जल संरक्षण को जनआंदोलन बनाने की दिशा में चूरू का अनूठा मॉडल : भामाशाहों, प्रवासियों और स्वयंसेवी संगठनों की भागीदारी से जल स्रोतों के पुनर्जीवन को मिली नई गति
‘वंदे गंगा : जल संरक्षण जन अभियान’ के तहत मीडिया राउंड टेबल में जिला कलक्टर अभिषेक सुराणा ने साझा की उपलब्धियां

चूरू, 3 जून : मरुस्थलीय राजस्थान में जल संकट कोई नई समस्या नहीं है, लेकिन चूरू जिले में जल संरक्षण को लेकर जिस प्रकार प्रशासन, भामाशाह, प्रवासी नागरिक, स्वयंसेवी संगठन और आमजन एक मंच पर आकर कार्य कर रहे हैं, वह पूरे प्रदेश के लिए एक प्रेरणादायक मॉडल बनता जा रहा है। मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के निर्देशानुसार संचालित ‘वंदे गंगा : जल संरक्षण जन अभियान’ के तहत जिले में जल स्रोतों के संरक्षण, पुनर्जीवन और वर्षा जल संचयन को लेकर व्यापक स्तर पर कार्य किए जा रहे हैं।
इसी अभियान के अंतर्गत बुधवार को जिला परिषद सभागार में मीडिया राउंड टेबल कार्यक्रम का आयोजन किया गया। जिला कलक्टर अभिषेक सुराणा एवं जिला परिषद की मुख्य कार्यकारी अधिकारी श्वेता कोचर ने मीडिया प्रतिनिधियों के साथ संवाद करते हुए अभियान की उपलब्धियों, चुनौतियों और भविष्य की कार्ययोजना की विस्तृत जानकारी साझा की।
मीडिया बने जल संरक्षण अभियान का सबसे बड़ा जनसंदेशवाहक : सुराणा
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए जिला कलक्टर अभिषेक सुराणा ने कहा कि जल संरक्षण केवल सरकारी कार्यक्रम नहीं, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के भविष्य को सुरक्षित करने का सामूहिक संकल्प है। उन्होंने कहा कि मीडिया समाज में जागरूकता फैलाने का सबसे प्रभावी माध्यम है और यदि जल संरक्षण का संदेश गांव-गांव और घर-घर तक पहुंचता है तो यह अभियान एक व्यापक जनआंदोलन का स्वरूप ले सकता है।
उन्होंने कहा कि जिले में पारंपरिक जल स्रोतों के संरक्षण, तालाबों की सफाई, जोहड़ों के पुनर्जीवन, वर्षा जल संचयन संरचनाओं के निर्माण और पर्यावरण संरक्षण से जुड़े कार्यों को प्राथमिकता दी जा रही है। इन प्रयासों का उद्देश्य केवल जल संग्रहण बढ़ाना नहीं, बल्कि भूजल स्तर में सुधार लाना और भविष्य के जल संकट को कम करना भी है।
भामाशाह, प्रवासी और एनजीओ बने अभियान की सबसे बड़ी ताकत
जिला कलक्टर ने बताया कि ‘कर्मभूमि से मातृभूमि’ अभियान के तहत देश-विदेश में बसे प्रवासी चूरूवासी, स्थानीय भामाशाह, उद्योगपति, सामाजिक संगठन और स्वयंसेवी संस्थाएं जल संरक्षण कार्यों में सक्रिय योगदान दे रही हैं। इनकी भागीदारी से कई गांवों में पुराने जोहड़ों, तालाबों, कुओं और अन्य पारंपरिक जल स्रोतों का जीर्णोद्धार किया जा रहा है।
उन्होंने बताया कि अनेक स्वयंसेवी संगठनों और गैर-सरकारी संस्थाओं (NGOs) द्वारा पारंपरिक जल स्रोतों को ‘गोद लेने’ की अभिनव पहल की गई है। इन संस्थाओं के सहयोग से जलाशयों की सफाई, गहरीकरण, मरम्मत, तटबंध निर्माण, पौधारोपण तथा दीर्घकालिक संरक्षण के कार्य किए जा रहे हैं। इससे न केवल जल स्रोतों की उपयोगिता बढ़ी है, बल्कि ग्रामीण क्षेत्रों में जल संरक्षण के प्रति सामाजिक चेतना भी विकसित हुई है।
सुराणा ने कहा कि सरकार की योजनाओं और समाज की भागीदारी का यह समन्वय भविष्य में जल संकट से निपटने की दिशा में महत्वपूर्ण साबित होगा।

12 हजार से अधिक कार्यक्रम, डेढ़ लाख से ज्यादा लोगों की भागीदारी
जिला कलक्टर ने बताया कि जिले में विभिन्न विभागों के समन्वय से ग्राम स्तर से लेकर जिला स्तर तक 12 हजार से अधिक कार्यक्रमों का आयोजन किया जा चुका है, जिनमें 1.5 लाख से अधिक लोगों ने सक्रिय भागीदारी निभाई है।
इन कार्यक्रमों के माध्यम से जल संरक्षण, वर्षा जल संचयन, जल स्रोतों के संरक्षण, पर्यावरण सुरक्षा एवं सामुदायिक भागीदारी को बढ़ावा दिया जा रहा है। मुख्यमंत्री जल स्वावलंबन अभियान के तहत भी जलग्रहण क्षेत्रों में अनेक विकास कार्य कराए गए हैं, जिनका सकारात्मक प्रभाव दिखाई देने लगा है।
हरियालो राजस्थान अभियान की तैयारियां तेज
अभिषेक सुराणा ने बताया कि वंदे गंगा अभियान के साथ-साथ आगामी ‘हरियालो राजस्थान अभियान’ की तैयारियां भी व्यापक स्तर पर की जा रही हैं। वन विभाग के सहयोग से जिले में खेजड़ी वाटिकाओं का विकास किया गया है, जबकि ग्रामीण विकास विभाग के समन्वय से ग्राम पंचायत स्तर पर पौधशालाएं और नर्सरियां तैयार की गई हैं।
इन नर्सरियों का संचालन राजीविका महिला समूहों के माध्यम से किया जा रहा है, जिससे महिलाओं को रोजगार के अवसर भी प्राप्त हो रहे हैं और पर्यावरण संरक्षण को भी बढ़ावा मिल रहा है।
पंचायत स्तर तक पहुंचा जल संरक्षण अभियान
मुख्य कार्यकारी अधिकारी श्वेता कोचर ने बताया कि ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में जल स्रोतों की पहचान, सफाई, गहरीकरण, पौधारोपण, श्रमदान और जनजागरूकता गतिविधियों को प्राथमिकता दी जा रही है। पंचायत स्तर तक अभियान को प्रभावी ढंग से संचालित किया जा रहा है ताकि प्रत्येक नागरिक इस मुहिम का भागीदार बन सके।
उन्होंने कहा कि विभिन्न विभागों के समन्वय से जल संरक्षण, भूजल संवर्धन और पर्यावरण संरक्षण संबंधी गतिविधियों को निरंतर गति दी जा रही है।

मीडिया ने दिए महत्वपूर्ण सुझाव
कार्यक्रम के दौरान मीडिया प्रतिनिधियों ने अभियान को और अधिक प्रभावी बनाने के लिए कई महत्वपूर्ण सुझाव दिए। उन्होंने सामाजिक संगठनों, युवाओं, स्वयंसेवी संस्थाओं और शिक्षण संस्थानों की भागीदारी बढ़ाने, पारंपरिक जल स्रोतों के संरक्षण को सर्वोच्च प्राथमिकता देने तथा जनजागरूकता कार्यक्रमों को और व्यापक बनाने पर जोर दिया।
जिला कलक्टर ने सभी सुझावों का स्वागत करते हुए उन्हें अभियान की आगामी कार्ययोजना में शामिल करने का आश्वासन दिया।
जनगणना-2027 पर भी हुई चर्चा
मीडिया संवाद के दौरान जिला कलक्टर ने जनगणना-2027 के प्रथम चरण ‘मकान सूचीकरण एवं मकानों की गणना’ के तहत जिले में चल रही गतिविधियों की भी जानकारी दी। वहीं सांख्यिकी उपनिदेशक डॉ. रामगोपाल सेपट ने जनगणना कार्यों की प्रगति और प्रक्रियाओं पर विस्तार से प्रकाश डाला।
कार्यक्रम में पीआरओ सूर्यकांत कुमावत ने अतिथियों का स्वागत किया तथा एपीआरओ मनीष कुमार ने कार्यक्रम का संचालन करते हुए इसकी रूपरेखा प्रस्तुत की।
इस अवसर पर सहायक प्रशासनिक अधिकारी रामचंद्र गोयल, सहायक प्रोग्रामर सुनील ढाका, गुरप्रीत लबाना, मंगेज सिंह, प्रदीप कुमार माली, संजय गोयल, विजय रक्षक, मोहित चौबे, दूलीचंद, राजकुमार सहित बड़ी संख्या में मीडिया प्रतिनिधि एवं अधिकारी उपस्थित रहे।
कार्यक्रम के अंत में सभी उपस्थित जनों ने जल संरक्षण, जल स्रोतों के पुनर्जीवन और पर्यावरण संरक्षण के लिए सामूहिक रूप से कार्य करने का संकल्प लिया तथा यह संदेश दिया कि जल बचाना केवल आवश्यकता नहीं, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के प्रति हमारी जिम्मेदारी भी है।




