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रूपकोंवर ज्योति प्रसाद अग्रवाल की जयंती पर तिनसुकिया में श्रद्धा और सम्मान का संगम : मारवाड़ी सम्मेलन सहित विभिन्न सामाजिक संगठनों ने किया असम के सांस्कृतिक महापुरुष को नमन

प्रश्नोत्तरी, काव्य-पाठ और पुष्पांजलि कार्यक्रम के माध्यम से याद किए गए रूपकोंवर के आदर्श

तिनसुकिया, 17 जून : असम के सांस्कृतिक नवजागरण के अग्रदूत, महान साहित्यकार, कवि, संगीतकार, नाटककार, स्वतंत्रता सेनानी एवं भारतीय सिनेमा में असमिया फिल्म आंदोलन के जनक माने जाने वाले रूपकोंवर ज्योति प्रसाद अग्रवाल की जन्म जयंती के अवसर पर बुधवार को तिनसुकिया जिला पुस्तकालय परिसर में एक गरिमामय श्रद्धांजलि कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का आयोजन मारवाड़ी सम्मेलन तिनसुकिया शाखा द्वारा किया गया, जिसमें शहर की विभिन्न सामाजिक, सांस्कृतिक एवं व्यावसायिक संस्थाओं के प्रतिनिधियों ने भाग लेकर उन्हें श्रद्धापूर्वक स्मरण किया।

माल्यार्पण एवं पुष्पांजलि से हुआ कार्यक्रम का शुभारंभ

कार्यक्रम का शुभारंभ रूपकोंवर ज्योति प्रसाद अग्रवाल की प्रतिमा पर माल्यार्पण, दीप प्रज्ज्वलन तथा पुष्पांजलि अर्पित कर किया गया। उपस्थित गणमान्य व्यक्तियों, समाजसेवियों एवं सदस्यों ने महान विभूति को श्रद्धासुमन अर्पित करते हुए उनके बहुआयामी व्यक्तित्व, साहित्यिक प्रतिभा तथा असम की सांस्कृतिक चेतना को नई दिशा देने वाले योगदान को याद किया।

वक्ताओं ने कहा कि ज्योति प्रसाद अग्रवाल केवल एक साहित्यकार या कलाकार नहीं थे, बल्कि वे असमिया समाज के सांस्कृतिक पुनर्जागरण के प्रतीक थे, जिन्होंने अपनी रचनाओं के माध्यम से समाज में राष्ट्रीय चेतना, सांस्कृतिक गौरव और सामाजिक जागरूकता का संचार किया।

विभिन्न संगठनों ने दी श्रद्धांजलि

इस अवसर पर मारवाड़ी सम्मेलन तिनसुकिया शाखा के अध्यक्ष पवन केजड़ीवाल, नेशनल चैंबर ऑफ कॉमर्स के अध्यक्ष भगवत सुरेखा, मारवाड़ी युवा मंच तिनसुकिया शाखा के सचिव देवीदत्त लोहिया, मंच के अन्य पदाधिकारियों एवं सदस्यों के साथ-साथ श्री मारवाड़ी दुर्गापूजा कमेटी (स्थापित 1951) के पदाधिकारियों एवं सदस्यों ने भी प्रतिमा पर माल्यार्पण एवं पुष्प अर्पित कर अपनी श्रद्धांजलि व्यक्त की।

उपस्थित वक्ताओं ने रूपकोंवर के जीवन, साहित्य, संगीत, रंगमंच और सिनेमा के क्षेत्र में उनके अमूल्य योगदान पर प्रकाश डालते हुए नई पीढ़ी को उनके विचारों एवं आदर्शों से प्रेरणा लेने का आह्वान किया।

रूपकोंवर के जीवन पर आधारित प्रश्नोत्तरी प्रतियोगिता

कार्यक्रम की एक विशेष आकर्षण रूपकोंवर ज्योति प्रसाद अग्रवाल के जीवन, साहित्य एवं सांस्कृतिक योगदान पर आधारित प्रश्नोत्तरी प्रतियोगिता रही, जिसका संचालन मारवाड़ी सम्मेलन तिनसुकिया शाखा के अध्यक्ष पवन केजड़ीवाल ने किया।

प्रतियोगिता में उपस्थित सदस्यों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया तथा ज्योति प्रसाद अग्रवाल के जीवन और कृतित्व से जुड़े अनेक महत्वपूर्ण तथ्यों की जानकारी प्राप्त की। प्रतियोगिता में सर्वाधिक सही उत्तर देने वाले नेशनल चैंबर ऑफ कॉमर्स के कार्यालय सचिव अमल बरुआ रहे। इस उपलब्धि के लिए उन्हें आगामी कार्यक्रम में मारवाड़ी सम्मेलन तिनसुकिया शाखा द्वारा सम्मानित किया जाएगा।

काव्य-पाठ ने बांधा समां

कार्यक्रम के दौरान साहित्य प्रेमी बजरंग केजड़ीवाल ने रूपकोंवर ज्योति प्रसाद अग्रवाल को समर्पित एक भावपूर्ण कविता का पाठ किया। कविता में रूपकोंवर के जीवन संघर्ष, साहित्यिक साधना तथा असम के सांस्कृतिक उत्थान में उनकी भूमिका का मार्मिक वर्णन किया गया, जिसने उपस्थित जनसमूह को भावविभोर कर दिया।

रूपकोंवर ज्योति प्रसाद अग्रवाल : एक परिचय

असम के सांस्कृतिक नवजागरण के महानायक

रूपकोंवर ज्योति प्रसाद अग्रवाल का जन्म 17 जून 1903 को असम के डिब्रूगढ़ जिले के तामुलबाड़ी चाय बागान में हुआ था। उनके पिता का नाम परमानंद अग्रवाल तथा माता का नाम किरणमयी देवी था। वे असम के प्रतिष्ठित अग्रवाल परिवार से संबंध रखते थे।

उन्होंने प्रारंभिक शिक्षा असम में प्राप्त करने के बाद उच्च शिक्षा के लिए विदेश का रुख किया। जर्मनी में फिल्म निर्माण की तकनीकी शिक्षा ग्रहण करने के बाद वे असम लौटे और असमिया सिनेमा को नई दिशा प्रदान की।

असमिया सिनेमा के जनक

सन् 1935 में उन्होंने असम की पहली असमिया फीचर फिल्म ‘जॉयमती’ का निर्माण और निर्देशन किया। यह फिल्म असमिया सिनेमा के इतिहास में मील का पत्थर मानी जाती है। इसके बाद उन्होंने ‘इंद्रमालती’ जैसी फिल्मों का निर्माण किया और असमिया चलचित्र जगत की मजबूत नींव रखी।

साहित्य, संगीत और रंगमंच में अमिट योगदान

रूपकोंवर ने अनेक नाटक, गीत, कविताएँ और साहित्यिक कृतियाँ रचीं। उनके द्वारा रचित गीत आज ‘ज्योति संगीत’ के नाम से प्रसिद्ध हैं और असमिया सांस्कृतिक जीवन का अभिन्न अंग माने जाते हैं।

उन्होंने साहित्य और कला को राष्ट्रीय आंदोलन तथा सामाजिक जागरण का माध्यम बनाया। उनके नाटकों और गीतों में देशभक्ति, सामाजिक चेतना, मानवीय संवेदनाएँ और सांस्कृतिक गौरव की झलक स्पष्ट दिखाई देती है।

स्वतंत्रता आंदोलन में सक्रिय भूमिका

ज्योति प्रसाद अग्रवाल भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन से भी जुड़े रहे। उन्होंने महात्मा गांधी के विचारों से प्रेरित होकर राष्ट्रीय आंदोलन में सक्रिय भागीदारी निभाई और युवाओं को राष्ट्र निर्माण के लिए प्रेरित किया। उनके लेखन और सांस्कृतिक गतिविधियों में स्वतंत्रता और स्वाभिमान की भावना प्रमुख रूप से दिखाई देती है।

सांस्कृतिक विरासत को आगे बढ़ाने का संकल्प

कार्यक्रम के अंत में उपस्थित सभी सदस्यों ने रूपकोंवर ज्योति प्रसाद अग्रवाल के आदर्शों, मूल्यों और सांस्कृतिक विरासत को आगे बढ़ाने का संकल्प लिया। वक्ताओं ने कहा कि साहित्य, कला, संगीत और संस्कृति के प्रति जागरूकता बढ़ाना ही रूपकोंवर के प्रति सच्ची श्रद्धांजलि होगी।

ये रहे प्रमुख रूप से उपस्थित

कार्यक्रम में मारवाड़ी सम्मेलन तिनसुकिया शाखा के अध्यक्ष पवन केजड़ीवाल, सचिव विमल चौखानी, उपाध्यक्ष जितेंद्र डालमिया एवं समीर गोयल, जनसंपर्क अधिकारी दीपक बजाज, संयुक्त सचिव मनोज अग्रवाल, प्रदीप खेतान, भगवत सुरेखा, अमित बजाज, बजरंग केजड़ीवाल, रमेश शर्मा ‘रामा’ सहित बड़ी संख्या में सदस्य एवं गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे।

“रूपकोंवर ज्योति प्रसाद अग्रवाल केवल एक व्यक्ति नहीं, बल्कि असम की सांस्कृतिक आत्मा के प्रतीक हैं। उनकी रचनाएँ और आदर्श आने वाली पीढ़ियों को सदैव प्रेरित करते रहेंगे।”

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