पिता की पुण्यतिथि पर बेटी के सेवा-संकल्प ने रचा मानवता का नया अध्याय—गुवाहाटी में रक्तदान के माध्यम से स्व. धर्मेन्द्र शर्मा (टोनी) को भावपूर्ण श्रद्धांजलि : पारीक महिला परिषद के इतिहास में पहली बार आयोजित रक्तदान शिविर बना सेवा, संवेदना और सामाजिक एकजुटता की प्रेरणादायक मिसाल—70 लोगों ने कराया पंजीकरण, 48 रक्तवीरों ने किया महादान : सर्व समाज के युवाओं, महिलाओं और समाजसेवियों ने निभाई महत्वपूर्ण भूमिका
पिता की स्मृतियों को जनकल्याण से जोड़ने का बेटी खुशी शर्मा का सपना हुआ साकार : भाई नमन शर्मा के सहयोग और सामाजिक संस्थाओं की सामूहिक पहल से जरूरतमंद मरीजों के लिए जगाई जीवन की नई उम्मीद

अध्यक्ष निशा पारीक ने कहा—“एक बेटी के अपने पिता के प्रति प्रेम और श्रद्धा को मानव सेवा का स्वरूप देना हमारे लिए अत्यंत भावनात्मक एवं गौरवपूर्ण अनुभव”
खुशी शर्मा का भावुक संदेश—“पापा की स्मृतियों को जनकल्याणकारी कार्यों के माध्यम से जीवंत रखने में मिले सहयोग के लिए हम सभी के हृदय से आभारी”
गुवाहाटी, 11 अक्टूबर : पिता और पुत्री का रिश्ता केवल स्नेह, सुरक्षा और विश्वास का संबंध नहीं होता, बल्कि यह जीवनभर साथ रहने वाली उन अनमोल स्मृतियों का संसार होता है, जो समय बीतने के बाद भी हृदय में जीवंत रहती हैं। जब एक बेटी अपने दिवंगत पिता की यादों को समाज की भलाई और जरूरतमंदों की सेवा से जोड़ने का संकल्प लेती है, तो उसकी व्यक्तिगत भावनाएं मानवता के लिए प्रेरणा बन जाती हैं। ऐसी ही एक हृदयस्पर्शी और अनुकरणीय पहल रविवार को असम की राजधानी गुवाहाटी में देखने को मिली, जहां स्वर्गीय श्री धर्मेन्द्र शर्मा (टोनी) की पुण्यतिथि पर उनकी सुपुत्री खुशी शर्मा और पुत्र नमन शर्मा के सेवा-संकल्प को साकार करते हुए एक विशेष रक्तदान शिविर का आयोजन किया गया।
पारीक महिला परिषद, गुवाहाटी ने पारीक सभा एवं पारीक युवक परिषद के संयुक्त सहयोग से शहर के आठगांव स्थित मारवाड़ी हॉस्पिटल में इस रक्तदान शिविर का आयोजन किया। इस अवसर पर पारीक समाज के साथ-साथ विभिन्न समाजों के युवाओं, महिलाओं, समाजसेवियों और स्वैच्छिक रक्तदाताओं ने उत्साहपूर्वक भाग लेकर मानव सेवा के प्रति अपनी प्रतिबद्धता व्यक्त की।
विशेष बात यह रही कि पारीक महिला परिषद, गुवाहाटी के इतिहास में यह पहला रक्तदान शिविर था। परिषद की बहनों ने इस आयोजन को केवल एक सामाजिक कार्यक्रम तक सीमित नहीं रखा, बल्कि इसे एक बेटी की भावनाओं, पिता की पुण्य स्मृतियों और समाज के प्रति सामूहिक जिम्मेदारी का प्रतीक बना दिया।
सुबह 9 बजे से शाम 4 बजे तक चले इस शिविर में कुल 70 लोगों ने रक्तदान के लिए पंजीकरण कराया, जिनमें से चिकित्सकीय प्रक्रिया पूरी होने के बाद 48 रक्तदाताओं ने सफलतापूर्वक रक्तदान किया। इन रक्तवीरों के योगदान ने जरूरतमंद मरीजों के उपचार में सहायता पहुंचाने के साथ-साथ स्वैच्छिक रक्तदान के प्रति जागरूकता बढ़ाने का महत्वपूर्ण संदेश दिया।

बेटी खुशी शर्मा का सपना—पिता की पुण्यतिथि को बनाया जनसेवा का अवसर
इस रक्तदान शिविर की सबसे भावनात्मक और प्रेरणादायक पृष्ठभूमि स्वर्गीय श्री धर्मेन्द्र शर्मा (टोनी) एवं श्रीमती मधु शर्मा की सुपुत्री कु. खुशी शर्मा की अपने पिता के प्रति अगाध श्रद्धा, प्रेम और सम्मान से जुड़ी रही।
खुशी की इच्छा थी कि उनके पिता की पुण्यतिथि केवल पारिवारिक स्मरण, श्रद्धांजलि और धार्मिक अनुष्ठानों तक सीमित न रहे, बल्कि इस दिन कोई ऐसा जनकल्याणकारी कार्य किया जाए, जिससे समाज के जरूरतमंद लोगों को वास्तविक सहायता मिल सके।
उनकी सोच थी कि यदि पिता की स्मृति में आयोजित किसी कार्यक्रम से किसी मरीज के उपचार में सहायता मिलती है, किसी परिवार को उम्मीद मिलती है या किसी जरूरतमंद के जीवन की रक्षा में योगदान होता है, तो इससे बढ़कर पिता के प्रति दूसरी श्रद्धांजलि नहीं हो सकती।
इसी भावना से खुशी शर्मा ने अपने पिता की पुण्यतिथि पर रक्तदान शिविर आयोजित करने का सपना संजोया। उनके भाई नमन शर्मा ने भी इस मानवीय संकल्प में उनका साथ दिया। दोनों भाई-बहनों की इच्छा थी कि पिता की यादें केवल परिवार के हृदय में ही नहीं, बल्कि समाज के लिए किए गए अच्छे कार्यों के माध्यम से भी जीवंत बनी रहें।
जब यह भावना पारीक महिला परिषद की बहनों तक पहुंची, तो उन्होंने इसे अत्यंत संवेदनशीलता और आत्मीयता के साथ अपनाया। परिषद की सलाहकार एवं पूर्व अध्यक्ष ममता शर्मा, अध्यक्ष निशा पारीक और सचिव जया पारीक सहित अन्य सदस्यों ने इस संकल्प को साकार करने की दिशा में सामूहिक प्रयास प्रारंभ किए।
पारीक सभा एवं पारीक युवक परिषद के सहयोग से रक्तदान शिविर की रूपरेखा तैयार की गई और मारवाड़ी हॉस्पिटल में इसके आयोजन की व्यवस्था की गई।
इस प्रकार एक बेटी के मन में जन्मी भावनात्मक इच्छा धीरे-धीरे सामूहिक जनसेवा के अभियान में परिवर्तित हो गई।

पारीक महिला परिषद के इतिहास में पहली बार रक्तदान शिविर—सामाजिक सेवा का नया अध्याय
पारीक महिला परिषद, गुवाहाटी के लिए यह आयोजन ऐतिहासिक महत्व का रहा। परिषद की स्थापना के बाद पहली बार रक्तदान शिविर आयोजित किए जाने से संगठन की सामाजिक एवं जनकल्याणकारी गतिविधियों में एक नया अध्याय जुड़ गया।
परिषद की बहनों ने इस कार्यक्रम को सफल बनाने के लिए तैयारियों से लेकर आयोजन के समापन तक सक्रिय भूमिका निभाई। रक्तदान के प्रति जागरूकता बढ़ाने, संभावित रक्तदाताओं से संपर्क करने, पंजीकरण की व्यवस्था करने, सहयोगी संस्थाओं के बीच समन्वय स्थापित करने तथा आयोजन स्थल पर आवश्यक सुविधाएं सुनिश्चित करने में सदस्यों ने सामूहिक जिम्मेदारी निभाई।
इस आयोजन ने यह भी प्रदर्शित किया कि महिला संगठन धार्मिक, सांस्कृतिक और पारंपरिक गतिविधियों के साथ-साथ स्वास्थ्य जागरूकता, सामाजिक उत्तरदायित्व तथा मानव सेवा के क्षेत्र में भी महत्वपूर्ण योगदान दे सकते हैं।
पारीक महिला परिषद की सदस्यों ने यह संदेश दिया कि समाजसेवा के लिए केवल आर्थिक संसाधनों की आवश्यकता नहीं होती, बल्कि सच्ची भावना, सामूहिक सहयोग, संगठनात्मक क्षमता और सेवा के प्रति समर्पण भी उतना ही आवश्यक है।

70 पंजीकरण और 48 सफल रक्तदान—सर्व समाज ने दिखाई उत्साहपूर्ण सहभागिता
रक्तदान शिविर में विभिन्न समाजों के लोगों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। सुबह से ही स्वैच्छिक रक्तदान करने वाले लोगों का आगमन शुरू हो गया था। कई रक्तदाता अपने परिवारजनों, मित्रों और परिचितों के साथ पहुंचे, जिससे आयोजन में सामूहिक सहभागिता का सकारात्मक वातावरण बना।
शिविर में कुल 70 लोगों ने रक्तदान के लिए पंजीकरण कराया। चिकित्सकीय जांच एवं आवश्यक औपचारिकताओं के बाद 48 लोगों ने सफलतापूर्वक रक्तदान किया।
रक्तदान के लिए पंजीकरण कराने वाले सभी लोगों की सहभागिता को आयोजकों ने महत्वपूर्ण बताया। रक्तदान के लिए आगे आने वाले व्यक्तियों की इच्छाशक्ति और सेवा भावना की सराहना करते हुए कहा गया कि प्रत्येक स्वैच्छिक रक्तदाता समाज में मानवता की भावना को मजबूत करने में योगदान देता है।
इस अवसर पर यह संदेश भी दिया गया कि रक्तदान के लिए इच्छुक प्रत्येक व्यक्ति का चिकित्सकीय रूप से पात्र होना आवश्यक है। इसलिए रक्तदान हमेशा निर्धारित स्वास्थ्य मानदंडों और चिकित्सकीय परामर्श के अनुसार ही किया जाना चाहिए।
आयोजकों ने कहा कि रक्तदान के प्रति समाज में जागरूकता बढ़ाने और अधिक से अधिक पात्र व्यक्तियों को स्वैच्छिक रक्तदान के लिए प्रेरित करने की आवश्यकता है।

अध्यक्ष निशा पारीक का भावुक संबोधन—“खुशी बिटिया का सपना साकार करना हमारे लिए विशेष अनुभूति”
पारीक महिला परिषद, गुवाहाटी की अध्यक्ष निशा पारीक ने इस आयोजन को संगठन के लिए अत्यंत भावनात्मक, प्रेरणादायक और गौरवपूर्ण अवसर बताया।
उन्होंने कहा कि यह शिविर एक बेटी के अपने पिता के प्रति प्रेम और श्रद्धा को जनसेवा से जोड़ने का सुंदर प्रयास है। खुशी बिटिया के रक्तदान शिविर के सपने को साकार करना हमारे लिए भावनात्मक रूप से विशेष रहा। रक्तदान जरूरतमंदों के जीवन की रक्षा में महत्वपूर्ण योगदान देता है, इसलिए इसके प्रति जागरूकता बढ़ाना हम सभी की जिम्मेदारी है।
निशा पारीक ने कहा कि पारीक महिला परिषद का उद्देश्य समाज की महिलाओं को एकजुट करके धार्मिक, सामाजिक, सांस्कृतिक एवं जनकल्याणकारी गतिविधियों में उनकी सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित करना है। उन्होंने इस बात पर प्रसन्नता व्यक्त की कि परिषद के प्रथम रक्तदान शिविर को समाज के विभिन्न वर्गों से उत्साहपूर्ण सहयोग प्राप्त हुआ।
अध्यक्ष ने कहा कि खुशी शर्मा और नमन शर्मा ने अपने पिता की पुण्यतिथि को मानव सेवा से जोड़कर नई पीढ़ी के सामने एक प्रेरणादायक उदाहरण प्रस्तुत किया है। उन्होंने कहा कि जब युवा पीढ़ी अपने पारिवारिक संस्कारों और भावनाओं को सामाजिक जिम्मेदारी के साथ जोड़ती है, तो समाज में सेवा और संवेदनशीलता की नई चेतना विकसित होती है।
निशा पारीक ने रक्तदान करने वाले सभी 48 रक्तदाताओं के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि इनका योगदान अत्यंत मूल्यवान है। उन्होंने आयोजन में सहयोग करने वाली पारीक सभा, पारीक युवक परिषद, सर्व समाज के सदस्यों तथा मारवाड़ी हॉस्पिटल की चिकित्सकीय टीम का भी धन्यवाद किया।

खुशी शर्मा का भावुक आभार—“पापा की स्मृतियों को सेवा के माध्यम से जीवंत रखने में आपका सहयोग अमूल्य”
इस अवसर पर स्वर्गीय श्री धर्मेन्द्र शर्मा (पारीक) की सुपुत्री खुशी शर्मा ने अपने पिता की पुण्य स्मृति में आयोजित रक्तदान शिविर को सफल बनाने में सहयोग देने वाले सभी लोगों और संस्थाओं के प्रति हृदय से कृतज्ञता व्यक्त की।
खुशी ने भावुक शब्दों में कहा कि मेरे पिता श्री धर्मेन्द्र शर्मा (पारीक) की पुण्य स्मृति में 11 अक्टूबर 2026 को आयोजित रक्तदान शिविर में सहयोग एवं सहभागिता के लिए पारीक महिला परिषद, गुवाहाटी का हम दिल से आभार व्यक्त करते हैं। आपके सहयोग, समर्थन और समर्पण ने इस नेक पहल को सफल बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
उन्होंने आगे कहा कि जीवन बचाने और जरूरतमंदों के जीवन में आशा की नई किरण जगाने के इस पुनीत कार्य में आपका साथ हमारे लिए अत्यंत मूल्यवान रहा। पापा की स्मृति को इस तरह के जनकल्याणकारी कार्य के माध्यम से जीवंत रखने में सहयोग देने के लिए हम आपके प्रति हृदय से कृतज्ञ हैं।
खुशी ने भविष्य में भी सामूहिक रूप से समाजहित के कार्यों को आगे बढ़ाने की आशा व्यक्त करते हुए कहा कि आशा करते हैं कि भविष्य में भी हम इसी प्रकार मिलकर समाजहित के कार्य करते रहेंगे। सहयोग एवं स्नेह के लिए हार्दिक धन्यवाद।
उनके इस संदेश में एक बेटी का अपने पिता के प्रति प्रेम, उनकी स्मृतियों को संजोकर रखने की भावना तथा समाज के सहयोग के प्रति आत्मीय कृतज्ञता स्पष्ट रूप से दिखाई दी।
इस आयोजन में खुशी के भाई नमन शर्मा की सहभागिता भी महत्वपूर्ण रही। दोनों भाई-बहनों का यह संयुक्त संकल्प इस बात का प्रतीक बना कि परिवार के किसी प्रिय सदस्य की स्मृति को जनकल्याणकारी कार्यों के माध्यम से एक व्यापक सामाजिक उद्देश्य प्रदान किया जा सकता है।

पूर्व अध्यक्ष ममता शर्मा का महत्वपूर्ण योगदान—सामूहिक सहयोग बना सफलता का आधार
पारीक महिला परिषद की सलाहकार एवं पूर्व अध्यक्ष ममता शर्मा ने इस रक्तदान शिविर के आयोजन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
उनके साथ परिषद की अध्यक्ष निशा पारीक, सचिव जया पारीक तथा अन्य सदस्यों ने संगठनात्मक समन्वय और व्यवस्थाओं को संभालने में सक्रिय योगदान दिया।
इस आयोजन से यह संदेश सामने आया कि सामाजिक संस्थाओं की सफलता केवल पदाधिकारियों के प्रयासों पर निर्भर नहीं करती, बल्कि सभी सदस्यों की सहभागिता, आपसी विश्वास और सामूहिक जिम्मेदारी से ही कोई कार्यक्रम अपने उद्देश्य को प्राप्त करता है।
ममता शर्मा एवं परिषद की अन्य सदस्यों के प्रयासों ने महिला संगठन की सेवा क्षमता को नई दिशा प्रदान की।
इस प्रथम रक्तदान शिविर के माध्यम से परिषद ने स्वास्थ्य सेवा और सामाजिक जागरूकता के क्षेत्र में अपनी भागीदारी का एक प्रेरणादायक उदाहरण प्रस्तुत किया।

सचिव जया पारीक सहित परिषद की बहनों ने संभाली आयोजन की जिम्मेदारियां
पारीक महिला परिषद की सचिव जया पारीक ने शिविर की विभिन्न व्यवस्थाओं के संचालन और सहयोगी संस्थाओं के बीच समन्वय में सक्रिय भूमिका निभाई।
परिषद की सभी उपस्थित बहनों ने सामूहिक सहयोग से रक्तदाताओं के स्वागत, पंजीकरण में सहायता, आवश्यक व्यवस्थाओं और कार्यक्रम के संचालन में योगदान दिया।
विशेष रूप से ममता शर्मा, सीमा जोशी और मधु शर्मा की सहभागिता उल्लेखनीय रही।
स्वर्गीय धर्मेन्द्र शर्मा की धर्मपत्नी मधु शर्मा के लिए भी यह अवसर विशेष भावनात्मक महत्व रखता था, क्योंकि उनके दिवंगत पति की पुण्य स्मृति में बेटी खुशी और बेटे नमन के संकल्प को समाज के सहयोग से साकार किया जा रहा था।
इस आयोजन में परिवार की भावनाओं के साथ समाज की सहभागिता ने सेवा और संवेदनशीलता का सुंदर संगम प्रस्तुत किया।

पारीक सभा के कोषाध्यक्ष नंदकिशोर पारीक और मुकेश पारीक का सराहनीय सहयोग
रक्तदान शिविर के सफल आयोजन में पारीक सभा, गुवाहाटी के कोषाध्यक्ष नंदकिशोर पारीक तथा मुकेश पारीक ने आयोजन से जुड़ी व्यवस्थाओं और सामूहिक सहयोग में उल्लेखनीय भूमिका निभाई। उनके सहयोग से इस कार्यक्रम को व्यापक सामाजिक समर्थन प्राप्त हुआ।
तीनों संस्थाओं के संयुक्त प्रयासों ने यह संदेश दिया कि जब समाज की विभिन्न संस्थाएं आपसी सहयोग और समन्वय के साथ कार्य करती हैं, तो किसी व्यक्तिगत सेवा-संकल्प को भी व्यापक जनकल्याणकारी अभियान का स्वरूप दिया जा सकता है।

पारीक युवक परिषद के विकास पारीक, विशाल पारीक और सिद्धार्थ पारीक ने निभाई सक्रिय भूमिका
इस आयोजन में पारीक युवक परिषद, गुवाहाटी के विकास पारीक, विशाल पारीक तथा सिद्धार्थ पारीक ने रक्तदान शिविर को सफल बनाने में सक्रिय योगदान दिया। युवा सदस्यों की सहभागिता से कार्यक्रम को नई ऊर्जा मिली और रक्तदान के प्रति जागरूकता बढ़ाने के उद्देश्य को भी बल मिला।
इस अवसर पर युवाओं की भूमिका ने यह संदेश दिया कि नई पीढ़ी केवल अपने व्यक्तिगत और व्यावसायिक जीवन तक सीमित न रहकर सामाजिक जिम्मेदारियों के निर्वहन में भी अग्रणी भूमिका निभा सकती है।
पारीक युवक परिषद का सहयोग इस बात का सकारात्मक उदाहरण रहा कि समाज की महिला और युवा संस्थाएं एकजुट होकर मानव सेवा के क्षेत्र में प्रभावशाली पहल कर सकती हैं।

सर्व समाज के सहयोगियों का उल्लेखनीय योगदान—युवाओं ने दिखाई सेवा और समर्पण की भावना
इस रक्तदान शिविर को सफल बनाने में पारीक समाज के अतिरिक्त सर्व समाज के अनेक युवाओं और समाजसेवियों का भी महत्वपूर्ण सहयोग प्राप्त हुआ।
विशेष रूप से आर्यन मिश्रा, दीपेश धानुका, महेश कलानी, शिवानी शर्मा, खुशाल अग्रवाल, दीपम अग्रवाल, राहुल टापड़िया, हर्ष जाजू, हर्ष अग्रवाल, सुनील शर्मा तथा ऋषभ शर्मा का उल्लेखनीय योगदान रहा।
इन सभी सहयोगियों ने आयोजन के प्रति सकारात्मक दृष्टिकोण रखते हुए सेवा भावना और सामाजिक जिम्मेदारी का परिचय दिया।
आयोजकों ने इन सभी के योगदान की सराहना करते हुए कहा कि किसी भी जनकल्याणकारी कार्यक्रम की सफलता के पीछे अनेक ऐसे सहयोगियों का परिश्रम होता है, जो बिना किसी व्यक्तिगत अपेक्षा के समाज के हित में कार्य करते हैं। सर्व समाज के इन सहयोगियों की सक्रिय सहभागिता ने रक्तदान शिविर को सामाजिक एकता और भाईचारे का स्वरूप प्रदान किया।
इस अवसर पर यह भी स्पष्ट हुआ कि मानव सेवा किसी एक समाज, संस्था या समुदाय तक सीमित नहीं होती। जरूरतमंद व्यक्ति की सहायता करने की भावना ही समाज को एकजुट करने का सबसे सशक्त माध्यम है।

मारवाड़ी हॉस्पिटल की चिकित्सकीय टीम ने निभाई महत्वपूर्ण जिम्मेदारी
आठगांव स्थित मारवाड़ी हॉस्पिटल में आयोजित इस शिविर के दौरान अस्पताल की चिकित्सकीय एवं सहयोगी टीम ने रक्तदान प्रक्रिया के संचालन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
रक्तदाताओं की आवश्यक चिकित्सकीय जांच, पात्रता संबंधी प्रक्रिया तथा रक्त संग्रह से जुड़ी व्यवस्थाओं में स्वास्थ्यकर्मियों का सहयोग प्राप्त हुआ।

रक्तदान जैसी स्वास्थ्य संबंधी गतिविधियों में प्रशिक्षित चिकित्सकीय टीम की उपस्थिति अत्यंत आवश्यक होती है, ताकि रक्तदाता और रक्त प्राप्त करने वाले मरीजों की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके।
पारीक महिला परिषद ने मारवाड़ी हॉस्पिटल के चिकित्सकों, स्वास्थ्यकर्मियों और अन्य सहयोगी कर्मचारियों के प्रति विशेष आभार व्यक्त किया। आयोजकों ने कहा कि अस्पताल की टीम के सहयोग से शिविर का संचालन सुव्यवस्थित ढंग से संभव हो सका।

रक्तदान का संदेश—एक व्यक्ति का छोटा-सा प्रयास किसी परिवार के लिए बन सकता है बड़ी उम्मीद
रक्तदान शिविर के माध्यम से समाज को स्वैच्छिक रक्तदान के महत्व के प्रति जागरूक करने का प्रयास भी किया गया।
रक्त की आवश्यकता अनेक चिकित्सकीय परिस्थितियों में पड़ सकती है। सड़क दुर्घटनाओं में गंभीर रूप से घायल मरीजों, बड़ी शल्य चिकित्सा से गुजर रहे रोगियों, प्रसव के दौरान जटिलताओं का सामना करने वाली महिलाओं, थैलेसीमिया से पीड़ित मरीजों तथा अन्य गंभीर बीमारियों के उपचार में रक्त और उसके विभिन्न घटकों की आवश्यकता हो सकती है।
ऐसी परिस्थितियों में सुरक्षित और समय पर रक्त की उपलब्धता अत्यंत महत्वपूर्ण होती है। स्वैच्छिक रक्तदाताओं का योगदान रक्त बैंकों में रक्त की उपलब्धता बनाए रखने और जरूरतमंद मरीजों के उपचार में सहायता करने के लिए आवश्यक है।
इस आयोजन ने समाज को यह संदेश दिया कि रक्तदान केवल किसी अस्पताल या मरीज की सहायता करने का कार्य नहीं, बल्कि यह मानवता के प्रति संवेदनशीलता और सामाजिक जिम्मेदारी का भी परिचायक है।
रक्तदान के लिए स्वस्थ एवं चिकित्सकीय रूप से पात्र व्यक्तियों को आगे आना चाहिए, ताकि जरूरत के समय रक्त की उपलब्धता सुनिश्चित करने में सहयोग मिल सके।

महिला शक्ति ने दिखाई संगठन क्षमता—परंपरागत गतिविधियों से आगे बढ़कर स्वास्थ्य सेवा में भागीदारी
पारीक महिला परिषद का यह पहला रक्तदान शिविर महिला सशक्तिकरण और सामाजिक नेतृत्व की दृष्टि से भी महत्वपूर्ण रहा।
परिषद की बहनों ने आयोजन की जिम्मेदारियों को सामूहिक रूप से संभालकर यह प्रदर्शित किया कि महिलाएं समाज की सांस्कृतिक एवं धार्मिक गतिविधियों के साथ-साथ स्वास्थ्य जागरूकता और जनकल्याण के क्षेत्र में भी प्रभावशाली नेतृत्व प्रदान कर सकती हैं।
इस आयोजन ने महिला संगठनों की भूमिका को व्यापक सामाजिक संदर्भ में प्रस्तुत किया। महिलाओं की संगठन क्षमता, संवेदनशीलता और समर्पण ने एक बेटी के भावनात्मक संकल्प को वास्तविक स्वरूप देने में महत्वपूर्ण योगदान दिया।
पारीक महिला परिषद की इस पहल ने भविष्य में भी ऐसे जनहितकारी कार्यक्रमों के आयोजन के लिए सकारात्मक प्रेरणा प्रदान की।

एक बेटी की भावना से तीन संस्थाओं की एकजुटता तक—सेवा-संकल्प ने समाज को दिया नया संदेश
इस आयोजन की सबसे बड़ी विशेषता यह रही कि इसकी शुरुआत किसी औपचारिक संस्थागत योजना से नहीं, बल्कि एक बेटी की अपने दिवंगत पिता के प्रति भावनात्मक इच्छा से हुई।
खुशी शर्मा चाहती थीं कि उनके पिता की पुण्यतिथि पर ऐसा कार्य हो, जो समाज के लिए उपयोगी सिद्ध हो।
उनके भाई नमन शर्मा ने इस संकल्प को समर्थन दिया और पारीक महिला परिषद की बहनों ने इसे अपनी सामूहिक जिम्मेदारी के रूप में स्वीकार किया।
इसके बाद पारीक सभा एवं पारीक युवक परिषद के सहयोग से इस विचार को एक सुव्यवस्थित रक्तदान शिविर का स्वरूप प्रदान किया गया। सर्व समाज के युवाओं, समाजसेवियों और मारवाड़ी हॉस्पिटल की टीम की सहभागिता ने इस पहल को और अधिक व्यापक बनाया।
इस प्रकार एक परिवार की भावनाओं से शुरू हुआ प्रयास समाज के विभिन्न वर्गों को जोड़ने वाले मानवीय अभियान में परिवर्तित हो गया। यह आयोजन इस बात का उदाहरण बना कि व्यक्तिगत स्मृतियां जब समाजहित से जुड़ती हैं, तो वे दूसरों के जीवन में आशा और सहयोग का माध्यम बन सकती हैं।

श्रद्धांजलि का नया स्वरूप—पुष्पांजलि के साथ परोपकार की भावना को भी मिले महत्व
स्वर्गीय श्री धर्मेन्द्र शर्मा (टोनी) की पुण्यतिथि पर आयोजित इस रक्तदान शिविर ने श्रद्धांजलि की भावना को एक व्यापक मानवीय दृष्टिकोण प्रदान किया।
सामान्यतः किसी दिवंगत परिजन की पुण्यतिथि पर परिवारजन उन्हें श्रद्धापूर्वक स्मरण करते हैं, धार्मिक अनुष्ठान करते हैं और उनकी स्मृतियों को नमन करते हैं।
लेकिन खुशी शर्मा और नमन शर्मा ने अपने पिता की पुण्यतिथि को जनसेवा से जोड़कर एक अलग उदाहरण प्रस्तुत किया।
इस पहल का मूल संदेश यही रहा कि किसी प्रियजन के प्रति सच्ची श्रद्धांजलि उनकी स्मृतियों को समाज के लिए उपयोगी कार्यों के माध्यम से जीवंत बनाए रखने में भी निहित हो सकती है।
जब किसी दिवंगत व्यक्ति की स्मृति में किया गया कार्य जरूरतमंदों के लिए सहायता का माध्यम बनता है, तो वह श्रद्धांजलि व्यक्तिगत भावनाओं से आगे बढ़कर सामाजिक प्रेरणा का स्वरूप ग्रहण कर लेती है।

नई पीढ़ी के लिए प्रेरणा—खुशी और नमन का संकल्प बना पारिवारिक संस्कारों और सामाजिक जिम्मेदारी का संगम
खुशी शर्मा और नमन शर्मा की इस पहल ने नई पीढ़ी के सामने पारिवारिक मूल्यों और सामाजिक जिम्मेदारी का एक प्रेरणादायक उदाहरण प्रस्तुत किया।
अपने पिता की पुण्य स्मृति में रक्तदान शिविर आयोजित करने का उनका संकल्प यह दर्शाता है कि पारिवारिक संस्कार केवल व्यक्तिगत जीवन तक सीमित नहीं रहते, बल्कि समाज के प्रति सेवा भावना के रूप में भी अभिव्यक्त हो सकते हैं।
इस आयोजन से यह संदेश सामने आया कि युवाओं को अपने जीवन के विशेष अवसरों, पारिवारिक स्मृति दिवसों और महत्वपूर्ण तिथियों को जनकल्याणकारी गतिविधियों से जोड़ने की दिशा में भी विचार करना चाहिए।
रक्तदान, स्वास्थ्य जागरूकता, शिक्षा सहायता, जरूरतमंदों की मदद और अन्य सामाजिक कार्यों के माध्यम से किसी प्रियजन की स्मृति को सार्थक स्वरूप दिया जा सकता है।
खुशी और नमन की यह पहल इसी भावना का सुंदर उदाहरण बनी।

रक्तदाताओं और सभी सहयोगियों के प्रति परिषद ने जताई विशेष कृतज्ञता
रक्तदान शिविर के सफल समापन पर पारीक महिला परिषद, गुवाहाटी ने रक्तदान करने वाले सभी 48 रक्तवीरों के प्रति विशेष आभार व्यक्त किया। इसके साथ ही रक्तदान के लिए पंजीकरण कराने वाले सभी 70 व्यक्तियों की सेवा भावना की भी सराहना की गई।
परिषद ने आयोजन में सहयोग देने वाली पारीक सभा, पारीक युवक परिषद, सर्व समाज के सदस्यों, मारवाड़ी हॉस्पिटल की चिकित्सकीय टीम और सभी सहयोगियों के प्रति कृतज्ञता व्यक्त की।
विशेष रूप से परिषद की सलाहकार एवं पूर्व अध्यक्ष ममता शर्मा, अध्यक्ष निशा पारीक, सचिव जया पारीक, सीमा जोशी, मधु शर्मा, पारीक सभा के कोषाध्यक्ष नंदकिशोर पारीक, मुकेश पारीक, पारीक युवक परिषद के विकास पारीक, विशाल पारीक और सिद्धार्थ पारीक सहित सभी पदाधिकारियों एवं सदस्यों के सहयोग की सराहना की गई।
इसी प्रकार सर्व समाज के आर्यन मिश्रा, दीपेश धानुका, महेश कलानी, शिवानी शर्मा, खुशाल अग्रवाल, दीपम अग्रवाल, राहुल टापड़िया, हर्ष जाजू, हर्ष अग्रवाल, सुनील शर्मा और ऋषभ शर्मा के योगदान को भी विशेष रूप से उल्लेखनीय बताया गया।
आयोजकों ने कहा कि सभी सहयोगियों की सामूहिक सहभागिता ने इस प्रथम रक्तदान शिविर को सफल और स्मरणीय बनाया।

48 रक्तवीरों की सहभागिता बनी मानवता की मिसाल—पिता की स्मृतियों को मिला सेवा का सार्थक स्वरूप
स्वर्गीय श्री धर्मेन्द्र शर्मा (टोनी) की पुण्यतिथि पर आयोजित यह रक्तदान शिविर केवल एक दिन का आयोजन नहीं, बल्कि प्रेम, स्मृति, सेवा और सामाजिक एकजुटता का प्रेरणादायक उदाहरण बनकर सामने आया।
एक ओर पारीक महिला परिषद, गुवाहाटी ने अपने इतिहास में पहली बार रक्तदान शिविर आयोजित कर सामाजिक सेवा के क्षेत्र में नई पहल की, वहीं दूसरी ओर खुशी शर्मा और नमन शर्मा ने अपने पिता की पुण्य स्मृतियों को जनकल्याण से जोड़कर श्रद्धांजलि का एक सार्थक संदेश दिया।
70 लोगों का पंजीकरण और 48 रक्तदाताओं का सफल रक्तदान इस आयोजन की महत्वपूर्ण उपलब्धि रही।
पारीक महिला परिषद, पारीक सभा, पारीक युवक परिषद, सर्व समाज के सहयोगियों और मारवाड़ी हॉस्पिटल की चिकित्सकीय टीम के संयुक्त प्रयासों ने यह सिद्ध किया कि जब समाज किसी नेक उद्देश्य के लिए एकजुट होता है, तो एक परिवार की भावनात्मक इच्छा भी व्यापक जनहित का माध्यम बन सकती है।
इस आयोजन का सबसे भावनात्मक पक्ष यही रहा कि एक बेटी ने अपने पिता को याद करने के लिए ऐसा मार्ग चुना, जिसमें उनकी स्मृति दूसरों की सहायता करने के संकल्प से जुड़ गई।
खुशी शर्मा की अपने पिता के प्रति श्रद्धा, भाई नमन शर्मा का सहयोग, माता मधु शर्मा से जुड़ी पारिवारिक भावनाएं तथा पारीक महिला परिषद की बहनों का समर्पण इस आयोजन की विशेष पहचान रहे।
गुवाहाटी में संपन्न यह रक्तदान शिविर समाज के सामने एक महत्वपूर्ण संदेश छोड़ गया कि अपनों की स्मृतियों को जीवंत रखने का एक सुंदर माध्यम यह भी है कि उनके नाम पर ऐसे कार्य किए जाएं, जिनसे किसी जरूरतमंद को सहायता मिले और किसी परिवार के जीवन में आशा की नई किरण जगे।
पिता की यादों से शुरू हुआ बेटी का यह सेवा-संकल्प 48 रक्तवीरों के महादान और समाज के सामूहिक सहयोग के साथ मानवता की एक प्रेरणादायक मिसाल बन गया।
“सच्ची श्रद्धांजलि केवल स्मृतियों को संजोकर रखना नहीं, बल्कि उन स्मृतियों को ऐसे पुण्य कार्यों में बदल देना है, जिनसे किसी जरूरतमंद के जीवन में उम्मीद की नई रोशनी जग सके।”




