मारवाड़ी सम्मेलन गुवाहाटी मेट्रो शाखा का ‘गोल्डन स्माइल प्रोजेक्ट’ बना दो पीढ़ियों के बीच संवाद का सेतु, वरिष्ठजनों की जीवन-पूंजी को नई पीढ़ी तक पहुंचाने का सार्थक प्रयास : ‘गोल्डन स्माइल 3.0’ में सजी अनुभव और संस्कारों की अनमोल विरासत : वरिष्ठ मातृशक्ति शांति देवी मित्तल ने साझा की हरियाणा से असम तक की संघर्षपूर्ण जीवन-यात्रा
शिक्षा संग संस्कारों का दिया संदेश : गामोछा, स्मृति-चिह्न व प्रभु श्रीराम की प्रतिमा से सम्मान

गुवाहाटी, 3 सितंबर : समय आगे बढ़ता रहता है, पीढ़ियां बदलती रहती हैं और जीवन जीने के तौर-तरीके भी बदलते जाते हैं, लेकिन एक पीढ़ी द्वारा दशकों के संघर्ष, त्याग, परिश्रम और अनुभवों से अर्जित जीवन-मूल्य कभी पुराने नहीं होते। इन्हीं अनमोल अनुभवों को सहेजने, वरिष्ठजनों को सम्मान देने और उनकी जीवन-यात्रा से नई पीढ़ी को परिचित कराने के उद्देश्य से मारवाड़ी सम्मेलन गुवाहाटी मेट्रो शाखा द्वारा संचालित ‘गोल्डन स्माइल प्रोजेक्ट’ के अंतर्गत ‘गोल्डन स्माइल 3.0’ का आत्मीय एवं गरिमामय आयोजन किया गया।
कार्यक्रम शाखा उपाध्यक्ष राजेश मित्तल के निवास पर उनकी पूजनीय माताजी एवं वरिष्ठ मातृशक्ति श्रीमती शांति देवी मित्तल के सान्निध्य में आयोजित हुआ। यह आयोजन महज एक सम्मान समारोह न रहकर वरिष्ठ पीढ़ी के अनुभवों को सुनने, समझने और उनसे जीवन की सीख ग्रहण करने का एक भावनात्मक मंच बन गया।
श्रीमती शांति देवी मित्तल ने उपस्थित सदस्यों के बीच अपने जीवन के अनेक अनुभव, संघर्ष, सपने, पारिवारिक संस्मरण और समय के साथ आए सामाजिक बदलावों से जुड़ी बातें साझा कीं। उनकी सहज और भावपूर्ण बातचीत के दौरान कई ऐसे प्रसंग सामने आए, जिन्होंने उपस्थित सदस्यों को बीते समय के संघर्ष, परिवार की मजबूती और जीवन में संस्कारों के महत्व पर विचार करने के लिए प्रेरित किया।

हरियाणा से असम तक—सिर्फ दूरी नहीं, अनुभवों से भरी एक लंबी जीवन-यात्रा
कार्यक्रम के दौरान श्रीमती शांति देवी मित्तल ने अपनी हरियाणा से असम तक की जीवन-यात्रा को याद करते हुए बताया कि जीवन के अलग-अलग पड़ावों पर परिस्थितियां हमेशा अनुकूल नहीं रहीं। नए परिवेश और बदलती परिस्थितियों के बीच परिवार को संभालना, जिम्मेदारियों को निभाना और आगे बढ़ते रहना अपने आप में एक बड़ी चुनौती रही।
लेकिन जीवन की कठिन परिस्थितियों के बीच भी उन्होंने धैर्य और आत्मविश्वास को कमजोर नहीं पड़ने दिया। परिवार के प्रति जिम्मेदारी, त्याग, परिश्रम और संस्कारों को उन्होंने जीवन की सबसे बड़ी ताकत माना। उनकी बातों से यह स्पष्ट हुआ कि संघर्षों से भरी यात्रा ने उन्हें कठिन परिस्थितियों का सामना करना ही नहीं सिखाया, बल्कि परिवार को एक सूत्र में बांधे रखने और अगली पीढ़ी को मजबूत जीवन-मूल्य देने की प्रेरणा भी दी।
उनके संस्मरणों में उस दौर की झलक दिखाई दी, जब सीमित संसाधनों के बावजूद परिवारों में आपसी सहयोग, धैर्य और रिश्तों की मजबूती जीवन की सबसे बड़ी पूंजी हुआ करती थी। परिस्थितियां चाहे जैसी रही हों, परिवार को साथ लेकर चलने और बच्चों को बेहतर भविष्य देने की इच्छा ने हर चुनौती के सामने आगे बढ़ने की शक्ति दी।
संघर्ष ने सिखाया धैर्य, परिवार ने दी आगे बढ़ने की ताकत
जीवन की लंबी यात्रा में व्यक्ति को कई प्रकार की परिस्थितियों से गुजरना पड़ता है। कुछ अनुभव सुखद होते हैं तो कुछ कठिनाइयों से भरे होते हैं, लेकिन समय के साथ यही अनुभव जीवन की सबसे मूल्यवान सीख बन जाते हैं। श्रीमती शांति देवी मित्तल के संवाद में भी यही भाव प्रमुख रूप से सामने आया।
उनकी जीवन-यात्रा में संघर्ष के साथ धैर्य, त्याग के साथ संतोष, चुनौतियों के बीच आत्मविश्वास और परिवार के प्रति अटूट समर्पण की प्रेरक झलक देखने को मिली। उन्होंने अपने अनुभवों के माध्यम से इस बात को रेखांकित किया कि कठिन समय में घबराने के बजाय परिस्थितियों का सामना करना और परिवार को साथ लेकर आगे बढ़ना जीवन की बड़ी सीख है।
उनकी बातें सुनते हुए उपस्थित सदस्यों ने महसूस किया कि आज की पीढ़ी के पास सुविधाएं और अवसर अधिक हो सकते हैं, लेकिन वरिष्ठ पीढ़ी के संघर्षों से मिलने वाली सीख आज भी उतनी ही प्रासंगिक है।
‘शिक्षा जरूरी, लेकिन संस्कार और जड़ों से जुड़ाव भी उतना ही महत्वपूर्ण’
श्रीमती शांति देवी मित्तल ने अपने संवाद में विशेष रूप से शिक्षा और संस्कारों के महत्व को रेखांकित किया। उनका मानना रहा कि बच्चों को अच्छी शिक्षा देकर उन्हें अपने पैरों पर खड़ा करना परिवार की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी है, लेकिन शिक्षा के साथ उन्हें अच्छे संस्कार देना भी उतना ही आवश्यक है।
उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि जीवन में आगे बढ़ने के बावजूद व्यक्ति को अपनी पारिवारिक जड़ों, संस्कृति और मूल्यों को नहीं भूलना चाहिए। परिवार के बड़ों का सम्मान, रिश्तों की अहमियत, जिम्मेदारियों का निर्वहन और समाज के प्रति संवेदनशीलता जैसे मूल्य व्यक्ति के व्यक्तित्व को पूर्ण बनाते हैं।
उनके विचारों ने यह संदेश दिया कि शिक्षा व्यक्ति को जीवन में अवसर प्रदान करती है, जबकि संस्कार उन अवसरों का सही उपयोग करने और समाज में सम्मानजनक स्थान बनाने की दिशा दिखाते हैं। आधुनिकता और प्रगति के साथ यदि परिवार अपनी परंपराओं और मूल्यों को भी सहेजकर रखे तो नई पीढ़ी अधिक मजबूत और जिम्मेदार बन सकती है।

वरिष्ठों के अनुभव—वह पाठशाला जिसकी कोई किताब नहीं
‘गोल्डन स्माइल 3.0’ के दौरान सबसे महत्वपूर्ण पहलू वरिष्ठ और अपेक्षाकृत युवा पीढ़ी के बीच हुआ आत्मीय संवाद रहा। श्रीमती शांति देवी मित्तल ने किसी औपचारिक संबोधन के बजाय सहज बातचीत के माध्यम से अपनी जिंदगी के अनुभव साझा किए। इसी सहजता ने कार्यक्रम को विशेष बना दिया।
उपस्थित सदस्यों ने उनके अनुभवों को बड़े ध्यान और सम्मान से सुना। सदस्यों के बीच यह भावना उभरकर सामने आई कि वरिष्ठजनों का जीवन स्वयं में एक ऐसी जीवंत पाठशाला है, जहां संघर्ष से जूझना, रिश्तों को संभालना, सीमित संसाधनों में परिवार को आगे बढ़ाना, परिस्थितियों से समझौता किए बिना धैर्य रखना और जीवन के उतार-चढ़ाव के बीच संतुलन बनाए रखना सीखा जा सकता है।
किताबों से ज्ञान प्राप्त किया जा सकता है, लेकिन दशकों तक जीवन को करीब से देखने के बाद मिलने वाली समझ अनुभव से ही प्राप्त होती है। वरिष्ठ पीढ़ी के पास मौजूद यही अनुभव आने वाली पीढ़ियों के लिए मार्गदर्शक बन सकते हैं।
बदलते समय में पीढ़ियों के बीच संवाद की आवश्यकता
तेजी से बदलते सामाजिक परिवेश और आधुनिक जीवनशैली के दौर में परिवारों के बीच संवाद की प्रकृति भी बदल रही है। ऐसे समय में वरिष्ठजनों के अनुभवों को सुनने और नई पीढ़ी को उनके साथ संवाद का अवसर देने वाले कार्यक्रम सामाजिक दृष्टि से महत्वपूर्ण बन जाते हैं।
‘गोल्डन स्माइल प्रोजेक्ट’ इसी सोच को आगे बढ़ाता दिखाई देता है। इसका उद्देश्य वरिष्ठजनों को केवल औपचारिक रूप से सम्मानित करना नहीं, बल्कि उनकी जिंदगी की उन कहानियों और अनुभवों को सामने लाना भी है, जिनमें आने वाली पीढ़ी के लिए अनगिनत सीख छिपी हैं।
‘गोल्डन स्माइल 3.0’ ने भी वरिष्ठ और नई पीढ़ी के बीच इसी संवाद को मजबूत करने का अवसर दिया। कार्यक्रम में जीवन के पुराने अनुभवों और वर्तमान समय के बीच एक ऐसा भावनात्मक सेतु दिखाई दिया, जिसने परिवार, संस्कार और सामाजिक जुड़ाव के महत्व को फिर से रेखांकित किया।
गामोछा और स्मृति-चिह्न से किया मातृशक्ति का सम्मान
कार्यक्रम में श्रीमती शांति देवी मित्तल के जीवन-संघर्ष, पारिवारिक योगदान और प्रेरक अनुभवों के प्रति सम्मान व्यक्त करते हुए उनका अभिनंदन भी किया गया।
कार्यक्रम के संयोजक अमित शर्मा एवं सुदर्शन गरोड़िया ने श्रीमती शांति देवी मित्तल को पारंपरिक असमिया गामोछा एवं स्मृति-चिह्न भेंट कर सम्मानित किया। असम की सांस्कृतिक पहचान के प्रतीक गामोछा के माध्यम से किया गया यह सम्मान कार्यक्रम के आत्मीय वातावरण को और विशेष बना गया।
वहीं शाखा अध्यक्ष अमित कुमार कंसल ने मारवाड़ी सम्मेलन, गुवाहाटी मेट्रो शाखा की ओर से श्रीमती शांति देवी मित्तल को प्रभु श्रीराम की प्रतिमा भेंट कर श्रद्धापूर्वक सम्मानित किया। सम्मान के इन क्षणों में वरिष्ठ मातृशक्ति के प्रति आदर और कृतज्ञता का भाव स्पष्ट रूप से दिखाई दिया।
राजेश मित्तल ने की सदस्यों के लिए जलपान की व्यवस्था
कार्यक्रम की मेजबानी कर रहे शाखा उपाध्यक्ष राजेश मित्तल ने सभी आगंतुक सदस्यों का आत्मीय स्वागत किया। कार्यक्रम के दौरान उनकी ओर से उपस्थित सदस्यों के लिए स्वादिष्ट जलपान की भी व्यवस्था की गई।
आत्मीय संवाद, वरिष्ठ मातृशक्ति का सम्मान और सदस्यों के बीच पारिवारिक माहौल ने आयोजन को औपचारिक कार्यक्रम से अलग एक पारिवारिक मिलन जैसा स्वरूप प्रदान किया।
शाखा के पदाधिकारियों एवं सदस्यों की रही सक्रिय उपस्थिति
‘गोल्डन स्माइल 3.0’ में मारवाड़ी सम्मेलन, गुवाहाटी मेट्रो शाखा के पदाधिकारियों एवं सदस्यों की उल्लेखनीय उपस्थिति रही।
इस अवसर पर शाखा अध्यक्ष अमित कुमार कंसल, शाखा सचिव नवीन हरलालका, शाखा उपाध्यक्ष पीयूष गनेरीवाल, गौतम गोयनका, संयुक्त सचिव जितेश जालान सहित रूपेश पोद्दार, मनोज पोद्दार, अनिल शर्मा, अनुराग पोद्दार, अमित कुमार अग्रवाल, रॉकी पोद्दार, अमित शर्मा एवं सुदर्शन गरोड़िया उपस्थित रहे।
सदस्यों ने श्रीमती शांति देवी मित्तल के अनुभवों को सुनने के साथ वरिष्ठजनों को केंद्र में रखकर आयोजित किए जा रहे इस प्रकार के कार्यक्रमों की भावना की सराहना की। कार्यक्रम ने सदस्यों को वरिष्ठ पीढ़ी के जीवन-संघर्ष को करीब से जानने और उनके अनुभवों से सीखने का अवसर प्रदान किया।

सम्मान से आगे बढ़कर अनुभवों को सहेजने की पहल
मारवाड़ी सम्मेलन, गुवाहाटी मेट्रो शाखा का ‘गोल्डन स्माइल प्रोजेक्ट’ अपनी अवधारणा में वरिष्ठजनों के सम्मान को एक व्यापक सामाजिक उद्देश्य से जोड़ता है। समाज के बुजुर्गों ने अपने जीवन में जो संघर्ष देखे, जिन परिस्थितियों का सामना किया और जिन संस्कारों एवं मूल्यों को वर्षों तक सहेजा, उन्हें अगली पीढ़ी तक पहुंचाना इस पहल की मूल भावना के रूप में सामने आया।
ऐसे कार्यक्रम वरिष्ठजनों को यह अहसास भी कराते हैं कि उनके अनुभव परिवार और समाज के लिए आज भी उतने ही महत्वपूर्ण हैं। वहीं युवा पीढ़ी को अपने वरिष्ठों की जिंदगी को करीब से समझने और उनके अनुभवों से सीखने का अवसर मिलता है।
यह संवाद इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि प्रत्येक परिवार की अपनी एक कहानी होती है और प्रत्येक वरिष्ठ सदस्य उस कहानी के एक महत्वपूर्ण अध्याय का प्रतिनिधित्व करता है। यदि उनके अनुभवों को सुना और सहेजा जाए तो वे केवल पारिवारिक स्मृतियां नहीं रहते, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा और मार्गदर्शन का स्रोत बन जाते हैं।
संस्कारों की विरासत को अगली पीढ़ी तक पहुंचाने का संदेश
कार्यक्रम में बार-बार यह भाव उभरकर सामने आया कि भौतिक उपलब्धियां समय के साथ बदल सकती हैं, लेकिन अच्छे संस्कार और जीवन-मूल्य पीढ़ियों तक परिवार की पहचान बने रहते हैं।
वरिष्ठजनों के पास जीवन का ऐसा अनुभव होता है जो वर्षों की मेहनत, कठिन परिस्थितियों, सफलताओं, असफलताओं और रिश्तों को निभाने से अर्जित होता है। इसलिए उनके अनुभवों को सुनना केवल अतीत को जानना नहीं, बल्कि भविष्य के लिए सीख हासिल करना भी है।
‘गोल्डन स्माइल 3.0’ के माध्यम से परिवार के प्रति समर्पण, बड़ों का सम्मान, शिक्षा का महत्व, अपनी जड़ों से जुड़ाव, कठिन समय में धैर्य और जीवन में सकारात्मक दृष्टिकोण बनाए रखने जैसे संदेश प्रमुख रूप से सामने आए।
‘उम्र केवल संख्या, अनुभवों की कोई उम्र नहीं’
कार्यक्रम का सार इस संदेश में दिखाई दिया कि उम्र केवल एक संख्या है, जबकि जीवन के अनुभवों की कोई उम्र नहीं होती। वरिष्ठजनों ने अपने जीवन के लंबे सफर में जो देखा, समझा और सीखा है, वह परिवार और समाज के लिए अमूल्य धरोहर है।
आज की पीढ़ी जहां तकनीक, आधुनिक शिक्षा और नए अवसरों के साथ तेजी से आगे बढ़ रही है, वहीं पिछली पीढ़ियों का अनुभव उसे अपनी जड़ों से जुड़े रहने और जीवन की चुनौतियों को समझदारी से संभालने की दिशा दे सकता है। यही कारण है कि वरिष्ठ और नई पीढ़ी के बीच निरंतर संवाद परिवार एवं समाज दोनों के लिए महत्वपूर्ण है।

‘गोल्डन स्माइल’ बना सम्मान, संवाद और संस्कारों का मंच
‘गोल्डन स्माइल 3.0’ ने एक बार फिर यह स्थापित करने का प्रयास किया कि वरिष्ठजनों का सम्मान केवल किसी विशेष दिवस या औपचारिक समारोह तक सीमित नहीं होना चाहिए। उनकी जिंदगी की कहानियों को सुनना, उनके संघर्ष को समझना और उनके अनुभवों को नई पीढ़ी तक पहुंचाना भी सम्मान का महत्वपूर्ण स्वरूप है।
मारवाड़ी सम्मेलन गुवाहाटी मेट्रो शाखा द्वारा इस प्रोजेक्ट के माध्यम से किया जा रहा प्रयास सामाजिक और पारिवारिक मूल्यों के संरक्षण की दिशा में एक सार्थक पहल के रूप में सामने आया। ऐसे आयोजन समाज में पीढ़ियों के बीच भावनात्मक दूरी कम करने, संवाद बढ़ाने और पारिवारिक संस्कारों की निरंतरता बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।
कार्यक्रम के समापन तक माहौल सम्मान, आत्मीयता और प्रेरणा से भरा रहा। श्रीमती शांति देवी मित्तल के जीवन के अनुभवों ने उपस्थित सदस्यों को यह सोचने का अवसर दिया कि परिवार के वरिष्ठ सदस्य केवल परिवार के बुजुर्ग नहीं, बल्कि उसके इतिहास, संस्कार, संघर्ष और स्मृतियों के जीवंत संरक्षक भी हैं।
‘गोल्डन स्माइल 3.0’ का संदेश स्पष्ट था—वरिष्ठों की मुस्कान में वर्षों का अनुभव छिपा है, उनकी बातों में जीवन की सीख है और उनका आशीर्वाद आने वाली पीढ़ियों के लिए सबसे बड़ी पूंजी है।
“वरिष्ठों का आशीर्वाद और अनुभव हमारी सबसे बड़ी पूंजी है, उनके जीवन से सीखना ही हमारी सबसे बड़ी उपलब्धि है।”




