आपदा से मुकाबले को तैयार होंगे युवा—वीर लाचित बरफुकन कॉलेज के NSS स्वयंसेवकों को NDRF ने दिया विशेष प्रशिक्षण : बाढ़, तूफान, भूस्खलन, भूकंप और अग्निकांड जैसी आपदाओं में बचाव एवं राहत के व्यावहारिक गुर सिखाए : आपात स्थिति में प्रथम प्रतिक्रिया, प्राथमिक बचाव तकनीक और टीमवर्क पर विशेष जोर, 80 छात्र-छात्राओं ने लिया प्रशिक्षण
NDRF के इंस्पेक्टर दुवरा और कॉलेज NSS समन्वयक डॉ. सीमांत बरुआ रहे मौजूद; युवाओं में जागरूकता, आत्मविश्वास और सामाजिक जिम्मेदारी बढ़ाने की पहल

शिवसागर, 12 सितंबर : प्राकृतिक और मानवजनित आपदाओं के दौरान युवाओं को स्वयं की सुरक्षा के साथ संकट में फंसे लोगों की मदद एवं बचाव के लिए सक्षम बनाने के उद्देश्य से शिवसागर जिले के वीर लाचित बरफुकन कॉलेज में राष्ट्रीय सेवा योजना (NSS) इकाई के छात्र-छात्राओं के लिए विशेष आपदा प्रबंधन एवं बचाव प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया गया। राष्ट्रीय आपदा मोचन बल (NDRF) की पहल पर आयोजित इस कार्यक्रम में कॉलेज के 80 छात्र-छात्राओं ने भाग लेकर आपदा के समय अपनाई जाने वाली विभिन्न बचाव तकनीकों का प्रशिक्षण प्राप्त किया।

बाढ़ से भूकंप तक—विभिन्न आपदाओं से निपटने की दी जानकारी
प्रशिक्षण कार्यक्रम के दौरान विद्यार्थियों को बाढ़, तूफान, भूस्खलन, भूकंप और अग्निकांड सहित विभिन्न प्राकृतिक एवं मानवजनित आपदाओं के दौरान उत्पन्न होने वाली परिस्थितियों से निपटने के बारे में विस्तार से जानकारी दी गई।
NDRF की ओर से विद्यार्थियों को बताया गया कि किसी आपदा की स्थिति में सबसे पहले स्वयं को सुरक्षित रखते हुए किस प्रकार संकट में फंसे लोगों तक सहायता पहुंचाई जा सकती है। इसके साथ ही प्रभावित लोगों को सुरक्षित स्थान तक पहुंचाने और उपलब्ध संसाधनों का प्रभावी तरीके से इस्तेमाल करने से जुड़े व्यावहारिक पहलुओं पर भी प्रशिक्षण दिया गया।

सिर्फ जानकारी नहीं, बचाव के व्यावहारिक गुर भी सिखाए
प्रशिक्षण का विशेष जोर विद्यार्थियों को केवल सैद्धांतिक जानकारी देने के बजाय व्यावहारिक ज्ञान और प्राथमिक बचाव कौशल से परिचित कराने पर रहा। आपदा के दौरान बरती जाने वाली सावधानियां, जोखिम को कम करने के उपाय और आपातकालीन परिस्थिति में सही समय पर सही निर्णय लेने के महत्व के बारे में विद्यार्थियों को समझाया गया।
कार्यक्रम के माध्यम से NSS स्वयंसेवकों को यह जानकारी भी दी गई कि अचानक पैदा होने वाली आपात स्थिति में घबराने के बजाय व्यवस्थित तरीके से परिस्थितियों का आकलन कर सहायता एवं बचाव कार्य कैसे शुरू किया जा सकता है।

‘फर्स्ट रिस्पॉन्डर’ की भूमिका और टीमवर्क पर जोर
आपदा के शुरुआती क्षणों में स्थानीय स्तर पर उपलब्ध प्रशिक्षित लोगों की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण होती है। इसी को ध्यान में रखते हुए विद्यार्थियों को प्रथम प्रतिक्रिया (First Response) देने की प्रक्रिया और प्राथमिक स्तर पर बचाव कार्य करने के तरीकों से परिचित कराया गया।
इसके साथ ही किसी बड़े संकट के दौरान व्यक्तिगत प्रयास के बजाय समन्वित टीमवर्क के महत्व पर विशेष जोर दिया गया। विद्यार्थियों को बताया गया कि आपदा प्रबंधन में बेहतर तालमेल, अनुशासन, त्वरित प्रतिक्रिया और सामूहिक प्रयास से राहत एवं बचाव कार्य को अधिक प्रभावी बनाया जा सकता है।

80 छात्र-छात्रियों ने लिया प्रशिक्षण
इस विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रम में वीर लाचित बरफुकन कॉलेज के 80 छात्र-छात्रियों ने सक्रिय रूप से भाग लिया। कार्यक्रम का उद्देश्य NSS स्वयंसेवकों को ऐसे बुनियादी कौशल से लैस करना था, जिनका उपयोग वे आवश्यकता पड़ने पर अपने आसपास के लोगों की मदद करने में कर सकें।
प्रशिक्षण से विद्यार्थियों में आपदा प्रबंधन संबंधी जागरूकता और आत्मविश्वास बढ़ने के साथ उन्हें सामाजिक जिम्मेदारी के प्रति और अधिक संवेदनशील बनाने की उम्मीद जताई गई।

NDRF के इंस्पेक्टर दुवरा और डॉ. सीमांत बरुआ रहे मौजूद
प्रशिक्षण कार्यक्रम में राष्ट्रीय आपदा मोचन बल (NDRF) के इंस्पेक्टर दुवरा उपस्थित रहे और विद्यार्थियों को आपदा प्रबंधन तथा बचाव से जुड़े महत्वपूर्ण पहलुओं का प्रशिक्षण दिया। इस अवसर पर वीर लाचित बरफुकन कॉलेज की NSS इकाई के समन्वयक डॉ. सीमांत बरुआ भी उपस्थित रहे।
NDRF और कॉलेज की NSS इकाई के संयुक्त प्रयास से विद्यार्थियों को वास्तविक आपदा की परिस्थितियों में उपयोगी साबित होने वाले प्राथमिक कौशल और जरूरी जानकारी से परिचित कराया गया।

संकट के समय समाज की मदद के लिए तैयार होंगे NSS स्वयंसेवक
इस प्रशिक्षण का व्यापक उद्देश्य विद्यार्थियों को केवल आपदा प्रबंधन की जानकारी देना नहीं, बल्कि उनमें सामाजिक दायित्व, सेवा भावना और संकट के समय आगे बढ़कर मदद करने की क्षमता विकसित करना भी रहा।
उम्मीद जताई गई कि इस तरह के प्रशिक्षण से कॉलेज के NSS स्वयंसेवक भविष्य में किसी प्राकृतिक अथवा मानवजनित आपदा की स्थिति में अधिक सजग और आत्मविश्वास के साथ प्रतिक्रिया दे सकेंगे तथा प्रभावित लोगों तक समय पर और प्रभावी सहायता पहुंचाने में उपयोगी भूमिका निभा सकेंगे।




