आपदा प्रबंधन में सरकार और सामाजिक संगठनों के बीच मजबूत होगा तालमेल, शिवसागर में जिला स्तरीय ओरिएंटेशन कार्यक्रम : जिला आयुक्त मृदुल यादव की मौजूदगी में ‘कम्युनिटी फीडबैक मैकेनिज्म’ पर मंथन : GO-NGO समन्वय मजबूत करने पर जोर : DDMA की पहल, UNICEF Assam और Sivasagar Inter Agency Group के सहयोग से आयोजन : बाढ़ राहत और पुनर्वास में एनजीओ की भूमिका की जिला आयुक्त ने की सराहना; जिला स्तर की ‘Best Practices’ को पूरे असम में अपनाने की बताई जरूरत
आपदा प्रतिक्रिया से जुड़े 60 से अधिक संगठनों के प्रतिनिधियों की भागीदारी, समुदाय की आवाज को राहत और पुनर्वास प्रक्रिया का हिस्सा बनाने पर विशेष फोकस : सरकार, सामाजिक संगठनों और समुदाय की साझेदारी से अधिक सक्षम, समन्वित और ‘आपदा-रोधी शिवसागर’ बनाने का संकल्प

शिवसागर, 11 सितंबर : प्राकृतिक आपदाओं के दौरान सरकारी तंत्र, गैर-सरकारी संस्थाओं और नागरिक समाज संगठनों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करने तथा राहत एवं पुनर्वास व्यवस्था को अधिक प्रभावी, जवाबदेह और समुदाय-केंद्रित बनाने की दिशा में शिवसागर जिला प्रशासन ने एक महत्वपूर्ण पहल की है। इसी उद्देश्य से गुरुवार को शिवसागर के होटल ब्रह्मपुत्र में ‘कम्युनिटी फीडबैक मैकेनिज्म’ पर जिला स्तरीय ओरिएंटेशन कार्यक्रम आयोजित किया गया।
कार्यक्रम में जिले के विभिन्न हिस्सों में आपदा प्रतिक्रिया, राहत और पुनर्वास गतिविधियों से जुड़े 60 से अधिक नागरिक समाज संगठनों के प्रतिनिधियों ने भाग लिया। आयोजन का प्रमुख उद्देश्य प्राकृतिक आपदाओं, विशेषकर बाढ़ के दौरान सरकारी और गैर-सरकारी तंत्र के बीच स्थापित समन्वय को संस्थागत रूप देते हुए प्रभावित समुदायों की प्रतिक्रिया को आपदा प्रबंधन प्रक्रिया का महत्वपूर्ण हिस्सा बनाना था।

ASDMA के GO-NGO प्रोटोकॉल के अनुरूप महत्वपूर्ण पहल
यह कार्यक्रम असम राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (ASDMA) के GO-NGO प्रोटोकॉल के अनुरूप सरकारी और गैर-सरकारी संस्थाओं के बीच समन्वय को और मजबूत करने की व्यापक पहल का हिस्सा रहा।
शिवसागर जिला आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (DDMA) इस दिशा में UNICEF Assam और Sivasagar Inter Agency Group (IAG) के सहयोग से लगातार कार्य कर रहा है। इसी साझेदारी को अधिक व्यवस्थित और संस्थागत स्वरूप देने के उद्देश्य से जिला स्तरीय ओरिएंटेशन कार्यक्रम आयोजित किया गया।
कार्यक्रम के दौरान इस बात पर जोर दिया गया कि आपदा के समय अलग-अलग संस्थाओं द्वारा किए जाने वाले राहत एवं प्रतिक्रिया कार्यों के बीच बेहतर तालमेल होने से संसाधनों का प्रभावी उपयोग सुनिश्चित किया जा सकता है और जरूरतमंद लोगों तक समय पर सहायता पहुंचाने में भी मदद मिल सकती है।

जिला आयुक्त मृदुल यादव ने किया कार्यक्रम का उद्घाटन
कार्यक्रम का उद्घाटन शिवसागर के जिला आयुक्त मृदुल यादव ने किया। उन्होंने हाल की बाढ़ के दौरान राहत, पुनर्वास और आपदा प्रतिक्रिया से जुड़े कार्यों में गैर-सरकारी संगठनों और नागरिक समाज संस्थाओं द्वारा निभाई गई भूमिका की सराहना की।
जिला आयुक्त ने कहा कि बड़े पैमाने की प्राकृतिक आपदाओं से प्रभावी तरीके से निपटने के लिए केवल सरकारी तंत्र के प्रयास पर्याप्त नहीं होते, बल्कि सरकारी एजेंसियों और गैर-सरकारी संगठनों के बीच सुव्यवस्थित तथा संस्थागत समन्वय बेहद महत्वपूर्ण है।
उन्होंने विशेष रूप से ASDMA के GO-NGO प्रोटोकॉल के अनुरूप समन्वित और एकीकृत तरीके से काम करने की आवश्यकता पर जोर दिया।
‘Best Practices’ को पूरे असम में अपनाने की जरूरत
जिला आयुक्त ने आपदा प्रबंधन के दौरान अलग-अलग जिलों में विकसित होने वाली प्रभावी कार्यप्रणालियों और सफल अनुभवों को साझा करने की आवश्यकता पर भी जोर दिया।
उन्होंने कहा कि किसी जिले में आपदा प्रबंधन के दौरान सामने आने वाली सफल पहलों को केवल उसी क्षेत्र तक सीमित नहीं रखा जाना चाहिए। जिला स्तर पर विकसित ऐसी ‘Best Practices’ की पहचान कर उन्हें पूरे असम में अपनाने की दिशा में प्रयास होने चाहिए।
इस तरह अलग-अलग जिलों के अनुभवों और सफल मॉडलों का उपयोग करते हुए राज्य की समग्र आपदा प्रतिक्रिया प्रणाली को अधिक संगठित, प्रभावी और परिणामोन्मुख बनाया जा सकता है।

‘कम्युनिटी फीडबैक मैकेनिज्म’ पर विशेष मंथन
ओरिएंटेशन कार्यक्रम का मुख्य केंद्र ‘कम्युनिटी फीडबैक मैकेनिज्म’ रहा। इसके तहत इस बात पर विस्तृत चर्चा हुई कि आपदा प्रभावित समुदायों की जरूरतों, अनुभवों, शिकायतों, सुझावों और प्रतिक्रियाओं को किस प्रकार व्यवस्थित ढंग से राहत एवं पुनर्वास प्रक्रिया में शामिल किया जा सकता है।
कार्यक्रम में IAG Assam द्वारा तैयार फ्रेमवर्क का उपयोग करते हुए इस व्यवस्था के विभिन्न पहलुओं पर चर्चा की गई। इसका उद्देश्य राहत पहुंचाने वाली संस्थाओं और सहायता प्राप्त करने वाले समुदायों के बीच संवाद की प्रक्रिया को मजबूत करना है।
प्रभावित लोगों की आवाज बनेगी आपदा प्रबंधन का हिस्सा
कार्यक्रम में इस बात पर विशेष जोर दिया गया कि आपदा प्रबंधन का अर्थ केवल राहत सामग्री पहुंचाना नहीं है। प्रभावित समुदाय की वास्तविक जरूरतों को समझना, उनके अनुभवों को सुनना और उनकी प्रतिक्रिया के आधार पर राहत एवं पुनर्वास व्यवस्था में आवश्यक सुधार करना भी उतना ही महत्वपूर्ण है।
‘कम्युनिटी फीडबैक मैकेनिज्म’ के जरिए प्रभावित लोगों और राहत कार्यों में लगी सरकारी एवं गैर-सरकारी संस्थाओं के बीच सूचना और प्रतिक्रिया का प्रवाह मजबूत करने की दिशा में चर्चा की गई।
इस व्यवस्था का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि आपदा के दौरान लिए जाने वाले फैसले केवल प्रशासनिक आकलन तक सीमित न रहें, बल्कि प्रभावित समुदायों से मिलने वाले फीडबैक और उनकी वास्तविक जरूरतों को भी निर्णय प्रक्रिया में उचित स्थान मिले।

60 से अधिक संगठनों की व्यापक भागीदारी
कार्यक्रम की व्यापक भागीदारी विशेष रूप से उल्लेखनीय रही। शिवसागर जिले में आपदा प्रतिक्रिया गतिविधियों से जुड़े 60 से अधिक नागरिक समाज संगठनों के 60 से ज्यादा प्रतिनिधियों ने इसमें हिस्सा लिया।
इतनी बड़ी संख्या में सामाजिक संगठनों की भागीदारी ने जिले में आपदा प्रबंधन से जुड़े सरकारी और गैर-सरकारी तंत्र के बीच समन्वय को संस्थागत स्वरूप देने की पहल को और महत्वपूर्ण बनाया।
कार्यक्रम के माध्यम से विभिन्न संस्थाओं को एक साझा मंच मिला, जहां उन्होंने आपदा प्रबंधन के अपने अनुभवों, चुनौतियों और भविष्य की रणनीतियों पर विचार साझा किए।
UNICEF और IAG के विशेषज्ञों ने साझा किए अनुभव
ओरिएंटेशन में UNICEF, Roots to Branches Foundation, IAG Assam और IAG Sivasagar से जुड़े विशेषज्ञों ने भी भाग लिया।
विशेषज्ञों ने समुदाय आधारित आपदा प्रतिक्रिया, अलग-अलग संस्थाओं के बीच समन्वय, प्रभावी फीडबैक व्यवस्था तथा राहत एवं पुनर्वास प्रक्रिया को अधिक जवाबदेह बनाने से जुड़े विभिन्न पहलुओं पर अपने अनुभव और सुझाव साझा किए।
इस दौरान यह समझ विकसित करने पर विशेष ध्यान दिया गया कि सरकारी विभाग, गैर-सरकारी संगठन और स्थानीय समुदाय किस प्रकार एक साझा व्यवस्था के तहत काम कर सकते हैं।

‘आपदा प्रबंधन किसी एक विभाग की जिम्मेदारी नहीं’
कार्यक्रम में इस बात पर भी जोर दिया गया कि आपदा प्रबंधन को केवल प्रशासन अथवा किसी एक सरकारी विभाग की जिम्मेदारी के रूप में नहीं देखा जा सकता।
बड़े पैमाने पर आने वाली बाढ़ अथवा अन्य प्राकृतिक आपदाओं के दौरान जिला प्रशासन, आपदा प्रबंधन एजेंसियों, गैर-सरकारी संस्थाओं, नागरिक समाज संगठनों और स्थानीय समुदायों के बीच प्रभावी साझेदारी जरूरी है।
सभी पक्षों की भूमिका और जिम्मेदारियों के बीच स्पष्ट एवं बेहतर तालमेल होने से उपलब्ध संसाधनों का अधिक व्यवस्थित इस्तेमाल किया जा सकता है। साथ ही प्रभावित और जरूरतमंद लोगों तक सही समय पर सही सहायता पहुंचाने में भी मदद मिल सकती है।
तैयारी से पुनर्वास तक साझा व्यवस्था विकसित करने पर जोर
शिवसागर जिला प्रशासन ने कार्यक्रम के जरिए जिले में आपदा प्रबंधन से जुड़ी संस्थागत भागीदारी को और मजबूत करने की अपनी प्रतिबद्धता दोहराई।
प्रशासन का लक्ष्य विभिन्न हितधारकों को एक साझा व्यवस्था से जोड़ना है, ताकि आपदा-पूर्व तैयारी से लेकर आपदा के दौरान प्रतिक्रिया, राहत वितरण और बाद के पुनर्वास तक प्रत्येक चरण में बेहतर समन्वय सुनिश्चित किया जा सके।
इसके साथ ही समुदाय से मिलने वाले फीडबैक को लगातार इस प्रक्रिया में शामिल करने पर जोर दिया गया, ताकि बदलती परिस्थितियों और वास्तविक जरूरतों के अनुरूप राहत एवं पुनर्वास रणनीतियों में आवश्यक सुधार किए जा सकें।

लक्ष्य—अधिक सक्षम और ‘आपदा-रोधी शिवसागर’
जिला स्तरीय ओरिएंटेशन कार्यक्रम का व्यापक उद्देश्य एक अधिक सक्षम, समन्वित और आपदा-रोधी शिवसागर तैयार करना है। इसके लिए सरकारी एवं गैर-सरकारी संस्थाओं की मजबूत साझेदारी, सामाजिक संगठनों की सक्रिय भागीदारी और प्रभावित समुदाय की आवाज को आपदा प्रबंधन व्यवस्था का अभिन्न हिस्सा बनाने पर जोर दिया गया।
हाल की बाढ़ के अनुभवों के बाद आयोजित यह कार्यक्रम भविष्य की आपदाओं के लिए बेहतर तैयारी, अधिक प्रभावी प्रतिक्रिया और समुदाय-केंद्रित पुनर्वास व्यवस्था विकसित करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। जिला प्रशासन की इस पहल से सरकारी तंत्र और सामाजिक संगठनों के बीच समन्वय को मजबूत करने के साथ-साथ राहत कार्यों को अधिक जवाबदेह और वास्तविक जरूरतों के अनुरूप बनाने की दिशा में भी आगे बढ़ने का प्रयास किया गया है।




