शिवसागर में बाढ़ का संकट बरकरार : राहत व्यवस्था पर उठे सवाल, पेयजल के लिए सड़क पर उतरे पीड़ित : बेतबाड़ी में एक व्यक्ति का शव बरामद, एक अन्य लापता : नाजिरा में दिखौ नदी के तेज बहाव में किशोर बहा
दरिका पार में राष्ट्रीय राजमार्ग-37 जाम : गुरुद्वारा समाज प्रतिदिन 1,200–1,500 लोगों को करा रहा भोजन : कई नदियां अब भी खतरे के निशान से ऊपर

शिवसागर, 23 जुलाई : ऊपरी असम के शिवसागर जिले में अभूतपूर्व बाढ़ का संकट गुरुवार को भी बरकरार रहा। शहर और आसपास के अनेक इलाके अब भी जलमग्न हैं, जबकि हजारों परिवार भोजन, स्वच्छ पेयजल, दवाइयों और अन्य आवश्यक सुविधाओं के अभाव में कठिन परिस्थितियों का सामना कर रहे हैं। कई स्थानों से राहत एवं बचाव कार्यों की गति और पहुंच को लेकर गंभीर सवाल उठाए गए हैं। स्थानीय लोगों का आरोप है कि प्रभावित आबादी और बाढ़ के व्यापक दायरे की तुलना में राहत अभियान पर्याप्त नहीं है तथा प्रशासन की टीमें अब भी कई अंदरूनी इलाकों तक नहीं पहुंच सकी हैं।
400 से अधिक गांव प्रभावित, जनजीवन पूरी तरह अस्त-व्यस्त
शिवसागर नगर के सभी 14 वार्ड तथा जिले की 27 ग्राम पंचायतों के अंतर्गत 400 से अधिक गांव बाढ़ से प्रभावित बताए जा रहे हैं। अनेक आवासीय क्षेत्रों, मुख्य सड़कों और बाजारों में कई दिनों से पानी जमा होने के कारण सामान्य जनजीवन पूरी तरह प्रभावित है। बड़ी संख्या में परिवार अब भी अपने घरों की ऊपरी मंजिलों, छतों अथवा ऊंचे स्थानों पर शरण लिए हुए हैं।
बेतबाड़ी में लापता व्यक्ति का शव बरामद, एक अन्य की तलाश जारी
बाढ़ के बीच बेतबाड़ी के काकती गांव से दुखद खबर सामने आई। स्थानीय जानकारी के अनुसार 55 वर्ष से अधिक आयु के गुण चेतिया बुधवार से लापता थे। गुरुवार को SDRF की टीम ने उनका शव बांस की झाड़ियों में फंसा हुआ बरामद किया। प्रारंभिक आशंका है कि तेज बहाव में बह जाने से उनकी मृत्यु हुई, हालांकि वास्तविक कारण का पता पुलिस जांच और पोस्टमार्टम रिपोर्ट के बाद ही चल सकेगा।
इसी गांव के विजय दत्ता भी बुधवार से लापता बताए जा रहे हैं। परिजन और स्थानीय लोग लगातार उनकी तलाश में जुटे हैं तथा राहत एजेंसियों से खोज अभियान तेज करने की मांग कर रहे हैं।
नाजिरा में दिखौ नदी फिर उफान पर, किशोर तेज धारा में बहा
नाजिरा में गुरुवार सुबह दिखौ नदी का जलस्तर अचानक लगभग एक मीटर बढ़ने से नदी किनारे बसे क्षेत्रों में फिर से दहशत फैल गई। बताया गया कि नागालैंड के पहाड़ी क्षेत्रों में लगातार हो रही बारिश के कारण नदी का जलस्तर तेजी से बढ़ा।
इसी बीच मठियासिगा–कोंवर गांव क्षेत्र में गुरुवार सुबह लगभग 10:30 बजे एक हृदयविदारक घटना हुई। स्थानीय जानकारी के अनुसार मेसागढ़ के गोहांई गांव निवासी कुमुद बरगोहाईं के पुत्र अम्लान बरगोहाईं अपने मित्रों के साथ बढ़ा हुआ जलस्तर देखने गए थे। इसी दौरान उनका संतुलन बिगड़ गया और वे दिखौ नदी की तेज धारा में बह गए। स्थानीय लोगों ने उन्हें बचाने का प्रयास किया, लेकिन सफलता नहीं मिल सकी। समाचार लिखे जाने तक शव बरामद नहीं हुआ था और प्रशासनिक पुष्टि का इंतजार किया जा रहा था। SDRF सहित बचाव एजेंसियों से व्यापक तलाशी अभियान चलाने की मांग की गई है।
प्रशासन ने जारी की चेतावनी
प्रशासन और पुलिस ने नागरिकों से उफनती नदियों, पुलों, तटबंधों तथा तेज बहाव वाले क्षेत्रों से दूर रहने की अपील की है। विशेष रूप से बच्चों और किशोरों को नदी का पानी देखने या वीडियो बनाने के लिए जोखिम वाले स्थानों पर न जाने की सलाह दी गई है।
केंद्रीय मंत्री पवित्र मार्घेरिटा और सांसद कामाख्या तासा ने लिया जायजा
केंद्रीय मंत्री पवित्र मार्घेरिटा तथा लोकसभा सांसद कामाख्या प्रसाद तासा ने शिवसागर और चराईदेव जिलों के बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों का दौरा कर लोगों की स्थिति का जायजा लिया। दोनों नेता रात में जेंगनीकटिया पहुंचे और प्रभावित परिवारों से बातचीत की।
मीडिया से बातचीत में सांसद कामाख्या प्रसाद तासा ने कहा कि यह बाढ़ अभूतपूर्व है और इतनी व्यापक तबाही की पहले कल्पना नहीं की गई थी। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री डॉ. हिमंत विश्व शर्मा के नेतृत्व में राज्य सरकार राहत एवं बचाव कार्यों के लिए हरसंभव प्रयास कर रही है। उन्होंने यह भी बताया कि सेना और भारतीय वायुसेना की सहायता से दुर्गम क्षेत्रों में राहत सामग्री की एयरड्रॉपिंग तथा फंसे लोगों को सुरक्षित निकालने का अभियान जारी है।
पेयजल संकट से नाराज लोगों ने NH-37 किया जाम
शिवसागर के दरिका पार क्षेत्र में शुद्ध पेयजल उपलब्ध नहीं होने से नाराज बाढ़ पीड़ितों ने प्रशासन के खिलाफ प्रदर्शन करते हुए राष्ट्रीय राजमार्ग-37 को अवरुद्ध कर दिया। प्रदर्शनकारियों का आरोप था कि कई दिनों से इलाके में बाढ़ का पानी भरा है, लेकिन पीने का साफ पानी नियमित रूप से उपलब्ध नहीं कराया जा रहा।
बाढ़ के कारण नलकूप और अन्य जलस्रोत दूषित हो चुके हैं, जिससे बच्चों, बुजुर्गों और बीमार लोगों के सामने गंभीर स्वास्थ्य संकट पैदा हो गया है। लोगों ने तत्काल बोतलबंद पानी, पानी के टैंकर, जल शुद्धिकरण की गोलियां, आवश्यक दवाइयां तथा स्वास्थ्य जांच दल भेजने की मांग की।
राहत वितरण को लेकर लोगों में असंतोष
प्रभावित क्षेत्रों से लगातार ऐसी शिकायतें सामने आ रही हैं कि राहत नौकाओं की संख्या सीमित है तथा भोजन और पेयजल का समान वितरण नहीं हो पा रहा। हालांकि प्रशासन राहत शिविरों, SDRF, NDRF, नौकाओं तथा एयरड्रॉपिंग के माध्यम से सहायता पहुंचाने का प्रयास कर रहा है, लेकिन बाढ़ का व्यापक फैलाव अंतिम छोर तक राहत पहुंचाने में बड़ी चुनौती बना हुआ है।
आपात सहायता के लिए जिला प्रशासन ने 03772-223397 तथा 8471864355 हेल्पलाइन नंबर जारी किए हैं।
सिख समाज बना मानवता की मिसाल
सरकारी राहत व्यवस्था पर उठ रहे सवालों के बीच शिवसागर सिख समाज ने मानव सेवा का प्रेरक उदाहरण प्रस्तुत किया है। शिवसागर शहर के एटी रोड़ स्थित गुरुद्वारा परिसर को सभी धर्मों और समुदायों के बाढ़ प्रभावित लोगों के लिए खोल दिया गया है। यहां बड़ी संख्या में परिवारों को आश्रय दिया जा रहा है तथा चौबीसों घंटे सामुदायिक रसोई (लंगर) संचालित की जा रही है।
गुरुद्वारा समाज प्रतिदिन लगभग 1,200 से 1,500 लोगों को भोजन उपलब्ध करा रहा है। रात में आश्रय लेने वालों की सुविधा के लिए जनरेटर से पंखे भी चलाए जा रहे हैं।
मारवाड़ी समाज ने भी बढ़ाया सहयोग का हाथ
सिख समाज के राहत अभियान में शिवसागर के मारवाड़ी समाज ने भी भोजन, राशन और अन्य आवश्यक सामग्री उपलब्ध कराकर महत्वपूर्ण सहयोग दिया है। समाज ने जिला स्वास्थ्य विभाग से गुरुद्वारा परिसर में नियमित चिकित्सा दल भेजने की मांग की है ताकि वहां रह रहे बच्चों, महिलाओं, बुजुर्गों और बीमार लोगों का समय-समय पर स्वास्थ्य परीक्षण किया जा सके।
गुरुद्वारा प्रबंधन का आरोप है कि नगर पालिका की ओर से लगभग 40 लोगों के हिसाब से ही भोजन उपलब्ध कराया गया, जबकि वहां आश्रय लेने और भोजन करने वालों की संख्या इससे कई गुना अधिक है। समाज ने वास्तविक संख्या के आधार पर राहत सामग्री उपलब्ध कराने तथा चावल, दाल, सब्जी, शिशु आहार, स्वच्छ पेयजल, दवाइयां और सैनिटरी नैपकिन जैसी आवश्यक वस्तुओं की नियमित आपूर्ति सुनिश्चित करने की मांग की है।
रात 10 बजे की जल संसाधन विभाग की रिपोर्ट : कई नदियां अब भी खतरे के निशान से ऊपर, कुछ स्थानों पर जलस्तर स्थिर तो कुछ पर गिरावट
शिवसागर जल संसाधन (W.R.) नियंत्रण कक्ष द्वारा 23 जुलाई 2026 को रात 10:00 बजे जारी नवीनतम रिपोर्ट के अनुसार, जिले की कई प्रमुख नदियां अब भी खतरे के निशान से ऊपर बह रही हैं। हालांकि कुछ नदियों में जलस्तर में गिरावट दर्ज की गई है, जबकि कई स्थानों पर पानी स्थिर बना हुआ है। ताजा आंकड़े इस प्रकार हैं—
ब्रह्मपुत्र (दिसांगमुख) : जलस्तर 90.30 मीटर, खतरे के स्तर 91.00 मीटर से नीचे, जलस्तर स्थिर।
दिहिंग (जूनगांव) : जलस्तर 98.87 मीटर, खतरे के स्तर 98.50 मीटर से 0.37 मीटर ऊपर, जलस्तर घट रहा है।
दिहिंग (दिहिंगमुख) : जलस्तर 97.61 मीटर, खतरे के स्तर 97.63 मीटर से 0.02 मीटर नीचे, जलस्तर घट रहा है।
दिसांग (नांगलामारा) : जलस्तर 95.94 मीटर, खतरे के स्तर 94.46 मीटर से 1.48 मीटर ऊपर, जलस्तर घट रहा है।
दिसांग (एटी रोड क्रॉसिंग) : जलस्तर 92.56 मीटर, खतरे के स्तर 92.00 मीटर से 0.56 मीटर ऊपर, जलस्तर घट रहा है।
दिखौ (नाजिरा) : जलस्तर 98.18 मीटर, खतरे के स्तर 96.46 मीटर से 1.72 मीटर ऊपर, जलस्तर स्थिर।
दिखौ (एटी रोड क्रॉसिंग) : जलस्तर 94.44 मीटर, खतरे के स्तर 93.30 मीटर से 1.14 मीटर ऊपर, जलस्तर स्थिर।
दिखौ (गोलगांव) : जलस्तर 89.53 मीटर, जो खतरे के स्तर 89.66 मीटर से 0.13 मीटर नीचे है, जलस्तर स्थिर।
दरिका (धाई अली) : जलस्तर 92.02 मीटर, खतरे के स्तर 90.47 मीटर से 1.55 मीटर ऊपर, जलस्तर स्थिर।
मिटोंग (एटी रोड क्रॉसिंग) : जलस्तर 90.28 मीटर, खतरे के स्तर 89.00 मीटर से 1.28 मीटर ऊपर, जलस्तर स्थिर।
दिखौ और दरिका अब भी चिंता का विषय
ताजा आंकड़ों से स्पष्ट है कि नाजिरा में दिखौ नदी अब भी खतरे के निशान से 1.72 मीटर ऊपर बह रही है, जबकि दरिका, मिटोंग और दिसांग नदियों का जलस्तर भी खतरे के स्तर से ऊपर बना हुआ है। हालांकि दिहिंग और दिसांग के कुछ माप केंद्रों पर जलस्तर में गिरावट दर्ज की गई है तथा ब्रह्मपुत्र खतरे के निशान से नीचे बनी हुई है। इसके बावजूद जल संसाधन विभाग और जिला प्रशासन ने निचले एवं नदी किनारे के इलाकों में रहने वाले लोगों को सतर्क रहने की सलाह दी है, क्योंकि कई प्रमुख नदियां अब भी खतरे के स्तर से ऊपर बह रही हैं और स्थिति पूरी तरह सामान्य नहीं हुई है।
चाय बागान, खेती और आजीविका पर गहरा असर
नाजिरा उपमंडल में लगातार बारिश और बाढ़ से चाय बागानों सहित बड़े क्षेत्र प्रभावित हुए हैं। चाय उद्योग से जुड़े संगठनों ने 57 हजार से अधिक लोगों के प्रभावित होने की जानकारी दी है। हजारों हेक्टेयर कृषि भूमि जलमग्न हो चुकी है, जिससे फसल, पशुधन, मकानों और स्थानीय व्यापार को भारी नुकसान पहुंचा है।
अब सबसे बड़ी चुनौती : स्वच्छ पेयजल और स्वास्थ्य सुरक्षा
लगातार कई दिनों तक पानी जमा रहने के कारण अब राहत एवं बचाव अभियान के साथ-साथ स्वच्छ पेयजल, साफ-सफाई, चिकित्सा सेवाएं और जलजनित रोगों की रोकथाम सबसे बड़ी चुनौती बन गई है। प्रभावित लोगों ने प्रशासन से प्रत्येक जलमग्न गांव और वार्ड में नियमित नाव सेवा, राहत वितरण केंद्र, मोबाइल मेडिकल टीम, पशु चिकित्सा दल तथा सुरक्षित पेयजल की निर्बाध व्यवस्था सुनिश्चित करने की मांग की है।
फिलहाल नाजिरा में दिखौ नदी का बढ़ता जलस्तर तथा जिले की कई अन्य नदियों का खतरे के निशान से ऊपर बने रहना इस बात का संकेत है कि शिवसागर में बाढ़ का संकट अभी पूरी तरह टला नहीं है।




