बाढ़ में उजड़े चार परिवारों को फिर मिलेगी अपनी छत, अर्पण फाउंडेशन अजमेर बना रहा नए आशियाने : सीईओ अभय भार्गव के मार्गदर्शन में असम के बाढ़ प्रभावित परिवारों के स्थायी पुनर्वास की बड़ी पहल, राहत से आगे बढ़कर जिंदगी दोबारा बसाने पर जोर : सीमेंट ब्लॉक और टीन से आधुनिक तकनीक पर बन रहे आवास; 15×23 फीट का मुख्य हिस्सा और प्रत्येक घर में 8×8 फीट का टॉयलेट : एक घर तैयार, दूसरा अंतिम चरण में, तीसरे का निर्माण जारी
प्रोजेक्ट कोऑर्डिनेटर पंकज पारीक और फील्ड ऑफिसर शेर सिंह जाट दस दिनों से मौके पर डटे, निर्माण की गुणवत्ता और प्रगति की लगातार निगरानी : पूर्वोत्तर प्रदेशीय मारवाड़ी युवा मंच की अहम भागीदारी, स्थायी पुनर्वास की जरूरत वाले चार परिवारों की पहचान में किया सहयोग

शिवसागर, 8 सितंबर : बाढ़ का पानी उतर जाने और राहत शिविरों के बंद होने के बाद अधिकांश इलाकों में जिंदगी धीरे-धीरे सामान्य होने लगती है, लेकिन जिन परिवारों की पूरी गृहस्थी के साथ उनकी छत भी आपदा की भेंट चढ़ जाती है, उनके लिए असली संघर्ष उसके बाद शुरू होता है। असम की विनाशकारी बाढ़ में अपना आशियाना गंवाने वाले ऐसे ही चार जरूरतमंद परिवारों के जीवन में अब उम्मीद की नई नींव रखी जा रही है। राजस्थान के अजमेर की गैर-सरकारी सामाजिक संस्था अर्पण फाउंडेशन ने इन परिवारों को केवल तात्कालिक राहत उपलब्ध कराने के बजाय सुरक्षित एवं स्थायी आवास देकर उन्हें फिर से सामान्य जीवन की ओर लौटाने की जिम्मेदारी उठाई है।

फाउंडेशन के सीईओ अभय भार्गव के मार्गदर्शन एवं सानिध्य में असम में चार बाढ़ प्रभावित परिवारों के लिए चार अलग-अलग घरों का निर्माण कराया जा रहा है। इस परियोजना के पीछे संस्था की सोच है कि आपदा प्रभावित परिवारों की सहायता राहत सामग्री वितरण तक सीमित न रहे, बल्कि ऐसा आधार तैयार किया जाए जो लंबे समय तक उनके जीवन में सुरक्षा, सम्मान और स्थिरता प्रदान करे।

27 अगस्त को भूमि एवं वास्तु पूजन के साथ रखी गई उम्मीद की नींव
स्थायी पुनर्वास की इस परियोजना की औपचारिक शुरुआत 27 अगस्त को शिवसागर के भाधोरा निमाईजान में भूमि एवं वास्तु पूजन के साथ हुई। धार्मिक विधि-विधान के बाद निर्माण कार्य शुरू किया गया।
जिन चार परिवारों का इस परियोजना के लिए चयन किया गया है, उनके सामने बाढ़ के बाद सुरक्षित आवास की गंभीर समस्या खड़ी हो गई थी। इसी जरूरत को देखते हुए फाउंडेशन ने प्रत्येक परिवार के लिए अलग घर तैयार कराने का निर्णय लिया, ताकि उन्हें लंबे समय तक अस्थायी आश्रय पर निर्भर न रहना पड़े और वे अपनी छत के नीचे फिर से गृहस्थ जीवन शुरू कर सकें।

दस दिनों से मौके पर डटी अर्पण की टीम
परियोजना को केवल वित्तीय सहयोग देकर छोड़ने के बजाय फाउंडेशन ने निर्माण कार्य की जमीनी निगरानी की जिम्मेदारी भी अपने स्तर पर संभाली है। प्रोजेक्ट कोऑर्डिनेटर पंकज पारीक और फील्ड ऑफिसर शेर सिंह जाट पिछले करीब दस दिनों से निर्माण स्थल पर मौजूद रहकर कार्य की प्रगति और गुणवत्ता की लगातार मॉनिटरिंग कर रहे हैं।
दोनों का प्रयास निर्माण को योजनाबद्ध तरीके से आगे बढ़ाने, गुणवत्ता बनाए रखने और अनावश्यक देरी से बचने पर केंद्रित है। फाउंडेशन की प्राथमिकता है कि चारों परिवारों के घर जल्द पूरे हों और प्रभावित लोग नए आशियानों में अपना जीवन दोबारा शुरू कर सकें।

एक घर तैयार, दूसरे का काम अंतिम चरण में
कम समय में परियोजना ने महत्वपूर्ण प्रगति की है। प्रस्तावित चार घरों में से पहले घर का निर्माण पूरा हो चुका है, जबकि दूसरे घर का अधिकांश कार्य संपन्न होने के बाद अब अंतिम चरण का काम शेष है।
तीसरे घर का निर्माण जारी है और चौथे घर का काम भी जल्द शुरू करने की योजना है। चारों आवासों को चरणबद्ध तरीके से पूरा कर संबंधित परिवारों को उपलब्ध कराया जाएगा।

15×23 फीट का मुख्य आवास, साथ में 8×8 फीट का टॉयलेट
बाढ़ प्रभावित परिवारों के लिए तैयार किए जा रहे घरों को केवल अस्थायी आश्रय के रूप में नहीं, बल्कि उनकी दीर्घकालिक जरूरतों को ध्यान में रखकर बनाया जा रहा है। निर्माण में सीमेंट ब्लॉक और टीन के साथ आधुनिक तकनीक का इस्तेमाल किया जा रहा है।
प्रत्येक घर का मुख्य आवासीय हिस्सा 15×23 फीट का होगा, जिसमें दो खिड़कियां और एक दरवाजा रखा गया है। स्वच्छता एवं परिवार की बुनियादी आवश्यकताओं को देखते हुए प्रत्येक आवास के साथ 8×8 फीट का टॉयलेट भी तैयार किया जा रहा है।
इस संरचना के माध्यम से प्रभावित परिवारों को ऐसा उपयोगी और व्यवस्थित आवास देने का प्रयास है, जहां वे बाढ़ की त्रासदी से बाहर निकलकर सुरक्षित माहौल में अपने जीवन को फिर से संवार सकें।

मारवाड़ी युवा मंच ने जरूरतमंद परिवारों की पहचान में निभाई भूमिका
असम में इस पुनर्वास परियोजना को वास्तविक जरूरतमंद परिवारों तक पहुंचाने में पूर्वोत्तर प्रदेशीय मारवाड़ी युवा मंच की महत्वपूर्ण भूमिका रही है। मंच ने बाढ़ प्रभावित इलाकों की जमीनी परिस्थितियों को देखते हुए ऐसे चार परिवारों की पहचान करने में सहयोग किया, जिन्हें स्थायी आवास की सबसे अधिक आवश्यकता थी।
इन परिवारों की जानकारी अर्पण फाउंडेशन तक पहुंचने के बाद संस्था ने घर निर्माण की जिम्मेदारी संभाली। इस तरह स्थानीय स्तर पर जरूरत की पहचान और फाउंडेशन के संसाधनों एवं सामाजिक प्रतिबद्धता के समन्वय से पुनर्वास परियोजना को जमीन पर उतारा गया।

2022 में I-Field Group की CSR इकाई के रूप में हुई अर्पण की शुरुआत
अर्पण फाउंडेशन की यह परियोजना संस्था के व्यापक सामाजिक दृष्टिकोण का हिस्सा है। वर्ष 2022 में I-Field Group की CSR इकाई के रूप में स्थापित अर्पण सामाजिक कल्याण, सामुदायिक विकास और वंचित वर्गों के सशक्तिकरण के माध्यम से दीर्घकालिक बदलाव की दिशा में कार्य कर रहा है।
संस्था की कार्यप्रणाली इस विचार पर आधारित है कि समाज में स्थायी परिवर्तन अचानक नहीं आता, बल्कि लगातार उठाए गए छोटे और प्रभावशाली कदम मिलकर व्यापक बदलाव की नींव रखते हैं। इसी दृष्टिकोण के तहत फाउंडेशन शिक्षा, कौशल विकास, महिला सशक्तिकरण, दिव्यांगजन सहायता, बाल सुरक्षा, ग्रामीण समुदायों की सहायता और आपदा राहत के विभिन्न क्षेत्रों में काम कर रहा है।

वंचित बच्चों और युवाओं को बेहतर अवसर देने पर फोकस
फाउंडेशन के प्रमुख कार्यक्षेत्रों में वंचित परिस्थितियों में पल रहे बच्चों और युवाओं को बेहतर अवसर उपलब्ध कराना शामिल है। संस्था का मानना है कि आर्थिक एवं सामाजिक रूप से कमजोर परिवारों के बच्चों को जीवन के शुरुआती वर्षों में अनेक अतिरिक्त चुनौतियों का सामना करना पड़ता है।
ऐसे बच्चों को सही समय पर शिक्षा, संसाधन और मार्गदर्शन उपलब्ध कराना उनके भविष्य को नई दिशा दे सकता है। इसी सोच के साथ बच्चों और युवाओं के लिए विभिन्न शैक्षणिक एवं सामाजिक कार्यक्रम संचालित किए जा रहे हैं।

आठ कंप्यूटर लैब, डिजिटल शिक्षा से जुड़ीं 730 छात्राएं
डिजिटल युग में तकनीकी दक्षता को शिक्षा और रोजगार के अवसरों की महत्वपूर्ण कुंजी मानते हुए फाउंडेशन वंचित समुदायों की बालिकाओं को डिजिटल शिक्षा से जोड़ने पर भी काम कर रहा है।
इस पहल के तहत 15-15 कंप्यूटर वाली आठ आधुनिक कंप्यूटर लैब स्थापित की गई हैं। इन कार्यक्रमों से अब तक 730 छात्राएं जुड़ चुकी हैं। उन्हें डॉक्यूमेंटेशन, एक्सेल स्प्रेडशीट, ई-मेल के उपयोग और प्रेजेंटेशन तैयार करने जैसी बुनियादी कंप्यूटर दक्षताओं का प्रशिक्षण दिया गया है।
कई छात्राओं के लिए यह तकनीक से व्यवस्थित रूप से जुड़ने का पहला अवसर रहा। स्थानीय संस्थानों के साथ समावेशी डिजिटल शिक्षा को आगे बढ़ाने के प्रयासों में आरएमकेएम अजमेर के मीनू स्कूल जैसे केंद्रों के साथ की गई पहल भी शामिल है।

महिलाओं को कौशल और संसाधनों के जरिए आत्मनिर्भर बनाने का प्रयास
महिला सशक्तिकरण अर्पण फाउंडेशन के प्रमुख सामाजिक सरोकारों में शामिल है। संस्था महिलाओं को रोजमर्रा की चुनौतियों से आगे बढ़कर अपने लिए नए अवसर तलाशने और आवश्यक कौशल हासिल करने में मदद करने पर जोर देती है।
उद्देश्य यह है कि महिलाएं कौशल और उपलब्ध संसाधनों के माध्यम से अपने परिवार की आर्थिक-सामाजिक प्रगति में योगदान देने के साथ समुदाय के विकास में भी सक्रिय भूमिका निभा सकें।

दिव्यांगजनों के लिए प्रशिक्षण और समान अवसर
दिव्यांग व्यक्तियों को अधिक स्वतंत्र एवं आत्मनिर्भर जीवन की दिशा में आगे बढ़ाने के लिए भी फाउंडेशन काम कर रहा है। इसके तहत व्यावसायिक प्रशिक्षण, आवश्यक संसाधन और सहयोग उपलब्ध कराने पर ध्यान दिया जाता है।
इस पहल का उद्देश्य केवल सहायता देना नहीं, बल्कि दिव्यांगजनों की क्षमताओं को विकसित कर उन्हें समाज और अर्थव्यवस्था में सक्रिय भागीदारी के अवसर उपलब्ध कराना है।

ग्रामीण परिवारों की खाद्य सुरक्षा और बच्चों की शिक्षा में सहयोग
सामुदायिक विकास के क्षेत्र में संस्था अजमेर और आसपास के ग्रामीण इलाकों में भी सक्रिय है। सिडियास और भुवाल जैसे ग्रामीण क्षेत्रों में मासिक खाद्य सामग्री उपलब्ध कराने के कार्यक्रम चलाए गए हैं। इनका उद्देश्य जरूरतमंद परिवारों की खाद्य सुरक्षा में सहयोग करते हुए बच्चों की नियमित शिक्षा को भी समर्थन देना है।
वंचित परिवारों को कपड़े, कंबल और राशन उपलब्ध कराने जैसी गतिविधियां भी संस्था के सामाजिक सहायता कार्यक्रमों का हिस्सा रही हैं।

‘Raise Your Voice’ के जरिए बच्चों की सुरक्षा पर जागरूकता
बाल सुरक्षा के संवेदनशील विषय पर फाउंडेशन चाइल्ड चैप्टर के सहयोग से ‘Raise Your Voice’ पहल चला रहा है। इसके अंतर्गत बाल यौन शोषण के प्रति जागरूकता बढ़ाने के लिए स्कूलों में संवादात्मक कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं।
बच्चों को उनकी उम्र के अनुरूप सुरक्षित और असुरक्षित स्पर्श की जानकारी देकर असहज परिस्थितियों की पहचान करने तथा जरूरत पड़ने पर अपनी बात कहने के लिए प्रोत्साहित किया जाता है। इस अभियान के माध्यम से अजमेर और आसपास के 30 से अधिक स्कूलों तक जागरूकता सामग्री और गतिविधियां पहुंचाई गई हैं। नियमित संवाद एवं फॉलो-अप के जरिए बच्चों में अपनी सुरक्षा के प्रति जागरूकता विकसित करने का प्रयास किया जा रहा है।
तात्कालिक राहत से स्थायी पुनर्वास की ओर बढ़ा कदम
शिक्षा, डिजिटल साक्षरता, महिला सशक्तिकरण, दिव्यांगजन सहायता, बाल सुरक्षा, ग्रामीण सहयोग और कौशल विकास के बाद असम में बाढ़ प्रभावित परिवारों के लिए घर निर्माण की यह परियोजना संस्था के सामाजिक कार्यों में स्थायी पुनर्वास का एक नया अध्याय जोड़ रही है।
बाढ़ में घर का नष्ट होना केवल आर्थिक क्षति नहीं होता। परिवार की सुरक्षा, वर्षों की स्मृतियां, सामाजिक पहचान और भविष्य की उम्मीदें भी उस घर से जुड़ी होती हैं। ऐसे में आपदा के बाद स्थायी आवास मिलना प्रभावित परिवार के सामान्य जीवन की ओर लौटने में महत्वपूर्ण आधार बन सकता है।
चार मकान नहीं, चार परिवारों के लिए नई शुरुआत
सीईओ अभय भार्गव के मार्गदर्शन, प्रोजेक्ट कोऑर्डिनेटर पंकज पारीक और फील्ड ऑफिसर शेर सिंह जाट की जमीनी निगरानी तथा पूर्वोत्तर प्रदेशीय मारवाड़ी युवा मंच के स्थानीय सहयोग से आकार ले रही परियोजना विभिन्न सामाजिक संस्थाओं के बीच समन्वय का भी उदाहरण बन रही है।
चारों घर तैयार होने के बाद ये केवल सीमेंट ब्लॉक और टीन से बनी चार संरचनाएं नहीं होंगी। बाढ़ में अपना सब कुछ खोकर सुरक्षित छत से वंचित हुए चार परिवारों के लिए ये घर सुरक्षा, सम्मान, आत्मविश्वास और जिंदगी को नए सिरे से शुरू करने की उम्मीद के चार नए आशियाने होंगे।




