असम के मार्घेरिटा में मानव अंग तस्करी का खतरनाक रैकेट बेनकाब : चार दलाल गिरफ्तार : गरीब युवकों को नौकरी और पैसे का लालच देकर किडनी बेचने का जाल
डिब्रुगढ़ और तिनसुकिया पुलिस की संयुक्त टीम ने मार्घेरिटा में सक्रिय इस रैकेट का भंडाफोड़ किया

मार्घेरिटा 8 मई : ऊपरी असम इलाके में मानव अंग तस्करी का एक बड़ा सिंडिकेट ध्वस्त हो गया है। डिब्रुगढ़ और तिनसुकिया पुलिस की संयुक्त टीम ने मार्घेरिटा में सक्रिय इस रैकेट का भंडाफोड़ किया और चार आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया।
आरोपियों पर गरीब और बेरोजगार युवकों को नौकरी व अच्छी कमाई का लालच देकर उनके किडनी निकालने का गंभीर आरोप है।
गिरफ्तार आरोपियों की पहचान तिनसुकिया जिले के मार्घेरिटा थाना क्षेत्र अंतर्गत के 1 नंबर माकुमपथार विनियर मिल क्षेत्र निवासी जाकिर हुसैन (53 वर्ष), मार्घेरिटा विनियर मिल क्षेत्र निवासी शंकर सांतना (28 वर्ष), डिब्रुगढ़ सदर थाना क्षेत्र के पल्टन बाजार निवासी समीर पाल (37 वर्ष) और डिब्रुगढ़ के ही गोपाल रॉय (31 वर्ष) के रूप में की गई है।
गिरफ्तार आरोपी शंकर सांतना नामक युवक खुद लगभग 7-8 महीने पहले कलकत्ता के एक अस्पताल में अपनी किडनी बेच चुका है।
पीड़ित युवक की दहलाने वाली कहानी
मार्घेरिटा के 35 वर्षीय युवक राजीव दे को आरोपियों ने अच्छी नौकरी और मोटी रकम का लालच देकर डिब्रुगढ़ ले जाने की कोशिश की। गुपचुप रूप से युवक की किडनी बेचने की जा रही थी। जब राजीब दे को सच्चाई का अंदाजा हुआ तो इसके होश उड़ गए। उसने डर के मारे तुरंत परिवार को इस षड्यंत्र की सूचना दी और पुलिस में शिकायत दर्ज कराई।
पीड़ित के परिवार की शिकायत पर तिनसुकिया जिले के डीएसपी (क्राइम) फयेज अहमद के नेतृत्व में तिनसुकिया और डिब्रुगढ़ जिला पुलिस की संयुक्त टीम ने त्वरित कार्रवाई की। चारों आरोपियों को अलग-अलग जगहों से रंगे हाथों गिरफ्तार किया गया।
कानूनी कार्रवाई और जांच
इस घटना के संदर्भ में मार्गेरिटा पुलिस थाने में मानव तस्करी, धोखाधड़ी, आपराधिक षड्यंत्र, कॉमन इंटेंशन और ट्रांसप्लांटेशन ऑफ ह्यूमन ऑर्गन्स एंड टिश्यूज एक्ट के तहत मामला दर्ज करते हुए पुलिस ने सभी चार आरोपियों को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया है। इस मामले में पुलिस बड़े नेटवर्क की तह तक पहुंचने के लिए गहन जांच कर रही है। अस्पतालों, डॉक्टरों और मेडिकल स्टाफ से संभावित लिंक की भी गहन छानबीन जारी है।
राज्य में अंग तस्करी का बढ़ता खतरा
असम में ऐसे रैकेट पहले भी सामने आए हैं, लेकिन यह मामला इसलिए ज्यादा गंभीर है क्योंकि एक आरोपी शंकर खुद अंग दानकर्ता था और अब दूसरों को जाल में फंसा रहा था। पुलिस सूत्रों के मुताबिक, गिरोह चाय बागान क्षेत्रों के आर्थिक रूप से कमजोर लोगों को मेडिकल चेकअप या अच्छी नौकरी का झांसा देकर निशाना बनाता था।
डीएसपी फयेज अहमद ने कहा कि यह शुरुआती सफलता है। पूरे नेटवर्क को तोड़ने और अन्य संभावित पीड़ितों को बचाने के लिए जांच तेज कर दी गई है।
तिनसुकिया पुलिस ने आम जनता से अनुरोध किया है कि नौकरी या पैसे के लालच के किसी भी संदिग्ध प्रस्ताव पर तुरंत स्थानीय पुलिस स्टेशन में सूचना दें।




