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शिवसागर कॉमर्स कॉलेज में ‘अग्नियुग की चिंगारी हूं मैं’ के जरिए सुधाकंठ डॉ. भूपेन हजारिका को संगीतमय श्रद्धांजलि : शताब्दी जयंती पर विशेष पहल, कालजयी गीतों के जरिए याद किए गए भारत रत्न डॉ. भूपेन हजारिका : प्राचार्य डॉ. सौमार ज्योति महंत ने सुधाकंठ की रचनाओं पर राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय स्तर पर व्यापक चर्चा और शोध को बढ़ावा देने पर दिया जोर : आकाशवाणी डिब्रूगढ़ की कलाकार प्रणति बरुआ, प्रसिद्ध गिटारिस्ट जयंत दत्ता और संगीतज्ञ नवज्योति भट्टाचार्य ने गीतों के जरिए अर्पित की स्वरांजलि

मानवता, समानता, भाईचारे, सामाजिक सद्भाव और चेतना के भूपेन हजारिका के संदेश को नई पीढ़ी तक पहुंचाने का आह्वान

शिवसागर, 12 सितंबर : भारत रत्न एवं सुधाकंठ डॉ. भूपेन हजारिका की शताब्दी जयंती के उपलक्ष्य में शिवसागर कॉमर्स कॉलेज में उनके कालजयी व्यक्तित्व, संगीत, साहित्य और विराट सृजन संसार को समर्पित एक गरिमामय एवं संगीतमय कार्यक्रम आयोजित किया गया। कॉलेज के असमिया एवं मैनेजमेंट विभाग की पहल तथा शिक्षक-कर्मचारियों के सहयोग से आयोजित इस विशेष कार्यक्रम को ‘अग्नियुग की चिंगारी हूं मैं’ शीर्षक दिया गया। इस अवसर पर डॉ. भूपेन हजारिका के बहुआयामी जीवन, कर्म तथा असमिया समाज और संस्कृति के प्रति उनके अतुलनीय योगदान को भावपूर्ण ढंग से याद किया गया।

दीप प्रज्ज्वलन के साथ कार्यक्रम का शुभारंभ

कार्यक्रम की शुरुआत दीप प्रज्ज्वलन के साथ हुई। इसके बाद कॉलेज की शिक्षिकाओं ने सुधाकंठ के कालजयी गीतों पर आधारित आकर्षक प्रस्तुति के साथ सामूहिक गान प्रस्तुत किया। भूपेन हजारिका के अमर गीतों की स्वर लहरियों से पूरा वातावरण संगीतमय हो उठा। गीतों के माध्यम से उपस्थित शिक्षक, विद्यार्थी और अतिथि उनकी समृद्ध सांस्कृतिक विरासत तथा मानवतावादी विचारधारा से एक बार फिर जुड़े।

आयोजन में सुधाकंठ के गीतों को केवल संगीत के रूप में नहीं, बल्कि असमिया समाज की चेतना, संघर्ष, मानवीय संवेदना और सामाजिक एकता के सशक्त दस्तावेज के रूप में भी याद किया गया।

‘सागर समान विराट था सुधाकंठ का व्यक्तित्व’

कॉलेज के प्राचार्य डॉ. सौमार ज्योति महंत ने अपने स्वागत भाषण में सुधाकंठ डॉ. भूपेन हजारिका के रंगीन और प्रेरणादायी जीवन, सागर समान विराट व्यक्तित्व तथा संगीत और साहित्य की दुनिया में उनके असाधारण योगदान पर विस्तार से प्रकाश डाला।

उन्होंने कहा कि बदलते सामाजिक परिदृश्य में भी भूपेन हजारिका के गीतों और विचारों की प्रासंगिकता बरकरार है। उनकी रचनाएं आज भी समाज को मानवता, समानता, भाईचारे, सामाजिक सद्भाव और सामाजिक चेतना का संदेश देती हैं। सुधाकंठ का संगीत समय और पीढ़ियों की सीमाओं से परे जाकर लोगों को जोड़ने की क्षमता रखता है।

राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय स्तर पर शोध और चर्चा की जरूरत

डॉ. सौमार ज्योति महंत ने विशेष रूप से इस बात पर जोर दिया कि महान कलाकार डॉ. भूपेन हजारिका की विशाल सृजन-यात्रा को केवल स्मृति आयोजनों या जयंती समारोहों तक सीमित नहीं रखा जाना चाहिए। उनकी रचनाओं, विचारों, संगीत और साहित्यिक योगदान पर राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय स्तर पर व्यापक चर्चा, अध्ययन और शोध को बढ़ावा दिया जाना चाहिए।

उन्होंने कहा कि सुधाकंठ की रचनात्मक विरासत इतनी व्यापक और समृद्ध है कि उस पर गंभीर अकादमिक अध्ययन की अपार संभावनाएं मौजूद हैं। इसके साथ ही उन्होंने नई पीढ़ी को भूपेन हजारिका के जीवन, विचारों और रचनात्मक विरासत से परिचित कराने की आवश्यकता भी रेखांकित की।

प्रणति बरुआ, जयंत दत्ता और नवज्योति भट्टाचार्य ने बांधा समां

कार्यक्रम में आकाशवाणी डिब्रूगढ़ की रेडियो कलाकार एवं गीतकार प्रणति बरुआ, विशिष्ट गायक एवं प्रसिद्ध गिटारिस्ट जयंत दत्ता तथा विशिष्ट गायक-संगीतज्ञ नवज्योति भट्टाचार्य आमंत्रित अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। समारोह का प्रमुख आकर्षण इन कलाकारों द्वारा प्रस्तुत डॉ. भूपेन हजारिका के कालजयी गीत रहे।

कलाकारों ने अपनी गायकी और रचनात्मक प्रस्तुतियों के माध्यम से सुधाकंठ को भावपूर्ण स्वरांजलि अर्पित की। उनकी प्रस्तुतियों ने पूरे आयोजन को जीवंत बना दिया और उपस्थित लोगों को भूपेन हजारिका की संगीत यात्रा के विभिन्न रंगों से रूबरू कराया।

जीतू बरुआ और राजकुमारी फाल्गुनी ने भी दी स्वरांजलि

इस अवसर पर विशिष्ट गायक जीतू बरुआ तथा उभरती हुई गायिका राजकुमारी फाल्गुनी ने भी गीत प्रस्तुत कर सुधाकंठ को श्रद्धांजलि अर्पित की। अलग-अलग पीढ़ियों के कलाकारों की प्रस्तुतियों ने डॉ. भूपेन हजारिका के संगीत की व्यापकता और पीढ़ियों को जोड़ने वाली उनकी अद्भुत सृजनात्मक शक्ति को एक बार फिर सामने रखा।

सुधाकंठ के गीतों की प्रस्तुतियों के बीच उनके जीवन और सृजन के विभिन्न पहलुओं को याद किए जाने से कार्यक्रम केवल एक संगीत समारोह तक सीमित नहीं रहा, बल्कि उनके विचारों और सांस्कृतिक योगदान को समझने का एक महत्वपूर्ण मंच भी बना।

नई पीढ़ी तक पहुंचे मानवता और समानता का संदेश

कार्यक्रम में इस बात पर विशेष जोर दिया गया कि सुधाकंठ की रचनाओं में निहित मानवता, समानता, भाईचारे, सामाजिक सद्भाव और सामाजिक चेतना के संदेश को नई पीढ़ी तक पहुंचाना वर्तमान समय की महत्वपूर्ण आवश्यकता है।

वक्ताओं ने रेखांकित किया कि डॉ. भूपेन हजारिका के गीत केवल संगीत की अमूल्य धरोहर नहीं हैं, बल्कि समाज को जोड़ने, मानवीय मूल्यों को मजबूत करने और लोगों में सामाजिक जिम्मेदारी का बोध कराने वाली सांस्कृतिक विरासत भी हैं। उनकी रचनाओं में आम आदमी की पीड़ा, संघर्ष, प्रेम, भाईचारा और मानवता की आवाज सुनाई देती है, जो आज भी उतनी ही प्रासंगिक है।

‘अग्नियुग की चिंगारी हूं मैं’ बना भावपूर्ण सांस्कृतिक स्मरण

‘अग्नियुग की चिंगारी हूं मैं’ कार्यक्रम के माध्यम से शिवसागर कॉमर्स कॉलेज परिवार ने असमिया समाज के महान कलाकार सुधाकंठ डॉ. भूपेन हजारिका को गहरी श्रद्धांजलि अर्पित की। गीत, संगीत, विचार और उनके विराट सृजन संसार के स्मरण से सजा यह आयोजन उनकी शताब्दी जयंती को समर्पित एक भावपूर्ण सांस्कृतिक श्रद्धांजलि के रूप में यादगार बन गया।

कार्यक्रम ने जहां सुधाकंठ की कालजयी रचनाओं को एक बार फिर जीवंत किया, वहीं यह संदेश भी दिया कि डॉ. भूपेन हजारिका की सांस्कृतिक और वैचारिक विरासत को नई पीढ़ी तक पहुंचाने के साथ-साथ उनके सृजन पर गंभीर अध्ययन, व्यापक विमर्श और राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय स्तर पर शोध को आगे बढ़ाना ही उनके प्रति सच्ची श्रद्धांजलि होगी।

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