शिवसागर में भूमि खरीद को लेकर विवाद गहराया : कुवामारा सत्र के समीप बाहरी लोगों द्वारा जमीन खरीदने के आरोप पर जातीय संग्रामी सेना असम और अखिल असम गोरिया जातीय परिषद का विरोध : प्रशासन से एक सप्ताह के भीतर जांच एवं कार्रवाई की मांग उठाई

शिवसागर, 3 जून : शिवसागर जिले के ऐतिहासिक एवं धार्मिक महत्व वाले कुवामारा सत्र के समीप स्थित मेरबिल राजस्व गांव में कथित रूप से बाहरी व्यक्तियों द्वारा भूमि खरीदने के मामले को लेकर नया विवाद खड़ा हो गया है। इस मुद्दे पर जातीय संग्रामी सेना असम तथा अखिल असम गोरिया जातीय परिषद की शिवसागर जिला समिति ने कड़ा विरोध जताते हुए जिला प्रशासन से तत्काल हस्तक्षेप की मांग की है।

बुधवार को जातीय संग्रामी सेना असम के केंद्रीय अध्यक्ष सीटू बरुआ, जिला सचिव रीदीप डेका और अखिल असम गोरिया जातीय परिषद की शिवसागर जिला समिति के रियाज अहमद के नेतृत्व में दोनों संगठनों के प्रतिनिधि भूमि खरीद से संबंधित स्थल पर पहुंचे और स्थिति का जायजा लिया।
इस दौरान जातीय संग्रामी सेना असम के केंद्रीय अध्यक्ष सीटू बरुआ ने आरोप लगाया कि बरपेटा जिले के बाघबर क्षेत्र से जुड़े चार व्यक्तियों द्वारा कुवामारा सत्र एवं राष्ट्रीय राजमार्ग-37 के निकट भूमि खरीदी गई है, जिसे वे स्थानीय सामाजिक एवं सांस्कृतिक हितों के विरुद्ध मानते हैं।

जातीय संग्रामी सेना असम और अखिल असम गोरिया जातीय परिषद के नेताओं ने कहा कि कुवामारा सत्र असम की वैष्णव सांस्कृतिक विरासत का महत्वपूर्ण केंद्र है और इसके आसपास की भूमि के स्वामित्व में हो रहे बदलावों पर प्रशासन को गंभीरता से नजर रखनी चाहिए।
संगठनों का दावा है कि फुलबर अली, एकिबुल अली सहित चार व्यक्तियों ने मेरबिल राजस्व गांव में लगभग एक बीघा ढाई लोचा भूमि खरीदी है। उन्होंने आरोप लगाया कि संबंधित लोग मूल रूप से बरपेटा जिले के बाघबर क्षेत्र से जुड़े हुए हैं और रोजगार के सिलसिले में पहले शिवसागर आए थे।

दस्तावेजों की जांच की मांग करते हुए संगठनों ने दावा किया कि संबंधित व्यक्तियों के आधार कार्ड में जन्म स्थान शिवसागर के नामतियाल पथार क्षेत्र का उल्लेख है, जबकि उनके माता-पिता का मूल निवास और अन्य विवरण कथित रूप से बरपेटा जिले के बाघबर क्षेत्र से संबंधित बताए गए हैं। उन्होंने इस पूरे मामले की विस्तृत जांच कर भूमि खरीद की वैधानिकता की पड़ताल करने की मांग की है।
हालांकि इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि अभी तक नहीं हो सकी है और न ही प्रशासन की ओर से इस संबंध में कोई आधिकारिक बयान जारी किया गया है। दोनों संगठनों ने कहा कि वे इस विषय पर जिला प्रशासन को विस्तृत ज्ञापन सौंपेंगे और भूमि खरीद से जुड़े सभी दस्तावेजों की जांच की मांग करेंगे।

उनका कहना है कि यदि भूमि क्रय-विक्रय की प्रक्रिया में किसी प्रकार की अनियमितता पाई जाती है तो प्रशासन को कानून के अनुसार कार्रवाई करनी चाहिए। संगठनों ने प्रशासन को एक सप्ताह के भीतर आवश्यक कदम उठाने की मांग करते हुए कहा कि मामले की निष्पक्ष जांच कर स्थानीय लोगों को वास्तविक स्थिति से अवगत कराया जाए।
भूमि संबंधी यह मुद्दा क्रमशः संवेदनशील बनता जा रहा है। उल्लेखनीय है कि असम के विभिन्न जिलों में भूमि स्वामित्व, राजस्व अभिलेखों और अवैध अतिक्रमण से जुड़े मुद्दे समय-समय पर सामाजिक एवं राजनीतिक चर्चा का विषय बनते रहे हैं। ऐसे मामलों में प्रशासनिक जांच और दस्तावेजी सत्यापन को महत्वपूर्ण माना जाता है।
फिलहाल मेरबिल राजस्व गांव में भूमि खरीद का यह मामला स्थानीय स्तर पर चर्चा का विषय बना हुआ है। अब सभी की नजर जिला प्रशासन की आगामी कार्रवाई और जांच प्रक्रिया पर टिकी हुई है।




