जन्माष्टमी पर मारवाड़ी सम्मेलन शिवसागर शाखा की सेवा पहल, स्टेशन चाराली नामघर को भेंट की आवश्यक उपयोगी सामग्री : श्रद्धालुओं, धार्मिक आयोजनों और सामुदायिक सेवा कार्यों के लिए कई उपयोगी वस्तुएं प्रदान : नामघर व मारवाड़ी सम्मेलन के पदाधिकारियों की रही उपस्थिति; धार्मिक पर्वों को समाजहित और सेवा से जोड़ने पर जोर
‘सेवा ही सच्ची भक्ति है’ की भावना के साथ मनाया श्रीकृष्ण जन्माष्टमी पर्व, सामाजिक सहयोग और सद्भाव का दिया संदेश

शिवसागर, 4 सितंबर : श्रीकृष्ण जन्माष्टमी के पावन अवसर पर शिवसागर मारवाड़ी सम्मेलन शाखा ने धार्मिक आस्था को सामाजिक सेवा से जोड़ते हुए एक सार्थक पहल की। शुक्रवार को शाखा की ओर से शहर के स्टेशन चाराली स्थित नामघर में श्रद्धालुओं तथा वहां आयोजित होने वाले धार्मिक, सामाजिक और सामुदायिक कार्यक्रमों की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए विभिन्न आवश्यक उपयोगी सामग्रियों के सेट भेंट किए गए।
इस सेवा कार्यक्रम को ‘सेवा ही सच्ची भक्ति है’ की भावना को समर्पित किया गया। आयोजकों ने कहा कि धार्मिक पर्व हमें पूजा-अर्चना के साथ समाज और जरूरतमंदों के प्रति अपने दायित्वों को निभाने की प्रेरणा भी देते हैं। इसी सोच के तहत जन्माष्टमी के अवसर को सेवा और सामाजिक सहयोग के माध्यम से सार्थक बनाने का प्रयास किया गया।

नामघर को भेंट की दैनिक उपयोग की सामग्री
मारवाड़ी सम्मेलन शाखा की ओर से नामघर को कड़ाही, टोपिया, हांडी, प्लेट, कटोरी, गिलास, चम्मच, बाल्टी और मग सहित विभिन्न आवश्यक उपयोगी वस्तुएं प्रदान की गईं।
आयोजकों के अनुसार इन सामग्रियों का उपयोग नामघर में नियमित रूप से होने वाले धार्मिक आयोजनों, प्रसाद वितरण, सामुदायिक कार्यक्रमों और विभिन्न सेवा गतिविधियों में किया जा सकेगा। सामग्री का चयन भी नामघर की व्यावहारिक जरूरतों को ध्यान में रखते हुए किया गया, ताकि इसका उपयोग लंबे समय तक विभिन्न अवसरों पर हो सके।
आस्था के साथ सामाजिक उत्तरदायित्व का संदेश
कार्यक्रम के दौरान उपस्थित सदस्यों ने इस पहल को धार्मिक आस्था के साथ सामाजिक उत्तरदायित्व को जोड़ने का सकारात्मक प्रयास बताया। शाखा के प्रतिनिधियों ने कहा कि सेवा गतिविधि का उद्देश्य केवल सामग्री भेंट करना नहीं, बल्कि समाज में सहयोग, सद्भाव, सेवा और आपसी जुड़ाव की भावना को और मजबूत करना भी है।
उन्होंने कहा कि सामाजिक और धार्मिक संस्थाएं आपसी सहयोग के माध्यम से समाज में सकारात्मक वातावरण तैयार करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती हैं। जन्माष्टमी जैसे पावन पर्व पर की गई यह पहल इसी सामुदायिक भावना को आगे बढ़ाने का प्रयास है।
‘सेवा ही सच्ची भक्ति है’ की भावना को किया साकार
श्रीकृष्ण जन्माष्टमी के अवसर पर आयोजित कार्यक्रम में सेवा को भक्ति के महत्वपूर्ण स्वरूप के रूप में रेखांकित किया गया। सदस्यों का कहना था कि धार्मिक पर्व केवल व्यक्तिगत आस्था या पूजा-पाठ तक सीमित न रहकर समाजहित और जनसेवा के कार्यों के लिए भी प्रेरणा का माध्यम बनने चाहिए।
इसी उद्देश्य के साथ शिवसागर मारवाड़ी सम्मेलन शाखा ने इस वर्ष जन्माष्टमी को नामघर के लिए उपयोगी सामग्री प्रदान कर मनाया। संगठन ने इसे समाज के प्रति अपने दायित्व का छोटा लेकिन सार्थक प्रयास बताया।
नामघर के प्रतिनिधियों की रही उपस्थिति
इस अवसर पर नामघर की ओर से पुजारी उमेश गोस्वामी, वरिष्ठ पत्रकार मनोज बोरठाकुर, बिजित भगवती, सौरव भगवती और बिपुल गोस्वामी सहित कई अन्य सदस्य उपस्थित रहे।
समाज की ओर से रवि शंकर अग्रवाल ने भी कार्यक्रम में भाग लिया और इस सेवा पहल के प्रति अपना सहयोग एवं शुभकामनाएं व्यक्त कीं। उपस्थित लोगों ने सामुदायिक संस्थाओं के बीच इस प्रकार के सहयोग को सामाजिक एकता और सद्भाव को मजबूत करने वाला बताया।
मारवाड़ी सम्मेलन के पदाधिकारी भी रहे मौजूद
शिवसागर मारवाड़ी सम्मेलन शाखा की ओर से अध्यक्ष प्रदीप खेमका, सचिव आनंद प्रकाश केडिया, रुपचंद करनानी, विनोद अग्रवाल और संयुक्त सचिव एडवोकेट पायल अग्रवाल कार्यक्रम में उपस्थित रहे।
शाखा के प्रतिनिधियों ने कहा कि समाजसेवा, धार्मिक आस्था और सामुदायिक सहयोग को साथ लेकर चलना संगठन की प्राथमिकताओं में शामिल है। विभिन्न अवसरों पर समाजोपयोगी गतिविधियों के माध्यम से समुदाय और स्थानीय संस्थाओं के साथ सहयोग को और मजबूत करने का प्रयास किया जाता रहा है।
सुख, शांति और समृद्धि की कामना
कार्यक्रम के दौरान उपस्थित सदस्यों ने भगवान श्रीकृष्ण से सभी के जीवन में सुख, शांति और समृद्धि की कामना की। साथ ही समाज में प्रेम, सेवा, आपसी सहयोग और सद्भाव की भावना निरंतर बनी रहने की प्रार्थना की गई।
जन्माष्टमी पर आयोजित इस सेवा कार्यक्रम के माध्यम से यह संदेश देने का प्रयास किया गया कि धार्मिक पर्वों की सार्थकता पूजा-अर्चना के साथ समाजहित और सेवा कार्यों से जुड़ने पर और बढ़ जाती है। शिवसागर मारवाड़ी सम्मेलन शाखा की नामघर के प्रति यह पहल इसी भावना का उदाहरण बनी।




