शोक की घड़ी में नेत्रदान कर बेंगाणी परिवार ने पेश की मानवता की मिसाल, दिवंगत रीता बेंगाणी के दोनों कॉर्निया किए गए दान : 9 सितंबर को हुआ श्रीमती रीता बेंगाणी का निधन, गहरे दुःख के बीच परिवार ने लिया नेत्रदान का प्रेरणादायी निर्णय : तेजपुर मेडिकल कॉलेज में आवश्यक मेडिकल किट उपलब्ध नहीं होने पर तेजपुर मारवाड़ी सम्मेलन को मिली किट बनी मददगार : समाजसेवी बजरंग सुराना ने उपलब्ध कराई नेत्रदान मेडिकल किट, आपसी समन्वय से समय पर संभव हो सकी प्रक्रिया
डॉ. पुनीत सैनी की अगुवाई में मेडिकल टीम ने सफलतापूर्वक प्राप्त किए दोनों कॉर्निया, समाजसेवियों ने निभाई महत्वपूर्ण भूमिका : दुःख को मानव सेवा के संकल्प में बदला बेंगाणी परिवार ने, नेत्रदान से जरूरतमंद के जीवन में दृष्टि का उजाला लाने का संदेश

तेजपुर, 10 सितंबर : किसी अपने को खोने का दुःख परिवार के लिए बेहद कठिन होता है, लेकिन इसी शोक की घड़ी में यदि कोई परिवार मानव सेवा का ऐसा निर्णय ले, जो किसी जरूरतमंद के जीवन में नई रोशनी की उम्मीद जगा सके, तो वह समाज के लिए प्रेरणा बन जाता है। तेजपुर के बेंगाणी परिवार ने ऐसा ही अनुकरणीय उदाहरण प्रस्तुत करते हुए दिवंगत श्रीमती रीता बेंगाणी का नेत्रदान कराया है।

तेजपुर निवासी श्रीमती रीता बेंगाणी, धर्मपत्नी स्वर्गीय नथमलजी बेंगाणी एवं प्रशांत बेंगाणी की माताजी, का 9 सितंबर 2026 को दोपहर करीब 2:35 बजे निधन हो गया। उनके निधन से परिवार और शुभचिंतकों में शोक की लहर दौड़ गई। गहरे दुःख के बावजूद परिवार ने सामाजिक सरोकार और मानव सेवा की भावना को सर्वोपरि रखते हुए उनका नेत्रदान कराने का निर्णय लिया।

परिवार के निर्णय के बाद तत्काल शुरू हुए नेत्रदान के प्रयास
परिवार की ओर से नेत्रदान की इच्छा व्यक्त किए जाने के बाद इसकी प्रक्रिया को समय रहते पूरा करने के लिए संबंधित लोगों ने तत्काल प्रयास शुरू किए। समाजसेवी राजीव जैन ने तेजपुर मेडिकल कॉलेज के नेत्र विशेषज्ञ डॉ. पुनीत सैनी से संपर्क किया। वहीं शक्ति बोथरा एवं राजेंद्र भाटी ने तेजपुर मेडिकल कॉलेज में संबंधित व्यवस्था के प्रभारी डॉ. सौरभ भुइयां से संपर्क कर आवश्यक समन्वय स्थापित किया।
नेत्रदान की प्रक्रिया जल्द से जल्द पूरी करने के उद्देश्य से सभी संबंधित लोगों ने अपने-अपने स्तर पर व्यवस्था सुनिश्चित करने का प्रयास किया। इसी दौरान एक व्यावहारिक समस्या सामने आई, जिसने कुछ समय के लिए नेत्रदान की प्रक्रिया को चुनौतीपूर्ण बना दिया।
मेडिकल कॉलेज में उपलब्ध नहीं थी आवश्यक किट और ट्रांसपोर्टेशन बॉक्स
बातचीत के दौरान जानकारी सामने आई कि उस समय तेजपुर मेडिकल कॉलेज में नेत्रदान की प्रक्रिया के लिए आवश्यक मेडिकल किट एवं ट्रांसपोर्टेशन बॉक्स उपलब्ध नहीं था। ऐसे में समयबद्ध तरीके से प्रक्रिया पूरी करने के लिए जरूरी संसाधन की व्यवस्था करना महत्वपूर्ण हो गया।
इसी दौरान पूर्व में की गई एक सामाजिक पहल बेहद उपयोगी साबित हुई। कुछ समय पहले गुवाहाटी के समाजसेवी बजरंग सुराना ने भविष्य में जरूरत पड़ने पर किसी नेत्रदाता के काम आ सके, इसी उद्देश्य से तेजपुर मारवाड़ी सम्मेलन को नेत्रदान के लिए आवश्यक मेडिकल किट उपलब्ध कराई थी।
उस समय शायद किसी ने कल्पना भी नहीं की होगी कि यह किट इतनी महत्वपूर्ण परिस्थिति में उपयोगी सिद्ध होगी। श्रीमती रीता बेंगाणी के नेत्रदान की प्रक्रिया के दौरान जब मेडिकल किट की आवश्यकता सामने आई, तब उसी किट का उपयोग किया गया।

आपसी समन्वय से सफल हुआ नेत्रदान, दोनों कॉर्निया किए गए प्राप्त
परिवार, समाजसेवियों और चिकित्सकों के बीच त्वरित समन्वय के बाद नेत्रदान की आवश्यक प्रक्रिया आगे बढ़ाई गई। डॉ. पुनीत सैनी की अगुवाई में तेजपुर मेडिकल कॉलेज की चार सदस्यीय चिकित्सा टीम ने 9 सितंबर को श्रीमती रीता बेंगाणी के दोनों कॉर्निया सफलतापूर्वक प्राप्त किए।
पूरी प्रक्रिया आवश्यक चिकित्सकीय मानकों का पालन करते हुए गरिमा और संवेदनशीलता के साथ संपन्न की गई। इस मानवीय पहल को सफल बनाने में बेंगाणी परिवार के निर्णय के साथ चिकित्सकों और सहयोग करने वाले समाजसेवियों की तत्परता एवं आपसी समन्वय की महत्वपूर्ण भूमिका रही।
शोक को सेवा के संकल्प में बदलकर दिया प्रेरणादायी संदेश
श्रीमती रीता बेंगाणी के निधन से परिवार पर दुःख का पहाड़ टूट पड़ा, लेकिन इसी कठिन समय में परिवार द्वारा लिया गया नेत्रदान का निर्णय समाज के सामने मानवता और सेवा का प्रेरक उदाहरण बनकर सामने आया है।
नेत्रदान का यह निर्णय इस संदेश को भी मजबूत करता है कि किसी व्यक्ति के निधन के बाद किया गया नेत्रदान दृष्टि की आवश्यकता वाले किसी व्यक्ति के जीवन में नई उम्मीद का माध्यम बन सकता है। बेंगाणी परिवार की इस पहल ने शोक की घड़ी में भी मानव कल्याण के प्रति संवेदनशीलता और सामाजिक जिम्मेदारी का परिचय दिया है।
साथ ही, इस पूरी प्रक्रिया में यह तथ्य भी सामने आया कि नेत्रदान जैसे समय-संवेदनशील कार्य के लिए अस्पतालों और संबंधित संस्थानों में आवश्यक संसाधनों की उपलब्धता कितनी महत्वपूर्ण है। पूर्व में उपलब्ध कराई गई मेडिकल किट का सही समय पर उपयोग होना सामाजिक सहयोग और दूरदर्शिता का सकारात्मक उदाहरण है।

10 सितंबर को दोपहर 2 बजे निकलेगी अंतिम यात्रा
दिवंगत श्रीमती रीता बेंगाणी की अंतिम यात्रा 10 सितंबर को दोपहर 2:00 बजे उनके निवास स्थान से प्रस्थान करेगी। परिजनों एवं शुभचिंतकों से अंतिम यात्रा में सम्मिलित होकर दिवंगत आत्मा को श्रद्धांजलि अर्पित करने का अनुरोध किया गया है।
श्रीमती रीता बेंगाणी के निधन पर परिजनों, रिश्तेदारों, शुभचिंतकों तथा सामाजिक क्षेत्र से जुड़े लोगों ने गहरी संवेदना व्यक्त करते हुए उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की है।
मानवता की स्मृति के रूप में याद रहेगा नेत्रदान का निर्णय
बेंगाणी परिवार का यह निर्णय केवल एक नेत्रदान तक सीमित नहीं है, बल्कि समाज में अंग एवं नेत्रदान के प्रति जागरूकता बढ़ाने वाला एक प्रेरक संदेश भी है। गहरे व्यक्तिगत दुःख के बीच दूसरों के जीवन में उम्मीद की किरण जगाने की भावना ने इस निर्णय को विशेष बना दिया है।
ईश्वर दिवंगत श्रीमती रीता बेंगाणी की आत्मा को शांति प्रदान करें तथा शोकाकुल बेंगाणी परिवार को इस अपार दुःख को सहन करने की शक्ति और संबल प्रदान करें।




