“अमेरिका के बाद विश्व की सुपर पावर बनने की दिशा में भारत”—शिवसागर में बैरिस्टर इलियास हुसैन अंसारी : नॉर्थ ईस्ट फाउंडेशन की पहल पर जयसागर में बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों के मेधावी विद्यार्थियों को छात्रवृत्ति एवं आर्थिक सहायता : अंसारी फाउंडेशन ने शिवसागर, चराईदेव और जोरहाट के बाढ़ प्रभावित विद्यार्थियों तक पहुंचाई मदद
आज के मेधावी विद्यार्थी ही आधुनिक और शक्तिशाली भारत के भविष्य निर्माता बनेंगे, बाढ़ में शैक्षणिक सामग्री गंवाने वाले विद्यार्थियों की पढ़ाई बाधित न हो, हरसंभव सहयोग जारी रहेगा”—इलियास हुसैन अंसारी

शिवसागर, 4 सितंबर : विनाशकारी बाढ़ से प्रभावित परिवारों के बच्चों की शिक्षा को दोबारा पटरी पर लाने और मेधावी विद्यार्थियों का मनोबल बढ़ाने के उद्देश्य से शिवसागर के नॉर्थ ईस्ट फाउंडेशन की पहल पर शुक्रवार को जयसागर तीनआली में विशेष छात्रवृत्ति वितरण कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम में देश के प्रमुख स्वयंसेवी संगठनों में शामिल अंसारी फाउंडेशन के प्रमुख तथा असम के मूल निवासी बैरिस्टर इलियास हुसैन अंसारी ने मुख्य अतिथि के रूप में भाग लिया।
कार्यक्रम के दौरान अंसारी फाउंडेशन की ओर से शिवसागर, चराईदेव और जोरहाट जिलों के बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों के चयनित मेधावी छात्र-छात्राओं को नकद राशि के रूप में छात्रवृत्ति एवं आर्थिक सहायता प्रदान की गई। आयोजकों के अनुसार इस पहल का उद्देश्य बाढ़ के कारण प्रभावित विद्यार्थियों को अपनी पढ़ाई जारी रखने के लिए सहयोग देने के साथ उनमें भविष्य को लेकर नया आत्मविश्वास पैदा करना है।

ऊपरी असम में बाढ़ की तबाही देखकर लंदन में छलक पड़े थे आंसू—अंसारी
छात्रवृत्ति वितरण के दौरान बैरिस्टर इलियास हुसैन अंसारी ने ऊपरी असम में आई हालिया विनाशकारी बाढ़ का उल्लेख करते हुए कहा कि इस अभूतपूर्व प्राकृतिक आपदा की तस्वीरों ने उन्हें अंदर तक झकझोर दिया था।
अंसारी ने कहा कि जब उन्होंने लंदन में रहते हुए ऊपरी असम में बाढ़ से हुई व्यापक तबाही को देखा तो उनकी आंखों से आंसू निकल आए। विशेष रूप से यह जानकर उन्हें गहरा दुख हुआ कि बाढ़ के कारण बड़ी संख्या में छात्र-छात्राओं की किताबें, कॉपियां और दूसरी शैक्षणिक सामग्री नष्ट हो गई।
उन्होंने कहा कि प्राकृतिक आपदा केवल घर, संपत्ति और आजीविका को नुकसान नहीं पहुंचाती, बल्कि बच्चों की शिक्षा और उनके भविष्य पर भी दीर्घकालिक प्रभाव डाल सकती है। इसलिए बाढ़ के बाद पुनर्वास की प्रक्रिया में विद्यार्थियों की शैक्षणिक जरूरतों को विशेष प्राथमिकता दी जानी चाहिए।
“नई पीढ़ी को देश की सबसे मूल्यवान मानव संपदा बनाना होगा”
बैरिस्टर अंसारी ने कहा कि छात्र-छात्राएं ही देश का भविष्य हैं और नई पीढ़ी के भविष्य को सुरक्षित करना अभिभावकों के साथ पूरे समाज की जिम्मेदारी है। विद्यार्थियों को अच्छी शिक्षा, अवसर और उचित मार्गदर्शन उपलब्ध कराकर उन्हें देश के लिए मूल्यवान मानव संसाधन के रूप में तैयार करना होगा।
उन्होंने विद्यार्थियों से डॉ. ए.पी.जे. अब्दुल कलाम, महात्मा गांधी और जवाहरलाल नेहरू जैसी हस्तियों के जीवन एवं योगदान से प्रेरणा लेने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि आज के इन्हीं विद्यार्थियों में से भविष्य में महान वैज्ञानिक, चिकित्सक, इंजीनियर, राजनेता, समाजसेवी और पत्रकार निकलेंगे, जो अपने-अपने क्षेत्रों में योगदान देकर देश को आगे ले जाएंगे।
अंसारी के अनुसार शिक्षा का उद्देश्य केवल व्यक्तिगत सफलता हासिल करना नहीं होना चाहिए, बल्कि ऐसे जिम्मेदार नागरिक तैयार करना भी होना चाहिए जो अपनी प्रतिभा और ज्ञान का उपयोग समाज एवं राष्ट्र के विकास के लिए करें।

“भारत के विश्व की सुपर पावर बनने का दिन दूर नहीं”
देश की भविष्य की संभावनाओं पर बात करते हुए बैरिस्टर इलियास हुसैन अंसारी ने कहा कि आज अमेरिका जैसे शक्तिशाली देश के नागरिक दुनिया के अग्रणी राष्ट्र का हिस्सा होने पर गर्व महसूस करते हैं। उन्होंने विश्वास जताया कि भारत जिस गति से विकास और प्रगति के पथ पर आगे बढ़ रहा है, उससे वह दिन दूर नहीं जब देश विश्व की प्रमुख शक्तियों में और अधिक मजबूत स्थान बनाएगा।
अंसारी ने कहा कि उनका विश्वास है कि आने वाले समय में भारत विश्व की ‘सुपर पावर’ के रूप में पहचान बनाने की क्षमता रखता है।
उन्होंने कहा, “वह दिन करीब है। आज जिन मेधावी छात्र-छात्राओं को हम छात्रवृत्ति देकर प्रोत्साहित कर रहे हैं, यही विद्यार्थी आधुनिक और शक्तिशाली भारत के भविष्य निर्माता बनेंगे। आने वाले समय में यही नई पीढ़ी भारत को विश्व की सुपर पावर बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।”
बाढ़ के कारण किसी विद्यार्थी की पढ़ाई नहीं रुकनी चाहिए
अंसारी ने विशेष रूप से बाढ़ प्रभावित विद्यार्थियों की शिक्षा पर जोर देते हुए कहा कि प्राकृतिक आपदा के कारण किसी बच्चे की पढ़ाई बाधित नहीं होनी चाहिए। जिन परिवारों की आर्थिक स्थिति बाढ़ से प्रभावित हुई है और जिन विद्यार्थियों की शैक्षणिक सामग्री नष्ट हुई है, उन्हें समाज के सक्षम वर्गों और संस्थाओं की ओर से आवश्यक सहायता मिलनी चाहिए।
उन्होंने कहा कि ऐसे कठिन समय में आर्थिक सहायता के साथ विद्यार्थियों का मनोबल बनाए रखना भी जरूरी है, ताकि वे विपरीत परिस्थितियों के कारण अपने शैक्षणिक लक्ष्यों से पीछे न हटें।
बैरिस्टर अंसारी ने आश्वस्त किया कि छात्र-छात्राओं को शिक्षा ग्रहण करने में किसी प्रकार की कठिनाई का सामना न करना पड़े, इसे ध्यान में रखते हुए अंसारी फाउंडेशन भविष्य में भी अपनी क्षमता के अनुसार हरसंभव सहायता और सहयोग जारी रखेगा।

शिवसागर के साथ चराईदेव और जोरहाट के विद्यार्थियों को भी सहायता
जयसागर में आयोजित कार्यक्रम को केवल शिवसागर जिले तक सीमित नहीं रखा गया। इसके माध्यम से चराईदेव और जोरहाट जिले के बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों के मेधावी विद्यार्थियों को भी सहायता के दायरे में शामिल किया गया।
अंसारी फाउंडेशन की ओर से नकद राशि सहित छात्रवृत्ति प्रदान कर विद्यार्थियों को अपनी पढ़ाई जारी रखने के लिए प्रोत्साहित किया गया। नॉर्थ ईस्ट फाउंडेशन की पहल पर आयोजित कार्यक्रम के माध्यम से यह संदेश देने का प्रयास किया गया कि बाढ़ के बाद पुनर्वास की प्रक्रिया में बच्चों की शिक्षा और उनके मानसिक मनोबल को भी उतनी ही प्राथमिकता मिलनी चाहिए जितनी अन्य आवश्यकताओं को दी जाती है।
शिक्षा के सपनों को बचाने की साझा पहल
आयोजकों का मानना है कि बाढ़ में किताबें, कॉपियां और अन्य शैक्षणिक संसाधन नष्ट हो सकते हैं, लेकिन परिस्थितियों के कारण विद्यार्थियों के शिक्षा के सपने और बेहतर भविष्य बनाने की आकांक्षा समाप्त नहीं होनी चाहिए।
इसी उद्देश्य से नॉर्थ ईस्ट फाउंडेशन और अंसारी फाउंडेशन की यह पहल विद्यार्थियों को आर्थिक सहयोग देने के साथ उन्हें विपरीत परिस्थितियों से उबरकर दोबारा पढ़ाई पर ध्यान केंद्रित करने के लिए प्रेरित करने का प्रयास भी रही।
कार्यक्रम के दौरान शिक्षा को केवल व्यक्तिगत उन्नति का माध्यम नहीं, बल्कि राष्ट्र निर्माण की आधारशिला के रूप में रेखांकित किया गया। वक्ताओं ने कहा कि मेधावी और शिक्षित नई पीढ़ी ही भविष्य में एक आधुनिक, आत्मनिर्भर और शक्तिशाली भारत के निर्माण में निर्णायक भूमिका निभाएगी।
कई गणमान्य व्यक्तियों ने की कार्यक्रम में शिरकत
छात्रवृत्ति वितरण कार्यक्रम में ऊपरी असम मुस्लिम कल्याण परिषद की केंद्रीय समिति के अध्यक्ष मनीरुल इस्लाम बोरा, चिकित्सक डॉ. ताजिम अहमद, डॉ. साबिर इस्लाम, पत्रकार इनामुल हजारिका, एनामुद्दीन अहमद, खलीलुर रहमान हजारिका और प्रोफेसर सीमांत बरुआ सहित कई गणमान्य व्यक्ति उपस्थित रहे।
उपस्थित लोगों ने बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों के विद्यार्थियों की शिक्षा को पुनः सामान्य बनाने और उन्हें आर्थिक सहयोग प्रदान करने के लिए बैरिस्टर इलियास हुसैन अंसारी तथा अंसारी फाउंडेशन की पहल के प्रति आभार व्यक्त किया।
आपदा के बीच शिक्षा और भविष्य की उम्मीद को जीवित रखने का संदेश
कार्यक्रम का प्रमुख संदेश यही रहा कि बाढ़ की तबाही विद्यार्थियों की शैक्षणिक सामग्री छीन सकती है, लेकिन उनके सपनों और भविष्य बनाने के संकल्प को कमजोर नहीं होने देना चाहिए।
नॉर्थ ईस्ट फाउंडेशन और अंसारी फाउंडेशन की संयुक्त पहल ने बाढ़ प्रभावित मेधावी विद्यार्थियों को आर्थिक सहायता उपलब्ध कराने के साथ उन्हें अपनी शिक्षा जारी रखने, चुनौतियों से उबरने और भविष्य में देश के कुशल मानव संसाधन के रूप में स्वयं को विकसित करने के लिए प्रोत्साहित किया।
कार्यक्रम के माध्यम से यह संदेश भी सामने आया कि आपदा के बाद पुनर्निर्माण केवल घरों और बुनियादी ढांचे तक सीमित नहीं होना चाहिए, बल्कि बच्चों की शिक्षा, उनके सपनों और भविष्य का पुनर्निर्माण भी पुनर्वास का उतना ही महत्वपूर्ण हिस्सा है।




