शेट्टी आयोग की सिफारिशों के पूर्ण क्रियान्वयन की मांग पर असम के न्यायिक कर्मचारियों की दो दिवसीय हड़ताल शुरू : शिवसागर जिला न्यायालय सहित पूरे राज्य में सामूहिक कार्य बहिष्कार और शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन : सुप्रीम कोर्ट के आदेश के पूर्ण पालन एवं लंबित सेवा संबंधी मांगों को लेकर बुलंद हुई आवाज
सेवा नियम, पदोन्नति, वेतन विसंगतियां, ग्रेड पे, भत्ते, चिकित्सा सुविधा और पुरानी पेंशन बहाली सहित कई मांगों पर सरकार से शीघ्र निर्णय की अपील

शिवसागर, 15 जुलाई : अखिल असम न्यायिक कर्मचारी संघ (ऑल असम जुडिशियल एंप्लाइज एसोसिएशन – AAJEA) के आह्वान पर बुधवार से शिवसागर जिला न्यायालय सहित राज्य के सभी जिला न्यायालयों में दो दिवसीय सर्वात्मिक कार्य बहिष्कार एवं शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन शुरू हो गया। न्यायिक कर्मचारियों ने न्यायमूर्ति शेट्टी आयोग की सिफारिशों के अनुरूप सुप्रीम कोर्ट द्वारा WP(C) No. 1022/1989 में 7 अक्टूबर 2009 को दिए गए आदेश का असम में अब तक पूर्ण रूप से क्रियान्वयन नहीं किए जाने पर कड़ा विरोध दर्ज कराया।

कर्मचारियों का कहना है कि वर्षों से सरकार एवं संबंधित प्राधिकारियों के समक्ष विभिन्न माध्यमों से अपनी मांगें रखी जाती रही हैं, लेकिन अब तक कोई ठोस समाधान नहीं निकलने के कारण उन्हें लोकतांत्रिक तरीके से आंदोलन का रास्ता अपनाना पड़ा।
शिवसागर जिला न्यायालय परिसर में कर्मचारियों की बड़ी भागीदारी
शिवसागर जिला न्यायालय परिसर में आयोजित विरोध प्रदर्शन में जिला एवं सत्र न्यायाधीश कार्यालय तथा मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी (सीजेएम) कार्यालय के कर्मचारियों ने बड़ी संख्या में भाग लिया।
आंदोलन में मुख्य प्रशासनिक अधिकारी अनिमेष दास, प्रोटोकॉल अधिकारी विद्युत विकास बरबरुआ, सिस्टम्स ऑफिसर जितुल बोरा, मुख्य प्रशासनिक अधिकारी कैलाश राजकुंवर सहित न्यायालय के विभिन्न अनुभागों के कर्मचारी उपस्थित रहे।
कार्यक्रम के आधिकारिक प्रवक्ता एवं वरिष्ठ प्रशासनिक सहायक प्रशांत बोरठाकुर ने आंदोलन की पृष्ठभूमि, उद्देश्य तथा कर्मचारियों की मांगों को विस्तार से रखा। उनके साथ दोनों न्यायिक प्रतिष्ठानों के अधिकारी एवं कर्मचारी एकजुट होकर विरोध प्रदर्शन में शामिल हुए।
सुप्रीम कोर्ट के आदेश के पूर्ण पालन की प्रमुख मांग
संघ का कहना है कि सुप्रीम कोर्ट द्वारा स्वीकृत शेट्टी आयोग की सिफारिशों का असम में आज तक पूर्ण रूप से क्रियान्वयन नहीं किया गया है। कर्मचारियों ने मांग की कि न्यायिक कर्मचारियों के सेवा नियम तत्काल प्रकाशित किए जाएं तथा वर्षों से लंबित प्रशासनिक सुधारों को बिना और विलंब के लागू किया जाए।
पदोन्नति, नए पदों और विशेष भत्तों की भी मांग
प्रदर्शनकारी कर्मचारियों ने मांग की कि पुराने जिलों में बेंच क्लर्क ग्रेड-I, ग्रेड-II एवं ग्रेड-III के पद सृजित किए जाएं तथा चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों के लिए 25 प्रतिशत पदोन्नति कोटा लागू किया जाए।
इसके अलावा स्टेनोग्राफर, वाहन चालक, रिकॉर्ड कीपर एवं अन्य पात्र कर्मचारियों को विशेष भत्ता प्रदान करने तथा लोक अदालतों के दौरान अवकाश के दिनों में कार्य करने वाले कर्मचारियों को मूल वेतन का 5 प्रतिशत अतिरिक्त पारिश्रमिक दिए जाने की मांग भी प्रमुखता से उठाई गई।
वेतन विसंगतियां दूर करने और ओपीएस बहाली की उठी मांग
संघ ने ROP-2017 में मौजूद वेतन विसंगतियों को दूर करने, विभिन्न पदोन्नति पदों के सृजन, मुख्य प्रशासनिक अधिकारी के पद एवं वेतनमान में समानता सुनिश्चित करने, पात्र कर्मचारियों को 8,700 ग्रेड पे, चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों को 4,400 ग्रेड पे, प्रोसेस सर्वरों के यात्रा भत्ते में वृद्धि तथा न्यायिक अधिकारियों के समान चिकित्सा प्रतिपूर्ति सुविधा उपलब्ध कराने की मांग भी रखी।
इसके साथ ही कर्मचारियों ने नई पेंशन योजना (NPS) को समाप्त कर पुरानी पेंशन योजना (OPS) लागू करने की मांग भी दोहराई।
‘टकराव नहीं, न्यायोचित अधिकारों के लिए आंदोलन’
संगठन के पदाधिकारियों ने स्पष्ट किया कि यह आंदोलन किसी प्रकार का टकराव उत्पन्न करने के उद्देश्य से नहीं, बल्कि न्यायिक कर्मचारियों के वैध अधिकार, सम्मान और सेवा संबंधी न्याय प्राप्त करने के लिए किया जा रहा है।
उन्होंने कहा कि वर्षों तक ज्ञापन, वार्ता और प्रतिनिधिमंडलों के माध्यम से समाधान का प्रयास किया गया, लेकिन अपेक्षित कार्रवाई नहीं होने के कारण शांतिपूर्ण लोकतांत्रिक विरोध ही अंतिम विकल्प बचा।

मांगें नहीं मानी गईं तो आंदोलन होगा और व्यापक
प्रदर्शनकारी कर्मचारियों ने चेतावनी दी कि यदि 15 और 16 जुलाई तक चलने वाले इस दो दिवसीय कार्य बहिष्कार के बाद भी उनकी मांगों पर सकारात्मक निर्णय नहीं लिया गया, तो आगामी दिनों में आंदोलन को और अधिक व्यापक तथा तीव्र किया जाएगा।
उन्होंने राज्य सरकार एवं संबंधित प्राधिकारियों से संवेदनशीलता और गंभीरता के साथ वर्षों से लंबित समस्याओं का शीघ्र समाधान करने की अपील की।
राज्यभर के जिला न्यायालयों में एक साथ विरोध प्रदर्शन
उल्लेखनीय है कि शिवसागर के साथ-साथ असम के सभी जिला न्यायालयों में ऑल असम जुडिशियल एंप्लाइज एसोसिएशन के आह्वान पर यह दो दिवसीय सर्वात्मिक कार्य बहिष्कार एवं विरोध प्रदर्शन आयोजित किया जा रहा है।
संघ का दावा है कि राज्यभर के न्यायिक कर्मचारियों ने अभूतपूर्व एकजुटता का परिचय देते हुए आंदोलन में भाग लिया है और उम्मीद जताई है कि सरकार उनकी न्यायोचित मांगों पर शीघ्र सकारात्मक निर्णय लेकर वर्षों से लंबित समस्याओं का स्थायी समाधान करेगी।
इन कर्मचारियों की रही प्रमुख उपस्थिति
शिवसागर जिला न्यायालय परिसर में आयोजित विरोध कार्यक्रम में भास्कर दिहिंगिया, प्रशांत बोरठाकुर, जयदीप बरुआ, अनिल गोगोई सहित न्यायालय की विभिन्न शाखाओं के कर्मचारी बड़ी संख्या में उपस्थित रहे और अपनी मांगों के समर्थन में शांतिपूर्ण ढंग से प्रदर्शन किया।



