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बीकानेर जिले के श्रीडूंगरगढ़ में नकली नोट–हवाला नेटवर्क पर पुलिस का शिकंजा : 65 लाख रुपये की संदिग्ध खेप के साथ दो युवक पकड़े गए, बोलेरो कार जब्त : असली नोटों के बीच रखे गए थे साइड-प्रिंटेड नकली नोट जैसे कागज : फरार हवाला कारोबारी की तलाश में दबिश

असली नोटों की आड़ में करोड़ों की धोखाधड़ी का खेल : 13 बंडलों में मिले केवल 13 हजार रुपये असली, बाकी निकले कूटरचित नोट : ओमप्रकाश नैन और महेंद्र उर्फ सीताराम गोदारा गिरफ्तार, फरार नेटवर्क की तलाश जारी

न्यूज डेस्क, 23 जून : राजस्थान के बीकानेर जिले में नकली नोटों और हवाला नेटवर्क से जुड़े मामलों ने पुलिस और आमजन दोनों की चिंता बढ़ा दी है। जिले में लगातार नकली नोटों, जाली मुद्रा और नोटों के आकार के प्रिंटेड कागजों से जुड़ी गतिविधियां सामने आ रही हैं। ताजा मामला श्रीडूंगरगढ़ क्षेत्र का है, जहां सोमवार रात पुलिस ने असली नोटों की आड़ में नकली नोट जैसे दिखने वाले साइड-प्रिंटेड कागजों की बड़ी खेप पकड़ी। प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, यह खेप करीब 65 लाख रुपये की रकम खपाने के उद्देश्य से तैयार की गई थी।

श्रीडूंगरगढ़ क्षेत्र में पुलिस ने नकली नोटों और हवाला कारोबार से जुड़े एक बड़े नेटवर्क का पर्दाफाश करते हुए दो आरोपियों को गिरफ्तार किया है। पुलिस ने कार्रवाई के दौरान एक बोलेरो वाहन से लगभग 65 लाख रुपये की संदिग्ध नकदी जैसी सामग्री बरामद की, जिसमें अधिकांश नोट कूटरचित (फर्जी) पाए गए। प्रारंभिक जांच में इस पूरे मामले के तार हवाला कारोबार और संगठित आर्थिक अपराध से जुड़े होने के संकेत मिले हैं।

गश्त के दौरान सामने आया बड़ा खुलासा

श्रीडूंगरगढ़ थाना पुलिस को सोमवार रात नियमित गश्त के दौरान यह सफलता मिली। थाना अधिकारी कश्यप सिंह के निर्देशन में एसआई सुरेश कुमार गुर्जर के नेतृत्व में पुलिस टीम क्षेत्र में निगरानी कर रही थी। इसी दौरान एक संदिग्ध बोलेरो वाहन को रोककर उसकी जांच की गई।

वाहन में सवार दो व्यक्तियों की गतिविधियां संदिग्ध लगने पर पुलिस उन्हें थाने लेकर गई और वाहन की विस्तृत तलाशी शुरू की। तलाशी के दौरान नोटों के कई बंडल बरामद हुए, जिन्हें देखकर पहली नजर में बड़ी नकदी होने का आभास हो रहा था।

बंडल खोले तो सामने आई चौंकाने वाली सच्चाई

पुलिस ने जब सभी बंडलों को खोलकर एक-एक नोट की जांच की तो चौंकाने वाला खुलासा हुआ। कुल 13 बंडल बरामद हुए, जिनकी अनुमानित कीमत लगभग 65 लाख रुपये बताई जा रही थी।

जांच में सामने आया कि प्रत्येक बंडल में केवल ऊपर और नीचे के नोट असली थे, जबकि बीच में बड़ी संख्या में कूटरचित नोट या नोटों के आकार में तैयार किए गए विशेष प्रिंटेड कागज रखे गए थे। इस प्रकार पूरे बंडल को असली मुद्रा जैसा दिखाने की कोशिश की गई थी।

पुलिस के अनुसार, कुल बरामद सामग्री में केवल लगभग 13 हजार रुपये ही असली नोट थे, जबकि बाकी पूरी खेप नकली या कूटरचित नोटों की थी।

धोखाधड़ी के लिए तैयार की गई थी विशेष खेप

प्रारंभिक जांच से संकेत मिले हैं कि इस सामग्री का उपयोग बड़े पैमाने पर आर्थिक धोखाधड़ी के लिए किया जाना था। आरोपी असली नोटों की आड़ में नकली नोटों के बंडल तैयार कर लोगों को ठगने की योजना बना रहे थे। पुलिस को संदेह है कि इस प्रकार की खेप का उपयोग हवाला लेन-देन, अवैध सौदों अथवा नकदी आधारित धोखाधड़ी में किया जाता है।

विशेष बात यह है कि बंडलों की पैकिंग इतनी सावधानी से की गई थी कि सामान्य व्यक्ति पहली नजर में इन्हें असली नकदी ही समझता।

दो आरोपी गिरफ्तार

मामले में पुलिस ने दो व्यक्तियों को गिरफ्तार किया है, जिनकी पहचान जेतासर निवासी ओमप्रकाश नैन और धोलिया निवासी महेंद्र उर्फ सीताराम गोदारा के रूप में की गई है।

दोनों आरोपियों से पुलिस गहन पूछताछ कर रही है। जांच एजेंसियां यह पता लगाने का प्रयास कर रही हैं कि यह खेप कहां से लाई गई थी, किसे सौंपी जानी थी और इसके पीछे कौन लोग सक्रिय हैं।

हवाला कारोबार से जुड़े होने के संकेत

पुलिस सूत्रों के अनुसार, बरामद सामग्री और आरोपियों की गतिविधियों को देखते हुए इस मामले के तार हवाला नेटवर्क से जुड़े होने की आशंका है। जांच में सामने आया है कि नकली नोटों जैसी यह सामग्री बड़े आर्थिक लेन-देन में इस्तेमाल की जा सकती थी।

अधिकारियों का मानना है कि गिरफ्तार आरोपी संभवतः केवल सप्लाई चैन की एक कड़ी हैं और इसके पीछे एक बड़ा संगठित गिरोह सक्रिय हो सकता है।

फरार सरगना और सप्लायर की तलाश

पुलिस अब उन लोगों की तलाश में जुटी है जिन्होंने यह खेप आरोपियों तक पहुंचाई थी। विभिन्न स्थानों पर दबिश दी जा रही है और मोबाइल कॉल डिटेल, वित्तीय लेन-देन तथा अन्य तकनीकी साक्ष्यों की जांच की जा रही है।

जांच एजेंसियों को उम्मीद है कि आरोपियों से पूछताछ में हवाला नेटवर्क और नकली मुद्रा कारोबार से जुड़े अन्य लोगों के नाम सामने आ सकते हैं।

कार्रवाई करने वाली पुलिस टीम

इस महत्वपूर्ण कार्रवाई में थाना अधिकारी कश्यप सिंह, ऑपरेशन प्रभारी एसआई सुरेश कुमार गुर्जर, कांस्टेबल अशरफ महेश, कांस्टेबल गोपी, हेड कांस्टेबल इन्द्रचंद, नरेंद्र सिंह, रामनिवास, गजेंद्र सिंह और रविंद्र सिंह की विशेष भूमिका रही।

पूरे ऑपरेशन का नेतृत्व एसआई सुरेश कुमार गुर्जर ने किया, जिनकी सतर्कता और त्वरित कार्रवाई के कारण यह बड़ा खुलासा संभव हो सका।

कोटगेट पुलिस ने 22 लाख रुपये के पुराने नकली नोट प्रकरण में आरोपी पकड़ा

इस कार्रवाई से पहले सोमवार को ही कोटगेट थाना पुलिस ने 22 लाख रुपये के नकली नोट प्रकरण में एक आरोपी को गिरफ्तार किया था। इस पुराने मामले ने भी बीकानेर में नकली नोटों के नेटवर्क की गंभीरता को उजागर किया था। पुलिस अब यह भी जांच कर रही है कि क्या कोटगेट और श्रीडूंगरगढ़ के मामलों के बीच कोई कनेक्शन है।

मई में भी श्रीडूंगरगढ़ में पकड़ी गई थी नकली नोटों की फैक्ट्री

श्रीडूंगरगढ़ क्षेत्र में यह कोई पहला मामला नहीं है। मई 2026 में भी पुलिस ने नेशनल हाईवे स्थित होटल सांवरिया सेठ में नकली नोट छापने के आरोप में चार युवकों को गिरफ्तार किया था। उस मामले में 500-500 रुपये के 156 नकली नोट, दो प्रिंटर, कटर, चमकीली टेप, छोटा कटर और रबरबैंड जब्त किए गए थे।

उस कार्रवाई में गिरफ्तार आरोपियों की पहचान श्रीडूंगरगढ़ के आड़सर बास निवासी तथा होटल सांवरिया सेठ संचालक आशीष पुत्र किशनलाल ब्राह्मण, नारायण पुत्र कालूराम ब्राह्मण, हेमासर निवासी श्यामलाल पुत्र पुनाराम मेघवाल और पुंदलसर निवासी जितेंद्र सिंह पुत्र राजेंद्र सिंह राजपूत के रूप में हुई थी।

उस कार्रवाई में पुलिस टीम में एसआई पवन शर्मा, कांस्टेबल पुनीत कुमार, अशोक, कैलाश और नरेंद्र शामिल थे।

पुराने मामलों में भी हवाला कनेक्शन सामने आया था

बीकानेर में नकली नोटों का नेटवर्क पहले भी हवाला कारोबार से जुड़ता रहा है। वर्ष 2023 में सामने आए एक मामले में पुलिस जांच में यह बात सामने आई थी कि आरोपी नकली नोटों को हवाला के जरिए दिल्ली तक खपाने की तैयारी में थे। उस मामले में बामनवाली निवासी प्रदीप सारस्वत, जैसा निवासी रामनिवास गोदारा, सारोठिया निवासी रामावतार सारस्वत, लूणकरणसर निवासी सोनू उर्फ संदीप कायल और कालू निवासी राहुल सारस्वत जैसे नाम सामने आए थे।

बीकानेर में बार-बार क्यों उभर रहा नकली नोट नेटवर्क ?

लगातार सामने आ रहे मामलों से यह सवाल उठ रहा है कि बीकानेर और श्रीडूंगरगढ़ क्षेत्र नकली नोट और हवाला नेटवर्क के लिए बार-बार क्यों इस्तेमाल हो रहे हैं। पुलिस जांच के अनुसार, आरोपी गांवों और कस्बों में नकली नोट या नोट जैसे दिखने वाले कागज तैयार कर उन्हें शहरी और हवाला नेटवर्क में खपाने की कोशिश करते हैं। असली नोटों को ऊपर-नीचे लगाकर बीच में नकली सामग्री रखना इस गिरोह की धोखाधड़ी का मुख्य तरीका बताया जा रहा है।

पुलिस की जांच कई दिशाओं में जारी

पुलिस अब इस बात की जांच कर रही है कि 65 लाख रुपये की यह खेप किसे दी जानी थी, इसके बदले असली रकम कितनी मिलनी थी, किस हवाला कारोबारी से संपर्क था और क्या यह नेटवर्क बीकानेर से बाहर अन्य जिलों या राज्यों तक फैला हुआ है। जब्त बोलेरो वाहन की डिटेल, मोबाइल कॉल रिकॉर्ड, वित्तीय लेन-देन और संदिग्ध संपर्कों की भी जांच की जा रही है।

आगे और गिरफ्तारियों की संभावना

पुलिस अधिकारियों का कहना है कि जांच अभी प्रारंभिक चरण में है। आरोपियों से पूछताछ और तकनीकी विश्लेषण के आधार पर जल्द ही और गिरफ्तारियां हो सकती हैं। यदि हवाला नेटवर्क से सीधा संबंध स्थापित होता है तो मामला और भी बड़ा रूप ले सकता है।

मामले में पुलिस को बड़े खुलासे की उम्मीद है। फरार हवाला कारोबारी और नेटवर्क के अन्य सदस्यों की तलाश में दबिश जारी है। पुलिस सूत्रों के अनुसार गिरफ्तार युवकों से पूछताछ के बाद कई और नाम सामने आ सकते हैं। इस कार्रवाई ने एक बार फिर यह साफ कर दिया है कि बीकानेर में नकली नोट और हवाला कारोबार के गठजोड़ को लेकर पुलिस को और गहराई से जांच करनी होगी।

फिलहाल पुलिस ने बरामद सामग्री, बोलेरो वाहन और अन्य साक्ष्यों को जब्त कर लिया है तथा मामले की विस्तृत जांच जारी है।

जांच के दायरे में पुराना नेटवर्क

पुलिस अब यह भी जांच कर रही है कि क्या इस मामले का संबंध बीकानेर जिले में पूर्व में पकड़े गए नकली नोट और हवाला मामलों से है। आर्थिक अपराध शाखा और स्थानीय पुलिस इस पूरे नेटवर्क की परतें खोलने में जुटी हुई हैं।

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