50 वर्षों बाद फिर सजा दोस्ती का कारवां : जीसीसी 1976 बैच का स्वर्ण जयंती मिलन समारोह बना यादगार : देशभर से पहुंचे 47 पूर्व विद्यार्थियों ने ताज़ा की छात्र जीवन की सुनहरी यादें,
दिवंगत साथियों को दी श्रद्धांजलि, गीत-संगीत और आत्मीय मिलन के बीच मित्रता के रिश्तों को किया और मजबूत

गुवाहाटी, 20 जुलाई : जीवन की भागदौड़, व्यावसायिक जिम्मेदारियों और समय के लंबे अंतराल के बावजूद यदि कोई रिश्ता वर्षों तक उसी आत्मीयता के साथ जीवित रहता है, तो वह छात्र जीवन की मित्रता होती है। इसी अटूट रिश्ते और अनमोल यादों को फिर से जीवंत करने के उद्देश्य से गुवाहाटी कॉमर्स कॉलेज (जीसीसी) के 1976 बैच के पूर्व विद्यार्थियों ने अपने बैच के 50 वर्ष पूर्ण होने के उपलक्ष्य में स्वर्ण जयंती मिलन समारोह का भव्य आयोजन उलुबाड़ी स्थित होटल ऑर्नेट में किया। यह समारोह केवल एक पुनर्मिलन नहीं, बल्कि भावनाओं, स्मृतियों, मित्रता, सम्मान और अपनत्व का ऐसा संगम बना, जिसने उपस्थित प्रत्येक सदस्य को छात्र जीवन के सुनहरे दिनों में लौटा दिया।

देश के विभिन्न राज्यों और शहरों से पहुंचे 47 पूर्व विद्यार्थियों ने इस विशेष अवसर पर भाग लिया। लंबे समय बाद एक-दूसरे से मिलते ही सभी के चेहरे पर उत्साह, भावुकता और अपनत्व की झलक साफ दिखाई दी। वर्षों बाद साथियों से मिलकर सभी ने अपने कॉलेज जीवन की अनगिनत यादों को साझा किया और पुरानी मित्रता को नए उत्साह के साथ फिर से मजबूत किया।

स्वागत भाषण के साथ हुआ भावनात्मक शुरुआत
कार्यक्रम का शुभारंभ अशोक जैन योगेश के स्वागत भाषण से हुआ। उन्होंने सभी साथियों का हार्दिक अभिनंदन करते हुए कहा कि जीवन में सफलता, प्रतिष्ठा और उपलब्धियां महत्वपूर्ण हैं, लेकिन छात्र जीवन के मित्रों के साथ बिताए गए पल सबसे अनमोल होते हैं। उन्होंने कहा कि 50 वर्षों बाद इस प्रकार का मिलन केवल एक समारोह नहीं, बल्कि भावनाओं का ऐसा उत्सव है जो जीवनभर याद रहेगा।
उन्होंने आयोजन समिति की ओर से देश के विभिन्न हिस्सों से आए सभी साथियों का स्वागत करते हुए कहा कि इस स्वर्ण जयंती समारोह का उद्देश्य केवल पुराने दिनों को याद करना नहीं, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के लिए भी मित्रता, एकता और आपसी संबंधों की मिसाल प्रस्तुत करना है।

दिवंगत साथियों को दी गई भावभीनी श्रद्धांजलि
कार्यक्रम की शुरुआत अत्यंत भावुक वातावरण में हुई। बैच के दिवंगत 13 साथियों को दो मिनट का मौन रखकर श्रद्धांजलि अर्पित की गई। उपस्थित सभी सदस्यों ने अपने उन मित्रों को याद किया, जिनके साथ उन्होंने कॉलेज जीवन के सबसे खूबसूरत पल बिताए थे।
श्रद्धांजलि के दौरान अनेक सदस्य भावुक हो उठे। सभी ने कहा कि भले ही वे आज हमारे बीच नहीं हैं, लेकिन उनकी यादें, उनका स्नेह और उनके साथ बिताए गए पल हमेशा हमारे दिलों में जीवित रहेंगे।

राजस्थानी साफा और असमिया सम्मान ने दिखाई सांस्कृतिक एकता
समारोह की विशेष आकर्षणों में से एक रहा पारंपरिक स्वागत समारोह। जयपुर से पधारे दीपक जालान ने सभी प्रतिभागियों का राजस्थानी साफा पहनाकर एवं तिलक लगाकर आत्मीय स्वागत किया। इसके बाद सभी पूर्व विद्यार्थियों को स्मृति-चिह्न, असम की सांस्कृतिक पहचान फूलाम गमछा तथा मोतियों की माला भेंट कर सम्मानित किया गया।
यह दृश्य भारतीय सांस्कृतिक विविधता और राष्ट्रीय एकता का सुंदर उदाहरण बन गया, जहां राजस्थान की परंपरा और असम की सांस्कृतिक विरासत का अद्भुत संगम देखने को मिला।

एक जैसी लाल टी-शर्ट में दिखाई दी 50 वर्षों पुरानी दोस्ती की एकता
समारोह में सभी पूर्व विद्यार्थियों ने एक समान लाल रंग की टी-शर्ट पहनकर भाग लिया। यह केवल एक ड्रेस कोड नहीं था, बल्कि वर्षों पुरानी मित्रता, समानता, एकता और अपनत्व का प्रतीक था।
समूह फोटो, हंसी-मजाक और पुराने संस्मरणों के बीच ऐसा प्रतीत हो रहा था मानो समय एक बार फिर 1976 के छात्र जीवन में लौट आया हो।

गीत, संगीत, शायरी और नृत्य ने बनाया यादगार माहौल
कार्यक्रम में मनोरंजन का भी विशेष आयोजन किया गया। बैच के सदस्य सुरेंद्र भड़ेच ने अपनी प्रभावशाली शायरी प्रस्तुत कर सभी का दिल जीत लिया। उनकी रचनाओं ने मित्रता, समय और जीवन के विभिन्न पहलुओं को बेहद खूबसूरती से प्रस्तुत किया।
इसके बाद कई पूर्व विद्यार्थियों ने गीत प्रस्तुत किए, तो कुछ ने संगीत और नृत्य के माध्यम से समारोह में चार चांद लगा दिए। पूरे कार्यक्रम के दौरान हंसी, तालियों और उत्साह का माहौल बना रहा। प्रत्येक प्रस्तुति के साथ पुरानी यादें और भी ताजा होती चली गईं।

महिला सदस्यों ने साझा की स्वर्णिम स्मृतियां
बैच की दो महिला सदस्य स्मिता चक्रवर्ती एवं पूर्णिमा चक्रवर्ती ने सभी साथियों को स्वर्ण जयंती की शुभकामनाएं देते हुए कहा कि वर्षों बाद इस तरह का मिलन जीवन की सबसे सुखद अनुभूतियों में से एक है।
उन्होंने कहा कि छात्र जीवन की यादें कभी पुरानी नहीं होतीं और ऐसे आयोजन मित्रता के रिश्तों को नई ऊर्जा प्रदान करते हैं। उन्होंने भविष्य में भी इस प्रकार के आयोजनों को निरंतर जारी रखने की आवश्यकता पर बल दिया।
आयोजन की सफलता में कई साथियों का रहा विशेष योगदान
इस ऐतिहासिक आयोजन को सफल बनाने में अशोक जैन योगेश, सुभाष सेठी, प्रदीप सरावगी तथा धुबड़ी के अनोप चन्द सेठिया का विशेष एवं सक्रिय योगदान रहा। आयोजन की संपूर्ण व्यवस्थाओं, अतिथियों के स्वागत, सम्मान समारोह, सांस्कृतिक कार्यक्रमों तथा समन्वय की सभी ने मुक्तकंठ से प्रशंसा की।
सभी प्रतिभागियों ने आयोजन समिति का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि इतने व्यवस्थित और आत्मीय वातावरण में आयोजित यह स्वर्ण जयंती समारोह लंबे समय तक उनकी स्मृतियों में जीवंत रहेगा।

कॉलेज परिसर से लेकर जीवन के सफर तक की यादों का हुआ साझा
समारोह के दौरान पूर्व विद्यार्थियों ने कॉलेज के दिनों के अनेक संस्मरण साझा किए। किसी ने कक्षा के रोचक प्रसंग सुनाए, किसी ने परीक्षा के दिनों की बातें याद कीं, तो किसी ने शिक्षकों के मार्गदर्शन और अनुशासन को अपने जीवन की सफलता का आधार बताया।
सभी ने इस बात पर सहमति व्यक्त की कि गुवाहाटी कॉमर्स कॉलेज ने केवल उन्हें शिक्षा ही नहीं दी, बल्कि जीवन के मूल्य, अनुशासन, नेतृत्व क्षमता और सामाजिक उत्तरदायित्व का भी पाठ पढ़ाया।
भविष्य में भी जुड़े रहने का लिया संकल्प
समारोह के समापन अवसर पर सभी पूर्व विद्यार्थियों ने यह संकल्प लिया कि भविष्य में भी नियमित अंतराल पर इस प्रकार के मिलन समारोह आयोजित किए जाएंगे, ताकि वर्षों पुरानी मित्रता और आपसी संबंधों को और अधिक सुदृढ़ बनाया जा सके।
समूह छायाचित्र, आत्मीय संवाद, स्मृति-चिह्नों का आदान-प्रदान और भावनात्मक विदाई के साथ स्वर्ण जयंती समारोह का समापन हुआ। विदा लेते समय हर चेहरे पर संतोष, खुशी और अगली मुलाकात की उम्मीद साफ झलक रही थी।

गुवाहाटी कॉमर्स कॉलेज : पूर्वोत्तर भारत की प्रतिष्ठित शैक्षणिक पहचान
गुवाहाटी कॉमर्स कॉलेज (जीसीसी) की स्थापना वर्ष 1962 में हुई थी और आज यह पूर्वोत्तर भारत के प्रतिष्ठित वाणिज्य शिक्षण संस्थानों में अपनी विशिष्ट पहचान रखता है। पिछले छह दशकों में इस संस्थान ने हजारों विद्यार्थियों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा प्रदान की है। इसके अनेक पूर्व छात्र आज देश-विदेश में उद्योग, व्यापार, प्रशासन, शिक्षा, बैंकिंग, वित्त, सामाजिक सेवा और उद्यमिता जैसे विभिन्न क्षेत्रों में उल्लेखनीय योगदान दे रहे हैं। ऐसे में 1976 बैच का स्वर्ण जयंती मिलन समारोह केवल एक पुनर्मिलन नहीं, बल्कि कॉलेज की समृद्ध परंपरा, आजीवन मित्रता और शिक्षा से जुड़े मूल्यों का भी प्रेरणादायी उत्सव बन गया।




