शिवसागर में गूंजा ‘मानुहे मानुहोर बाबे’, 100 से अधिक युवतियों ने सुरों से दी भूपेन दा को श्रद्धांजलि : भारत रत्न डॉ. भूपेन हजारिका की जन्म शताब्दी पर आसू का विशेष आयोजन, कालजयी गीतों के जरिए महान कलाकार की विरासत और आदर्शों का स्मरण : लक्ष्मीनाथ बेजबरुआ शिशु उद्यान में सामूहिक गीत प्रस्तुति बनी आकर्षण का केंद्र, विशिष्ट कलाकार जयंत दत्ता ने प्रतिमा पर किया माल्यार्पण
मानवता और भाईचारे का संदेश लेकर एक स्वर में गूंजा अमर गीत, नई पीढ़ी को भूपेन दा के विचारों से जोड़ने की पहल : शाम को दीप प्रज्वलन कर महान कलाकार को किया नमन, जिला व आंचलिक छात्र संघ के पदाधिकारी रहे मौजूद

शिवसागर, 8 सितंबर : असमिया संगीत, साहित्य और संस्कृति को अपनी कालजयी रचनाओं के माध्यम से विश्व पटल पर विशिष्ट पहचान दिलाने वाले महान कलाकार एवं भारत रत्न डॉ. भूपेन हजारिका की जन्म शताब्दी के अवसर पर मंगलवार को शिवसागर में श्रद्धा, संगीत और सांस्कृतिक चेतना का अनूठा संगम देखने को मिला। ऑल असम स्टूडेंट्स यूनियन (आसू) के आह्वान पर अखिल शिवसागर जिला छात्र संघ की पहल से आयोजित विशेष कार्यक्रम में भूपेन दा के अमर गीतों, मानवीय विचारों और सामाजिक समरसता के संदेश को याद करते हुए उन्हें भावपूर्ण श्रद्धांजलि अर्पित की गई।
समारोह का सबसे आकर्षक और भावपूर्ण क्षण तब आया, जब 100 से अधिक युवतियों ने एक साथ भूपेन हजारिका का कालजयी गीत ‘मानुहे मानुहोर बाबे’ प्रस्तुत किया। सामूहिक स्वर में गूंजे मानवता और भाईचारे के इस अमर संदेश ने पूरे वातावरण को भूपेनमय कर दिया।

जन्म शताब्दी ने आयोजन को दिया विशेष महत्व
आसू की ओर से प्रत्येक वर्ष डॉ. भूपेन हजारिका की जयंती उनके आदर्शों और सांस्कृतिक योगदान को याद करते हुए मनाई जाती रही है। इस वर्ष उनकी जन्म शताब्दी होने के कारण कार्यक्रम का महत्व और बढ़ गया। राज्य के विभिन्न हिस्सों में आयोजित कार्यक्रमों की कड़ी में शिवसागर में भी भूपेन दा की स्मृतियों को संजोते हुए विशेष आयोजन किया गया।
कार्यक्रम का उद्देश्य केवल महान कलाकार को श्रद्धांजलि अर्पित करना ही नहीं, बल्कि नई पीढ़ी को उनके संगीत, साहित्य, मानवीय मूल्यों, सामाजिक समरसता और सांस्कृतिक चेतना से परिचित कराना भी रहा। आयोजकों ने भूपेन हजारिका की उस विरासत को आगे बढ़ाने का संदेश दिया, जिसमें कला और संगीत को समाज तथा मानवता से जोड़कर देखा गया है।

100 से अधिक युवतियों के स्वर में गूंजा ‘मानुहे मानुहोर बाबे’
जन्म शताब्दी समारोह का मुख्य आकर्षण शिवसागर शहर में दिखौ पुल के समीप स्थित लक्ष्मीनाथ बेजबरुआ शिशु उद्यान में आयोजित सामूहिक सांस्कृतिक प्रस्तुति रही। यहां 100 से अधिक युवतियां एक साथ मंच पर आईं और भूपेन दा के प्रसिद्ध गीत ‘मानुहे मानुहोर बाबे’ को सामूहिक स्वर दिया।
बड़ी संख्या में युवतियों द्वारा एक स्वर में प्रस्तुत इस कालजयी रचना ने कार्यक्रम को विशेष भावनात्मक ऊंचाई प्रदान की। गीत के माध्यम से मानवता, परस्पर प्रेम, भाईचारे और सामाजिक एकता के उस संदेश को दोहराया गया, जिसे भूपेन हजारिका ने अपनी रचनाओं के जरिए पीढ़ियों तक पहुंचाया।
सामूहिक प्रस्तुति ने यह संदेश भी दिया कि भूपेन दा की रचनाएं केवल एक दौर तक सीमित नहीं हैं, बल्कि आज भी नई पीढ़ी को इंसानियत और सामाजिक सद्भाव की राह दिखाने की क्षमता रखती हैं।

जयंत दत्ता ने प्रतिमा पर किया माल्यार्पण, गीतों से दी श्रद्धांजलि
जन्म शताब्दी कार्यक्रम में शिवसागर के विशिष्ट कलाकार जयंत दत्ता ने भी भाग लिया। उन्होंने डॉ. भूपेन हजारिका की प्रतिमा पर माल्यार्पण कर महान कलाकार को श्रद्धापूर्वक नमन किया।
इसके बाद जयंत दत्ता ने गीत प्रस्तुत कर भूपेन दा को संगीतमय श्रद्धांजलि अर्पित की। उनकी प्रस्तुति के माध्यम से उपस्थित लोगों ने एक बार फिर सुधाकंठ की समृद्ध सांगीतिक विरासत और उनकी कालजयी रचनाओं को याद किया।

आसू के जिला और आंचलिक पदाधिकारियों ने किया नमन
कार्यक्रम में आसू के केंद्रीय कार्यकारिणी सदस्य ध्रुवज्योति कलिता, शिवसागर जिला छात्र संघ के सहायक महासचिव जिपम बोरा, शिवसागर आंचलिक छात्र संघ के अध्यक्ष मानस प्रतिम बरुआ और सचिव मनजीत हजारिका सहित जिला एवं आंचलिक छात्र संघ के कई पदाधिकारी उपस्थित रहे।
सभी ने भारत रत्न डॉ. भूपेन हजारिका को श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए असमिया समाज, संगीत, साहित्य और संस्कृति के प्रति उनके अतुलनीय योगदान का स्मरण किया। कार्यक्रम के माध्यम से उनकी सांस्कृतिक विरासत को आने वाली पीढ़ियों तक पहुंचाने का संकल्प भी व्यक्त किया गया।

दीपों की रोशनी में भूपेन दा की स्मृतियों को नमन
दिनभर चले जन्म शताब्दी कार्यक्रम की कड़ी में शाम को दीप प्रज्वलन किया गया। दीपों की रोशनी के बीच उपस्थित लोगों ने भूपेन दा की स्मृतियों को श्रद्धापूर्वक नमन किया। इस दौरान उनके विचारों, आदर्शों और सांस्कृतिक विरासत को जीवंत बनाए रखने तथा नई पीढ़ी तक पहुंचाने का संदेश दिया गया।
संगीत और दीपों के माध्यम से दी गई इस श्रद्धांजलि ने समारोह को भावपूर्ण समापन प्रदान किया।
सिर्फ महान कलाकार नहीं, मानवता और सामाजिक एकता की आवाज थे भूपेन दा
शिवसागर में आयोजित जन्म शताब्दी समारोह ने एक बार फिर रेखांकित किया कि डॉ. भूपेन हजारिका की पहचान केवल महान गायक, गीतकार और संगीतकार तक सीमित नहीं थी। वे मानवता, सामाजिक एकता, भाईचारे और असमिया सांस्कृतिक अस्मिता की सशक्त आवाज थे।
100 से अधिक युवतियों द्वारा ‘मानुहे मानुहोर बाबे’ का सामूहिक गायन, प्रतिमा पर माल्यार्पण, संगीतमय प्रस्तुति और शाम को दीप प्रज्वलन के माध्यम से शिवसागर में भूपेन दा को ऐसी श्रद्धांजलि दी गई, जिसमें उनकी कला के साथ उनके सामाजिक संदेश को भी केंद्र में रखा गया।
समारोह ने यह संदेश दिया कि समय बदलता रहेगा, लेकिन भूपेन दा के गीत, विचार और मानवता का संदेश आने वाली पीढ़ियों को भी प्रेम, भाईचारे और सामाजिक समरसता की राह दिखाता रहेगा।




