आतंक का पर्याय बना विशालकाय जंगली भालू आखिरकार ट्रैंकुलाइज होकर पकड़ा गया : मरियानी के पुखुरिया डेकागांव में वन विभाग की विशेष टीम की सफल कार्रवाई : स्थानीय लोगों ने ली राहत की सांस

जितेंद्र सोमानी, जोरहाट
जोरहाट, 19 मई : पिछले कई दिनों से जोरहाट और गोलाघाट जिलों के विभिन्न इलाकों में दहशत फैला रहे एक विशालकाय जंगली भालू को वन विभाग की टीम ने कड़ी मशक्कत के बाद सफलतापूर्वक ट्रैंकुलाइज कर काबू में ले लिया। मंगलवार को मरियानी क्षेत्र के पुखुरिया डेकागांव में मुकुल सैकिया के घर परिसर में यह कार्रवाई अंजाम दी गई।

सोमवार सुबह मरियानी के डकलंगिया डेका गांव में अचानक अफरा-तफरी मच गई, जब यह विशाल भालू आबादी वाले इलाके में घूमता हुआ मुकुल सैकिया के घर के बरामदे तक पहुंच गया। घर के इतने करीब भालू को देखकर परिवार के सदस्यों और आसपास के ग्रामीणों में भय का माहौल फैल गया। देखते-ही-देखते बड़ी संख्या में स्थानीय लोग मौके पर जमा हो गए और पूरे क्षेत्र में दहशत छा गई।

घटना की सूचना मिलते ही वन विभाग की टीम तुरंत मौके पर पहुंची। इलाके की घेराबंदी कर निगरानी शुरू कर दी गई। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए काजीरंगा राष्ट्रीय उद्यान से विशेषज्ञ चिकित्सकों की एक टीम को भी मरियानी बुलाया गया।
लंबे प्रयास के बाद सफलता :
मंगलवार को विशेषज्ञ टीम के लंबे प्रयासों और सतर्क अभियान के बाद भालू को ट्रैंकुलाइज कर सुरक्षित रूप से कब्जे में ले लिया गया। विभागीय सूत्रों के अनुसार, यही भालू पिछले कई दिनों से जोरहाट-गोलाघाट क्षेत्र के विभिन्न गांवों और जंगली इलाकों में विचरण कर रहा था, जिससे स्थानीय लोगों में लगातार भय बना हुआ था।

ट्रैंकुलाइजेशन के बाद वन विभाग की टीम ने भालू को सुरक्षा व्यवस्था के साथ मरियानी वन क्षेत्रीय अधिकारी कार्यालय पहुंचाया। अभी यह स्पष्ट नहीं किया गया है कि भालू को आगे किस जंगल या संरक्षित क्षेत्र में छोड़ा जाएगा, लेकिन विभाग इसे प्राकृतिक आवास में वापस छोड़ने की तैयारी में है।
स्थानीय लोगों की प्रतिक्रिया :
भालू के पकड़े जाने की खबर फैलते ही स्थानीय निवासियों ने राहत की सांस ली। कई लोगों ने कहा कि पिछले दिनों भालू के साये में घर से बाहर निकलना भी मुश्किल हो गया था। महिलाएं और बच्चे विशेष रूप से डरे हुए थे।
वन विभाग ने स्थानीय लोगों से अपील की है कि जंगलों के आसपास या आबादी वाले क्षेत्रों में किसी भी जंगली जानवर के दिखाई देने पर तुरंत विभाग को सूचना दें। जानवरों के करीब जाने या उन्हें उकसाने की कोशिश न करें, क्योंकि इससे दोनों पक्षों को नुकसान हो सकता है।

पृष्ठभूमि और महत्व :
असम के जोरहाट-गोलाघाट क्षेत्र में मानव-वन्यजीव संघर्ष की घटनाएं समय-समय पर देखी जाती हैं। काजीरंगा और आसपास के जंगलों से जानवरों का आबादी वाले इलाकों में भटकना आम है, खासकर भोजन की तलाश में। वन विभाग ऐसे मामलों में ट्रैंकुलाइजेशन जैसी सुरक्षित विधियों का इस्तेमाल कर जानवरों को उनके प्राकृतिक आवास में वापस भेजता है। इस सफल अभियान से न केवल स्थानीय लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित हुई है, बल्कि भालू की जान भी बची है।
यह घटना वन्यजीव संरक्षण और मानव सुरक्षा के बीच संतुलन बनाए रखने की जरूरत को रेखांकित करती है। वन विभाग की टीम की सराहना की जा रही है।




