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नगांव लोकसभा उपचुनाव में मेहदी आलम बोरा को उम्मीदवार बनाने की मांग : “40 लाख स्वदेशी मुस्लिमों को राजनीतिक अधिकारों और प्रतिनिधित्व से वंचित किया गया” — ऊपरी असम मुस्लिम कल्याण परिषद

शिवसागर में प्रेस वार्ता कर कांग्रेस नेतृत्व से की विशेष अपील : परिसीमन के बाद स्वदेशी मुस्लिम समुदाय के प्रतिनिधित्व का मुद्दा फिर उठा

शिवसागर, 17 जून : आगामी नगांव लोकसभा उपचुनाव को लेकर राजनीतिक सरगर्मियां तेज होने लगी हैं। इसी बीच ऊपरी असम मुस्लिम कल्याण परिषद ने मंगलवार को शिवसागर प्रेस क्लब में आयोजित एक पत्रकार सम्मेलन के माध्यम से कांग्रेस पार्टी से वरिष्ठ कांग्रेस नेता मेहदी आलम बोरा को नगांव लोकसभा उपचुनाव का उम्मीदवार घोषित करने की मांग उठाई। परिषद ने दावा किया कि स्वदेशी मुस्लिम समुदाय को लंबे समय से पर्याप्त राजनीतिक प्रतिनिधित्व नहीं मिला है और अब कांग्रेस के पास इस समुदाय को सम्मानजनक प्रतिनिधित्व देने का अवसर है।

शिवसागर प्रेस क्लब में आयोजित हुई पत्रकार वार्ता

पत्रकार सम्मेलन को संबोधित करते हुए परिषद की केंद्रीय समिति के अध्यक्ष मनीरुल इस्लाम बोरा ने कहा कि नगांव लोकसभा क्षेत्र के सांसद प्रद्युत बरदलै के कांग्रेस छोड़कर भारतीय जनता पार्टी से विधायक निर्वाचित होने के बाद इस सीट पर उपचुनाव होना लगभग तय माना जा रहा है। उन्होंने कहा कि उपचुनाव को देखते हुए विभिन्न राजनीतिक दलों ने संभावित उम्मीदवारों को लेकर अपनी तैयारियां शुरू कर दी हैं।

उन्होंने कहा कि कांग्रेस के वरिष्ठ नेता, ऐतिहासिक असम आंदोलन के सक्रिय सहभागी तथा ऑल असम स्टूडेंट्स यूनियन (आसू) के पूर्व सहायक महासचिव मेहदी आलम बोरा ने भी कांग्रेस की ओर से चुनाव लड़ने की इच्छा व्यक्त की है।

स्वदेशी मुस्लिम समाज के सबसे उपयुक्त प्रतिनिधि हैं मेहदी आलम बोरा

मनीरुल इस्लाम बोरा ने कहा कि परिषद का मानना है कि ऊपरी असम के स्वदेशी मुस्लिम समुदाय के प्रमुख प्रतिनिधि के रूप में मेहदी आलम बोरा नगांव लोकसभा क्षेत्र के लिए कांग्रेस के सबसे उपयुक्त उम्मीदवार हो सकते हैं।

उन्होंने कहा कि मेहदी आलम बोरा लंबे समय से सामाजिक एवं राजनीतिक गतिविधियों से जुड़े रहे हैं तथा उन्हें संगठनात्मक अनुभव, जनसंपर्क और जमीनी राजनीति की अच्छी समझ है। ऐसे में उनकी उम्मीदवारी न केवल स्वदेशी मुस्लिम समुदाय बल्कि व्यापक सामाजिक संतुलन के दृष्टिकोण से भी महत्वपूर्ण साबित हो सकती है।

परिसीमन के बाद प्रतिनिधित्व का मुद्दा उठा

परिषद अध्यक्ष ने आरोप लगाया कि परिसीमन प्रक्रिया के बाद राज्य के लगभग 40 लाख स्वदेशी मुस्लिमों के लिए ऐसा कोई संसदीय या विधानसभा क्षेत्र प्रभावी रूप से नहीं बचा है, जहां इस समुदाय का राजनीतिक प्रतिनिधित्व सुनिश्चित हो सके।

उन्होंने कहा कि स्वदेशी मुस्लिम समुदाय असम के सामाजिक, सांस्कृतिक और ऐतिहासिक विकास का महत्वपूर्ण हिस्सा रहा है, लेकिन राजनीतिक प्रतिनिधित्व के मामले में यह समुदाय लगातार उपेक्षित महसूस कर रहा है।

उनका कहना था कि यदि कांग्रेस वास्तव में स्वदेशी मुस्लिम समाज के प्रति सम्मान और विश्वास का संदेश देना चाहती है, तो उसे नगांव लोकसभा उपचुनाव में मेहदी आलम बोरा को उम्मीदवार बनाना चाहिए।

नगांव सीट पर स्वदेशी मुस्लिम मतदाताओं की भूमिका महत्वपूर्ण

मनीरुल इस्लाम बोरा ने दावा किया कि नगांव लोकसभा क्षेत्र में लगभग ढाई लाख से अधिक स्वदेशी मुस्लिम मतदाता हैं, जो चुनाव परिणाम को प्रभावित करने की क्षमता रखते हैं।

उन्होंने कहा कि हालिया विधानसभा चुनावों में कांग्रेस को ऊपरी असम में अपेक्षित सफलता नहीं मिली थी। ऐसे में पार्टी के लिए यह आवश्यक है कि वह उम्मीदवार चयन के दौरान सामाजिक संतुलन, क्षेत्रीय प्रतिनिधित्व और विभिन्न समुदायों की भावनाओं को ध्यान में रखे।

गौरव गोगोई से की विशेष अपील

परिषद अध्यक्ष ने असम प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष गौरव गोगोई से विशेष अपील करते हुए कहा कि उन्हें सभी राजनीतिक और सामाजिक पहलुओं का मूल्यांकन कर मेहदी आलम बोरा को उम्मीदवार घोषित करना चाहिए।

उन्होंने कहा कि कांग्रेस यदि क्षेत्रीय संतुलन और सामाजिक प्रतिनिधित्व को प्राथमिकता देती है, तो मेहदी आलम बोरा का नाम सबसे मजबूत दावेदारों में शामिल होना चाहिए।

“जब प्रद्युत बरदलै नगांव से सांसद बन सकते हैं, तो मेहदी आलम बोरा क्यों नहीं ?”

मनीरुल इस्लाम बोरा ने अपने तर्क को स्पष्ट करते हुए कहा कि यदि ऊपरी असम के मार्गेरिटा क्षेत्र से आने वाले प्रद्युत बरदलै नगांव लोकसभा क्षेत्र का प्रतिनिधित्व कर सकते हैं, तो डिब्रूगढ़ निवासी मेहदी आलम बोरा भी कांग्रेस उम्मीदवार बनने के पूर्णतः पात्र हैं।

उन्होंने कहा कि किसी उम्मीदवार का मूल्यांकन उसके अनुभव, जनाधार और राजनीतिक क्षमता के आधार पर होना चाहिए, न कि केवल उसके भौगोलिक क्षेत्र के आधार पर।

“केवल वोट बैंक समझने की धारणा मजबूत होगी”

परिषद अध्यक्ष ने कहा कि यदि कांग्रेस पार्टी स्वदेशी मुस्लिम समाज की भावनाओं की अनदेखी करते हुए मेहदी आलम बोरा को उम्मीदवार नहीं बनाती है, तो समुदाय के भीतर यह संदेश जाएगा कि लंबे समय तक सत्ता में रहने वाली कांग्रेस ने उन्हें केवल वोट बैंक के रूप में इस्तेमाल किया है।

उन्होंने कहा कि स्वदेशी मुस्लिम समाज ने वर्षों तक कांग्रेस का समर्थन किया है और अब समय आ गया है कि पार्टी भी इस समुदाय को उचित राजनीतिक प्रतिनिधित्व प्रदान करे।

संगठनात्मक अनुभव और जनाधार को बताया मजबूत पक्ष

मनीरुल इस्लाम बोरा ने कहा कि मेहदी आलम बोरा के पास संगठनात्मक अनुभव, राजनीतिक समझ और जनाधार की कोई कमी नहीं है। उन्होंने कई वर्षों तक सामाजिक एवं राजनीतिक क्षेत्रों में सक्रिय भूमिका निभाई है और विभिन्न वर्गों के लोगों के बीच उनकी स्वीकार्यता है।

परिषद का मानना है कि उनकी उम्मीदवारी कांग्रेस को नगांव उपचुनाव में राजनीतिक रूप से लाभ पहुंचा सकती है।

समुदाय की भावनाओं का सम्मान करने की अपील

पत्रकार सम्मेलन के दौरान परिषद ने कांग्रेस नेतृत्व से अपील की कि वह स्वदेशी मुस्लिम समुदाय की भावनाओं का सम्मान करते हुए उम्मीदवार चयन प्रक्रिया में उनकी मांगों पर गंभीरता से विचार करे।

परिषद नेताओं ने विश्वास व्यक्त किया कि कांग्रेस नेतृत्व सामाजिक न्याय, संतुलित प्रतिनिधित्व और संगठनात्मक मजबूती को ध्यान में रखते हुए उचित निर्णय लेगा।

परिषद के अन्य पदाधिकारी भी रहे उपस्थित

इस अवसर पर ऊपरी असम मुस्लिम कल्याण परिषद की केंद्रीय समिति के सदस्य लखीबाबा अहमद तथा आजिमुद्दीन अहमद भी उपस्थित थे। दोनों नेताओं ने भी स्वदेशी मुस्लिम समुदाय के राजनीतिक प्रतिनिधित्व को लेकर अपनी चिंताएं व्यक्त कीं और कांग्रेस से सकारात्मक निर्णय लेने की अपील की।

उपचुनाव से पहले तेज हुई राजनीतिक चर्चा

नगांव लोकसभा उपचुनाव को लेकर अभी आधिकारिक घोषणा भले ही शेष हो, लेकिन संभावित उम्मीदवारों और राजनीतिक समीकरणों को लेकर चर्चाएं तेज हो चुकी हैं। ऐसे समय में ऊपरी असम मुस्लिम कल्याण परिषद की यह मांग राजनीतिक हलकों में नई चर्चा का विषय बन गई है।

अब सभी की निगाहें कांग्रेस नेतृत्व के अगले कदम और संभावित उम्मीदवारों की घोषणा पर टिकी हुई हैं।

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