शिक्षक दिवस पर शिवसागर मारवाड़ी महिला समिति की अनूठी पहल, सम्मान के साथ दिया पर्यावरण संरक्षण का संदेश : नंबर 3 टाउन बालिका प्राथमिक विद्यालय की 15 शिक्षिकाओं और 2 आंगनबाड़ी सहयोगियों को फुलाम गामुछा, उपहार व पौधे देकर किया सम्मानित : पुराने प्लास्टिक डिब्बों को आकर्षक गमलों में बदलकर दिया ‘Reuse-Recycle’ का संदेश, पर्यावरण संरक्षण को दैनिक जीवन से जोड़ने की सार्थक कोशिश
मेमोरी टेस्ट और मनोरंजक खेलों में शिक्षिकाओं ने उत्साह से लिया हिस्सा : उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाली तीन शिक्षिकाओं को विशेष उपहार : ‘शिक्षक केवल ज्ञान नहीं देते, संस्कार और सही दिशा देकर नई पीढ़ी के भविष्य का निर्माण करते हैं’—अध्यक्षा सारिका देवड़ा

शिवसागर, 6 सितंबर : शिक्षक दिवस के अवसर पर शिक्षकों के प्रति सम्मान व्यक्त करने के साथ ही पर्यावरण संरक्षण, पुनः उपयोग और सामाजिक जिम्मेदारी का संदेश देते हुए अखिल भारतीय मारवाड़ी महिला सम्मेलन के असम प्रदेश अंतर्गत शिवसागर मारवाड़ी महिला समिति की ओर से शनिवार को आमला पट्टी, एल.के.बी. रोड स्थित नंबर 3 टाउन बालिका प्राथमिक विद्यालय में विशेष सम्मान एवं पर्यावरण जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया गया। विद्यालय की प्रधान शिक्षिका आरा अहमद के सहयोग से आयोजित इस कार्यक्रम में शिक्षक सम्मान, पर्यावरण संरक्षण, ‘Reuse-Recycle’ की अवधारणा, मनोरंजक गतिविधियों और बच्चों के बीच खुशियां बांटने जैसे विभिन्न सामाजिक सरोकारों को एक मंच पर जोड़ने का प्रयास किया गया।

17 महिलाओं का सम्मान, फुलाम गामुछा के साथ भेंट किए पौधे
शिक्षक दिवस के उपलक्ष्य में विद्यालय की 15 शिक्षिकाओं और आंगनबाड़ी की 2 सहयोगी महिलाओं सहित कुल 17 महिलाओं को सम्मानित किया गया। समिति की ओर से सभी को असम की पारंपरिक पहचान फुलाम गामुछा, उपहार और एक-एक पौधा भेंट किया गया।
इस सम्मान के माध्यम से संस्था ने न केवल विद्यार्थियों को शिक्षित और संस्कारित करने वाली शिक्षिकाओं के योगदान को नमन किया, बल्कि बच्चों की देखभाल और उनके विकास से जुड़े कार्यों में योगदान देने वाली आंगनबाड़ी सहयोगियों की सेवाओं को भी रेखांकित किया। कार्यक्रम में उपस्थित लोगों के लिए संस्था की ओर से नाश्ते की व्यवस्था भी की गई।

‘शिक्षक नई पीढ़ी के भविष्य के निर्माता’—सारिका देवड़ा
इस अवसर पर समिति की अध्यक्षा सारिका देवड़ा ने सभी शिक्षिकाओं को शिक्षक दिवस की शुभकामनाएं देते हुए समाज और राष्ट्र निर्माण में शिक्षकों की भूमिका को अत्यंत महत्वपूर्ण बताया।
उन्होंने कहा कि शिक्षक का दायित्व केवल बच्चों को पाठ्यपुस्तकों का ज्ञान देने तक सीमित नहीं है। शिक्षक विद्यार्थियों में अनुशासन, संस्कार, जिम्मेदारी, आत्मविश्वास और सही निर्णय लेने की क्षमता विकसित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। बच्चे अपने जीवन का महत्वपूर्ण समय विद्यालय और शिक्षकों के सान्निध्य में बिताते हैं, इसलिए उनके व्यक्तित्व निर्माण में शिक्षक की भूमिका अत्यंत व्यापक होती है।
सारिका देवड़ा ने कहा, “शिक्षक केवल ज्ञान नहीं देते, बल्कि संस्कार और सही दिशा देकर नई पीढ़ी के भविष्य का निर्माण करते हैं। शिक्षकों का सम्मान वास्तव में ज्ञान, संस्कार, समर्पण और सेवा भावना का सम्मान है।”
उन्होंने कहा कि आज के बच्चे कल के जिम्मेदार नागरिक हैं। उन्हें बेहतर इंसान बनाने में माता-पिता के साथ शिक्षकों की भी अहम भूमिका है। बदलते दौर में शिक्षा के साधनों और तकनीक में तेजी से परिवर्तन आया है, लेकिन बच्चों को मानवीय मूल्यों, संवेदनशीलता, अनुशासन और सामाजिक जिम्मेदारी से जोड़ने में शिक्षक की आवश्यकता हमेशा बनी रहेगी।

शिक्षा के साथ पर्यावरण के प्रति संवेदनशीलता भी जरूरी
पर्यावरण संरक्षण का उल्लेख करते हुए सारिका देवड़ा ने कहा कि आने वाली पीढ़ियों को बेहतर भविष्य देना है तो गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और अच्छे संस्कारों के साथ उन्हें प्रकृति एवं पर्यावरण के प्रति संवेदनशील बनाना भी जरूरी है।
उन्होंने पर्यावरण संरक्षण को केवल पौधरोपण तक सीमित नहीं रखने पर जोर देते हुए कहा कि दैनिक जीवन में प्लास्टिक का कम उपयोग, अनुपयोगी वस्तुओं का पुनः इस्तेमाल, कचरे का उचित प्रबंधन और पौधों की नियमित देखभाल जैसे छोटे-छोटे प्रयास भी बड़ा सकारात्मक बदलाव ला सकते हैं।

कचरा नहीं, संसाधन : प्लास्टिक डिब्बों से बनाए आकर्षक गमले
कार्यक्रम का विशेष आकर्षण समिति का पर्यावरण प्रकल्प रहा। आमतौर पर उपयोग के बाद फेंक दिए जाने वाले पुराने प्लास्टिक के डिब्बों को पुनः उपयोग कर पौधे लगाने योग्य आकर्षक गमलों में बदला गया।
इन डिब्बों को जूट के बस्ते बनाने में इस्तेमाल होने वाली सामग्री से आकर्षक तरीके से सजाया गया और उनमें पौधे लगाकर शिक्षिकाओं तथा सहयोगियों को भेंट किया गया। इस रचनात्मक प्रयोग के जरिए संस्था ने ‘Reuse, Recycle और पर्यावरण संरक्षण’ की अवधारणा को केवल संदेश तक सीमित न रखकर व्यावहारिक रूप में प्रस्तुत किया।
इस पहल के माध्यम से संदेश दिया गया कि घर में मौजूद कई अनुपयोगी वस्तुओं को थोड़ी रचनात्मकता के साथ दोबारा उपयोगी बनाया जा सकता है। इससे एक ओर प्लास्टिक कचरा कम करने में मदद मिलती है, वहीं दूसरी ओर पौधों के जरिए हरियाली बढ़ाने की प्रेरणा भी मिलती है।
संस्था ने पौधे भेंट करने को केवल प्रतीकात्मक गतिविधि न मानते हुए उनकी नियमित देखभाल और संरक्षण की आवश्यकता पर भी ध्यान आकर्षित किया।

मेमोरी टेस्ट और मनोरंजक खेलों ने बढ़ाया उत्साह
आयोजन को केवल औपचारिक सम्मान समारोह तक सीमित नहीं रखा गया। शिक्षिकाओं के लिए मेमोरी टेस्ट सहित विभिन्न मनोरंजक खेल और गतिविधियां आयोजित की गईं, जिनमें उन्होंने उत्साहपूर्वक हिस्सा लिया।
खेलों और गतिविधियों से पूरे कार्यक्रम में आत्मीयता और उल्लास का वातावरण बना रहा। विभिन्न गतिविधियों में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाली तीन शिक्षिकाओं को विशेष उपहार देकर उनका उत्साहवर्धन किया गया। इसका उद्देश्य शिक्षक दिवस पर शिक्षिकाओं के लिए कुछ आनंददायक और यादगार पल तैयार करना भी था।

25 बच्चों को फ्रूटी और बिस्किट, खुशियों में विद्यार्थियों को भी किया शामिल
कार्यक्रम की खुशियों से विद्यालय के बच्चों को भी जोड़ा गया। संस्था की ओर से 25 बच्चों को फ्रूटी और बिस्किट के पैकेट वितरित किए गए। बच्चों ने उत्साहपूर्वक कार्यक्रम में हिस्सा लिया।
इस दौरान उन्हें अपने शिक्षकों का सम्मान करने के साथ पर्यावरण के प्रति जिम्मेदार व्यवहार अपनाने की प्रेरणा भी दी गई। इस तरह शिक्षक दिवस के आयोजन को शिक्षक सम्मान के साथ बाल विकास और पर्यावरण जागरूकता से भी जोड़ा गया।

प्रधान शिक्षिका आरा अहमद के सहयोग से सफल हुआ आयोजन
पूरे कार्यक्रम को सफलतापूर्वक संपन्न कराने में विद्यालय की प्रधान शिक्षिका आरा अहमद का महत्वपूर्ण सहयोग रहा। विद्यालय और संस्था के बेहतर समन्वय से सम्मान समारोह, पर्यावरण प्रकल्प, मनोरंजक गतिविधियां और बच्चों के लिए खाद्य सामग्री वितरण व्यवस्थित रूप से संपन्न हुआ।
संस्था ने विद्यालय परिवार के सहयोग के प्रति आभार व्यक्त करते हुए भविष्य में भी शिक्षा, बाल विकास, पर्यावरण संरक्षण और अन्य सामाजिक सरोकारों से जुड़े कार्यक्रमों के माध्यम से समाज में सकारात्मक संदेश पहुंचाने की प्रतिबद्धता व्यक्त की।
समिति की पूरी टीम की रही सक्रिय भागीदारी
कार्यक्रम को सफल बनाने में संस्था की अध्यक्षा सारिका देवड़ा, सचिव प्रीति केजरीवाल, कोषाध्यक्ष संगीता झूरिया, पर्यावरण प्रकल्प प्रमुख कविता अग्रवाल, सह-प्रमुख स्वाति बुखरेडिया, बाल विकास प्रकल्प प्रमुख रेनू अग्रवाल, सह-प्रमुख कंचन रामूका तथा अंशु शर्मा की सक्रिय भूमिका एवं विशेष सहयोग रहा।
सभी सदस्यों ने सम्मान समारोह से लेकर पर्यावरण प्रकल्प, मनोरंजक गतिविधियों और बच्चों के लिए खाद्य सामग्री वितरण तक विभिन्न व्यवस्थाओं को सफल बनाने में योगदान दिया।
कुल मिलाकर शिक्षक दिवस पर शिवसागर मारवाड़ी महिला समिति का यह आयोजन शिक्षकों के प्रति सम्मान, पर्यावरण के प्रति जिम्मेदारी, अनुपयोगी वस्तुओं के पुनः उपयोग और बच्चों के प्रति सामाजिक सरोकार को एक सूत्र में जोड़ने वाली रचनात्मक पहल के रूप में सामने आया। कार्यक्रम ने यह संदेश भी दिया कि पर्यावरण संरक्षण की शुरुआत दैनिक जीवन की छोटी-छोटी आदतों और जिम्मेदार व्यवहार से की जा सकती है।
यह जानकारी शिवसागर मारवाड़ी महिला समिति की जनसंपर्क अधिकारी एडवोकेट पायल अग्रवाल ने दी।




