लखनऊ कोचिंग सेंटर अग्निकांड : कुछ मिनटों में उजड़ गए सपने : अलीगंज में भीषण आग से कम से कम 15 लोगों की मौत, अधिकांश छात्र : जान बचाने के लिए इमारत से कूदे युवक-युवतियां
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने बीच में छोड़ा दौरा, उच्च स्तरीय जांच के आदेश : प्रधानमंत्री ने जताया शोक, सुरक्षा मानकों पर फिर उठे गंभीर सवाल

न्यूज डेस्क, 22 जून : उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ सोमवार को एक भयावह अग्निकांड से दहल उठी। शहर के अलीगंज क्षेत्र स्थित पुरनिया इलाके के एक बहुमंजिला व्यावसायिक भवन में लगी भीषण आग ने कुछ ही मिनटों में विकराल रूप धारण कर लिया। इस दर्दनाक हादसे में कम से कम 15 लोगों की मौत हो गई, जबकि कई अन्य घायल हो गए। मृतकों में अधिकांश छात्र और युवा बताए जा रहे हैं। जिस भवन में आग लगी, उसमें कोचिंग सेंटर, लाइब्रेरी, स्टडी सेंटर, गेमिंग जोन और अन्य व्यावसायिक गतिविधियां संचालित हो रही थीं। घटना के बाद पूरे प्रदेश में शोक और चिंता का माहौल है।

दोपहर करीब 3 बजे भड़की आग, मच गई अफरा-तफरी
प्राप्त जानकारी के अनुसार यह हादसा सोमवार दोपहर लगभग 3 बजे हुआ। बताया जा रहा है कि भवन के निचले हिस्से में अचानक आग लग गई, जो देखते ही देखते ऊपरी मंजिलों तक फैल गई। उस समय भवन में बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं पढ़ाई कर रहे थे। कुछ ही मिनटों में पूरा परिसर घने धुएं और आग की लपटों से घिर गया।
आग लगते ही भवन में अफरा-तफरी मच गई। छात्र, कर्मचारी और अन्य लोग जान बचाने के लिए बाहर निकलने का रास्ता तलाशने लगे। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार धुआं इतनी तेजी से फैला कि कई लोगों को सुरक्षित बाहर निकलने का अवसर तक नहीं मिला।
धुएं के बीच फंसे छात्र, खिड़कियों और पहली मंजिल से लगाई छलांग
हादसे के सबसे भयावह दृश्य तब सामने आए जब आग और धुएं से घिरे कई छात्र जान बचाने के लिए पहली मंजिल और खिड़कियों से नीचे कूदने लगे। सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो में लोगों को चीखते-चिल्लाते और बाहर निकलने के लिए संघर्ष करते देखा गया।
प्रत्यक्षदर्शियों ने बताया कि कई युवाओं ने धुएं से बचने के लिए खिड़कियों का सहारा लिया, जबकि कुछ लोग भवन के भीतर ही फंस गए। स्थानीय लोगों ने भी अपनी जान जोखिम में डालकर कई छात्रों को सुरक्षित बाहर निकालने का प्रयास किया।

राहत एवं बचाव अभियान में सामने आया दर्दनाक मंजर
घटना की सूचना मिलते ही दमकल विभाग, पुलिस, एसडीआरएफ तथा जिला प्रशासन की टीमें मौके पर पहुंच गईं। आग पर काबू पाने और भीतर फंसे लोगों को बाहर निकालने के लिए घंटों तक अभियान चलाया गया।
घना धुआं और अत्यधिक तापमान बचाव कार्य में बड़ी बाधा बने। कई स्थानों पर दमकल कर्मियों को भवन के पीछे की दीवार तोड़कर अंदर प्रवेश करना पड़ा। बचाव अभियान के दौरान कई शव बरामद किए गए, जबकि घायलों को तत्काल विभिन्न अस्पतालों में भर्ती कराया गया।
15 मौतों की पुष्टि, कई घायलों की हालत गंभीर
देर शाम तक कम से कम 15 लोगों की मौत की पुष्टि हो चुकी थी। कई अन्य लोग घायल हुए हैं, जिनमें कुछ की हालत गंभीर बताई जा रही है। अस्पतालों में घायलों का उपचार जारी है।
उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री बृजेश पाठक ने घटनास्थल और अस्पतालों का दौरा किया। उन्होंने इस हादसे को अत्यंत दुखद और हृदयविदारक बताते हुए कहा कि सरकार पीड़ित परिवारों के साथ खड़ी है और घायलों को हर संभव चिकित्सा सहायता उपलब्ध कराई जा रही है।

आग लगने के कारणों की जांच शुरू
आग लगने के वास्तविक कारणों का अभी तक आधिकारिक खुलासा नहीं हो पाया है। हालांकि प्रारंभिक जांच में शॉर्ट सर्किट की आशंका जताई जा रही है। अग्निशमन विभाग और जांच एजेंसियों की टीमों ने घटनास्थल से साक्ष्य एकत्र करने शुरू कर दिए हैं।
प्रशासन यह भी जांच कर रहा है कि भवन में अग्नि सुरक्षा के पर्याप्त इंतजाम थे या नहीं, क्या फायर सेफ्टी उपकरण कार्यरत थे, और क्या भवन के पास सभी आवश्यक सुरक्षा प्रमाणपत्र एवं अनुमति पत्र मौजूद थे।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने मांगी विस्तृत रिपोर्ट
घटना की गंभीरता को देखते हुए उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री ने अपना निर्धारित दौरा बीच में छोड़ दिया और अधिकारियों को तत्काल राहत एवं बचाव कार्य तेज करने के निर्देश दिए। मुख्यमंत्री ने पूरे मामले की उच्च स्तरीय जांच के आदेश देते हुए विस्तृत रिपोर्ट तलब की है।
उन्होंने मृतकों के परिजनों के प्रति संवेदना व्यक्त की तथा घायलों के समुचित उपचार और हरसंभव सहायता सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।
प्रधानमंत्री ने जताया शोक
प्रधानमंत्री ने भी इस दुखद घटना पर गहरा शोक व्यक्त किया। उन्होंने मृतकों के परिवारों के प्रति संवेदना प्रकट करते हुए घायलों के शीघ्र स्वस्थ होने की कामना की। प्रधानमंत्री ने घटना की जांच और जिम्मेदार लोगों की जवाबदेही तय करने की आवश्यकता पर भी बल दिया।

सुरक्षा मानकों पर फिर उठे सवाल
यह हादसा ऐसे समय हुआ है जब देशभर में कोचिंग संस्थानों और व्यावसायिक भवनों की अग्नि सुरक्षा व्यवस्था को लेकर लगातार चिंता जताई जा रही है। पिछले कुछ वर्षों में कई राज्यों में कोचिंग सेंटरों और व्यावसायिक परिसरों में आग लगने की घटनाएं सामने आ चुकी हैं।
विशेषज्ञों का कहना है कि बहुमंजिला भवनों में फायर एग्जिट, अग्निशमन यंत्र, आपातकालीन निकास मार्ग, धुआं नियंत्रण प्रणाली और नियमित सुरक्षा ऑडिट अनिवार्य रूप से सुनिश्चित किए जाने चाहिए। यदि सुरक्षा मानकों का कड़ाई से पालन किया जाए तो ऐसी कई दुर्घटनाओं को रोका जा सकता है।
पूरे देश को झकझोर गई त्रासदी
लखनऊ का यह अग्निकांड केवल एक दुर्घटना नहीं, बल्कि शहरी सुरक्षा व्यवस्था और अग्नि सुरक्षा मानकों पर गंभीर प्रश्नचिह्न भी है। जिन परिवारों ने अपने बच्चों को बेहतर भविष्य के सपनों के साथ कोचिंग संस्थानों में भेजा था, उनमें से कई अब कभी अपने घर वापस नहीं लौट पाएंगे।
यह घटना देशभर में कोचिंग संस्थानों, व्यावसायिक परिसरों और सार्वजनिक भवनों की सुरक्षा व्यवस्था की व्यापक समीक्षा की मांग कर रही है। हादसे ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि क्या हमारे शैक्षणिक और व्यावसायिक संस्थान आपातकालीन परिस्थितियों से निपटने के लिए वास्तव में तैयार हैं, या फिर सुरक्षा नियम केवल कागजों तक ही सीमित हैं।




