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असम की बाढ़ और भू-कटाव समस्या को राष्ट्रीय समस्या घोषित करने की मांग तेज : अजायुछाप ने शिवसागर में किया धरना प्रदर्शन : शिवसागर जिला आयुक्त के माध्यम से प्रधानमंत्री को भेजा ज्ञापन : बाढ़ और भू-कटाव के स्थायी समाधान सहित रखी चार सूत्रीय मांगें

‘हर साल हजारों करोड़ का नुकसान झेल रहा असम, राष्ट्रीय स्तर पर मिले विशेष महत्व और सहायता’ — असम जातीयतावादी युवा छात्र परिषद

शिवसागर, 6 जुलाई : असम में हर वर्ष आने वाली विनाशकारी बाढ़ और नदी कटाव की समस्या को राष्ट्रीय समस्या घोषित करने की मांग एक बार फिर तेज हो गई है। राज्य की इस गंभीर और लंबे समय से चली आ रही समस्या के स्थायी समाधान की मांग को लेकर असम जातीयतावादी युवा छात्र परिषद (अजायुछाप) ने आज शिवसागर में धरना प्रदर्शन किया।

असम जातीयतावादी युवा छात्र परिषद की शिवसागर जिला समिति के तत्वावधान में शिवसागर जिला आयुक्त कार्यालय के सामने धरना कार्यक्रम आयोजित किया गया। इस दौरान संगठन के कार्यकर्ताओं ने असम की बाढ़ और कटाव समस्या को राष्ट्रीय स्तर पर प्राथमिकता देने की मांग उठाई। धरना स्थल से ही संगठन ने शिवसागर जिला आयुक्त के माध्यम से देश के प्रधानमंत्री को एक ज्ञापन प्रेषित किया।

बाढ़ और कटाव को बताया असम की सबसे बड़ी चुनौती

असम जातीयतावादी युवा छात्र परिषद की शिवसागर जिला समिति के अध्यक्ष पलाश राजकोंवर और महासचिव प्रयास गोस्वामी द्वारा हस्ताक्षरित ज्ञापन में कहा गया कि असम देश के प्रमुख नदी प्रधान राज्यों में शामिल है। राज्य की भौगोलिक स्थिति के कारण हर वर्ष असम को विनाशकारी बाढ़ और नदी कटाव जैसी गंभीर समस्याओं का सामना करना पड़ता है।

ज्ञापन में उल्लेख किया गया कि भूटान सहित उत्तर-पूर्व भारत के विभिन्न पहाड़ी क्षेत्रों से निकलने वाली अनेक नदियां असम के मैदानी क्षेत्रों से होकर गुजरती हैं। बरसात के मौसम में इन नदियों का जलस्तर बढ़ने से राज्य के बड़े हिस्से में बाढ़ की स्थिति उत्पन्न होती है।

विशेष रूप से ब्रह्मपुत्र और उसकी सहायक नदियों के कारण हर साल लाखों लोग प्रभावित होते हैं। हजारों परिवारों को अपना घर छोड़ना पड़ता है, उपजाऊ कृषि भूमि नदी में समा जाती है और राज्य को भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ता है।

‘प्राकृतिक संसाधनों से भरपूर असम विकास में पीछे रह गया’ — अजायुछाप

संगठन ने ज्ञापन में कहा कि असम प्राकृतिक संसाधनों, उपजाऊ भूमि और खनिज संपदाओं से समृद्ध राज्य है। इसके बावजूद बाढ़ और नदी कटाव की समस्या ने राज्य के विकास को लंबे समय से प्रभावित किया है।

अजायुछाप ने कहा कि यदि असम को इस विनाशकारी समस्या से स्थायी राहत मिल जाती, तो राज्य आज देश के सबसे विकसित राज्यों में से एक बन सकता था। लेकिन हर वर्ष आने वाली बाढ़ के कारण कृषि, आधारभूत संरचना, शिक्षा, व्यापार और आम जनजीवन को भारी नुकसान पहुंचता है।

संगठन के अनुसार, बाढ़ केवल एक मौसमी प्राकृतिक आपदा नहीं है, बल्कि यह असम की अर्थव्यवस्था, सामाजिक व्यवस्था और भविष्य के विकास से जुड़ा गंभीर मुद्दा है।

हर साल हजारों करोड़ रुपये की क्षति, कृषि क्षेत्र सबसे अधिक प्रभावित

ज्ञापन में कहा गया कि बाढ़ और कटाव के कारण असम को हर वर्ष हजारों करोड़ रुपये का नुकसान झेलना पड़ता है। ग्रामीण क्षेत्रों में रहने वाले किसानों को सबसे अधिक प्रभावित होना पड़ता है।

नदी कटाव के कारण बड़ी मात्रा में कृषि योग्य भूमि खत्म हो रही है। कई परिवार वर्षों से विस्थापन की समस्या झेल रहे हैं। संगठन ने कहा कि प्रभावित लोगों के पुनर्वास और आर्थिक सुरक्षा के लिए केंद्र सरकार को विशेष योजना बनानी चाहिए।

बड़े नदी बांधों को लेकर भी जताई चिंता

असम जातीयतावादी युवा छात्र परिषद ने अपने ज्ञापन में पड़ोसी देश भूटान के साथ-साथ हाल के वर्षों में अरुणाचल प्रदेश और नागालैंड जैसे पहाड़ी राज्यों में बनाए जा रहे बड़े नदी बांधों को लेकर भी चिंता व्यक्त की।

संगठन ने कहा कि इन बांधों के कारण असम की नदियों के प्राकृतिक प्रवाह पर प्रभाव पड़ सकता है। इसके परिणामस्वरूप राज्य की भौगोलिक स्थिति, जनजीवन, सभ्यता और सांस्कृतिक पहचान पर गंभीर असर पड़ने की आशंका है।

अजायुछाप ने मांग की कि इस तरह की परियोजनाओं को लेकर वैज्ञानिक अध्ययन और असम के हितों को ध्यान में रखते हुए निर्णय लिए जाएं।

1978 से लगातार संघर्ष कर रहा है संगठन

अजायुछाप ने कहा कि असम की बाढ़ और कटाव समस्या को राष्ट्रीय समस्या घोषित करने की मांग कोई नई नहीं है। स्वतंत्रता के बाद से ही असम के लोग इस मुद्दे पर केंद्र सरकार से ठोस कदम उठाने की मांग करते आ रहे हैं।

संगठन ने कहा कि वर्ष 1978 में स्थापना के समय से ही असम जातीयतावादी युवा छात्र परिषद इस मुद्दे को लेकर आवाज उठा रही है। करीब पांच दशकों से संगठन बाढ़ और नदी कटाव के स्थायी समाधान की मांग करता आ रहा है, लेकिन अब तक किसी भी केंद्रीय सरकार द्वारा इस दिशा में अपेक्षित ठोस पहल नहीं की गई।

प्रधानमंत्री को भेजे ज्ञापन में रखी चार प्रमुख मांगें

असम जातीयतावादी युवा छात्र परिषद ने प्रधानमंत्री को भेजे गए ज्ञापन में चार प्रमुख मांगें रखीं —

पहली मांग — असम की बाढ़ और नदी कटाव समस्या को तत्काल राष्ट्रीय समस्या घोषित किया जाए।

दूसरी मांग — आधुनिक एवं वैज्ञानिक पद्धति अपनाकर बाढ़ और कटाव का स्थायी समाधान निकाला जाए।

तीसरी मांग — हालिया बाढ़ एवं नदी कटाव से प्रभावित परिवारों को उचित आर्थिक मुआवजा प्रदान किया जाए।

चौथी मांग — बाढ़ और कटाव से प्रभावित किसानों के कृषि ऋण पूरी तरह माफ किए जाएं।

केंद्र सरकार से तत्काल प्रभावी कदम उठाने की अपील

धरना प्रदर्शन के दौरान संगठन ने कहा कि असम की बाढ़ और कटाव समस्या को अब केवल राज्य की समस्या मानकर नजरअंदाज नहीं किया जाना चाहिए। यह लाखों लोगों के जीवन, रोजगार और भविष्य से जुड़ा विषय है।

असम जातीयतावादी युवा छात्र परिषद ने केंद्र सरकार से अपील की कि असमवासियों की वर्षों पुरानी मांग को गंभीरता से लेते हुए बाढ़ और नदी कटाव को राष्ट्रीय समस्या घोषित किया जाए तथा इसके स्थायी समाधान के लिए विशेष नीति और पर्याप्त आर्थिक सहायता उपलब्ध कराई जाए।

संगठन ने चेतावनी दी कि यदि इस गंभीर मुद्दे पर प्रभावी कदम नहीं उठाए गए तो आने वाले समय में जनहित में आंदोलन और तेज किया जाएगा।

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