“सपने देखें, दक्षता बढ़ाएं और राष्ट्र निर्माण में सक्रिय भागीदार बनें युवा”—केंद्रीय मंत्री सर्बानंद सोनोवाल : दिखौमुख कॉलेज के संस्थापक प्राचार्य स्वर्गीय हरेन भुइयां की आवक्ष प्रतिमा का अनावरण, शिक्षा और समाज के प्रति समर्पण को किया नमन : डिगबोई कॉलेज की नौकरी छोड़ दिखौमुख में जलाई थी उच्च शिक्षा की ज्योति, जनसहयोग से स्थापित हुई प्रतिमा : राज्यसभा सांसद जोगेन मोहन ने की सार्वजनिक सभागार की मरम्मत के लिए 10 लाख रुपये देने की घोषणा की
“विकसित भारत की मूल शक्ति युवा; प्रतिभा के साथ कौशल, अनुशासन और निरंतर परिश्रम जरूरी” : शिक्षा, संस्कृति, मूल्यबोध, आत्मनिर्भरता और पर्यावरण संरक्षण पर जोर; ‘एक पेड़ मां के नाम’ अभियान से जुड़ने का आह्वान

शिवसागर, 6 सितंबर : शिवसागर जिले के दिखौमुख कॉलेज के संस्थापक प्राचार्य स्वर्गीय हरेन भुइयां की स्मृति को चिरस्थायी बनाने के उद्देश्य से महाविद्यालय परिसर में स्थापित उनकी आवक्ष प्रतिमा का रविवार को केंद्रीय मंत्री एवं डिब्रूगढ़ लोकसभा क्षेत्र के सांसद सर्बानंद सोनोवाल ने विधिवत अनावरण किया। इस अवसर पर सोनोवाल ने स्वर्गीय भुइयां के शिक्षा, समाज, संस्कृति और आध्यात्मिक जीवन में दिए गए योगदान को याद करते हुए उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की।
समारोह में राज्यसभा सांसद एवं पूर्व मंत्री जोगेन मोहन सहित शिक्षा, चिकित्सा, सामाजिक और राजनीतिक क्षेत्र से जुड़े अनेक गणमान्य लोग मौजूद रहे। वक्ताओं ने स्वर्गीय हरेन भुइयां की दूरदर्शिता और दिखौमुख क्षेत्र में उच्च शिक्षा के प्रसार के लिए किए गए उनके त्याग एवं योगदान को याद किया।

डिगबोई की नौकरी छोड़ दिखौमुख में जलाई उच्च शिक्षा की ज्योति
समारोह में स्वर्गीय हरेन भुइयां की जीवन यात्रा और दिखौमुख कॉलेज की स्थापना में उनके योगदान को विशेष रूप से याद किया गया। हरेन भुइयां का 8 सितंबर 2025 को निधन हुआ था। उन्होंने प्रांतीयकृत डिगबोई कॉलेज के अंग्रेजी विभाग में प्रवक्ता की नौकरी छोड़कर दिखौमुख क्षेत्र में उच्च शिक्षा की ज्योति फैलाने के उद्देश्य से दिखौमुख कॉलेज के संस्थापक प्राचार्य का दायित्व स्वीकार किया था।
उनके निधन के बाद आयोजित सार्वजनिक आद्यश्राद्ध के दिन ही कॉलेज परिसर में उनकी आवक्ष प्रतिमा स्थापित करने का सार्वजनिक निर्णय लिया गया था। इसके बाद कॉलेज प्रबंधन और स्थानीय जनता के दान एवं आर्थिक सहयोग से प्रतिमा का निर्माण पूरा किया गया। रविवार को इसका औपचारिक अनावरण उनके शैक्षणिक और सामाजिक योगदान के प्रति सामूहिक सम्मान का अवसर बन गया।

“महान व्यक्तित्वों के आदर्श नई पीढ़ी तक पहुंचाना हमारी जिम्मेदारी”
समारोह को संबोधित करते हुए सर्बानंद सोनोवाल ने कहा कि स्वर्गीय हरेन भुइयां की दूरदर्शिता, अथक प्रयास और शिक्षा के प्रति समर्पण का परिणाम है कि दिखौमुख महाविद्यालय आज क्षेत्र के महत्वपूर्ण उच्च शिक्षण संस्थानों में अपनी पहचान बना चुका है।
उन्होंने कहा कि समाज के लिए जीवन समर्पित करने वाले व्यक्तित्वों के कार्यों को केवल इतिहास में दर्ज करना पर्याप्त नहीं है। उनके त्याग, आदर्श, अनुभव और योगदान को नई पीढ़ी तक पहुंचाना भी समाज की सामूहिक जिम्मेदारी है। ऐसे महान लोगों की स्मृतियां वर्तमान पीढ़ी को प्रेरणा देने के साथ भविष्य निर्माण का रास्ता दिखाती हैं।
सोनोवाल ने विद्यार्थियों से स्वर्गीय हरेन भुइयां के जीवन, कर्म, निष्ठा, त्याग और चिंतन से प्रेरणा लेने का आह्वान किया।

“सपने देखें और उन्हें साकार करने की दक्षता विकसित करें युवा”
युवाओं को विशेष संदेश देते हुए केंद्रीय मंत्री ने कहा कि विकसित भारत के निर्माण की सबसे बड़ी शक्ति देश की युवा पीढ़ी है। युवाओं को अपनी प्रतिभा, ज्ञान, कौशल और ऊर्जा को राष्ट्र के विकास से जोड़ना होगा।
उन्होंने युवाओं से आह्वान किया कि वे बड़े सपने देखें, लेकिन केवल सपने देखने तक सीमित न रहें। उन सपनों को वास्तविकता में बदलने के लिए आवश्यक कौशल हासिल करें, अनुशासन अपनाएं और निरंतर परिश्रम करें। उन्होंने कहा कि आत्मविश्वास, दक्षता और देश के प्रति जिम्मेदारी की भावना के साथ युवा राष्ट्र निर्माण में सक्रिय भागीदार बन सकते हैं।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में शिक्षा, कौशल विकास, नवाचार, उद्यमिता और युवाओं के सशक्तिकरण को दिए जा रहे महत्व का उल्लेख करते हुए सोनोवाल ने कहा कि युवाओं के सामने नई सोच और नए प्रयासों के लिए अवसर मौजूद हैं। उन्होंने विद्यार्थियों से केवल नौकरी तलाशने वाला बनने के बजाय रोजगार और अवसर पैदा करने की क्षमता विकसित करने का आह्वान किया।

सचिन तेंदुलकर का उदाहरण देकर समझाया अनुशासन का महत्व
अपने संबोधन में सोनोवाल ने महान क्रिकेटर सचिन तेंदुलकर के अनुशासन और निरंतर अभ्यास का उदाहरण देते हुए विद्यार्थियों को समझाया कि केवल प्रतिभा के बल पर बड़ी सफलता हासिल नहीं की जा सकती।
उन्होंने कहा कि प्रतिभा के साथ कठोर परिश्रम, नियमित अभ्यास, अनुशासन, दृढ़ संकल्प और निरंतरता जुड़ने पर ही व्यक्ति उत्कृष्टता के शिखर तक पहुंच सकता है। विद्यार्थियों के लिए परीक्षा में सफल होने के साथ जीवन की परीक्षा में सफल होना भी उतना ही महत्वपूर्ण है। इसके लिए सत्य, ज्ञान, परिश्रम, दक्षता और अनुशासन को जीवन का आधार बनाना होगा।
उन्होंने अभिभावकों की भूमिका को भी महत्वपूर्ण बताते हुए कहा कि बच्चों की शैक्षणिक प्रगति और व्यक्तित्व निर्माण के लिए घर में नियमित अध्ययन, अच्छे व्यवहार और सकारात्मक सोच का अनुकूल वातावरण तैयार किया जाना चाहिए।

शिक्षा के साथ संस्कृति और मूल्यबोध पर जोर
दिखौमुख महाविद्यालय के शैक्षणिक एवं सांस्कृतिक योगदान की सराहना करते हुए केंद्रीय मंत्री ने कहा कि शिक्षा, संस्कृति और मूल्यबोध के समन्वय से यह संस्थान अपनी विशिष्ट पहचान बना रहा है।
उन्होंने कहा कि शिक्षा का उद्देश्य केवल परीक्षा में अच्छे अंक हासिल करना या रोजगार प्राप्त करना नहीं होना चाहिए। वास्तविक शिक्षा व्यक्ति के चरित्र निर्माण, सामाजिक चेतना, मानवता और राष्ट्र के प्रति जिम्मेदारी विकसित करने का माध्यम भी है।
उन्होंने उम्मीद जताई कि महाविद्यालय आने वाले समय में भी नई पीढ़ी को ज्ञान के साथ संस्कार, मानवता, एकता, अनुशासन और सामाजिक उत्तरदायित्व की शिक्षा देता रहेगा।

कॉलेज में अतिथिशाला के लिए पहल करेंगे सोनोवाल
इस अवसर पर सर्बानंद सोनोवाल ने दिखौमुख कॉलेज में एक अतिथिशाला के निर्माण के लिए पहल करने की घोषणा की। उन्होंने कॉलेज की अन्य आवश्यकताओं और समस्याओं के समाधान के लिए भी गंभीरता से कदम उठाने का भरोसा दिया।
उन्होंने कहा कि क्षेत्र के उच्च शिक्षण संस्थानों में बेहतर शैक्षणिक माहौल और आवश्यक आधारभूत सुविधाओं का विकास नई पीढ़ी को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध कराने के लिए महत्वपूर्ण है।

जोगेन मोहन ने सभागार की मरम्मत के लिए दिए 10 लाख रुपये
समारोह में उपस्थित राज्यसभा सांसद एवं पूर्व मंत्री जोगेन मोहन ने भी दिखौमुख कॉलेज के विकास के लिए महत्वपूर्ण घोषणा की। उन्होंने कॉलेज के सार्वजनिक सभागार की पुनः मरम्मत के लिए 10 लाख रुपये की आर्थिक सहायता देने की घोषणा की।
इस घोषणा से कॉलेज के सभागार की आधारभूत सुविधाओं को बेहतर बनाने और शैक्षणिक, सांस्कृतिक एवं सामाजिक कार्यक्रमों के आयोजन में सुविधा मिलने की उम्मीद जताई गई।

पर्यावरण संरक्षण के बिना स्थायी विकास संभव नहीं
अपने संबोधन में सोनोवाल ने पर्यावरण संरक्षण को भी विशेष महत्व दिया। उन्होंने कहा कि आर्थिक विकास और प्रकृति का संरक्षण साथ-साथ चलना चाहिए। प्राकृतिक संसाधनों को नुकसान पहुंचाकर स्थायी विकास की कल्पना नहीं की जा सकती।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘एक पेड़ मां के नाम’ अभियान का उल्लेख करते हुए उन्होंने विद्यार्थियों और नागरिकों से पौधरोपण, जल संरक्षण तथा आसपास के वातावरण को स्वच्छ रखने में सक्रिय भूमिका निभाने की अपील की।
उन्होंने कहा कि जल केवल जीवन की बुनियादी आवश्यकता नहीं है, बल्कि अर्थव्यवस्था, पर्यावरण, सभ्यता और दुनिया के भविष्य से भी गहराई से जुड़ा है। असम में पूर्वजों द्वारा तालाबों और जलाशयों के निर्माण के माध्यम से स्थापित जल संरक्षण की समृद्ध परंपरा से आज की पीढ़ी को सीख लेनी चाहिए।

शिक्षा जगत और समाज के गणमान्य लोगों की रही उपस्थिति
कॉलेज के प्राचार्य डॉ. रंजीत कुमार बरुआ ने समारोह में स्वागत भाषण दिया, जबकि सहायक प्राध्यापक रमेन कलिता ने कार्यक्रम का संचालन किया।
समारोह में कॉलेज प्रबंधन समिति के अध्यक्ष एवं पूर्व प्राचार्य मणिराम सैकिया, भाजपा की शिवसागर जिला समिति के अध्यक्ष बितोपन रायडोंगिया, विशिष्ट चिकित्सक एवं कवि डॉ. प्रणय फुकन, पूर्व छात्र नेता शरत हजारिका, रमेन दत्ता, शिवसागर गर्ल्स कॉलेज के प्राचार्य प्रतिम शर्मा, नामति शहीद पियली फुकन कॉलेज के प्राचार्य ध्रुवज्योति नाथ, वीर लाचित बरफुकन कॉलेज के प्राचार्य पंकज हजारिका, भाजपा नेत्री सुरभि राजकुमारी और बिनीता सैकिया दे सहित अनेक गणमान्य व्यक्ति उपस्थित रहे।
इसके अलावा कॉलेज के शिक्षक-कर्मचारी, छात्र-छात्राओं, स्थानीय नागरिकों और शुभचिंतकों ने भी बड़ी संख्या में समारोह में भाग लिया।

“सक्षम, आत्मनिर्भर और जिम्मेदार नागरिक तैयार करता रहे कॉलेज”
विद्यार्थियों के उज्ज्वल भविष्य की कामना करते हुए सर्बानंद सोनोवाल ने विश्वास व्यक्त किया कि दिखौमुख कॉलेज अपने संस्थापक प्राचार्य स्वर्गीय हरेन भुइयां के आदर्शों को आगे बढ़ाते हुए शिक्षा, संस्कृति, संस्कार और सामाजिक जिम्मेदारी के मूल्यों को मजबूत करता रहेगा।
उन्होंने युवाओं से ज्ञान और कौशल हासिल करने के साथ आत्मनिर्भर, अनुशासित, पर्यावरण के प्रति संवेदनशील और जिम्मेदार नागरिक बनने तथा अपनी ऊर्जा को विकसित भारत के निर्माण में लगाने का आह्वान किया।




