सुधाकंठ डॉ. भूपेन हजारिका की जन्म शताब्दी पर टियोक में जगह-जगह श्रद्धांजलि : महान कलाकार के चित्र पर पुष्प अर्पित कर जलाए श्रद्धा के दीप, अमर गीतों और मानवीय संदेशों को किया याद : सांसद गौरव गोगोई, विधायक विकास सैकिया व रूपज्योति कुर्मी सहित राजनीतिक-सामाजिक संगठनों ने अर्पित किए श्रद्धासुमन : मारवाड़ी सम्मेलन टियोक शाखा और मारवाड़ी महिला समिति ने किया विशेष श्रद्धांजलि कार्यक्रम, समाज के सदस्यों की रही सक्रिय भागीदारी
आऊनीआटी विश्वविद्यालय में मनाई गई 101वीं जयंती; डॉ. पीताम्बर देव गोस्वामी ने ‘मानव रत्न’ सम्मान दिए जाने की आवश्यकता पर दिया जोर

टियोक, 9 सितंबर : असम की सांस्कृतिक चेतना को अपनी अद्वितीय आवाज, संगीत और रचनाओं के माध्यम से विश्व पटल पर प्रतिष्ठित करने वाले भारत रत्न, सुधाकंठ डॉ. भूपेन हजारिका की जन्म शताब्दी के अवसर पर मंगलवार को टियोक सहित विभिन्न स्थानों पर श्रद्धा और सम्मान के साथ अनेक कार्यक्रम आयोजित किए गए। महान संगीतकार, गायक, गीतकार और विश्वविख्यात कलाकार डॉ. हजारिका को याद करते हुए लोगों ने उनके चित्र पर पुष्प अर्पित किए और दीप प्रज्वलित कर भावभीनी श्रद्धांजलि दी।
दिनभर आयोजित कार्यक्रमों में सुधाकंठ के संगीत, असम की संस्कृति और लोकजीवन के प्रति उनके योगदान के साथ सामाजिक चेतना तथा मानवता के उनके सार्वभौमिक संदेश को विशेष रूप से याद किया गया। वक्ताओं ने कहा कि भूपेन हजारिका केवल असम के महान कलाकार नहीं थे, बल्कि उनकी रचनाओं ने भाषा और भौगोलिक सीमाओं से ऊपर उठकर मानवता, समानता, भाईचारे और सामाजिक सरोकारों की आवाज को दुनिया तक पहुंचाया।

गौरव गोगोई, विकास सैकिया और रूपज्योति कुर्मी ने दी श्रद्धांजलि
जन्म शताब्दी के अवसर पर जोरहाट के सांसद गौरव गोगोई, टियोक के विधायक विकास सैकिया तथा मरियानी के विधायक रूपज्योति कुर्मी सहित विभिन्न राजनीतिक, सामाजिक, छात्र और साहित्यिक संगठनों की ओर से भी डॉ. भूपेन हजारिका को श्रद्धांजलि अर्पित की गई।
विभिन्न स्थानों पर आयोजित कार्यक्रमों में सुधाकंठ के चित्र के समक्ष दीप जलाए गए और पुष्प अर्पित किए गए। लोगों ने उनकी कालजयी रचनाओं को याद करते हुए असमिया भाषा, साहित्य, संगीत और संस्कृति को राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय पहचान दिलाने में उनके योगदान का स्मरण किया।

मारवाड़ी सम्मेलन टियोक शाखा ने भी सुधाकंठ को किया नमन
इसी क्रम में पूर्वोत्तर प्रादेशिक मारवाड़ी सम्मेलन की टियोक शाखा की ओर से भी डॉ. भूपेन हजारिका की स्मृति में विशेष श्रद्धांजलि कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम में मारवाड़ी समाज के सदस्यों ने बड़ी श्रद्धा के साथ सुधाकंठ के चित्र के समक्ष दीप प्रज्वलित किए और पुष्प अर्पित कर उनके प्रति सम्मान व्यक्त किया।
इस अवसर पर शाखा अध्यक्ष रामावतार बिहानी, उपाध्यक्ष कामाख्या लाल चांडक, मनोहर लाल मूंधड़ा, मुकेश अग्रवाल, ललित शर्मा, कृष्ण अग्रवाल, पवन शर्मा, गोपाल बिहारी तथा शाखा सचिव बीजू कुमार तुनवाल सहित अन्य सदस्य उपस्थित रहे। सभी ने डॉ. हजारिका के चित्र पर श्रद्धासुमन अर्पित कर उनके सांस्कृतिक एवं सामाजिक योगदान को याद किया।

मारवाड़ी समाज की महिलाओं ने भी निभाई सक्रिय भागीदारी
श्रद्धांजलि कार्यक्रम में मारवाड़ी समाज की महिलाओं की भी उल्लेखनीय भागीदारी रही। मारवाड़ी महिला समिति की सलाहकार गायत्री देवी तुनवाल, अध्यक्ष संपत बिहानी, सचिव श्याम मूंधड़ा, मनीष जैन, गोमती देवी चांडक और कंचन बिहानी सहित अन्य महिला सदस्यों ने सुधाकंठ के चित्र पर पुष्प अर्पित कर उन्हें श्रद्धांजलि दी।
कार्यक्रम में उपस्थित सदस्यों ने कहा कि डॉ. भूपेन हजारिका का व्यक्तित्व और कृतित्व किसी एक भाषा अथवा समुदाय तक सीमित नहीं रहा। संगीत के माध्यम से समाज को जोड़ने और मानवीय मूल्यों का संदेश देने के कारण वे हर वर्ग और समुदाय के बीच समान रूप से सम्मानित हैं।
इस अवसर पर मारवाड़ी सम्मेलन की टियोक शाखा के सचिव बीजू कुमार तुनवाल ने डॉ. भूपेन हजारिका के योगदान को याद करते हुए कहा कि सुधाकंठ की आवाज और उनकी रचनाएं आज भी समाज को प्रेरणा देती हैं।

आऊनीआटी विश्वविद्यालय में श्रद्धा से मनाई गई 101वीं जयंती
दूसरी ओर, आऊनीआटी विश्वविद्यालय में भी डॉ. भूपेन हजारिका की 101वीं जयंती श्रद्धा और सम्मान के साथ मनाई गई। विश्वविद्यालय परिसर में आयोजित कार्यक्रम का उद्घाटन विश्वविद्यालय के कुलाधिपति एवं सत्राधिकारी डॉ. पीताम्बर देव गोस्वामी ने दीप प्रज्वलित कर किया।
इस अवसर पर डॉ. पीताम्बर देव गोस्वामी ने सुधाकंठ के व्यक्तित्व और योगदान पर प्रकाश डालते हुए उन्हें विश्वमानवता का महान चिंतक बताया। उन्होंने डॉ. भूपेन हजारिका को ‘मानव रत्न’ सम्मान से विभूषित किए जाने की आवश्यकता पर भी जोर दिया।
कार्यक्रम में विश्वविद्यालय के शिक्षक, छात्र-छात्राएं तथा अन्य गणमान्य लोग उपस्थित रहे। उपस्थित लोगों ने सुधाकंठ के सांस्कृतिक योगदान और मानवतावादी विचारों को याद करते हुए उनके प्रति श्रद्धा व्यक्त की।

आज भी असम की सांस्कृतिक पहचान है सुधाकंठ की अमर आवाज
टियोक सहित विभिन्न स्थानों पर दिनभर चले श्रद्धांजलि कार्यक्रमों के माध्यम से लोगों ने डॉ. भूपेन हजारिका के अमर संगीत, कला, सामाजिक चेतना और मानवता के संदेश को याद किया। वक्ताओं ने उनके द्वारा संगीत के जरिए समाज के विभिन्न वर्गों को जोड़ने और असम की सांस्कृतिक विरासत को दुनिया के सामने प्रस्तुत करने के योगदान को अविस्मरणीय बताया।
सुधाकंठ भले ही आज सशरीर हमारे बीच नहीं हैं, लेकिन उनकी कालजयी रचनाएं और अमर आवाज आज भी असम की सांस्कृतिक पहचान को नई पीढ़ी तक पहुंचा रही हैं। जन्म शताब्दी के अवसर पर आयोजित कार्यक्रमों ने एक बार फिर यह संदेश दिया कि डॉ. भूपेन हजारिका की सांस्कृतिक विरासत और मानवता का उनका संदेश आने वाली पीढ़ियों को निरंतर प्रेरित करता रहेगा।




