर्णय लेते हैं। इसलिए राजनीतिक दलों को जनता के बीच लगातार सक्रिय रहना होगा और पुराने ढर्रे की राजनीति से बाहर निकलना होगा।
गौरव गोगोई को घेरा—बाढ़ का मुद्दा संसद में मजबूती से नहीं उठाने का आरोप
अखिल गोगोई ने लोकसभा में कांग्रेस के उपनेता एवं जोरहाट सांसद गौरव गोगोई की राजनीतिक भूमिका पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि इस वर्ष जोरहाट संसदीय क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले जोरहाट, शिवसागर और चराईदेव जिलों में विनाशकारी बाढ़ से भारी नुकसान हुआ और हजारों परिवार प्रभावित हुए।
गोगोई ने आरोप लगाया कि इतनी बड़ी प्राकृतिक आपदा के बावजूद गौरव गोगोई ने संसद में बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों के लिए केंद्र सरकार से विशेष आर्थिक पैकेज की मांग अपेक्षित मजबूती से नहीं उठाई। उन्होंने यह भी सवाल किया कि बाढ़ के कारणों की विस्तृत जांच की मांग संसद में प्रभावी ढंग से क्यों नहीं की गई।
उन्होंने गौरव गोगोई की राजनीतिक कार्यशैली पर सवाल उठाते हुए कहा कि एक सांसद से अपेक्षा होती है कि वह अपने संसदीय क्षेत्र की गंभीर समस्याओं को राष्ट्रीय मंच पर मजबूती से उठाए।
“हमारे अंदर लड़ने की ताकत है”
अखिल गोगोई ने कहा कि रायजोर दल कांग्रेस पर निर्भर होकर अपनी राजनीति नहीं करेगा। उन्होंने कहा, “हम क्षेत्रीय राजनीतिक शक्ति हैं और अपने दम पर काम करेंगे। हम असम और भारत के संघीय ढांचे की मजबूती के लिए लड़ रहे हैं। हमारे अंदर लड़ने की ताकत है। कांग्रेस हमारे साथ रहे या नहीं रहे, हम पूरी ताकत से लड़ेंगे।”
उन्होंने भाजपा को “सांप्रदायिक और फासीवादी” करार देते हुए कहा कि रायजोर दल का दीर्घकालिक राजनीतिक उद्देश्य भाजपा को सत्ता से हटाना है। उन्होंने कहा कि पार्टी 2031 को ध्यान में रखते हुए अपनी राजनीतिक तैयारी आगे बढ़ा रही है।
नगांव उपचुनाव में किसी के साथ नहीं जाएगा रायजोर दल
नगांव लोकसभा सीट पर होने वाले उपचुनाव को लेकर भी अखिल गोगोई ने रायजोर दल का रुख स्पष्ट किया। उन्होंने कहा कि इस चुनाव में पार्टी की कोई प्रत्यक्ष भूमिका नहीं होगी और रायजोर दल किसी भी दल के समर्थन में नहीं उतरेगा।
उन्होंने भाजपा और एआईयूडीएफ को “सांप्रदायिक” तथा कांग्रेस को “भ्रष्ट” पार्टी बताते हुए आरोप लगाया कि इन दलों की जीत से असम के बुनियादी मुद्दों का समाधान नहीं होगा। इसी कारण रायजोर दल नगांव लोकसभा उपचुनाव में निरपेक्ष भूमिका अपनाएगा।
तीसरे मोर्चे की संभावना पर सस्पेंस बरकरार
असम में कांग्रेस और भाजपा से अलग किसी तीसरे राजनीतिक मोर्चे के गठन की संभावना को लेकर पूछे जाने पर अखिल गोगोई ने फिलहाल अपने पत्ते नहीं खोले। उन्होंने कहा कि तीसरे मोर्चे के गठन से संबंधित विषय पर वह आने वाले समय में जानकारी देंगे।
उनकी इस टिप्पणी से राज्य की भावी राजनीतिक समीकरणों और क्षेत्रीय दलों की संभावित रणनीति को लेकर चर्चाएं और तेज होने की संभावना है।
हिरन गोहांई की फेसबुक पोस्ट पर बोले—“वे मेरे गुरु, स्वयं मिलकर बात करूंगा”
विशिष्ट बुद्धिजीवी हिरन गोहांई की फेसबुक पोस्ट को लेकर पूछे गए सवाल पर अखिल गोगोई ने सार्वजनिक रूप से कोई विस्तृत प्रतिक्रिया देने से इनकार कर दिया।
उन्होंने कहा कि मैं उनसे स्वयं मिलकर बात करूंगा। वे मेरे गुरु हैं। इसलिए उनकी फेसबुक पोस्ट के संबंध में सार्वजनिक रूप से कुछ नहीं कहना चाहता।
गोगोई ने संकेत दिया कि वह इस विषय पर सार्वजनिक बयानबाजी के बजाय व्यक्तिगत रूप से हिरन गोहाईं से बातचीत करना उचित समझते हैं।
यूनेस्को के विश्व विरासत मानचित्र पर शिवसागर को स्थापित करने का लक्ष्य
राजनीतिक मुद्दों के साथ अखिल गोगोई ने शिवसागर की ऐतिहासिक एवं सांस्कृतिक विरासत को लेकर भी महत्वपूर्ण बयान दिया। उन्होंने अहोम राजवंश के लगभग छह शताब्दियों के गौरवशाली इतिहास की साक्षी रही ऐतिहासिक राजधानी के “रंगपुर–शिवसागर Historic Ensemble” को यूनेस्को वर्ल्ड हेरिटेज साइट का दर्जा दिलाने की दिशा में चल रहे प्रयासों पर प्रसन्नता जताई।
उन्होंने इसे केवल शिवसागर ही नहीं, बल्कि पूरे असम के लिए गौरव का विषय बताया।
2021 में विधानसभा में उठाया था मुद्दा
अखिल गोगोई ने कहा कि उन्होंने 13 जुलाई 2021 को असम विधानसभा में शिवसागर को यूनेस्को वर्ल्ड हेरिटेज साइट में शामिल कराने के लिए प्रस्ताव रखा था। इसके बाद से शिवसागर की ऐतिहासिक धरोहरों को अंतरराष्ट्रीय पहचान दिलाने की दिशा में लगातार प्रयास किए जाते रहे हैं।
उन्होंने कहा कि “रंगपुर–शिवसागर Historic Ensemble” को यूनेस्को की Tentative List की दिशा में आगे बढ़ाया जाना महत्वपूर्ण उपलब्धि है, लेकिन अंतिम लक्ष्य इसे पूर्ण रूप से UNESCO World Heritage Site का दर्जा दिलाना है।
दो वर्षों में उपलब्धि हासिल करने का लक्ष्य
शिवसागर विधायक ने कहा कि आने वाले वर्षों में वह संबंधित संस्थाओं, इतिहासकारों, विशेषज्ञों और सरकार के स्तर पर आवश्यक पहल को आगे बढ़ाने की कोशिश करेंगे। उन्होंने इसके लिए महत्वाकांक्षी समयसीमा तय करते हुए कहा कि उनका प्रयास रहेगा कि अगले दो वर्षों के भीतर “रंगपुर–शिवसागर Historic Ensemble” को यूनेस्को वर्ल्ड हेरिटेज साइट का दर्जा दिलाने की दिशा में लक्ष्य हासिल किया जाए।
अखिल गोगोई ने कहा कि शिवसागर केवल असम का एक ऐतिहासिक शहर नहीं है, बल्कि अहोम शासन व्यवस्था, स्थापत्य कला, संस्कृति और असम के गौरवशाली इतिहास की जीवंत विरासत है। इसलिए इस ऐतिहासिक क्षेत्र को विश्व विरासत के मानचित्र पर उचित स्थान दिलाना उनकी प्रमुख प्राथमिकताओं में शामिल रहेगा।




