शिक्षा को आनंदमय और रोजगारोन्मुख बनाने का संकल्प, ‘बच्चे केवल नौकरी खोजने वाले नहीं, बल्कि रोजगार सृजक बनें’ – डॉ. अलका देसाई शर्मा : शिवसागर के लक्ष्मीनगर एमई स्कूल पहुंचीं अक्षर फाउंडेशन की संस्थापक, विद्यार्थियों की प्रतिभा और नवाचार की सराहना

शिवसागर, 5 जून : असम की अग्रणी गैर-सरकारी एवं सामाजिक संस्था अक्षर फाउंडेशन की संस्थापक एवं शिक्षा सुधार की प्रख्यात हस्ती डॉ. अलका देसाई शर्मा ने शुक्रवार को शिवसागर के लक्ष्मीनगर एमई स्कूल का दौरा कर विद्यालय में संचालित विभिन्न शैक्षणिक एवं व्यावसायिक शिक्षा गतिविधियों का निरीक्षण किया। इस अवसर पर विद्यालय परिवार ने उनका पारंपरिक और आत्मीय स्वागत किया।
अक्षर फाउंडेशन पिछले कई वर्षों से शिवसागर जिले के अनेक विद्यालयों में शैक्षणिक गुणवत्ता सुधार, कौशल विकास, उद्यमिता प्रशिक्षण तथा व्यावसायिक शिक्षा के क्षेत्र में महत्वपूर्ण योगदान दे रहा है। संस्था का उद्देश्य विद्यालयी शिक्षा को केवल पाठ्यपुस्तकों तक सीमित न रखकर उसे जीवनोपयोगी, व्यवहारिक और आत्मनिर्भरता से जोड़ना है। फाउंडेशन की स्थापना डॉ. अलका देसाई शर्मा ने की थी और यह संस्था शिक्षा के माध्यम से गरीबी उन्मूलन एवं सामाजिक परिवर्तन के लिए देश-विदेश में सराही जा चुकी है।

विद्यालय पहुंचने पर छात्र-छात्राओं ने सांस्कृतिक एवं स्वागत कार्यक्रम के माध्यम से अतिथि का अभिनंदन किया। इसके बाद डॉ. शर्मा ने विद्यालय परिसर का विस्तृत निरीक्षण किया तथा अक्षर फाउंडेशन के सहयोग से संचालित विभिन्न गतिविधियों की जानकारी ली।
इस दौरान उन्होंने विद्यालय की हस्तलिखित पत्रिका “मरोद्यान” तथा विद्यार्थियों द्वारा तैयार की गई दीवार पत्रिका (वॉल मैगजीन) का विधिवत लोकार्पण किया। पत्रिका में विद्यार्थियों की रचनात्मक प्रतिभा, साहित्यिक अभिरुचि, चित्रकला, कविता, कहानी और सामाजिक विषयों पर लेखों को स्थान दिया गया है। लोकार्पण के अवसर पर उन्होंने कहा कि ऐसे प्रयास बच्चों की रचनात्मक सोच को विकसित करते हैं और उनमें आत्मविश्वास का संचार करते हैं।
डॉ. अलका देसाई शर्मा ने विद्यालय के विद्यार्थियों द्वारा व्यावसायिक शिक्षा के अंतर्गत तैयार विभिन्न उत्पादों, हस्तशिल्प सामग्री, पुनर्चक्रण (रीसाइक्लिंग) आधारित वस्तुओं तथा कौशल विकास परियोजनाओं का भी अवलोकन किया। उन्होंने बच्चों द्वारा प्रदर्शित रचनात्मकता, नवाचार और उद्यमशीलता की भावना की सराहना करते हुए कहा कि आज के समय में शिक्षा का उद्देश्य केवल परीक्षा में अंक प्राप्त करना नहीं होना चाहिए, बल्कि विद्यार्थियों को जीवन के लिए तैयार करना भी उतना ही आवश्यक है।
छात्र-छात्राओं के साथ संवाद करते हुए डॉ. शर्मा ने कहा कि “शिक्षा आनंदमय होनी चाहिए। जब बच्चे सीखने की प्रक्रिया का आनंद लेते हैं, तभी वास्तविक ज्ञान अर्जित होता है। शिक्षा को बोझ नहीं बल्कि अनुभव और सृजन की प्रक्रिया बनाना होगा।”
उन्होंने आगे कहा कि अक्षर फाउंडेशन का प्रमुख लक्ष्य बच्चों को केवल नौकरी पाने के लिए तैयार करना नहीं है, बल्कि उन्हें ऐसा सक्षम बनाना है कि वे भविष्य में स्वयं रोजगार सृजित कर सकें और समाज के विकास में सक्रिय भूमिका निभा सकें।

उनके अनुसार, व्यावसायिक शिक्षा बच्चों को आत्मनिर्भरता, समस्या समाधान क्षमता, रचनात्मक सोच और आर्थिक सशक्तिकरण की दिशा में आगे बढ़ाती है। इसी सोच के साथ फाउंडेशन विद्यालय स्तर से ही कौशल आधारित शिक्षा को बढ़ावा दे रहा है।
विद्यालय के शिक्षकों ने भी अक्षर फाउंडेशन द्वारा प्रदान किए जा रहे सहयोग की सराहना करते हुए कहा कि संस्था के प्रयासों से विद्यार्थियों में सीखने के प्रति उत्साह बढ़ा है और वे पारंपरिक शिक्षा के साथ-साथ व्यावहारिक ज्ञान भी प्राप्त कर रहे हैं।
कार्यक्रम के अंत में डॉ. अलका देसाई शर्मा ने विद्यार्थियों को जीवन में बड़े सपने देखने, निरंतर सीखते रहने तथा समाज के प्रति अपनी जिम्मेदारियों को समझने का संदेश दिया। उन्होंने कहा कि शिक्षा तभी सार्थक होगी जब वह बच्चों को संवेदनशील, आत्मनिर्भर और जिम्मेदार नागरिक बनने की प्रेरणा दे।
विद्यालय परिसर में आयोजित इस कार्यक्रम ने विद्यार्थियों, शिक्षकों और अभिभावकों के बीच शिक्षा के नए आयामों और कौशल आधारित शिक्षण प्रणाली को लेकर नई ऊर्जा और उत्साह का संचार किया। विद्यालय परिवार ने आशा व्यक्त की कि अक्षर फाउंडेशन का सहयोग भविष्य में भी इसी प्रकार जारी रहेगा और जिले के अधिकाधिक विद्यार्थियों को इसका लाभ मिलेगा।




