ऐतिहासिक ढेकीयाखोवा बरनामघर पहुंचे स्वास्थ्य मंत्री अशोक सिंघल : मत्था टेककर की पूजा-अर्चना, प्रदेश की सुख-समृद्धि और जनकल्याण की कामना : पारंपरिक असमिया रीति-रिवाज से हुआ सम्मान : विधायक विकास सैकिया और धीरज गोवाला भी रहे उपस्थित

टियोक, 1 जुलाई : असम सरकार के स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण, चिकित्सा शिक्षा एवं अनुसंधान मंत्री अशोक सिंघल ने बुधवार को टियोक विधानसभा क्षेत्र स्थित ऐतिहासिक ढेकीयाखोवा बरनामघर पहुंचकर श्रद्धापूर्वक दर्शन किए तथा पूजा-अर्चना कर प्रदेश की सुख-समृद्धि, शांति और जनकल्याण की कामना की। धार्मिक वातावरण और हरिनाम संकीर्तन के बीच संपन्न हुआ यह कार्यक्रम आस्था, संस्कृति और असम की समृद्ध वैष्णव परंपरा का अनुपम उदाहरण बन गया।

असम की वैष्णव परंपरा का ऐतिहासिक तीर्थस्थल
ढेकीयाखोवा बरनामघर असम की वैष्णव सांस्कृतिक विरासत का एक अत्यंत प्रतिष्ठित धार्मिक केंद्र माना जाता है। लोकमान्यता के अनुसार इसकी स्थापना लगभग पाँच सौ वर्ष पूर्व महान वैष्णव संत श्रीमंत माधवदेव ने की थी। यह बरनामघर न केवल धार्मिक आस्था का केंद्र है, बल्कि असम की सामाजिक और सांस्कृतिक चेतना का भी एक महत्वपूर्ण प्रतीक माना जाता है।
इस पवित्र स्थल की सबसे बड़ी विशेषता यहां सदियों से निरंतर प्रज्वलित अखंड दीप (अक्षय बंती) तथा नियमित रूप से होने वाला हरिनाम संकीर्तन है, जो देश-विदेश से आने वाले हजारों श्रद्धालुओं को अपनी ओर आकर्षित करता है। पूरे वर्ष यहां धार्मिक अनुष्ठान, नाम-प्रसंग और विभिन्न आध्यात्मिक कार्यक्रम आयोजित होते रहते हैं।

पूजा-अर्चना कर जनकल्याण की कामना
स्वास्थ्य मंत्री अशोक सिंघल ने बरनामघर में मत्था टेककर भगवान से राज्य के सभी नागरिकों के उत्तम स्वास्थ्य, सुख-समृद्धि, शांति और खुशहाली की प्रार्थना की। उन्होंने श्रद्धाभाव से नामघर में सेवा अर्पित की और वैष्णव परंपरा के अनुरूप धार्मिक अनुष्ठानों में भाग लिया।
मंत्री ने कहा कि असम की धार्मिक एवं सांस्कृतिक धरोहर राज्य की पहचान है और इन पवित्र स्थलों से समाज को आध्यात्मिक ऊर्जा एवं सामाजिक एकता की प्रेरणा मिलती है।

श्रद्धालुओं ने किया आत्मीय स्वागत
मंत्री के आगमन पर बरनामघर परिसर में उपस्थित श्रद्धालुओं ने जयघोष के साथ उनका स्वागत किया। पूरे परिसर में भक्ति और श्रद्धा का वातावरण बना रहा। हरिनाम संकीर्तन की मधुर ध्वनि के बीच बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने कार्यक्रम में भाग लेकर आध्यात्मिक वातावरण का अनुभव किया।

पारंपरिक असमिया सम्मान से किया अभिनंदन
इस अवसर पर बरनामघर प्रबंधन समिति ने स्वास्थ्य मंत्री अशोक सिंघल का पारंपरिक असमिया रीति-रिवाज के अनुसार चेलेंग, गामोचा, सोंफुरा (Xorai) तथा धार्मिक ग्रंथ भेंट कर सम्मानित किया। समिति के पदाधिकारियों ने उन्हें बरनामघर के इतिहास, धार्मिक महत्व और यहां की प्राचीन परंपराओं की जानकारी भी दी।

विधायक विकास सैकिया और धीरज गोवाला भी रहे मौजूद
इस अवसर पर टियोक के विधायक विकास सैकिया तथा तिताबर के विधायक धीरज गोवाला भी स्वास्थ्य मंत्री के साथ उपस्थित रहे। दोनों जनप्रतिनिधियों ने भी बरनामघर में पूजा-अर्चना कर प्रदेश की उन्नति और जनकल्याण की कामना की।

आस्था और सांस्कृतिक विरासत का सुंदर संगम
कार्यक्रम में बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं, स्थानीय गणमान्य नागरिकों तथा बरनामघर प्रबंधन समिति के सदस्यों की उपस्थिति रही। धार्मिक अनुष्ठानों, हरिनाम संकीर्तन और पारंपरिक सम्मान समारोह के साथ संपन्न यह आयोजन असम की समृद्ध वैष्णव संस्कृति, सामाजिक सौहार्द और आध्यात्मिक परंपरा का जीवंत प्रतीक बन गया।
ढेकीयाखोवा बरनामघर आज भी असम की धार्मिक, सांस्कृतिक और आध्यात्मिक विरासत का एक प्रमुख केंद्र है, जहां प्रतिवर्ष हजारों श्रद्धालु दर्शन और आशीर्वाद प्राप्त करने पहुंचते हैं। मंत्री का यह दौरा राज्य की सांस्कृतिक धरोहरों के प्रति सम्मान और जनआस्था के प्रति सरकार की प्रतिबद्धता का भी संदेश लेकर आया।
टियाेक से बीजू कुमार तुनवाल की रिपोर्ट।




