डिब्रूगढ़ में भक्ति, श्रद्धा और सनातन संस्कृति का अद्भुत संगम : 108 महिलाओं की भव्य कलश यात्रा के साथ श्रीमद्भागवत सप्ताह ज्ञानयज्ञ का दिव्य शुभारंभ : राष्ट्रीय संत श्री नवराज प्रपन्न महाराज के श्रीमुख से प्रवाहित हो रही भागवत कथा की अमृतधारा

डिब्रूगढ़, 9 जून : पुरुषोत्तम मास के परम पावन, दुर्लभ एवं पुण्यप्रद अवसर पर सोमवार को डिब्रूगढ़ की पावन धरती भक्ति, श्रद्धा और आध्यात्मिक चेतना से सराबोर हो उठी। ज्योतिनगर निवासी प्रतिष्ठित समाजसेवी प्रभुदयाल बेरीवाल एवं उनके परिवार के सौजन्य से आयोजित श्रीमद्भागवत सप्ताह ज्ञानयज्ञ का शुभारंभ अत्यंत श्रद्धा, आस्था और सनातन परंपराओं के अनुरूप भव्य कलश यात्रा के साथ हुआ। वैदिक मंत्रोच्चार, हरिनाम संकीर्तन, भजन-कीर्तन, शंखध्वनि और “जय श्रीकृष्ण” तथा “हर हर महादेव” के जयघोषों के बीच निकली इस दिव्य शोभायात्रा ने पूरे नगर को कृष्णमय एवं भक्तिमय बना दिया।

धर्म, संस्कृति और सनातन मूल्यों के संरक्षण एवं संवर्धन के उद्देश्य से आयोजित यह सप्ताहव्यापी कथा महोत्सव 9 जून से 15 जून तक प्रतिदिन दोपहर 2:30 बजे से सायं 6:30 बजे तक कृष्णा निवास, ज्योतिनगर, डिब्रूगढ़ में आयोजित किया जा रहा है। इस पावन आयोजन में हरिद्वार से पधारे सुप्रसिद्ध राष्ट्रीय संत एवं भागवताचार्य श्री नवराज प्रपन्न जी महाराज अपनी मधुर, ओजस्वी एवं ज्ञानमयी वाणी से श्रद्धालुओं को श्रीमद्भागवत महापुराण की अमृतधारा का रसास्वादन करा रहे हैं।
भक्ति, श्रद्धा और सनातन परंपरा की अनुपम झलक बनी भव्य कलश यात्रा
ज्ञानयज्ञ के प्रथम दिवस आयोजित कलश यात्रा ने नगरवासियों का विशेष ध्यान आकर्षित किया। यह विशाल एवं भव्य शोभायात्रा शहर के ऐतिहासिक श्री राधाकृष्ण देवस्थान (जालान मंदिर) से प्रारंभ हुई। पारंपरिक वाद्ययंत्रों, भजन मंडलियों, कीर्तन दलों तथा श्रद्धालुओं के जयघोषों के साथ निकली यह यात्रा शहर के प्रमुख मार्गों से गुजरते हुए कथा स्थल कृष्णा निवास पहुंची।

यात्रा में 108 से अधिक श्रद्धालु महिलाओं ने अपने सिर पर पवित्र कलश धारण कर भाग लिया। पीले, लाल एवं भगवा रंग के पारंपरिक परिधानों में सुसज्जित महिलाओं की यह शोभायात्रा सनातन संस्कृति की जीवंत तस्वीर प्रस्तुत कर रही थी। श्रद्धालु महिलाएं पूरे मार्ग में “राधे-राधे”, “जय श्रीकृष्ण”, “हर हर महादेव” एवं “भागवत महाराज की जय” के उद्घोषों के साथ आगे बढ़ती रहीं।
भगवान श्रीकृष्ण एवं भोलेनाथ की जीवंत झांकी ने मोहा श्रद्धालुओं का मन
कलश यात्रा का सबसे बड़ा आकर्षण घोड़ों से सुसज्जित भव्य रथ (बग्घी) पर विराजमान भगवान श्रीकृष्ण एवं भगवान भोलेनाथ की मनोरम जीवंत झांकी रही। भगवान श्रीकृष्ण की मोहक छवि तथा भगवान शिव के दिव्य स्वरूप ने श्रद्धालुओं को मंत्रमुग्ध कर दिया।

नगर के विभिन्न स्थानों पर श्रद्धालुओं ने झांकी का पुष्पवर्षा, आरती एवं जयघोषों के साथ स्वागत किया। अनेक भक्तों ने झांकी के समक्ष शीश नवाकर आशीर्वाद प्राप्त किया। बच्चों, युवाओं एवं बुजुर्गों में इस दिव्य शोभायात्रा को लेकर विशेष उत्साह और श्रद्धा देखने को मिली।
सुसज्जित वाहन में नगर भ्रमण पर निकले कथा व्यास
कथा व्यास राष्ट्रीय संत श्री नवराज प्रपन्न जी महाराज को भी विशेष रूप से सजाए गए आकर्षक वाहन में विराजमान कर नगर भ्रमण करवाया गया। यात्रा मार्ग में हजारों श्रद्धालुओं ने महाराजश्री का स्वागत किया तथा उनका आशीर्वाद प्राप्त किया।
महाराजश्री ने श्रद्धालुओं को धर्म, संस्कार और भक्ति के मार्ग पर चलने का संदेश देते हुए कहा कि श्रीमद्भागवत केवल एक ग्रंथ नहीं, बल्कि मानव जीवन को ईश्वर से जोड़ने वाला दिव्य मार्गदर्शक है।

कथास्थल पर हुआ भव्य स्वागत, प्रसाद एवं जलपान की रही विशेष व्यवस्था
कलश यात्रा के कथा स्थल पहुंचने पर आयोजक बेरीवाल परिवार द्वारा सभी श्रद्धालुओं के लिए जलपान एवं प्रसाद की विशेष व्यवस्था की गई। कथा पंडाल को आकर्षक धार्मिक सजावट, पुष्पमालाओं, भगवान श्रीकृष्ण एवं राधारानी के चित्रों तथा आध्यात्मिक प्रतीकों से सजाया गया था, जिससे सम्पूर्ण वातावरण दिव्यता और भक्ति से ओत-प्रोत दिखाई दे रहा था।

राष्ट्रीय संत श्री नवराज प्रपन्न जी महाराज : भक्ति, ज्ञान और वैराग्य के प्रखर प्रवक्ता
इस सप्ताहव्यापी ज्ञानयज्ञ के मुख्य आकर्षण हरिद्वार से पधारे राष्ट्रीय संत एवं प्रख्यात भागवताचार्य श्री नवराज प्रपन्न जी महाराज हैं, जिनकी ख्याति देशभर में एक ओजस्वी वक्ता, आध्यात्मिक चिंतक तथा सनातन संस्कृति के प्रचारक के रूप में है। वर्षों से वे श्रीमद्भागवत कथा, रामकथा एवं विभिन्न आध्यात्मिक प्रवचनों के माध्यम से धर्म, अध्यात्म, संस्कार और राष्ट्र चेतना का संदेश जन-जन तक पहुंचा रहे हैं।
महाराजश्री की कथाओं की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि वे श्रीमद्भागवत के गूढ़ आध्यात्मिक रहस्यों को अत्यंत सरल, सहज एवं प्रेरणादायी शैली में प्रस्तुत करते हैं। उनके प्रवचनों में केवल धार्मिक आख्यान ही नहीं, बल्कि वर्तमान सामाजिक परिस्थितियों, पारिवारिक मूल्यों, नैतिक शिक्षा, युवा पीढ़ी के मार्गदर्शन तथा जीवन प्रबंधन के सूत्र भी समाहित होते हैं। यही कारण है कि उनकी कथाओं में प्रत्येक आयु वर्ग के श्रद्धालु विशेष रुचि लेते हैं।

देश के विभिन्न राज्यों में आयोजित होने वाले धार्मिक आयोजनों, कथा महोत्सवों एवं आध्यात्मिक सम्मेलनों में महाराजश्री की विशेष उपस्थिति रहती है। हजारों श्रद्धालु उनके श्रीमुख से प्रवाहित कथा-अमृत का श्रवण कर धर्म एवं अध्यात्म के मार्ग पर अग्रसर हो रहे हैं। उनकी वाणी में भक्ति की मधुरता, ज्ञान की गंभीरता और वैराग्य की दिव्यता का अद्भुत संगम देखने को मिलता है।

डिब्रूगढ़ में आयोजित इस पावन श्रीमद्भागवत सप्ताह ज्ञानयज्ञ में भी महाराजश्री प्रतिदिन श्रद्धालुओं को भगवान श्रीकृष्ण की दिव्य लीलाओं, भक्ति, ज्ञान, वैराग्य तथा मानव जीवन के उच्च आदर्शों से परिचित करा रहे हैं। कथा के दौरान उनका प्रत्येक संदेश श्रद्धालुओं को आध्यात्मिक ऊर्जा और सकारात्मक जीवन दृष्टि प्रदान कर रहा है।

अपने उद्बोधन में महाराजश्री ने कहा कि “श्रीमद्भागवत महापुराण केवल एक धार्मिक ग्रंथ नहीं, बल्कि मानव जीवन को परमात्मा से जोड़ने वाला दिव्य मार्गदर्शक है। भागवत कथा का श्रवण मनुष्य के अंतःकरण को निर्मल बनाता है तथा उसे धर्म, भक्ति और सेवा के मार्ग पर अग्रसर करता है।”
उन्होंने आगे कहा कि “पुरुषोत्तम मास भगवान श्रीहरि की विशेष कृपा प्राप्त करने का दुर्लभ अवसर है। इस पावन काल में कथा श्रवण, नामस्मरण, सेवा और सत्संग से मनुष्य के जीवन में आध्यात्मिक जागरण होता है तथा उसे आत्मिक शांति और ईश्वर कृपा की प्राप्ति होती है।”
महाराजश्री के इन प्रेरणादायी विचारों ने कथा पंडाल में उपस्थित श्रद्धालुओं को गहराई से प्रभावित किया तथा सम्पूर्ण वातावरण को भक्तिमय बना दिया।
भागवत महात्म्य, ज्ञान, वैराग्य और गोकर्णोपाख्यान का हुआ भावपूर्ण वर्णन
ज्ञानयज्ञ के प्रथम दिवस कथा व्यास श्री नवराज प्रपन्न जी महाराज ने भागवत महात्म्य, ज्ञान, वैराग्य, भक्ति, गोकर्णोपाख्यान तथा सप्ताह विधि जैसे महत्वपूर्ण प्रसंगों पर विस्तृत प्रकाश डाला।

अपने प्रवचन में महाराजश्री ने कहा कि कलियुग में भगवान का स्मरण, सत्संग और श्रीमद्भागवत कथा का श्रवण ही मानव जीवन को सफल बनाने का सबसे सरल एवं प्रभावी साधन है।
उन्होंने कहा कि “जहाँ भागवत कथा होती है, वहाँ स्वयं भगवान श्रीहरि का वास होता है। भागवत कथा केवल सुनने का विषय नहीं, बल्कि जीवन में उतारने का संदेश देती है। यह कथा मनुष्य को मोह, लोभ, क्रोध और अहंकार से मुक्त कर भक्ति, प्रेम और सेवा के मार्ग पर अग्रसर करती है।”
महाराजश्री ने श्रद्धालुओं से अपने जीवन में धर्म, दया, सेवा, त्याग एवं संस्कारों को अपनाने का आह्वान भी किया।
धर्मप्रेमियों से कथा श्रवण एवं धर्मलाभ का आग्रह
आयोजक परिवार के सदस्य जयप्रकाश बेरीवाल एवं राजेश बेरीवाल ने बताया कि श्रीमद्भागवत सप्ताह ज्ञानयज्ञ का आयोजन समाज में आध्यात्मिक जागृति, धार्मिक संस्कारों के संरक्षण तथा युवा पीढ़ी को भारतीय संस्कृति से जोड़ने के उद्देश्य से किया जा रहा है।

उन्होंने समस्त धर्मप्रेमी श्रद्धालुओं से आग्रह करते हुए कहा कि वे अपने परिवार सहित कथा स्थल पर पहुंचकर श्रीमद्भागवत कथा का श्रवण करें और इस दुर्लभ आध्यात्मिक अवसर का लाभ उठाएं।
उन्होंने कहा कि पुरुषोत्तम मास में भगवान श्रीकृष्ण की कथा श्रवण का विशेष महत्व माना गया है तथा इस पावन अवसर पर प्राप्त धर्मलाभ जीवन को नई दिशा और आध्यात्मिक ऊर्जा प्रदान करता है।
पूरा सप्ताह रहेगा भक्ति, अध्यात्म और धर्मचेतना का महाकुंभ
15 जून तक चलने वाले इस सप्ताहव्यापी ज्ञानयज्ञ में प्रतिदिन श्रीमद्भागवत के विभिन्न प्रसंगों का विस्तृत वर्णन किया जाएगा। आयोजकों ने श्रद्धालुओं के लिए बैठने, प्रसाद, जलपान, पार्किंग एवं अन्य आवश्यक सुविधाओं की भी समुचित व्यवस्था की है।

डिब्रूगढ़ में आयोजित यह भव्य धार्मिक आयोजन न केवल आध्यात्मिक चेतना का संचार कर रहा है, बल्कि सनातन संस्कृति, पारिवारिक मूल्यों, सामाजिक समरसता एवं धार्मिक एकता को भी सुदृढ़ करने का कार्य कर रहा है। कथा स्थल पर प्रतिदिन उमड़ रही श्रद्धालुओं की भीड़ इस बात का प्रमाण है कि आज भी समाज में धर्म, अध्यात्म और भारतीय संस्कृति के प्रति अटूट आस्था एवं गहरा विश्वास विद्यमान है।
डिब्रुगढ़ से संदीप अग्रवाल की रिपोर्ट।




